दिल्ली में National Lok Adalat अब 10 जनवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से वाहन मालिकों को एक दिन का अवसर मिलेगा, जिसमें वे अपने पात्र ट्रैफिक चालानों का निपटारा बिना लंबी अदालती प्रक्रिया के कर सकेंगे।
यह लोक अदालत पहले 13 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित थी, लेकिन उस दिन को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा न्यायालय कार्य दिवस घोषित कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Delhi State Legal Services Authority – DSLSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के निर्णय के अनुसार इसकी नई तारीख तय की गई।
लोक अदालत का आयोजन दिल्ली की सभी जिला अदालत परिसरों में किया जाएगा, जिससे शहर के हर हिस्से के वाहन मालिकों को सुविधा मिल सके।
National Lok Adalat से जुड़ी मुख्य बातें
- National Lok Adalat का आयोजन 10 जनवरी 2026 को होगा
- पहले यह 13 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित थी
- निर्णय दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लिया गया
- आयोजन दिल्ली की सभी जिला अदालतों में होगा
- केवल छोटे और निपटाए जा सकने वाले ट्रैफिक चालान शामिल होंगे
- पहले से ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य होगा
- गंभीर मामलों और अन्य राज्यों के चालान शामिल नहीं होंगे
- मामलों का निपटारा उसी दिन किया जाएगा
10 जनवरी को कहां होगी National Lok Adalat

10 जनवरी को National Lok Adalat दिल्ली की सभी जिला अदालत परिसरों में आयोजित की जाएगी, जिनमें शामिल हैं:
- तीस हजारी अदालत
- द्वारका अदालत
- रोहिणी अदालत
- साकेत अदालत
- पटियाला हाउस अदालत
- कड़कड़डूमा अदालत
- राउज एवेन्यू अदालत
इसके अलावा दिल्ली हाईकोर्ट और स्थायी लोक अदालतों (Permanent Lok Adalat) में भी इसका आयोजन किया जाएगा।
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ट्रैफिक चालान निपटाने की पूरी प्रक्रिया
चरण 1: ट्रैफिक चालान की स्थिति जांचें
सबसे पहले वाहन मालिक यह जांच करें कि उनके नाम कोई ट्रैफिक चालान लंबित है या नहीं। इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट या परिवहन पोर्टल (Parivahan Portal) पर वाहन नंबर या चालान नंबर दर्ज करना होगा।
चरण 2: चालान की पात्रता जांचें
लोक अदालत में केवल छोटे और निपटाए जा सकने वाले ट्रैफिक अपराध शामिल किए जाते हैं। नशे में गाड़ी चलाना या दुर्घटना के बाद भाग जाना जैसे गंभीर मामले इसमें शामिल नहीं होते।
चरण 3: ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य
पात्र वाहन मालिकों को पहले से ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। इसके लिए वाहन का विवरण, चालान नंबर और संपर्क जानकारी सही-सही भरनी होगी। बिना पंजीकरण के सीधे पहुंचने वाले मामलों को आमतौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चरण 4: टोकन और पावती पत्र डाउनलोड करें
सफल पंजीकरण के बाद एक टोकन नंबर और पावती पत्र (Appointment Slip) जारी किया जाएगा। इसका प्रिंटआउट लोक अदालत में प्रवेश के लिए अनिवार्य होगा।
चरण 5: निर्धारित अदालत में उपस्थित हों
10 जनवरी को पावती पत्र में बताई गई अदालत में समय पर पहुंचना होगा। साथ में ये दस्तावेज़ लाने होंगे:
- वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र
- ड्राइविंग लाइसेंस
- बीमा दस्तावेज़
- प्रदूषण प्रमाण पत्र
- चालान की रसीद
चरण 6: सुनवाई और निपटारा
लोक अदालत की पीठ द्वारा मामले की सुनवाई की जाएगी। अपराध की प्रकृति को देखते हुए जुर्माने में कमी या पूरी छूट भी दी जा सकती है।
चरण 7: जुर्माने का भुगतान
यदि मामला निपट जाता है, तो उसी दिन निर्धारित काउंटर पर भुगतान करना होगा। इसके बाद चालान को निपटाया हुआ मान लिया जाएगा।
कौन से ट्रैफिक चालान निपटाए जा सकते हैं
- हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना
- तय सीमा से अधिक गति
- लाल बत्ती तोड़ना
- गलत जगह वाहन खड़ा करना
- प्रदूषण प्रमाण पत्र न होना
- ट्रैफिक संकेतों की अनदेखी
- नंबर प्लेट से संबंधित मामले
केवल वही चालान शामिल होंगे, जो 30 सितंबर 2025 तक वर्चुअल कोर्ट (Virtual Court) को भेजे जा चुके हों।
कौन से मामले शामिल नहीं होंगे
- नशे में वाहन चलाना
- दुर्घटना के बाद भागना
- लापरवाही से मृत्यु
- नाबालिग द्वारा वाहन चलाना
- आपराधिक गतिविधियों में उपयोग किए गए वाहन
- नियमित अदालतों में लंबित मामले
- अन्य राज्यों में जारी चालान
National Lok Adalat क्यों है महत्वपूर्ण
National Lok Adalat का उद्देश्य आपसी सहमति से मामलों का त्वरित समाधान करना है। यहां मामलों का निपटारा एक ही दिन में किया जाता है, जिससे लोगों को समय और खर्च दोनों की बचत होती है। हालांकि, केवल वही चालान स्वीकार किए जाते हैं जिनका पहले से पंजीकरण किया गया हो।
आध्यात्मिक अनुशासन और मर्यादा का महत्व
हर व्यवस्था नियमों और अनुशासन के माध्यम से संचालित होती है, और यही सिद्धांत आध्यात्मिक जीवन पर भी समान रूप से लागू होता है। जिस प्रकार कानूनी प्रक्रियाएं लोगों के हितों की रक्षा के लिए तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती हैं, उसी तरह आध्यात्मिक साधना भी उन सीमाओं के भीतर आगे बढ़ती है, जो मानव कल्याण के लिए निर्धारित होती हैं। धर्मग्रंथों और इतिहास में बार-बार मर्यादा अर्थात आध्यात्मिक अनुशासन के महत्व को रेखांकित किया गया है।
जब मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। इसी कारण संतजन आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने से पहले अनुशासन का महत्व समझाते हैं। वर्तमान समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज यह स्पष्ट करते हैं कि सच्चे आध्यात्मिक नियम केवल और केवल मानव जीवन के हित और सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। वे बताते हैं कि दैनिक आचरण और उपासना में अनुशासन अपनाने से साधक भ्रम और हानि से सुरक्षित रहते हैं।
उनकी शिक्षाओं के अनुसार वास्तविक आध्यात्मिक लाभ केवल शास्त्र-आधारित भक्ति से ही प्राप्त होता है, न कि उन साधनाओं से जिनका शास्त्रों में कोई आधार नहीं है। समझ के साथ अपनाया गया अनुशासन मानव जीवन में स्पष्टता, संतुलन और उद्देश्य प्रदान करता है।
अधिक जानकारी के लिए देखें:
- वेबसाइट: www.jagatgururampalji.org
- यूट्यूब: Sant Rampal Ji Maharaj
- फेसबुक: Spiritual Leader Sant Rampal Ji
- एक्स (ट्विटर): @SaintRampalJiM
National Lok Adalat 10 जनवरी 2026: FAQs
यह 10 जनवरी 2026 को आयोजित होगी।
क्योंकि 13 दिसंबर कोDelhi High Court द्वारा कोर्ट सिटिंग डे घोषित किया गया था।
नहीं, केवल minor और compoundable offences ही पात्र हैं।
हां, advance online registration और token अनिवार्य है।
सभी Delhi District Court Complexes, High Court of Delhi और Permanent Lok Adalats में।



