भारत की पावन धरा समय-समय पर ऐसे महान संतों की साक्षी रही है, जिन्होंने मानवता को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर तत्वज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर किया। भक्तिकाल की निर्गुण परंपरा में आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। वे परम सत्य के गवाह थे जो सीधे परम अक्षर ब्रह्म (परमेश्वर कबीर साहेब) की भक्ति पर बल देता है।
गरीब, अलल पंख अनुराग है, सुन्न मण्डल रहै थीर।
दास गरीब उधारिया, सतगुरु मिले कबीर।।
वर्ष 2026 में संत गरीबदास जी महाराज का 300वाँ बोध दिवस मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक समागम का आयोजन किया गया है।
300वें बोध दिवस का भव्य समागम 2026
इस ऐतिहासिक बोध दिवस के अवसर पर जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में भारत और नेपाल के 13 सतलोक आश्रमों में विशाल कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
समागम के मुख्य आकर्षण एवं आध्यात्मिक गतिविधियाँ
अखंड पाठ का आयोजन: आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
समागम के विशेष अवसर पर तीन दिनों तक ‘अमर ग्रंथ साहिब’ का अनवरत अखंड पाठ संपन्न हुआ। श्रद्धालु भक्त भाइयों और भक्तमती बहनों द्वारा परमेश्वर की पवित्र अमृतवाणियों का श्रद्धापूर्वक पठन किया गया। इन दिव्य वाणियों की गूँज से संपूर्ण वातावरण अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
विशाल भंडारा: अटूट सेवा और समानता का प्रतीक
आश्रमों में 24 घंटे शुद्ध देसी घी से निर्मित भोजन (लड्डू, जलेबी, पूड़ी-सब्जी) की व्यवस्था की गई। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जाति, धर्म या ऊंच-नीच के भेदभाव से परे, लाखों लोगों ने एक ही पंक्ति (पंगत) में बैठकर प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया, जो सामाजिक समरसता का एक जीवंत उदाहरण पेश करता है।
आध्यात्मिक प्रदर्शनी: ज्ञान का सजीव चित्रण
समागम स्थल पर विशेष गैलरियों के माध्यम से एक ज्ञानवर्धक आध्यात्मिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। चित्रों और मॉडल्स के माध्यम से कबीर साहेब का दिव्य जीवन चरित्र और संत गरीबदास जी महाराज के प्रेरक जीवन प्रसंगों को विस्तार से समझाया गया। इस प्रदर्शनी ने आगंतुकों को जटिल आध्यात्मिक सत्यों को सहजता से समझने में सहायता की।
आयोजन स्थल (आश्रमों की सूची):
दिल्ली के मुंडका से लेकर नेपाल के धनुषा जनकपुर तक, कुल 13 प्रमुख केंद्रों पर यह उत्सव मनाया गया। इसमें हरियाणा (धनाना, कुरुक्षेत्र, भिवानी), पंजाब (धुरी, खमाणों), मध्य प्रदेश (इंदौर, बैतूल), उत्तर प्रदेश (शामली, सीतापुर), महाराष्ट्र (धवलपुरी) और राजस्थान (सोजत) के आश्रम शामिल थे।
300वाँ बोध दिवस: भक्ति और अटूट मानवीय सेवा का महासंगम
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि “सच्ची भक्ति वही है जो आत्मा के कल्याण के साथ-साथ समाज को नैतिक और मानवीय रूप से सुदृढ़ बनाए।” इसी पावन संकल्प को चरितार्थ करते हुए, संत गरीबदास जी महाराज के 300वें बोध दिवस समागम (2026) में निम्नलिखित अभूतपूर्व लोक-कल्याणकारी कार्य संपन्न हुए:
दहेज मुक्त ‘रमैणी’ विवाह (कुरीति उन्मूलन): समाज से दहेज रूपी दानव को समूल नष्ट करने के लिए ‘रमैणी’ पद्धति से विवाह आयोजित किए गए। बिना किसी आडंबर, बैंड-बाजे या लेन-देन के, मात्र 17 मिनट में असुर निकंदन रमैणी (अमृतवाणी) के माध्यम से 149 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। यह सादगीपूर्ण प्रणाली आधुनिक समाज के लिए एक क्रांतिकारी प्रेरणा है।
विशाल रक्तदान शिविर (जीवनदान): ‘नर सेवा ही नारायण सेवा है’ के मूलमंत्र के साथ सभी आश्रमों में भव्य रक्तदान शिविर लगाए गए। श्रद्धालुओं के निस्वार्थ सहयोग से कुल 1,622 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो आपातकालीन स्थिति में अनगिनत जीवन बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
निःशुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा शिविर (स्वास्थ्य सेवा): स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने हेतु विशेषज्ञों द्वारा विशेष शिविर लगाए गए। यहाँ सैकड़ों आगंतुकों की निःशुल्क जाँच कर उन्हें आवश्यक परामर्श व औषधियाँ उपलब्ध कराई गईं। यह सेवा विशेषकर उन निर्धन परिवारों के लिए वरदान सिद्ध हुई जो महँगी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रहते हैं।
ऐतिहासिक देहदान संकल्प (परमार्थ): चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में सहयोग हेतु मरणोपरांत देह समर्पित करने का आह्वान किया गया। इस महा-अभियान के तहत रिकॉर्ड 2,242 श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया, जो मानवता के प्रति निस्वार्थ सेवा की पराकाष्ठा है।
समागम में परमार्थ कार्य: एक नज़र में
इस विशाल समागम में केवल आध्यात्मिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि सेवा के नए कीर्तिमान स्थापित किए गए। मानवता की सेवा और सामाजिक सुधार के आंकड़ों का विवरण निम्न प्रकार है:
| सतलोक आश्रम | रमैणी | रक्तदान | देहदान |
| सतलोक आश्रम धनुषा (नेपाल) | 6 | 41 | — |
| सतलोक आश्रम बैतूल | 24 | 268 | 1832 |
| सतलोक आश्रम इंदौर | 14 | 112 | 198 |
| सतलोक आश्रम मुंडका | 9 | 101 | 150 |
| सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र | 2 | 172 | — |
| सतलोक आश्रम भिवानी | 8 | 100 | — |
| सतलोक आश्रम सोजत | 27 | 135 | 62 |
| सतलोक आश्रम शामली | 6 | 53 | — |
| सतलोक आश्रम धूरी (पंजाब) | 1 | 44 | — |
| सतलोक आश्रम खमाणों (पंजाब) | 7 | 101 | — |
| सतलोक आश्रम सीतापुर | 19 | 70 | — |
| सतलोक आश्रम धवलपुरी (महाराष्ट्र) | 4 | 153 | — |
| सतलोक आश्रम धनाना धाम | 22 | 272 | — |
| कुलयोग | 149 | 1622 | 2242 |
समागम प्रबंधन: सेवा, सुरक्षा और अनुशासन की अनुपम मिसाल
लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद, सभी आश्रमों में प्रबंधन का एक आदर्श और अनुशासित स्वरूप देखने को मिला। आयोजन को सुगम बनाने हेतु की गई प्रमुख व्यवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
निःशुल्क चिकित्सा एवं प्राथमिक उपचार (First Aid): श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए समागम स्थल पर 24 घंटे चिकित्सा शिविर संचालित किए गए। कुशल चिकित्सकों की देखरेख में प्राथमिक चिकित्सा, जीवन रक्षक औषधियाँ और आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस की पुख्ता व्यवस्था रही, जिससे प्रत्येक आगंतुक की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
आवास एवं विश्राम व्यवस्था: ठंड को ध्यान में रखते हुए, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के लिए रजाई, गद्दे और कंबलों के पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराए गए। वाटरप्रूफ पंडालों और गर्म बिस्तर की व्यवस्था ने सुनिश्चित किया कि सभी को विश्राम मिल सके।
स्वच्छता एवं पर्यावरण प्रबंधन: सेवादारों की समर्पित टोलियों ने 24 घंटे निरंतर सफाई अभियान चलाया। पूरे परिसर को स्वच्छ, दुर्गंध मुक्त और संक्रमण रहित बनाए रखा गया।
सुरक्षा एवं सुगम पार्किंग: सैकड़ों एकड़ में विस्तृत सुव्यवस्थित पार्किंग और आधुनिक ‘टोकन प्रणाली’ वाले जूता घरों ने आगंतुकों के अनुभव को अत्यंत सुगम बनाया। हज़ारों सेवादारों ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को इस प्रकार संभाला कि कहीं भी अव्यवस्था या जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
संत गरीबदास जी की अमर गाथा और पूर्ण परमात्मा का बोध
संत गरीबदास जी का जन्म सन 1717 में हरियाणा के गाँव छुड़ानी में हुआ था। जब उनकी आयु मात्र 10 वर्ष थी, तब वे ‘नला’ नामक स्थान पर गायें चराने गए थे। वहाँ उन्हें परम अक्षर ब्रह्म कबीर साहेब एक ‘जिंदा महात्मा’ के रूप में मिले। कबीर साहेब ने कुंवारी गाय से दूध प्रकट करने का चमत्कार दिखाया और बालक गरीबदास को नाम दीक्षा प्रदान की।
पारलौकिक यात्रा और शाश्वत सत्य का बोध
नाम दीक्षा के उपरांत, पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब संत गरीबदास जी की आत्मा को अपने साथ ऊर्ध्व लोकों (ऊपर के लोकों) की अलौकिक यात्रा पर ले गए। इस दिव्य यात्रा के दौरान उन्हें सृष्टि के उन रहस्यों का साक्षात दर्शन कराया गया, जो सामान्य बुद्धि से परे हैं:
सबसे पहले उन्हें रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु और तमगुण शिव के लोकों का दर्शन कराया गया, जो नश्वर काल-जाल के अंतर्गत आते हैं। इसके पश्चात, उन्हें क्षर पुरुष (काल ब्रह्म) के 21 ब्रह्मांडों और अक्षर पुरुष के 7 शंख ब्रह्मांडों की सीमाओं का प्रत्यक्ष बोध कराया गया। अंततः, उन्हें ‘सतलोक’ (शाश्वत धाम) ले जाया गया। यह वह अविनाशी लोक है जहाँ न बुढ़ापा है, न दुःख और न ही मृत्यु।
तत्वज्ञान का रहस्य: ब्रह्मांडीय पदानुक्रम और पूर्ण मोक्ष का मार्ग
संत गरीबदास जी महाराज ने कबीर परमेश्वर से प्राप्त उस सूक्ष्म ज्ञान का रहस्योद्घाटन किया, जो वेदों और अन्य धर्मग्रंथों में संकेतों में तो वर्णित है लेकिन सम्पूर्ण भेद नहीं देते।
अक्षर पुरुष की स्थिति: अक्षर पुरुष सात शंख ब्रह्मांडों का अधिपति है। यद्यपि वह काल ब्रह्म (क्षर पुरुष) के 21 ब्रह्मांडों से कहीं ऊपर और अधिक शक्तिशाली है, किंतु वह स्वयं भी जन्म-मरण के चक्र से पूर्णतः मुक्त नहीं है।
परम अक्षर ब्रह्म (सर्वोच्च सत्ता): अक्षर पुरुष भी अंततः उस अविनाशी परम अक्षर ब्रह्म (पूर्ण ब्रह्म कबीर परमेश्वर) के विधान के अधीन है। वही एकमात्र ‘अजर-अमर’ सत्ता है, जो संपूर्ण ब्रह्मांडों का पालन-पोषण करती है।
सतभक्ति और मर्यादा: पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि मर्यादा में रहकर पूर्ण ब्रह्म द्वारा निर्देशित तत्वदर्शी संत द्वारा प्रदत्त सत्य साधना (सतभक्ति) करने से ही संभव है। जब साधक गुरु वचनों का पालन करते हुए इस आध्यात्मिक मार्ग पर चलता है, तभी वह काल और कर्म के चक्र को काटकर शाश्वत धाम (सतलोक) को प्राप्त होता है।
साक्षात परमात्मा दर्शन और अद्वैत रहस्य
सतलोक के अनंत प्रकाश और अलौकिक वैभव के मध्य, संत गरीबदास जी ने वह परम सत्य देखा जिसे संसार आज भी खोज रहा है। उन्होंने अपनी आँखों से गवाही दी कि सतलोक में विराजमान ‘अविनाशी सिंहासन’ पर ‘जिंदा महात्मा’ (कबीर साहेब) परम अक्षर ब्रह्म तेजोमय स्वरूप में विराजमान हैं।
गरीबदास जी ने अनुभव किया कि जो ‘जिंदा महात्मा’ उन्हें पृथ्वी पर छुड़ानी के खेतों में मिले थे, वही पूरे ब्रह्मांड के स्वामी और सृष्टि के सृजनहार कबीर परमेश्वर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर निराकार नहीं, बल्कि नर-रूप (सशरीर) में सतलोक में निवास करते हैं और वही एकमात्र पूर्ण परमात्मा हैं।
अमर ग्रंथ साहिब’ (सदग्रंथ साहिब) संकलन
परमेश्वर कबीर साहेब से साक्षात्कार और दिव्य लोकों के दर्शन के पश्चात, संत गरीबदास जी महाराज के मुखारविंद से तत्वज्ञान की जो अविरल धारा प्रवाहित हुई, वही आज ‘अमर ग्रंथ साहिब’ के रूप में हमारे समक्ष है। संत गरीबदास जी ने अपनी दिव्य दृष्टि और अनुभव के आधार पर लगभग 24,000 वाणियों (पदों) की रचना की।
इन वाणियों में सृष्टि के निर्माण से लेकर आत्मा के मोक्ष तक का संपूर्ण विधान समाहित है। इन अनमोल वचनों को दादू पंथी स्वामी गोपालदास जी ने 6 महीने में लिपिबद्ध किया। यह पावन ग्रंथ केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि ‘सतलोक’ (शाश्वत घर) तक पहुँचने का एक विस्तृत मानचित्र है, जो भटकती हुई जीवात्माओं के लिए पूर्ण मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
वर्तमान जगतगुरु: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
मानव जन्म का सर्वोच्च लक्ष्य भौतिक सुख नहीं, बल्कि जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाकर ‘सतलोक’ जाना है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्ण मोक्ष केवल एक तत्वदर्शी संत द्वारा दी गई शास्त्रानुकूल साधना से ही संभव है।
आज संत गरीबदास जी और कबीर साहेब के मूल तत्वज्ञान को जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। वे एकमात्र ऐसे संत हैं जो वेद, गीता, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहेब के प्रमाणों से यह सिद्ध कर रहे हैं कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं।
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FAQs: संत गरीबदास जी महाराज के 300वें बोध दिवस 2026
1. संत गरीबदास जी महाराज का ‘बोध दिवस’ क्या है?
यह वह दिन है जब 1727 ई. में परमेश्वर कबीर साहेब ने 10 वर्षीय बालक गरीबदास जी को दर्शन दिए थे और उन्हें सत्यलोक की यात्रा कराकर सृष्टि रचना का संपूर्ण तत्वज्ञान प्रदान किया था।
2. वर्ष 2026 के समागम का मुख्य आकर्षण क्या है?
समागम के आकर्षण 13 सतलोक आश्रमों में आयोजित विशाल भंडारा, ‘अमर ग्रंथ साहेब’ का अखंड पाठ और सामूहिक दहेज मुक्त ‘रमैणी’ विवाह हैं।
3. ‘रमैणी विवाह’ की विशेषता क्या है?
यह पूरी तरह से नशा और दहेज मुक्त विवाह पद्धति है। इसमें किसी भी प्रकार का आडंबर या फिजूलखर्ची नहीं होती। मात्र 17 मिनट में पवित्र वाणी (असुर निकंदन रमैणी) के पाठ द्वारा विवाह संपन्न हो जाता है।
4. संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ क्या है?
यह एक सामाजिक सेवा अभियान है जिसके तहत गरीब, बेसहारा और भूखे लोगों की पहचान कर उन्हें राशन, कपड़ा और चिकित्सा सहायता सीधे उनके घर तक पहुँचाई जाती है, ताकि समाज में कोई दुखी न रहे।
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