हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित बेरी तहसील का एक प्यारा सा गाँव है— बरहाना गुगनान। आमतौर पर गाँवों की तस्वीर सुनते ही जेहन में लहलहाते खेत, चौपाल पर बैठे बुजुर्ग और खेलते हुए बच्चे आते हैं। लेकिन बरहाना गुगनान की कहानी पिछले 30 सालों से किसी डरावने सपने जैसी थी। जरा सोचिए, जिस बारिश का इंतजार किसान चातक पक्षी की तरह करता है, वही बारिश इस गाँव के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुकी थी।
गाँव के तीन मुख्य जोहड़— ‘चली वाला जोहड़’, ‘केशु वाला जोहड़’ और ‘भला जोहड़’, जरा सी बारिश में ही उफान पर आ जाते थे। पानी अपनी सीमाएं लांघकर सीधे गाँव की गलियों और गरीब ग्रामीणों के घरों में घुस जाता था। 30 साल… यह कोई छोटा समय नहीं होता। पूरी एक पीढ़ी इस गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव के बीच पैदा हुई और बड़ी हो गई।
करीब 2000 से 2500 की आबादी वाला यह गाँव हर मानसून में एक टापू बन जाता था। घरों के अंदर पानी, गलियों में घुटनों तक जलभराव और सबसे भयानक बात— गंदे पानी के साथ रेंगकर घरों में घुसने वाले जहरीले सांप और कीड़े-मकोड़े। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता था। महिलाएं रसोई में काम नहीं कर पाती थीं। पुरानी निकासी लाइनें पूरी तरह जर्जर होकर टूट चुकी थीं और सरकारी मोटरें जलकर कबाड़ हो चुकी थीं।
प्रशासन और सरकारी दफ्तरों के पास सरपंच और ग्रामीण दर्जनों बार गुहार लगा चुके थे, लेकिन फाइलों के बोझ तले इस गाँव का दर्द हमेशा दबकर रह जाता था। हालात इतने बदतर थे कि गाँव की 500 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई थी, दलदल बन चुकी उस जमीन पर किसान एक दाना तक नहीं बो पा रहे थे। पीने के साफ पानी के लिए लोग मीलों भटकने को मजबूर थे। लेकिन कहते हैं ना, जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब परमात्मा कोई न कोई ऐसा द्वार खोलता है, जहां से सिर्फ समाधान नहीं, बल्कि नया जीवन मिलता है।
संत रामपाल जी महाराज: समाज सुधार और मानवता के सच्चे मसीहा
जब प्रशासन और सरकारों की चौखट से बरहाना गुगनान के ग्रामीणों को सिर्फ निराशा मिली, तब उन्हें एक ऐसा सच्चा दर मिला, जहाँ कभी किसी फरियादी को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता— संत रामपाल जी महाराज का दरबार। संत रामपाल जी महाराज आज के इस स्वार्थी युग में साक्षात करुणा और दया की प्रतिमूर्ति बनकर उभरे हैं। समाज हित में उनके द्वारा किए जा रहे कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। उनके आदेशानुसार चल रहे ‘किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज-2’, ‘शुद्ध पेयजल सेवा अभियान’ और ‘पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान’ ने न जाने कितने ही बेसहारा और त्रस्त गाँवों की तकदीर बदल दी है।
संत रामपाल जी महाराज केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि वे जमीनी स्तर पर मानवता की सेवा का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण पेश कर रहे हैं। बिना किसी सरकारी मदद या लोक-दिखावे के, वे गरीब किसानों के लिए एक बहुत बड़ी मुहिम चला रहे हैं। जिन गरीब किसानों के पास ढाई एकड़ या उससे कम जमीन है, उनके लिए पूरे साल की खाद, बीज और कृषि दवाइयां बिल्कुल मुफ्त मुहैया कराई जा रही हैं।
संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट आदेश है कि सेवा में कोई दिखावा नहीं होना चाहिए, बल्कि काम ऐसा हो जो सीधे पीड़ित के आंसू पोंछे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। आज के कलयुग में जहाँ लोग स्वार्थ में अंधे हो चुके हैं, संत रामपाल जी महाराज बिना किसी भेदभाव के, खुले दरबार में हर जरूरतमंद को गले लगा रहे हैं। उनके दर पर अमेरिका से लेकर हरियाणा के एक छोटे से गाँव का व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर जा सकता है।
वे सही मायनों में एक ऐसे युगदृष्टा और समाज सुधारक हैं, जो कलयुग में सतयुग की नींव रख रहे हैं। उनके द्वारा जल निकासी और आरओ प्लांट लगवाने जैसे निस्वार्थ कार्य यह साबित करते हैं कि सच्चा संत वही है जो समाज के दर्द को अपना समझे और उसे दूर करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे। उनके इस अलौकिक प्रेम और सेवा भाव की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
राहत कार्य का विवरण: मिनटों में पास हुई फरियाद
गाँव की इस भयावह स्थिति से तंग आकर ग्राम पंचायत और गाँव के गणमान्य लोग संत रामपाल जी महाराज के आश्रम ‘श्री धनाना धाम’ पहुंचे। सरपंच ऋषिपाल और अन्य ग्रामीणों ने महाराज जी के श्री चरणों में अपनी व्यथा सुनाई। पंचायत ने 20,000 फुट 10 इंची पाइपलाइन, दो 20 एचपी की मोटरें और पीने के पानी के लिए दो आरओ प्लांट (5000-5000 लीटर क्षमता) की मांग रखी थी।
आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में ऐसी अर्जी सालों तक धूल फांकती है, लेकिन संत रामपाल जी महाराज का दरबार अलग ही है। वहां रविवार को फरियाद लगाई गई और अगले ही दिन सोमवार को महाराज जी के आदेश पर एक विशेष सर्वे टीम गाँव पहुंच गई। टीम ने जमीनी हकीकत का मुआयना किया और बुधवार को तो जैसे चमत्कार ही हो गया। वास्तविक आवश्यकता को देखते हुए 15,000 फुट 8 इंची हेवी-ड्यूटी पाइपलाइन और दो 20-20 एचपी की पावरफुल मोटरें पास कर दी गईं।
इतना ही नहीं, बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गाँव में दो विशाल आरओ प्लांट लगाने का आदेश भी तुरंत जारी कर दिया गया— एक गाँव की डिग्गी (मुख्य स्टैंड) के पास और दूसरा दादा भैया क्षेत्र में, जहां पास ही स्कूल है ताकि मासूम बच्चों को भी साफ पानी मिल सके। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार निम्न सामग्री गाँव बरहाना गुगनान को रातों-रात प्रदान की गई।
- 15,000 फुट पाइप
- पीवीसी बैंड
- फेविकोल
- एयर वाल्व
- लोहे की प्लेटें
- स्लोचन
- नट-बोल्ट और तमाम जरूरी एक्सेसरीज ट्रकों में भरकर गाँव पहुंचा दी गई।
साथ ही, महाराज जी का आदेश है कि जैसे ही पाइपलाइन भूमिगत (अंडरग्राउंड) हो जाएगी, तुरंत दोनों मोटरें भी गाँव को सौंप दी जाएंगी। यह एक ऐसा राहत कार्य था जिसकी गति और सटीकता ने सबको हैरान कर दिया।
भावुक कर देने वाली गाँव-वालों की प्रतिक्रियाएं: “वे हमारे लिए भगवान हैं”
जब ट्रकों में भरकर 15,000 फुट पाइप गाँव के दरवाजे पर पहुंचे, तो बरहाना गुगनान का नजारा किसी बड़े त्योहार जैसा था। गाँव की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत द्वार पर खड़े थे। महिलाओं ने ट्रैक्टरों पर बैठकर खुशी से मंगलगीत गाए और फूलों की बारिश करके महाराज जी का धन्यवाद किया। पूरा गाँव ‘संत रामपाल जी महाराज की जय’ के उद्घोष से गूंज रहा था।
गाँव के मौजूदा सरपंच ऋषिपाल की आंखें छलक आईं। उन्होंने रुंधे गले से कहा, “हम कई सालों से परेशान थे। पुरानी लाइनें टूट चुकी थीं, मोटरें जल चुकी थीं। थोड़ी सी बारिश में हम लोग पानी के बीच खड़े रहने को मजबूर थे। प्रशासन हाथ खड़े कर चुका था। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज ही हमारे लिए भगवान बनकर आए हैं।”
गाँव की एक बुजुर्ग ताई से जब पूछा गया कि आज कैसा लग रहा है, तो उनके चेहरे की झुर्रियों में 30 साल का सुकून एक साथ चमक उठा। उन्होंने कहा, “बेटा, हमारे तो घर डूब जायां करते। सांप और नाग घर में घुसते थे। सब दुखी थे। रामपाल महाराज ने तो हमारे जोहड़ की पारिख बना दी, हमें सुखी कर दिया। उनका जुग-जुग भला हो।”
एक अन्य ग्रामीण नरेश ने भावुक होते हुए बताया, “स्कूल जाने वाले बच्चे गंदे पानी से होकर जाते थे। बीमारियां फैलने का डर हमेशा सताता था। आज जो काम सरकार नहीं कर पाई, वो संत रामपाल जी ने एक पल में कर दिया। उनके जैसा कोई नहीं।”
युवाओं ने भी बताया कि 500 एकड़ जमीन जो बंजर होने की कगार पर थी, अब वहाँ फिर से हरियाली लौटेगी। गाँव के एक युवा ने तो स्टेडियम की समस्या भी रखी कि कैसे बाहर से आने वाले आर्मी के बच्चों को गंदे पानी की वजह से बाहर किराए पर रहना पड़ता है, और उन्हें पूरा विश्वास है कि महाराज जी इस समस्या का भी समाधान करेंगे। आज गांव बरहाना गुगनान के हर शख्स की जुबान पर बस एक ही बात है— “संत रामपाल जी महाराज इंसान नहीं, साक्षात भगवान हैं।”
सामाजिक प्रभाव: जलभराव से मुक्ति और बदलती ज़िंदगियाँ
इस महान राहत कार्य का सामाजिक प्रभाव इतना व्यापक है कि इसे केवल शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में आएगा। 30 सालों से जो गंदा पानी गलियों में सड़ता था, जिससे मच्छर, डेंगू, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा रहता था, अब वह स्थाई रूप से बाहर निकल जाएगा।
दूसरा सबसे बड़ा प्रभाव कृषि पर पड़ेगा। बरहाना गुगनान के किसानों की 500 एकड़ जमीन जो जलभराव के कारण दलदल बन चुकी थी, अब सूख जाएगी। किसान समय पर अपनी फसल की बिजाई कर सकेंगे। कर्ज में डूबते किसान अब फिर से खुशहाली की सांस लेंगे।
तीसरा सबसे अहम प्रभाव शिक्षा और नौनिहालों के भविष्य पर पड़ेगा। बच्चे बिना किसी डर और बिना गंदे पानी में पैर साने स्कूल जा सकेंगे। आरओ प्लांट लगने से गाँव के लोगों और खासकर स्कूल के बच्चों को शुद्ध और मीठा पेयजल मिलेगा, जिससे जलजनित बीमारियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। पशुधन को साफ पानी मिलेगा, जिससे उनकी भी अकाल मृत्यु नहीं होगी। पूरा गाँव अब एक स्वस्थ और सुरक्षित माहौल में सांस ले पाएगा।
एक नई सुबह का आगाज: संत रामपाल जी महाराज का उपकार
बरहाना गुगनान की यह कहानी सिर्फ एक जलभराव दूर करने की खबर भर नहीं है; यह एक जीवंत प्रमाण है कि जब नि:स्वार्थ सेवा, करुणा और सत्य का मिलन होता है, तो समाज की बड़ी से बड़ी परेशानी भी बौनी साबित हो जाती है। 30 साल का दुख, 30 साल की पीड़ा, आंसुओं से भरी रातें और सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर— यह सब कुछ मात्र 3 दिनों के भीतर एक सच्चे संत की सच्ची सेवा से खत्म हो गया।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कागजी वादों से कहीं बढ़कर होती है ‘जमीनी कार्रवाई’। संत रामपाल जी महाराज ने यह दिखा दिया है कि समाज की भलाई के लिए केवल सरकारी तंत्र की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक बड़े दिल और सच्ची नीयत की आवश्यकता होती है। आज बरहाना गुगनान गाँव में जो खुशियों के ढोल बज रहे हैं, वे पूरे देश और समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश हैं।
गाँव वालों के चेहरों की वह निश्छल मुस्कान और उनकी आंखों से बहते कृतज्ञता के आंसू इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जब तक धरती पर ऐसे सच्चे संत और मसीहा मौजूद हैं, तब तक इंसानियत कभी हार नहीं सकती। बरहाना गुगनान के लिए आज सिर्फ गंदे पानी की निकासी नहीं हुई है, बल्कि उनके जीवन में खुशियों, स्वास्थ्य, आस्था और तरक्की का एक नया और निर्मल झरना फूट पड़ा है।



