राजस्थान के चूरू जिले में स्थित गाँव गोगटिया बागवातान की गोपाला गौशाला में बेजुबान गोवंश के भरण-पोषण और चारे के सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर समस्या बनी हुई थी। खुले आसमान के नीचे सूखा चारा पड़े रहने और अकाल जैसी परिस्थितियों के बीच गौशाला प्रबंधन ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की गुहार लगाई थी। इसके उपरांत संत रामपाल जी महाराज की ओर से गोशाला को चारा उपलब्ध कराया गया और अब चारे के सुरक्षित भंडारण के लिए स्थायी टीन शेड के निर्माण का कार्य मंगलाचरण के साथ आरंभ किया गया है।
खुले आसमान में चारे की बर्बादी और गौशाला की बेबसी
चूरू जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस गौशाला में लगभग 100 गाएं आश्रित हैं। क्षेत्र में अकाल की स्थिति के चलते चारे का घोर संकट बना हुआ था। गौशाला परिसर में चारे को सुरक्षित रखने के लिए कोई पक्का ढांचा या शेड नहीं था, जिसके चलते सूखा चारा खुले मैदान में धूप और मौसम की मार झेलने को मजबूर था। इसके अतिरिक्त, गौशाला में बीमार और असहाय गोवंश को उठाने तथा उनके समुचित उपचार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। पर्याप्त संसाधनों और बुनियादी ढांचे के अभाव में गौशाला समिति के लिए गोवंश की उचित देखभाल करना बेहद कठिन हो गया था।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गौशाला को मिली ठोस राहत
संत रामपाल जी महाराज के गौ सुरक्षा अभियान के अंतर्गत गोपाला गौशाला की सहायता मांगों को स्वीकृत किया गया। इसके तहत उपलब्ध कराई गई प्रमुख सहायता इस प्रकार है:
- सूखा चारा (तूड़ी): गौशाला के लिए 150 क्विंटल सूखा चारा भिजवाया गया।
- टीन शेड निर्माण: चारे के भंडारण के लिए 48/32 फीट आकार का पक्का टीन शेड बनवाया जा रहा है।
- जल भंडारण कुंड: पानी की उचित व्यवस्था हेतु 14/20 फीट आकार का पानी का कुंड (टांका) बनाने की स्वीकृति दी गई।
- चेन पुलिंग मशीन: बीमार व कमजोर पशुओं को सहारा देकर खड़ा करने और उपचार हेतु चेन पुलिंग मशीन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
मौके पर उपस्थित सेवादार के अनुसार, शेड निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसे लगभग एक महीने में तैयार कर गौशाला को सौंप दिया जाएगा।
ग्रामीणों और गौशाला प्रतिनिधियों ने साझा की अपनी बात
गौशाला प्रबंधन और स्थानीय ग्रामीणों ने सहायता मिलने पर राहत व्यक्त की:
- राजेंद्र प्रजापत (अध्यक्ष, गोपाला गौशाला): उन्होंने बताया कि गौशाला में 100 गाएं हैं। संत रामपाल जी महाराज के समक्ष चार मांगें रखी गई थीं, जिन्हें पूरा किया गया। 150 क्विंटल चारा दूसरे दिन ही पहुंच गया था और अब शेड, 14/20 फीट के कुंड और बीमार पशुओं को उठाने वाली मशीन का कार्य हो रहा है। अच्छा चारा मिलने से बीमार पशु भी तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं।
- स्थानीय ग्रामीण: उन्होंने बताया कि धनाना धाम जाकर उन्होंने प्रदर्शनी भी देखी थी। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी चारों मांगें पूरी की हैं और धरातल पर 150 क्विंटल बेहतरीन चारा, शेड, टांका और चेन पुलिंग मशीन की सहायता उपलब्ध कराई है।
- लीला (स्थानीय ग्रामीण): उन्होंने कहा कि वे स्वयं दो बार गए थे और रास्ते में ही सर्वे की सूचना आ गई तथा अगली सुबह चारा पहुँच गया। उन्होंने कहा कि इतनी त्वरित सेवा पहली बार देखी है और गौ माता की सेवा के लिए किए गए इस कार्य से पूरा गाँव संतुष्ट है।
- गौ सुरक्षा अभियान सेवादार: सेवादार ने स्पष्ट किया कि गौशाला समिति के निवेदन पर पहले 150 क्विंटल तूड़ी भेजी गई थी और अब टीन शेड, पानी के कुंड व चेन पुलिंग मशीन की शुरुआत की गई है, जिसे एक माह में पूरा किया जाएगा।
सेवा कार्यों में तत्परता और प्रत्यक्ष जवाबदेही
गौशाला समिति जब अपनी प्रार्थना लेकर पहुँची, तो समिति के रास्ते में रहते हुए ही सर्वे की प्रक्रिया शुरू हो गई और अगले ही दिन 150 क्विंटल चारा गौशाला पहुँच गया। इसके 15–20 दिनों के भीतर शेड निर्माण की प्रक्रिया भी धरातल पर शुरू कर दी गई। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट निर्देश दिखावे के बजाय धरातल पर निष्काम कार्य करने का है। यह त्वरित कार्यप्रणाली सामाजिक सेवा में पारदर्शिता और संवेदनशीलता को दर्शाती है।
एक समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका
गोगटिया बागवातान में की गई यह सहायता संत रामपाल जी महाराज के व्यापक मानवीय दृष्टिकोण को उजागर करती है। ग्रामीण भारत में संकटग्रस्त मूक पशुओं और गौशालाओं के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा गौ सुरक्षा अभियान बेजुबान जीवों के प्रति दया और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके साथ ही देश भर में जरूरतमंदों की सहायता के लिए संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के जरिए मानव व प्राणी कल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज का जीवन जनकल्याण, दयाभाव और समाज सुधार को समर्पित है, जो बिना किसी भेदभाव के हर पीड़ित और बेजुबान तक राहत पहुँचाने की सीख देता है और यही एक पूर्ण संत की पहचान भी है जो कि सबको समान दृष्टि से देख कर दया के सागर को उनके लिए बहा दे।



