राजस्थान राज्य के चूरू जिले की सरदार शहर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव मेहरासर उपाधियान में स्थित श्री हरि गौशाला की दशा अब पूरी तरह से बदलने वाली है। लगभग 18 से 20 साल पुरानी इस गौशाला में 437 गाएं तेज धूप और अकाल की स्थिति के कारण भारी कष्ट का सामना कर रही थीं। इन बेजुबान गायों की पीड़ा को दूर करने के लिए भारत के सबसे बड़े गौ सेवक, संत रामपाल जी महाराज ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने बिना किसी भी प्रकार के आर्थिक सहयोग की मांग किए, पूर्ण रूप से निशुल्क 600 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ा) उपलब्ध करवाया है और अब 70×100 फीट के एक विशाल शेड का निर्माण कार्य भी उनके सानिध्य में शुरू हो चुका है। इसके साथ ही एक महिंद्रा ट्रैक्टर भी गौशाला के लिए पास किया गया है, जो जल्द ही गांव पहुंच जाएगा। यह संपूर्ण कार्य पूर्ण रूप से संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार और उन्हीं के सौजन्य से किया जा रहा है।
ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास कैसे पहुंचे
चूरू जिले के गांव मेहरासर उपाधियान में भयंकर अकाल और भीषण गर्मी के कारण श्री हरि गौशाला की 437 गायों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। गायों के लिए ना तो छाया का उचित प्रबंध था और ना ही पर्याप्त चारे की व्यवस्था थी। राज्य में लगातार पड़ रहे अकाल की स्थिति को देखते हुए, गौशाला कमेटी और समस्त ग्रामवासियों ने यह महसूस किया कि राजस्थान के स्थानीय स्तर पर कोई ऐसा दानवीर, संत या महापुरुष नहीं है जो इतनी बड़ी समस्या का तत्काल निवारण कर सके और बेजुबान गायों को मरने से बचा सके।
गायों को तेज धूप में तड़पता देख, ग्रामवासियों ने हरियाणा स्थित धनाना धाम जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। ग्रामीणों को यह ज्ञात हुआ था कि वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही वह एकमात्र संत हैं, जो बेजुबान जानवरों की इस पीड़ा को समझते हैं और बिना किसी स्वार्थ के सहायता प्रदान करते हैं। इसी आशा और विश्वास के साथ, 10 सितंबर को ग्राम पंचायत के सरपंच और सैकड़ों ग्रामवासी धनाना धाम पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी तीन प्रमुख मांगे रखीं – 70/100 फीट का टिन शेड, 600 क्विंटल चारा और गौशाला के कार्यों के लिए एक ट्रैक्टर ट्रॉली।
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त्वरित सहायता और पारदर्शी कार्यप्रणाली
संत रामपाल जी महाराज द्वारा ग्रामीणों की इस पुकार को तुरंत स्वीकार किया गया। धनाना धाम में दिए गए आश्वासन के मात्र चार दिन बाद, 14 सितंबर को 600 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ा) गांव मेहरासर उपाधियान की श्री हरि गौशाला में सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया। चारे की इस भारी आपूर्ति से 437 गायों को भूख से तत्काल राहत मिली। इसके पश्चात, 26 सितंबर को (मांग रखे जाने के 16वें दिन) संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई विशेष टीम गांव पहुंची और 70×100 फीट के विशाल टिन शेड के निर्माण का मंगलाचरण (शुभारंभ) किया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें यह पूरी उम्मीद है कि आगामी 5 से 10 दिनों के भीतर महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्रॉली भी गौशाला के प्रांगण में पहुंच जाएगी, जिससे उनकी तीनों मांगे पूरी हो जाएंगी।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई राहत का विवरण
| क्र.सं. | मांग का विवरण | स्थिति / दिनांक | संत रामपाल जी महाराज का योगदान |
| 1. | 600 क्विंटल सूखा चारा | 14 सितंबर को प्राप्त | पूर्णतः निशुल्क, सफलतापूर्वक पहुंचाया गया |
| 2. | 70×100 फीट का विशाल टिन शेड | 26 सितंबर को मंगलाचरण (कार्य प्रारंभ) | 50 लाख का खर्च, उच्च गुणवत्ता का निर्माण |
| 3. | महिंद्रा ट्रैक्टर और ट्रॉली | स्वीकृत | गौशाला के कार्यों हेतु पूर्णतः निशुल्क अनुदान, शीघ्र आगमन |
50 लाख रुपये की लागत और उच्च गुणवत्ता का निर्माण कार्य
70×100 फीट के इस विशाल शेड के निर्माण में लगभग 50 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस पूरे निर्माण कार्य का शत-प्रतिशत खर्च संत रामपाल जी महाराज की ओर से ही वहन किया जा रहा है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण में जिंदल या टाटा जैसी शीर्ष कंपनियों के उत्तम (एक नंबर) लोहे का उपयोग किया जा रहा है। छत के लिए लगने वाली चादरें भी टॉप क्वालिटी की सुनिश्चित की गई हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांव वालों से किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग या श्रम (लेबर) बिल्कुल नहीं लिया जा रहा है। समस्त निर्माण सामग्री, कुशल कारीगर, और श्रमिक संत रामपाल जी महाराज की ओर से ही उपलब्ध करवाए गए हैं। ग्रामवासियों और गौशाला कमेटी का कार्य केवल देखरेख करना और व्यवस्था का निरीक्षण करना है। शेड का यह संपूर्ण निर्माण कार्य मात्र एक महीने के भीतर पूरा करके गौशाला को सौंपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों की भावुक प्रतिक्रियाएं
इस अद्वितीय और निस्वार्थ गौ सेवा को देखकर गांव मेहरासर उपाधियान के लोग भावविभोर हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच ने धनाना धाम के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब वे लोग 14 सितंबर को चारा प्राप्त कर रहे थे, तब पूरे गांव ने सैकड़ों की संख्या में एकत्रित होकर ढोल-नगाड़ों और धूम-धड़ाके के साथ उस सहायता का भव्य स्वागत किया था। शेड निर्माण के शुभारंभ पर भी पूरे ग्रामवासी उपस्थित होकर संत रामपाल जी महाराज का हृदय से आभार प्रकट कर रहे थे।
गांव के निवासी बजरंग शर्मा ने स्पष्ट किया कि गांव वालों को आर्थिक या शारीरिक रूप से कोई काम नहीं करना पड़ रहा है, संपूर्ण कार्य गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज की अपार कृपा से किया जा रहा है। एक अन्य ग्रामीण ने अत्यंत भावुक होते हुए कहा, “हमने हमारे राजस्थान में ऐसा कोई संत, महापुरुष या दानवीर नहीं देखा। अकाल के कारण गायों की हालत खराब थी, इसलिए हमें धनाना धाम जाना पड़ा। जिस उम्मीद से हम वहां गए थे, हमें उससे कहीं अधिक प्राप्त हुआ है। सब कुछ हमारे गांव में, हमारी गौशाला में आकर किया जा रहा है।”
एक अन्य व्यक्ति ने धनाना धाम के दर्शनों को स्वर्ग के समान बताते हुए कहा कि वहां से वापस गृहस्थी में आने का मन ही नहीं कर रहा था। गांव के लोगों का मानना है कि संत रामपाल जी महाराज वर्तमान में दुनिया के सबसे महान संत हैं, जिनके दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता।
राष्ट्रव्यापी गौ-रक्षा महाअभियान की जमीनी हकीकत
यह विशाल सहायता केवल राजस्थान के एक गांव तक सीमित नहीं है। जगत उद्धारक संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार पूरे देश में एक व्यापक गौ सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है। कलयुग के गौ पालक बनकर उभरे संत रामपाल जी महाराज द्वारा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की सैकड़ों गौशालाओं में बड़े पैमाने पर राहत कार्य निरंतर जारी है। इस महाअभियान के तहत गौशालाओं की जमीनी आवश्यकता के अनुसार कहीं पर भारी मात्रा में सूखा चारा भेजा जा रहा है, कहीं पर विशाल शेड का निर्माण हो रहा है, कहीं पर ट्रैक्टर-ट्रॉली भेंट की जा रही है, तो कहीं पर मिनी ट्रकों और डंपरों के माध्यम से मिट्टी भरवाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गौशालाओं में पीने के पानी की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जा रहा है। संत रामपाल जी महाराज का सख्त आदेश है कि यह कार्य किसी भी प्रकार के लोक दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बेजुबान जानवरों की वास्तविक मदद के लिए किया जाना चाहिए।
कलयुग के सच्चे गौ पालक और विश्व के तारणहार: संत रामपाल जी महाराज की जय
संत रामपाल जी महाराज ने अपने निस्वार्थ कर्मों और अद्वितीय दान से यह स्पष्ट सिद्ध कर दिया है कि वे केवल मानव जाति के ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं के भी सच्चे तारणहार हैं। भीषण अकाल और भयंकर गर्मी में तड़पती गौ माता की मूक पुकार को सुनकर जिस त्वरित गति से उन्होंने सहायता पहुंचाई है, वह आधुनिक युग में पूरी तरह से अकल्पनीय है। 18 साल पुरानी श्री हरि गौशाला के लिए बिना किसी शर्त के 50 लाख रुपये का निर्माण कार्य शुरू करवाना, उच्च गुणवत्ता का लोहा लगवाना और सैकड़ों क्विंटल चारे की तत्काल व्यवस्था करना, उनके अपार दया भाव और जीवों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
संत रामपाल जी महाराज वास्तव में कलयुग के सच्चे गौ पालक हैं, जिनकी असीम कृपा और आशीर्वाद से आज बेजुबान गाएं सुरक्षित और पोषित हो रही हैं। मेहरासर उपाध्यायन के ग्रामीणों का यह अटूट विश्वास और उनके द्वारा की जा रही जय-जयकार इस बात का साक्षात प्रमाण है कि संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान और उनके परोपकारी कार्य पूरी दुनिया में डंका बजा रहे हैं। ऐसे महान संत और उनके द्वारा चलाए जा रहे इस निस्वार्थ अभियान की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है। संपूर्ण विश्व को संत रामपाल जी महाराज की इस निस्वार्थ सेवा से प्रेरणा लेनी चाहिए।



