राजस्थान के भोगराना में अकाल के बीच गौशाला को संत रामपाल जी महाराज से मिला बड़ा सहारा

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राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील स्थित गांव भोगराना में सूखे और अकाल की गंभीर परिस्थितियों के बीच गौवंश के लिए चारे का गहरा संकट खड़ा हो गया था। बारिश न होने के कारण खेतों में सूखा चारा उपलब्ध नहीं था, जिससे श्री राधा कृष्ण गौशाला समिति और ग्रामीणों के सामने लगभग 125 से 130 गायों के भरण-पोषण की विकट चुनौती उत्पन्न हो गई थी। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत, प्रबुद्ध नागरिक और गौशाला कमेटी के प्रतिनिधि हरियाणा के सोनीपत स्थित धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचे। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सर्वे टीम ने गौशाला की स्थिति का जायजा लिया और तुरंत सहायता को मंजूरी दी गई।

गाँव की मौजूदा स्थिति ने क्यों बढ़ाई मदद की जरूरत

भोगराना गांव में बारिश के अभाव के कारण अकाल जैसी स्थिति बन गई थी। क्षेत्र में फसलें न होने से सूखे चारे (तड़ी) की भारी किल्लत हो गई थी। श्री राधा कृष्ण गौशाला एक नई गौशाला होने के कारण सरकारी स्तर पर पंजीकृत या सहायता प्राप्त नहीं थी। गौशाला के पास कोई नियमित साधन न होने के कारण कमेटी के सदस्य गांव के घरों से प्रतिदिन एक-एक बाल्टी चारा, रोटियां और टोकरा तड़ी एकत्र करके गायों का पेट भर रहे थे। बाजार या क्षेत्र में चारा उपलब्ध न होने और अत्यधिक महंगा होने के कारण 125 से 130 गायों को सुरक्षित रख पाना ग्रामीणों के लिए अत्यंत कठिन हो गया था, जिससे बाहरी सहायता अनिवार्य हो गई थी।

संत रामपाल जी महाराज की ओर से पहुंचाई गई सहायता

संत रामपाल जी महाराज के आदेश के बाद भोगराना गांव में गौवंश की सुरक्षा के लिए ठोस और त्वरित मदद भेजी गई:

  • सूखा चारा (तड़ी): गांव की गौशाला के लिए कुल 205 क्विंटल सूखा चारा भेजा गया।
  • परिवहन वाहन: यह सूखा चारा 5 पिकअप गाड़ियों के माध्यम से गौशाला परिसर में पहुंचाया गया।
  • गौशाला शेड: गायों को धूप और मौसम से बचाने के लिए 60 × 100 फीट (60 बाय 100) आकार के टिन शेड निर्माण की लिखित मंजूरी दी गई।
  • लाभान्वित गौवंश: इस सहायता से गौशाला में मौजूद 125 से 130 गायों के लिए नियमित भोजन सुनिश्चित हुआ।
  • निरंतर सहयोग: संत रामपाल जी महाराज की ओर से गौशाला कमेटी को यह भी आश्वासन दिया गया कि चारा समाप्त होने से 10 दिन पहले सूचित करने पर आगे भी निरंतर चारा उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्रामीणों ने बताई मदद से बदलती तस्वीर

गांव में सहायता पहुंचने पर ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी:

  • राजेंद्र बेनीवाल (गौशाला सेवादार): उन्होंने बताया कि वे 30 तारीख को प्रार्थना लेकर गए थे और मात्र दो दिन के भीतर गांव में 205 क्विंटल सूखा चारा पहुंच गया, जिससे संकट के समय बड़ा संबल मिला।
  • भागीरथ (ग्रामीण बुजुर्ग): उन्होंने कहा कि अकाल के कारण गांव में चारे की भारी कमी थी, लेकिन संत रामपाल जी महाराज की दया से गौशाला में भरपूर चारा आ गया और आगे के लिए भी निरंतर चारे का आश्वासन मिला है।
  • श्रवण कुमार बेनीवाल (गौशाला सचिव): उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन गांव से एक-एक रोटी और टोकरा चारा मांगकर 125-130 गायों का निर्वाह कर रहे थे। 205 क्विंटल चारा मिलने के बाद अब उनकी सारी चिंताएं खत्म हो गई हैं।
  • सवाई सिंह राठौड़ (ग्रामीण प्रतिनिधि): उन्होंने कहा कि धाम में लघु किसानों (ढाई एकड़ तक) के लिए बीज-खाद और जरूरतमंदों के लिए आवास जैसी व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। भोगराना में 205 क्विंटल चारा 5 पिकअप से पहुंच चुका है और 60×100 फीट का शेड भी मंजूर हुआ है।
  • देवीलाल (सरपंच, ग्राम पंचायत भोगराना): सरपंच देवीलाल ने बताया कि अकाल की विषम परिस्थिति में 205 क्विंटल चारा और शेड की मंजूरी देकर गौवंश की रक्षा का सराहनीय कार्य किया गया है, जिसके लिए पूरा गांव आभारी है।

मानवीय सहायता में जवाबदेही और पारदर्शिता

30 तारीख को गौशाला कमेटी द्वारा धनाना धाम में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद संत रामपाल जी महाराज ने पहले अपनी सर्वे टीम को भोगराना भेजा। सर्वे टीम ने मौके पर जाकर गौशाला और चारे की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किया। सर्वे रिपोर्ट में मांग जायज पाए जाने के बाद अगले ही दिन 205 क्विंटल चारा रवाना कर दिया गया और मात्र दो दिनों के भीतर सहायता गांव तक पहुंच गई।

आश्रम से जुड़े वक्ताओं के अनुसार, इस अभियान में किसी गैर-अनुयायी से कोई जबरन चंदा नहीं लिया जाता, बल्कि भक्तों द्वारा स्वेच्छा से दिए गए सहयोग से ही ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। यह त्वरित प्रक्रिया संकट के समय मानवीय सहायता पहुंचाने की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका

भोगराना में की गई गौ सेवा संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे व्यापक मानवीय अभियानों का एक हिस्सा है। सभा में दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने 21 मार्च 2025 को अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य समाज के असहाय परिवारों को भोजन, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सा और आवास जैसी पांच बुनियादी जरूरतें उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही, ढाई एकड़ या उससे कम भूमि वाले जरूरतमंद लघु किसानों को निःशुल्क खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने की योजना भी चलाई जा रही है।

 धार्मिक व आध्यात्मिक मान्यताओं के साथ-साथ, धरातल पर संकटग्रस्त मूक पशुओं की रक्षा, अकाल पीड़ितों की सहायता और निर्धन परिवारों का उत्थान संत रामपाल जी महाराज को एक संवेदनशील समाज सुधारक और जनकल्याणकारी प्रेरक के रूप में स्थापित करता है।

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