राजस्थान के जिला चूरू अंतर्गत गांव खीवासर में श्री कृष्ण गौशाला की स्थिति को सुधारने और बेसहारा गोवंश को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल शुरू की गई है। गांव में भीषण सूखे और विपरीत मौसम के बीच गोवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर था। गौशाला कमेटी, सरपंच और ग्रामीणों की संयुक्त प्रार्थना के बाद संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में गौ सुरक्षा अभियान के तहत यहाँ 50×100 फीट के भव्य शेड निर्माण की नींव रखी गई है।
गाँव की मौजूदा स्थिति ने क्यों बढ़ाई मदद की जरूरत
चूरू जिले के खीवासर गांव में श्री कृष्ण गौशाला वीरान व कंटीली भूमि पर स्थित थी। गौशाला में लगभग 300 गायें हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए केवल तारबंदी की गई थी और पक्के शेड का अभाव था। खुले और जंगली वातावरण में धूप, आंधी और बारिश से गोवंश के बचाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में अकाल जैसी स्थिति के कारण चारे और पानी का भारी संकट उत्पन्न हो गया था। ऐसी कठिन परिस्थितियों में ग्रामीणों एवं गौशाला प्रबंधन के पास स्वयं के स्तर पर बड़े शेड के निर्माण हेतु पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण बाहर से राहत मिलना अत्यंत आवश्यक हो गया था।
संत रामपाल जी महाराज की ओर से प्रदान की गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज के गौ सुरक्षा अभियान के अंतर्गत खीवासर की श्री कृष्ण गौशाला को व्यापक राहत उपलब्ध करवाई गई है:
- विशाल शेड का निर्माण: गौशाला में 50×100 फीट (लगभग 5,000 वर्ग फुट) आकार के पक्के टीन शेड का निर्माण कार्य शुरू किया गया है।
- सामग्री व संरचना: शेड के निर्माण में टाटा कंपनी की मजबूत टीन, हैवी पिलर और चैनल लगाए जा रहे हैं (समय: 10:24)। इसकी ऊंचाई लगभग 13 से 14 फुट निर्धारित की गई है।
- लागत और श्रम: सेवादारों के अनुसार इस बड़े शेड के निर्माण की अनुमानित लागत ₹25 लाख से अधिक आंकी गई है। मिस्त्री और लेबर का पूरा खर्च व सामग्री आश्रम की ओर से वहन की जा रही है।
- सूखा चारा: शेड निर्माण से पूर्व ही इस गौशाला के लिए 450 क्विंटल सूखा चारा (तूड़ा) उपलब्ध कराया गया था।
- शून्य स्थानीय भार: निर्माण कार्य के दौरान गांव या गौशाला पर कोई आर्थिक अथवा प्रबंधकीय बोझ नहीं डाला गया है; कार्यकर्ताओं के भोजन और पानी तक की व्यवस्था स्वयं संस्था द्वारा की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताई मदद से बदलती तस्वीर
खीवासर के ग्रामीणों और गौशाला प्रतिनिधियों ने इस मानवीय सहायता पर अपने विचार साझा किए:
- रणबीर (अध्यक्ष, श्री कृष्ण गौशाला): उन्होंने बताया कि गौशाला में 300 गायें हैं और संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से 450 क्विंटल चारा मिलने के बाद अब 50×100 फीट के शेड (छपरे) का कार्य होने से गोवंश को बड़ा संबल मिला है।
- जितेंद्र (ग्रामीण/संस्थापक सदस्य): उन्होंने कहा कि वीरान और कंटीली भूमि पर बन रहा यह 5,000 वर्ग फुट का शेड अकल्पनीय कार्य है, जिसकी सुरक्षा व देखभाल का संकल्प ग्रामीणों ने लिया है।
- स्थानीय बुजुर्ग ग्रामीण: उन्होंने बताया कि क्षेत्र में गौ सेवा की यह व्यवस्था बेहद सराहनीय है और इससे ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही चिंता दूर हुई है।
- अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि: उन्होंने उल्लेख किया कि खीवासर गौशाला के लिए चारा उपलब्ध कराने के उपरांत आज 50×100 फीट के शेड की नींव रखी जाना पूरे गांव के लिए अत्यंत राहतकारी है।
जवाबदेही, तत्परता और पारदर्शिता
इस मानवीय परियोजना में त्वरित प्रक्रिया और पारदर्शी कार्यशैली स्पष्ट दिखाई देती है। गौशाला कमेटी, प्रधान और ग्रामीणों द्वारा प्रार्थना भेजे जाने के बाद तुरंत 450 क्विंटल चारा पहुंचाया गया और उसके बाद बिना किसी विलंब के शेड निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। सेवादारों के अनुसार, राजस्थान की लगभग 200 गौशालाओं की मांगों को स्वीकार करते हुए चरणबद्ध तरीके से सहायता पहुंचाई जा रही है। खीवासर में शेड की पैमाइश, जेसीबी द्वारा कॉलम खुदाई और सामग्री आपूर्ति का कार्य तेजी से शुरू किया गया और इसे लगभग एक महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण की देखरेख के लिए अनुयायियों की 10 सदस्यीय समिति और स्थानीय ग्रामीणों की संयुक्त निगरानी तय की गई है, जिससे काम की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
एक समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह पहल केवल ढांचागत निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकटग्रस्त मूक प्राणियों के प्रति गहरी करुणा और सामाजिक दायित्व का प्रतीक है। राजस्थान जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में गौशालाओं को चारा, शेड और वाहन सहायता उपलब्ध कराना ग्रामीण समाज के बुनियादी संकटों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनके अनुयायियों की आस्था है कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ-साथ व्यावहारिक धरातल पर जीव रक्षा और परोपकार ही वास्तविक धर्म है। अन्नपूर्णा मुहिम और गौ सुरक्षा जैसे अभियानों के माध्यम से वे एक ऐसे समाज सुधारक के रूप में रेखांकित होते हैं, जिनका उद्देश्य निस्वार्थ सेवा, सादगी और जीव दया को जन-जन तक पहुंचाना है।



