हरियाणा को भारत में खेलों की खान कहा जाता है। यहाँ के युवा अपने पसीने से देश के लिए मेडल सींचते हैं। लेकिन कई बार इन खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करना पड़ता है। रोहतक जिले के किलोई गाँव का ‘शिव कुमार मेमोरियल बास्केटबॉल स्टेडियम’ इसका जीता-जागता उदाहरण था।
यह हरियाणा की सबसे बड़ी बास्केटबॉल अकादमियों में से एक है। यहाँ हर साल ऑल-इंडिया (नेशनल लेवल) टूर्नामेंट होते हैं, जिनमें आर्मी, एयरफोर्स, रेलवे और पुलिस की टीमें हिस्सा लेने आती हैं। लेकिन इस प्रतिष्ठित स्टेडियम की हालत बेहद जर्जर हो चुकी थी।
प्रशासन की अनदेखी और कमेटी की बेबसी
स्टेडियम में खिलाड़ियों के रुकने और उनकी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी। पुराने बाथरूम टूट चुके थे, पानी की पाइपलाइन लीक कर रही थी, और बाहर से आने वाली नेशनल टीमों के लिए न तो कोई अच्छा मीटिंग हॉल था और न ही साफ-सुथरी रसोई (किचन)। खिलाड़ी दिन-रात मेहनत करते थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका मनोबल टूट रहा था।
जब सरकारी तंत्र और प्रशासन से कोई ठोस मदद नहीं मिली, तो स्टेडियम कमेटी और गाँव के मौजीज लोगों ने एक ऐसे दरवाजे पर दस्तक दी, जहाँ से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के नाम एक प्रार्थना पत्र लिखा और मदद की गुहार लगाई।
’अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत 30 लाख का कायाकल्प
संत रामपाल जी महाराज ने खिलाड़ियों की इस परेशानी को तुरंत समझा। बिना कोई सवाल किए और बिना एक भी रुपया मांगे, गुरुजी ने अपने सेवादारों को निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दे दिया।

स्टेडियम में बड़े पैमाने पर निर्माण और मरम्मत का कार्य किया गया:
- 12 नई लैट्रिन और 12 बाथरूम: खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बिल्कुल नए सिरे से बनाए गए।
- एक विशाल मीटिंग हॉल: जहाँ टीमें अपनी रणनीति बना सकें और इंडोर एक्टिविटी कर सकें।
- किचन और स्टोर रूम: खिलाड़ियों के लिए साफ-सुथरा खाना बनाने के लिए एक नई रसोई और खेल का सामान रखने के लिए स्टोर रूम बनाया गया।
- पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत: टूटी हुई खिड़कियां, दरवाज़े और पाइपलाइनों को पूरी तरह से ठीक किया गया।
कमेटी के सदस्य जगमंदर जी ने बताया, “संत रामपाल जी महाराज ने यहाँ 30 से 35 लाख रुपये का काम करवाया है। हमने लेटर पैड पर जो भी लिखकर दिया, गुरुजी ने तुरंत मंजूर कर लिया। उन्होंने हमारी पूरी चिंता खत्म कर दी।”
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नेशनल टूर्नामेंट और 3 दिन का विशाल ‘भंडारा’
संत रामपाल जी महाराज का सहयोग केवल ईंट-पत्थर के निर्माण तक सीमित नहीं था। शिव कुमार स्टेडियम के मुख्य कोच विजेंद्र हुड्डा ने बताया, “मार्च में यहाँ ऑल-इंडिया टूर्नामेंट होता है। पिछले 3 सालों से इस टूर्नामेंट में बाहर से आने वाली सभी टीमों के खाने-पीने और रहने का पूरा खर्च संत रामपाल जी महाराज ही उठा रहे हैं।”
गाँव वालों ने बताया कि टूर्नामेंट के दौरान गुरुजी की तरफ से लगातार 3 दिन तक एक विशाल ‘भंडारा’ (लंगर) चलता है। इस भंडारे में केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि आसपास के 7-8 गाँवों का कोई भी व्यक्ति आकर पेट भर खाना खा सकता है। इस अकेले भंडारे में लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसे गुरुजी खुशी-खुशी वहन करते हैं।
एक ‘स्वर्णिम भारत’ के निर्माण का सपना
स्टेडियम में दिन-रात निस्वार्थ भाव से ईंट-गारा उठा रहे सेवादारों ने बताया कि यह सब संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं का असर है। सेवादार जितेंद्र दास ने कहा, “गुरुजी ने हमें सिखाया है कि अपने लिए तो जानवर भी जीते हैं, इंसान वो है जो दूसरों के काम आए। जब खिलाड़ियों को यहाँ सारी सुविधाएँ मिलेंगी, तो वे बिना किसी तनाव के अपने खेल पर फोकस कर पाएंगे। इससे हमारे देश से बेहतरीन खिलाड़ी निकलेंगे जो दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।”
यह सेवा गुरुजी की ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ का हिस्सा है, जिसका नारा है—
“रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान; हर गरीब को दे रहा कबीर भगवान।”
सच्चे संत की सच्ची सेवा
किलोई के स्टेडियम का यह कायाकल्प साबित करता है कि सच्चा संत केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि समाज को धरातल पर मज़बूत भी करता है। जहाँ नेता केवल चुनाव के समय वादे करते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज निस्वार्थ भाव से देश की नींव (युवाओं) को मज़बूत कर रहे हैं। आज किलोई के स्टेडियम में बास्केटबॉल टप्पा खा रही है और खिलाड़ियों के जूतों की आवाज़ यह गवाही दे रही है कि संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से भारत का युवा अब रुकने वाला नहीं है।



