संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में चल रहा जनसेवा अभियान आज समाज के सबसे लाचार, अनाथ और टूटे हुए लोगों के लिए अंतिम उम्मीद और सबसे बड़ा सहारा बन चुका है। जहाँ दुनियावी व्यवस्थाएं और रिश्ते नाते साथ छोड़ देते हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज एक पिता और रक्षक बनकर खड़े होते हैं। चाहे जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर अनाथ व विकलांग बेटियों के सिर पर छत देनी हो, या बीमारी और कर्ज के बोझ तले दबकर मरने की कगार पर पहुंच चुके गरीब परिवारों को नया जीवन देना हो, उनके दरबार से कोई भी दुखी खाली हाथ नहीं लौटता। आइए पढ़ते हैं करुणा और इंसानियत की ऐसी ही दो बेहद भावुक कर देने वाली घटनाएं, जिन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं:
अनाथ और गंभीर रूप से विकलांग बेटियों के सिर पर रखा हाथ: संत रामपाल जी ने दिए ₹2 लाख नकद और पक्का आशियाना बनाने का लिया संकल्प
सतलोक आश्रम में एक अत्यंत मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला, जब एक महिला, जिसने अपना पूरा जीवन समर्पित करते हुए विवाह तक नहीं किया अनाथ और गंभीर रूप से विकलांग बच्चियों को लेकर संत रामपाल जी महाराज के दर्शन करने पहुंची। उनके साथ क्षेत्र के लगातार 5 बार के पार्षद देवेंद्र परीक्षित भी मौजूद थे। इन बच्चियों की स्थिति इतनी दयनीय थी कि किसी का केवल धड़ काम करता है और वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ (लेटी हुई अवस्था में) हैं। इन बेसहारा बेटियों के सिर पर रहने के लिए पक्की छत तक नहीं थी।
इन मासूम और लाचार बेटियों की पीड़ा देखकर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत उनके लिए 15×20 फीट के दो पक्के कमरे और आगे बरामदा बनवाने का आदेश दिया। जब महिला ने बताया कि वह अकेली ही इन बच्चियों की सेवा करती है और निर्माण कार्य की देखरेख नहीं कर पाएगी, तो संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत कहा कि वे अपनी टीम भेजकर खुद ये दोनों कमरे और बरामदा एक नंबर का बनवाकर देंगे। इसके बावजूद, उन्होंने बच्चियों की तत्काल देखभाल और परमार्थ सेवा के लिए मौके पर ही ₹2 लाख नकद महिला के हाथों में सौंप दिए। संत जी ने अत्यंत विनम्रता से स्वयं को परमपिता कबीर भगवान का एक साधारण सेवक बताते हुए कहा कि इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाएगा। इस दौरान साथ आए पार्षद ने भी संत जी के शास्त्र-आधारित ज्ञान और निडरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
सांघी (रोहतक, हरियाणा) के युवाओं की भूल को किया माफ और कर्ज व बीमारी से टूटी बेसहारा माताओं को दिया मकान का सहारा
हरियाणा के रोहतक जिले के गांव सांघी से युवा क्लब के प्रधान, खाप के प्रवक्ता के भतीजे और 200 से 300 ग्रामीणों का एक विशाल समूह संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त करने सतलोक आश्रम पहुंचा। ग्रामीणों ने बड़ी सादगी और भावुकता से स्वीकार किया कि कुछ समय पहले गांव के कुछ युवा दूसरों के बहकावे (मिसगाइड होने) में आ गए थे, जिसके कारण गांव में चल रहे आश्रम के सेवा कार्य में रुकावट आई थी। लेकिन जब खाप के बुजुर्गों और प्रवक्ता जगवंत जी ने युवाओं को सच्चाई समझाई कि संत रामपाल जी महाराज केवल समाज भलाई का कार्य कर रहे हैं, तो सभी युवाओं ने अपनी भूल सुधार ली। एक बड़े पिता की तरह संत रामपाल जी महाराज ने बच्चों की उस नादानी को तुरंत माफ कर दिया और गांव के अधूरे पड़े कार्य को पूरा करवाने का पक्का आश्वासन दिया।
इसी काफिले के साथ गांव की कई ऐसी बेबस और गरीब महिलाएं भी आई थीं, जो अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही थीं। एक महिला ने रोते हुए अपनी व्यथा बताई कि उसके दो बेटों की मृत्यु हो चुकी है, पति गंभीर रूप से बीमार हैं, सिर पर भारी कर्ज है और सिर छुपाने के लिए मकान तक नहीं है, हालात ऐसे हैं कि मरने की नौबत आ गई है। एक अन्य बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा,
“गुरु जी, हमने कई बार भगवान बदल कर देख लिए, लेकिन आज आपके दर्शन हो गए, अब हमें भगवान बदलने की जरूरत नहीं है, हमें आप में ही भगवान मिल गए।“
संत रामपाल जी महाराज ने उन सभी टूटे हुए परिवारों की पीड़ा को सुना और तुरंत सेवादारों को निर्देश दिया कि इन सभी बेसहारा माताओं और गरीब परिवारों के नाम लिखे जाएं, सबका सर्वे करवाकर उनके पक्के मकान बनवाए जाएंगे और उनकी हर संभव मदद की जाएगी। इस असीम करुणा से प्रभावित होकर गांव के 10 नए लोगों ने मौके पर ही नाम दीक्षा भी ग्रहण की।
संत रामपाल जी महाराज है वास्तव में मानवता के सच्चे तारणहार
सतलोक आश्रम में घटी ये दोनों हृदयस्पर्शी घटनाएं इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि संत रामपाल जी महाराज का मिशन केवल आध्यात्मिक उपदेशों तक सीमित नहीं है। एक ओर जहाँ वे भटके हुए युवाओं को क्षमादान देकर उन्हें समाज सेवा और सत्यभक्ति के मार्ग पर ला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन अनाथ व विकलांग बेटियों और बेसहारा विधवाओं के सिर पर छत दे रहे हैं जिनकी पुकार सुनने वाला इस दुनिया में कोई नहीं था। नेपाल से लेकर पूरे भारतवर्ष में बिना किसी भेदभाव के भूखों को भोजन, बीमारों को इलाज और बेघरों को मकान देने का यह महाअभियान सिद्ध करता है कि संत रामपाल जी महाराज वास्तव में मानवता के सच्चे तारणहार हैं।



