नंगला दादू में 70 साल पुराने जलभराव का संकट, संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए सोलर सिस्टम से जल निकासी को मिला नया सहारा

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राजस्थान के डीग जिले की कामां तहसील का गांव नंगला दादू कभी पानी की समस्या से जूझते-जूझते अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच गया था। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 70 वर्षों से गांव के आसपास के खेतों में जलभराव बना रहता था। बरसात के बाद हालात और बिगड़ जाते थे। सैकड़ों बीघा जमीन लंबे समय तक पानी में डूबी रहती, फसलें खराब हो जातीं और खेती पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता।

गांव के लोगों का कहना है कि लगातार जलभराव के कारण कई परिवार गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और खेती से होने वाली आमदनी लगभग खत्म हो गई। जिन खेतों में कभी अन्न उगना चाहिए था, वहां लंबे समय तक पानी जमा रहता था।

ग्रामीणों के मुताबिक, इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कई स्तरों पर प्रयास किए। इसी बीच गांव की ओर से जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पास सहायता के लिए प्रार्थना पहुंचाई गई। इसके बाद जल निकासी के लिए चरणबद्ध तरीके से पाइपलाइन, मोटर, पंपिंग और डीजल की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। अब बिजली की समस्या को देखते हुए 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम और 5 एचपी की डीसी मोटर भी गांव में पहुंचाई गई है।

सोलर सिस्टम की स्थापना के बाद इसका ट्रायल भी किया गया। ग्रामीणों के सामने मोटर चलाकर पानी निकासी की व्यवस्था को परखा गया। गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ एक मशीन का शुरू होना नहीं, बल्कि लंबे समय से रुकी खेती और गांव की जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की उम्मीद है।

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70 साल तक पानी से घिरा रहा गांव, खेतों में खेती करना बना सपना

नंगला दादू के ग्रामीण बताते हैं कि जलभराव की समस्या कोई एक-दो साल पुरानी नहीं थी। बुजुर्गों के अनुसार, कई दशकों से गांव की जमीन का बड़ा हिस्सा पानी की चपेट में रहता आया है। एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी करीब 300 बीघा जमीन में लंबे समय तक खेती करना संभव नहीं था। गांव के लोगों की परेशानी केवल खेतों तक सीमित नहीं थी। पानी भरा रहने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित रहते थे। एक महिला ग्रामीण ने बताया कि जलभराव के दौरान माता-पिता अपने बच्चों को लेकर काफी डर में रहते थे। उनके अनुसार, गांव में पानी में डूबने से बच्चों की मौत जैसी घटनाएं भी हुईं। ऐसे हालात में खेती छोड़ना कई परिवारों की मजबूरी बन गई। जिन परिवारों की रोजी-रोटी खेतों पर निर्भर थी, उन्हें मजदूरी या रोजगार की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा।

एक ग्रामीण ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पहले खेत में फसल होने की उम्मीद ही नहीं रहती थी। अगर किसी तरह फसल बोई भी जाती, तो पानी भरने के कारण वह खराब हो जाती। इसलिए धीरे-धीरे लोगों ने खेती करना ही छोड़ दिया।

पहली मदद में 13 हजार फीट पाइपलाइन और बड़ी मोटरों से शुरू हुई जल निकासी

ग्रामीणों के अनुसार, नंगला दादू की समस्या को देखते हुए सबसे पहले करीब 13,000 फीट 8 इंच की पाइपलाइन उपलब्ध कराई गई। इसके साथ दो बड़ी मोटरें और ट्रैक्टर से चलने वाले कपलिंग सेट भी दिए गए। इस व्यवस्था का उद्देश्य गांव और खेतों में जमा पानी को पाइपलाइन के जरिए बाहर निकालना था। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद लंबे समय से पानी में डूबी जमीन से पानी निकलना शुरू हुआ और करीब सात दशक बाद खेती की उम्मीद दिखाई देने लगी।

एक ग्रामीण प्रतिनिधि के अनुसार, पानी निकासी के बाद गांव के कुछ खेतों में गेहूं की फसल भी हुई। ग्रामीणों ने इसे लंबे समय बाद अपनी जमीन पर लौटी खेती के रूप में देखा। लेकिन जलभराव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। कुछ हिस्सों में पानी अभी भी जमा था। ऐसे में गांव की ओर से दोबारा सहायता की मांग रखी गई।

दूसरी बार 4,800 फीट पाइप और दो 5 एचपी मोटरें मिलीं

पहली व्यवस्था के बाद बचे हुए जलभराव को निकालने के लिए ग्रामीणों ने फिर सहायता मांगी। इसके बाद करीब 4,800 फीट अतिरिक्त पाइपलाइन और दो 5 एचपी की मोटरें उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस चरण से उन हिस्सों में भी पानी निकालने में मदद मिली जहां पहले की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। खेतों में पानी का स्तर कम होने लगा और ग्रामीणों ने दोबारा फसल बोने की तैयारी शुरू कर दी। गांव के प्रतिनिधि विनोद कुमार ने बताया कि पहले पानी की वजह से खेती की कल्पना करना भी मुश्किल था। लेकिन पाइपलाइन और मोटरों की मदद से जमीन खेती योग्य होने लगी और गांव के लोगों में दोबारा उम्मीद पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अब गांव में धान, बाजरा और ज्वार जैसी फसलें बोई जा रही हैं और ग्रामीणों को उम्मीद है कि आगे भी समय पर खेती हो सकेगी।

मोटरें थीं, पाइपलाइन थी, लेकिन बिजली की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

जल निकासी की व्यवस्था बनने के बाद एक नई परेशानी सामने आई। गांव में पर्याप्त विद्युत आपूर्ति नहीं थी। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लगे छोटे ट्रांसफॉर्मर पर पहले से ही काफी लोड था। ऐसे में 5 एचपी की मोटरों को पर्याप्त क्षमता से चलाना मुश्किल हो रहा था।

एक ग्रामीण ने बताया कि बिजली आने पर मोटर चलाने की कोशिश की गई, लेकिन वह पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही थी। पानी निकालने के लिए लगातार पंप चलाना जरूरी था, इसलिए बिजली की कमी अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई। कुछ समय तक डीजल से चलने वाले पंप और ट्रैक्टर की मदद से पानी निकाला गया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें जरूरत के अनुसार डीजल भी उपलब्ध कराया गया, जिससे पानी निकासी का काम जारी रह सका। लेकिन ग्रामीण चाहते थे कि ऐसी व्यवस्था हो जिससे हर बार बिजली या डीजल पर निर्भर न रहना पड़े। इसी जरूरत को देखते हुए सोलर सिस्टम की मांग सामने आई।

10 किलोवाट सोलर सिस्टम ने दूर की बिजली की बड़ी समस्या

ग्रामीणों के अनुसार, जब वे दोबारा सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे तो बिजली की समस्या के बारे में बताया गया। इसके बाद गांव के लिए 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम और 5 एचपी की डीसी मोटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसके साथ मोटर चलाने के लिए जरूरी अन्य सामग्री भी पहुंचाई गई। ग्रामीण प्रतिनिधि के अनुसार, कंट्रोलर, असेंबली, फ्लेक्सिबल पाइप, फुटबॉल और अन्य आवश्यक सामान भी उपलब्ध कराया गया।

महत्वपूर्ण बात यह रही कि केवल सामान पहुंचाकर काम समाप्त नहीं किया गया। सोलर सिस्टम को स्थापित करने के लिए तकनीकी टीम भी गांव पहुंची। टीम ने सोलर स्ट्रक्चर तैयार किया, पैनल लगाए और मोटर को चलाकर उसका परीक्षण किया। ग्रामीणों के सामने सोलर सिस्टम का ट्रायल किया गया। मोटर चलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। गांव में मौजूद लोगों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।

गांव वालों के लिए सोलर ट्रायल सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं, नई शुरुआत की उम्मीद

सोलर सिस्टम का सफल ट्रायल होने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि अब पानी निकासी का काम अधिक नियमित तरीके से किया जा सकेगा। उनके अनुसार, सोलर ऊर्जा से मोटर चलने के कारण बिजली की कमी के कारण आने वाली परेशानी कम होगी। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव का पानी पाइपलाइन के जरिए आगे नहर की दिशा में निकाला जाएगा। इससे खेतों में पानी जमा होने की स्थिति कम करने में मदद मिलेगी।

विनोद कुमार के अनुसार, गांव में पहले जो जमीन वर्षों तक पानी में डूबी रहती थी, उसका बड़ा हिस्सा अब खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब गांव के किसान समय पर बुवाई करने की उम्मीद कर रहे हैं। 

एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि पहले लोग फसल बोने से डरते थे, क्योंकि फसल के गल जाने का डर रहता था। अब सोलर सिस्टम शुरू होने के बाद ग्रामीणों को भरोसा है कि पानी की निकासी की व्यवस्था पहले से बेहतर रहेगी।

“उजड़ा हुआ गांव फिर बसने लगा”, पलायन रोकने की उम्मीद

नंगला दादू में जलभराव का असर केवल खेती पर नहीं पड़ा था। ग्रामीणों के अनुसार, लगातार खराब होते हालात के कारण कई परिवार गांव छोड़कर बाहर चले गए थे। जब खेतों में खेती बंद हुई तो परिवारों की आमदनी कम हुई। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ी। कई लोगों को मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ा। अब स्थिति बदलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खेती शुरू होने के बाद बाहर गए कुछ परिवार वापस लौटने लगे हैं। गांव के लोगों को उम्मीद है कि यदि खेतों में लगातार फसल होती रही तो पलायन पर भी रोक लग सकती है।

एक महिला ग्रामीण ने कहा कि पहले गांव में पानी के कारण बच्चों को लेकर डर बना रहता था। अब जल निकासी की व्यवस्था मजबूत होने से उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है। ग्रामीणों के लिए खेत में खड़ी फसल केवल अनाज नहीं, बल्कि उनके परिवार की शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़ी उम्मीद है।

ग्रामीणों की जुबानी: “अब हमारे खेतों में अन्न उगेगा”

गांव के बुजुर्गों और किसानों की बातचीत में सबसे ज्यादा खुशी खेती को लेकर दिखाई दी। एक ग्रामीण ने बताया कि उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है और उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गांव की इसी समस्या को देखते हुए बिताया।

उनके शब्दों में, “हमने वर्षों तक यहां खेती होते नहीं देखी। अब खेतों में अन्न उगने की उम्मीद है। फसल होगी तो बच्चों की पढ़ाई भी होगी और परिवार का खर्च भी चलेगा।”

एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि गांव में पहले पानी इतना जमा रहता था कि बच्चों को अकेले बाहर भेजने में भी डर लगता था। अब जल निकासी की व्यवस्था बनने से परिवारों को राहत मिली है।

गांव के प्रतिनिधि विनोद कुमार ने भी कहा कि पहले पाइपलाइन और मोटरों से पानी निकालने की व्यवस्था बनी और अब सोलर सिस्टम मिलने से बिजली की समस्या का समाधान करने की दिशा में बड़ा कदम हुआ है। उनके अनुसार, अब ग्रामीणों की कोशिश है कि पानी जमा न होने दिया जाए और समय रहते खेतों से अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाए।

संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने जताया आभार

  • नंगला दादू के ग्रामीणों ने इस पूरे राहत कार्य के लिए संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, सहायता एक बार तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांव की समस्या के अलग-अलग चरणों के अनुसार लगातार मदद उपलब्ध कराई गई।
  • ग्रामीणों के मुताबिक, पहले पाइपलाइन और मोटरें मिलीं, फिर अतिरिक्त पाइपलाइन और छोटी मोटरें उपलब्ध कराई गईं। बिजली की समस्या सामने आने के बाद सोलर सिस्टम और डीसी मोटर की व्यवस्था की गई। इस तरह जलभराव की समस्या से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर सहायता पहुंची।
  • गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों को करुणा और जनकल्याण से जोड़ते हुए कहा कि जरूरतमंद किसानों तक सहायता पहुंचाना उनके लिए बड़ी बात है। ग्रामीणों के अनुसार, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्षों से पानी में डूबी जमीन अब दोबारा खेती के काम आ रही है।
  • अन्नपूर्णा मुहिम और किसान-मजदूर बचाओ अभियान से जुड़े सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए सेवादारों ने भी कहा कि किसान और मजदूर को राहत देना इस तरह की सेवा का उद्देश्य है। हालांकि इन व्यापक अभियानों से जुड़े अन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के दायरे में नहीं की गई है।

खेतों में लौटती हरियाली से बदली गांव की तस्वीर

नंगला दादू की कहानी में सबसे बड़ा बदलाव खेतों की तस्वीर में दिखाई देता है। जहां लंबे समय तक पानी और दलदली जमीन दिखाई देती थी, वहीं अब कई हिस्सों में फसलें नजर आने लगी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ खेतों में धान, बाजरा और ज्वार जैसी फसलें बोई गई हैं। उनका कहना है कि खेती वापस आने से गांव में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। किसान के लिए खेत में उगती फसल केवल कमाई का जरिया नहीं होती। उसी फसल से घर का राशन आता है, बच्चों की फीस निकलती है, बीज और खाद खरीदे जाते हैं और परिवार का भविष्य जुड़ा होता है। इसलिए नंगला दादू में पानी निकासी की व्यवस्था मजबूत होना ग्रामीणों के लिए जीवन को फिर से व्यवस्थित करने जैसा है।

70 साल की पीड़ा से खेती की उम्मीद तक

नंगला दादू में कभी पानी गांव की पहचान बन गया था। खेत खाली थे, परिवार परेशान थे और कई लोग गांव छोड़कर चले गए थे। आज वही ग्रामीण खेतों में फसल देखकर भविष्य की बात कर रहे हैं। 13,000 फीट पाइपलाइन से शुरू हुआ राहत का सफर 4,800 फीट अतिरिक्त पाइपलाइन, मोटरों और डीजल सहायता से आगे बढ़ा और अब 10 किलोवाट के सोलर सिस्टम तक पहुंचा है। सोलर मोटर के सफल ट्रायल के बाद गांव वालों को उम्मीद है कि जलभराव की समस्या से निपटने के लिए उनके पास अब अधिक टिकाऊ व्यवस्था होगी।

नंगला दादू की जमीन पर उगती फसलें यह संदेश दे रही हैं कि किसी गांव की मुश्किल केवल पानी की समस्या नहीं होती, उसके साथ लोगों की रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई, परिवारों का भविष्य और गांव की पूरी अर्थव्यवस्था जुड़ी होती है। ग्रामीणों के लिए आज का दिन इसी उम्मीद का दिन है कि जिस जमीन ने दशकों तक पानी सहा, वही जमीन अब उनके परिवारों के लिए अन्न और भविष्य का आधार बनेगी। अधिक जानकारी हेतु आप Sant Rampal Ji Maharaj App  डॉउनलोड करें।

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