हरियाणा राज्य के जिला रोहतक के अंतर्गत आने वाली तहसील सांपला के गांव कसरेटी में ग्रामीण कई पीढ़ियों से मीठे पेयजल की भारी कमी का सामना कर रहे थे। गांव के अंदर पीने योग्य मीठा पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को विभिन्न व्यावहारिक तथा आर्थिक कठिनाइयों से जूझना पड़ता था। पेयजल एकत्र करने के लिए गांव की महिलाओं एवं बुजुर्गों को दूर स्थित कुओं तथा गांव से लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर दूर बनी डिग्गी तक पैदल जाना पड़ता था।
कई परिवारों को अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु रोजाना ₹100 से ₹150 खर्च करके पीने का पानी खरीदने के लिए विवश होना पड़ता था। गांव में उपलब्ध खारे तथा दूषित पानी का निरंतर सेवन करने के कारण ग्रामीणों को त्वचा संबंधी परेशानियों (खाज-खुजली) तथा अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ता था। एक 54 वर्षीय स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने अपने जन्म से लेकर अब तक गांव में पीने के मीठे पानी की कोई व्यवस्था नहीं देखी थी। गांव की वृद्ध महिला लाभार्थियों ने जानकारी दी कि कई दशकों से ग्रामीण खेतों के खारे पानी तथा गंदे पानी को कपड़े से छानकर पीने को विवश थे।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा समस्या समाधान हेतु की गई कार्रवाई
गांव कसरेटी के निवासियों ने इस वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के समाधान हेतु मुनिंदर धर्म ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना याचिका भेजी। इसके पश्चात संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार निम्नलिखित मदद भेजी गई:
- संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की प्रार्थना स्वीकार करते हुए तत्काल सेवादारों को गांव का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया।
- सेवादारों की सर्वे टीम ने गांव कसरेटी पहुंचकर भौगोलिक स्थिति का आकलन किया तथा भूमिगत स्तर से मीठा पानी निकालने हेतु 1,200 फीट गहरा ट्यूबवेल लगाने की योजना तैयार की।
- सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत होने के उपरांत संत रामपाल जी महाराज के आदेश से अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बोरिंग हेतु आवश्यक भारी मशीनें, बोरिंग उपकरण तथा पाइप गांव में पहुंचाए।
- संपूर्ण बोरिंग परियोजना को पूरा करने में अनुमानित 10 से 12 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
- प्रोजेक्ट के अंतर्गत कुल ₹25 लाख से ₹30 लाख तक का व्यय होने का अनुमान जताया गया है, जिसकी समस्त वित्तीय व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज द्वारा मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से की जा रही है।
- इस पूरी परियोजना के एवज में गांव कसरेटी के निवासियों से कोई भी शुल्क या चंदा नहीं लिया जा रहा है, संपूर्ण सेवा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है।
बोरिंग कार्य का शुभारंभ एवं तकनीकी विवरण
बोरिंग कार्य के शुभारंभ दिवस पर गांव कसरेटी के डिग्गी स्थल पर ग्रामीणों तथा सेवादारों का एक बड़ा समूह एकत्र हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण पाठ के साथ की गई। बोरिंग प्रक्रिया के दौरान स्थायित्व एवं जल निकासी हेतु 10 इंच तथा 6 इंच व्यास (diameter) वाले GI (Galvanized Iron) पाइपों का उपयोग किया जा रहा है।
तकनीकी टीम के अनुसार भू-जल स्तर में लगभग 800 फीट की गहराई के बाद मीठा जल स्तर आरंभ होता है, जिसके दृष्टिगत बोरिंग को 1,100 से 1,200 फीट की गहराई तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मंगलाचरण के समापन के पश्चात गांव के बुजुर्गों, पुरुषों तथा लगभग 400 से 500 महिलाओं ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र (दिव्य स्वरूप) पर पुष्प मालाएं अर्पित कीं। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के समर्थन में जयकारे लगाए और इस पहल के लिए आभार जताया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्य सामाजिक एवं मानवीय अभियान
मौके पर मौजूद सेवादार प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम, किसान मजदूर बचाओ अभियान (फेज 2), शुद्ध पेयजल सेवा अभियान तथा पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान के अंतर्गत संपूर्ण भारत में राहत कार्य संचालित करवा रहे हैं।
- पेजल एवं पाइपलाइन परियोजनाएं: अब तक देश भर के 100 से अधिक जल संकटग्रस्त गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जा चुकी है। उदाहरणस्वरूप, जींद जिले के जुलाना क्षेत्र स्थित मेरड़ा, किला मुफरगढ़ तथा राजगढ़ जैसे गांवों में 5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाकर पेयजल पहुंचाया गया है। हरियाणा के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब तथा झारखंड में भी ऐसी परियोजनाएं संचालित हैं।
- आवास निर्माण सेवा: अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत बेघर, गरीब तथा असहाय परिवारों को 10 से 15 दिनों के भीतर पक्के मकान बनाकर दिए जाते हैं। इन मकानों में 2 से 3 कमरे, रसोईघर (Kitchen) तथा शौचालय/स्नानघर (Washroom) की सुसज्जित व्यवस्था होती है।
- मासिक राशन वितरण: अनाथ, दिव्यांग अथवा आर्थिक रूप से अक्षम परिवारों को प्रति माह ₹8,000 से ₹10,000 मूल्य की गुणवत्तापूर्ण राशन सामग्री निरंतर उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता तब तक जारी रहती है जब तक परिवार आत्मनिर्भर न हो जाए।
- चिकित्सा एवं शिक्षा सहायता: गंभीर बीमारियों से पीड़ित निर्धन मरीजों को सेवादारों के माध्यम से अस्पताल ले जाकर निशुल्क इलाज, परिवहन तथा राशन की व्यवस्था कराई जाती है। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु पूर्ण वित्तीय सहायता दी जाती है।
परियोजना की मुख्य जानकारियों का संक्षिप्त विवरण
| विवरण श्रेणी | विशिष्ट आंकड़े एवं तथ्य |
| स्थल एवं स्थान | गांव कसरेटी, तहसील सांपला, जिला रोहतक (हरियाणा) |
| संस्था/ट्रस्ट | मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) |
| परियोजना का प्रकार | अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 1,200 फीट गहरा पेयजल ट्यूबवेल |
| उपयोग किए जा रहे पाइप | 10 इंच तथा 6 इंच जीआई (GI) पाइप |
| अनुमानित कुल लागत | ₹25,000,000 से ₹30,000,000 (₹25 लाख से ₹30 लाख) |
| कार्य पूरा होने की अवधि | 10 से 12 दिन |
| लाभार्थी लागत | ग्रामीणों के लिए पूर्णतः निःशुल्क (₹0) |
| अन्य आच्छादित अभियान | किसान मजदूर बचाओ अभियान (फेज 2), शुद्ध पेयजल सेवा अभियान, पशुधन बचाओ अभियान |
कसरेटी गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान एवं संभावित प्रभाव
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गांव कसरेटी में 1,200 फीट गहरे ट्यूबवेल का निर्माण कार्य शुरू करवाए जाने से गांव की बहुपीढ़ीगत पेयजल किल्लत समाप्त होने की दिशा में अग्रसर है। ट्यूबवेल का संचालन शुरू होने के पश्चात ग्रामीणों को 2 से 2.5 किलोमीटर दूर डिग्गी या कुओं से पानी ढोने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
रोजाना ₹100 से ₹150 खर्च करके पानी खरीदने वाले परिवारों के आर्थिक बोझ में कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता से दूषित पानी के सेवन से होने वाली त्वचा संबंधी बीमारियों एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर रोक लगेगी तथा ग्रामीणों के साथ-साथ मवेशियों (पशुधन) के लिए भी स्वच्छ जल उपलब्ध हो सकेगा।



