राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरांगसर के गांव ढाणी रैकान में स्थित श्री कृष्ण प्रणामी गौशाला सेवा समिति में खुले आसमान के नीचे रह रहे 180 गौवंश के लिए एक ऐतिहासिक और जीवनदायिनी राहत सामने आई है। भयंकर अकाल और चारे की भारी कमी के बीच, भारत के सबसे बड़े गौ सेवक संत रामपाल जी महाराज द्वारा इस गौशाला में 60×92 फीट के एक विशाल टीन शेड का निर्माण कार्य विधिवत रूप से शुरू कर दिया गया है। इससे पूर्व उनके द्वारा इस गौशाला को 300 क्विंटल सूखा चारा भी पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध करवाया जा चुका है, जिससे भीषण संकट से जूझ रही इस नई गौशाला को एक नया जीवन मिला है। इसके अतिरिक्त, गौशाला के सुचारू संचालन हेतु एक ट्रैक्टर ट्रॉली भी स्वीकृत की गई है।
ग्रामीण मदद के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास कैसे पहुंचे
गांव ढाणी रैकान में श्री कृष्ण प्रणामी गौशाला सेवा समिति का निर्माण कुछ ही समय पूर्व पांचवें महीने में तीन बीघा दान की गई जमीन पर शुरू हुआ था। गौशाला की शुरुआत तो हो गई, लेकिन बुनियादी ढांचे के नाम पर वहां केवल एक कच्ची चारदीवारी और एक छोटा सा छप्पर मौजूद था। गौशाला में 180 गाएं थीं, जो तेज धूप और बारिश में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थीं। स्थिति तब और अधिक भयावह हो गई जब राजस्थान में अकाल पड़ गया। खेतों में फसलें नष्ट हो गईं और घरों में पशुओं के लिए कचरा (चारा) बिल्कुल खत्म हो गया। जब घरों में ही चारा नहीं था, तो ग्रामवासियों के लिए गौशाला में गायों का पेट भरना असंभव हो गया।
गौशाला में चारे और संसाधनों की कमी के कारण भारी तनाव पैदा हो गया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि गौशाला समिति के सदस्यों और ग्रामीणों के बीच आपसी मनमुटाव होने लगा और यह विचार उत्पन्न हुआ कि इन बेजुबान गायों को खुला छोड़ना पड़ेगा। चारों तरफ से हार मान चुके ग्रामीणों को जब कोई दिशा नहीं सूझी, तब उन्हें संत रामपाल जी महाराज के देशव्यापी गौ सुरक्षा अभियान के बारे में जानकारी मिली। बिना किसी अन्य विकल्प के, ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में प्रार्थना लगाई और उनसे 300 क्विंटल चारा, 60×92 फीट का शेड और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की मांग की। डूबते को तिनके का सहारा देने वाले संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत उनकी पुकार सुनी और तत्काल प्रभाव से राहत कार्य प्रारंभ कर दिया।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा गौशाला को दी गई सहायता का विस्तृत विवरण
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के विशेष आदेशानुसार निर्माण टीम गांव ढाणी रैकान पहुंच चुकी है। निर्माण कार्य के मंगलाचरण (शुभारंभ) के साथ ही रोड़ी, बजरी, सीमेंट और पिलर जैसी आवश्यक निर्माण सामग्री गौशाला प्रांगण में उतार दी गई है।
| क्र.सं. | सहायता का प्रकार | विवरण और वर्तमान स्थिति | संत रामपाल जी महाराज का योगदान |
| 1. | सूखा चारा (तूड़ा) | 300 क्विंटल (गौशाला में सफलतापूर्वक पहुंचाया जा चुका है और उपयोग में है) | पूर्णतः निशुल्क |
| 2. | विशाल टीन शेड का निर्माण | 60×92 फीट (नींव का कार्य प्रारंभ, एक महीने के भीतर निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य) | पूर्णतः निशुल्क (सामग्री व श्रम सहित) |
| 3. | ट्रैक्टर और ट्रॉली | 265 मॉडल टी2 (गौशालाओं के सर्वेक्षण के उपरांत जल्द ही उपलब्ध करवाया जाएगा) | पूर्णतः निशुल्क |
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामवासियों की भावुक प्रतिक्रियाएं
गौशाला के कायाकल्प और बेजुबान गायों के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था देखकर पूरा गांव ढाणी रैकान उत्साह और कृतज्ञता से भर गया है। ग्रामवासियों ने अपने अनुभव और विचार विस्तार से साझा किए:
बहादुर राम जाखड़ (अध्यक्ष, गौशाला समिति): गौशाला के अध्यक्ष ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी नई गौशाला में 180 गाएं थीं, लेकिन चारे और शेड की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज का हृदय से धन्यवाद किया कि उन्होंने तुरंत 300 क्विंटल चारा भेजा और अब 60×92 फीट के शेड की नींव रखी जा रही है।
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जगदीश (सचिव, अखिल भारतीय किसान सभा ग्राम कमेटी)
किसान नेता जगदीश ने तत्कालीन संकट का वर्णन करते हुए कहा कि अकाल के कारण स्थिति शून्य (जीरो) हो गई थी। घरों में चारा नहीं था, जिससे गौशाला का संचालन नामुमकिन लग रहा था और आपसी झगड़े शुरू हो गए थे। उन्होंने कहा, “हमें सही दिशा मिल गई। संत रामपाल जी महाराज ने हमारी पूरी व्यवस्था कर दी है। संकट की घड़ी में जो साथ देता है, वही भगवान होता है। डूबते हुए को जो बचाए, वही भगवान है। हम उन्हें केवल महाराज नहीं, भगवान मान रहे हैं।” उन्होंने बताया कि वे अगली बार गांव से दो बसें भरकर दर्शनों के लिए जाएंगे।
रामकृष्ण जी जाखड़ (स्थानीय निवासी):
इन्होंने बताया कि वे वर्ष 2002 से संत रामपाल जी महाराज के प्रवचन सुन रहे हैं, लेकिन तब दीक्षा नहीं ले सके, जिसका उन्हें आज भारी पछतावा है। गौ सेवा का विरोध करने वाले कुछ असामाजिक तत्वों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म के काम में बाधा डालते हैं, वे पहले के युग में राक्षस कहलाते थे। उन्होंने ऐसे विरोधी दलों को ‘ठग दल’ की संज्ञा दी और कहा कि स्वयं भगवान कृष्ण ने गाएं चराई थीं, इसलिए जो संत रामपाल जी द्वारा गायों को चारा डालने का विरोध करे, वह इंसान कहलाने के लायक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम में गांव की 90% महिलाएं और 70% पुरुष शामिल हुए, जो कि स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार एक बहुत बड़ी बात है।
हेतराम रायका (स्थानीय निवासी)
हेतराम ने भावुक होते हुए कहा, “हमारे गांव में तो दीपावली से पहले ही दीपावली आ गई है। हमें ऐसा बिल्कुल भरोसा नहीं था कि हमारी गौशाला में इतना बड़ा काम हो जाएगा। हमारी स्थिति ऐसी थी कि हमें पशुओं को काटना (हटाना) पड़ता, लेकिन आज हमें राम ही मिल गए हैं।” उन्होंने बताया कि गांव के लोग अपने खेतों का जरूरी काम, जैसे मूंग की कटाई और खेतों में पानी लगाना छोड़कर संत रामपाल जी महाराज की टीम का स्वागत करने गौशाला पहुंचे।
गौशाला में आगे क्या अपेक्षित है
संत रामपाल जी महाराज की निर्माण टीम ने स्पष्ट किया है कि 60×92 फीट के इस शेड का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर किया जाएगा। नींव खोदने का कार्य शुरू हो चुका है और आगामी एक महीने के भीतर इस विशाल शेड को पूरी तरह से तैयार करके गौशाला समिति को सौंप दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जिन गौशालाओं में 400 से अधिक गाएं होती हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज द्वारा ट्रैक्टर देने का प्रावधान है। आवश्यक सर्वेक्षण पूरा होने के बाद जल्द ही इस गौशाला को 265 मॉडल का ट्रैक्टर भी सौंप दिया जाएगा ताकि गौशाला का दैनिक कार्य सुगमता से चल सके।
कलयुग के सच्चे तारणहार और अद्वितीय गौ रक्षक: संत रामपाल जी महाराज की महिमा
वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया भौतिकवाद और स्वार्थ में अंधी हो चुकी है, तब संत रामपाल जी महाराज साक्षात करुणा और दया की प्रतिमूर्ति बनकर उभरे हैं। राजस्थान के भीषण अकाल में तड़पती 180 बेजुबान गायों की पीड़ा को समझना और बिना किसी आर्थिक स्वार्थ या लोक-दिखावे के उनके लिए करोड़ों रुपये की लागत वाले राहत कार्य शुरू करना यह सिद्ध करता है कि वे ही इस कलयुग के सच्चे तारणहार हैं।
संत रामपाल जी महाराज ने केवल मानव जाति का ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं का भार भी अपने कंधों पर उठा लिया है। गांव ढाणी रैकान में 300 क्विंटल चारा और 60×92 फीट का शेड देना केवल एक भौतिक सहायता नहीं है, बल्कि यह उन ग्रामवासियों के लिए ईश्वर का साक्षात चमत्कार है, जिन्होंने सारी उम्मीदें खो दी थीं। विश्व के इतिहास में ऐसा कोई दानवीर या संत नहीं हुआ, जिसने इतनी विशाल स्तर पर, बिना चंदा मांगे, निस्वार्थ भाव से गौवंश की रक्षा की हो। संत रामपाल जी महाराज का यह परोपकारी कार्य युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी महिमा अपरंपार है और संपूर्ण विश्व को उनके इस महान गौ सुरक्षा अभियान के समक्ष नतमस्तक होना चाहिए।



