झज्जर (हरियाणा): हरियाणा राज्य के झज्जर जिले की बादली तहसील में मुँडाखेड़ा नामक गाँव है । यह गाँव अपनी ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रशासित होता है और इसकी जनसंख्या 2011 के अनुसार लगभग 3525 है, जो झज्जर जिले में एक महत्वपूर्ण ग्रामीण इकाई है। इस गाँव में 50 साल पुरानी बाढ़ की समस्या पिछले दिनों इतनी भयावह हो गई कि पलायन की स्तिथि पैदा हो गई। गांव मुंडा खेड़ा में जब उम्मीद की आखिरी किरण भी दम तोड़ रही थी, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ द्वारा लगातार रचे जा रहे नए इतिहास में एक पन्ना जुड़ गया। यह गाथा एक डूबते हुए गांव को पलायन से बचाने और उसकी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने की है। घोर प्रशासनिक अनदेखी के कारण ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर था। इस लेख में आप पढ़ेंगे कैसे संत रामपाल जी महाराज की दया से इस गाँव की 50 साल पुरानी बाढ़ की समस्या का अंत हुआ।
गाँव मुंडा खेड़ा बाढ़ राहत अभियान एक नजर में
- 50 साल का संघर्ष: गांव पिछले पांच दशकों से जलभराव और सरकारी उपेक्षा का शिकार था।
- त्वरित कार्रवाई: आश्रम में प्रार्थना करने के मात्र 10 दिनों के भीतर करोड़ों की सहायता गांव पहुँची।
- पूर्ण आत्मनिर्भरता: राहत सामग्री इतनी संपूर्ण थी कि ग्रामीणों को एक ‘फेविकोल’ तक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।
- नस्लों का बचाव: ग्रामीणों के अनुसार, यह सहायता केवल फसल नहीं बल्कि उनकी नस्ल भी बचाएगी।
- पारदर्शिता का मॉडल: ड्रोन वीडियो साक्ष्यों के जरिए कार्य की निगरानी की व्यवस्था।
बाढ़ का पानी भरने के बाद गाँव की हालत कैसी थी ?
मुंडा खेड़ा गांव में बाढ़ का पानी केवल खेतों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने पूरे जनजीवन को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। गांव की स्थिति किसी “शरणार्थी शिविर” से भी बदतर हो चली थी। किसान तक वेबसाईट की एक रिपोर्ट भी इस दर्द को बयान करती हैं ।
ग्रामीणों द्वारा बयां किया गया दर्द और गांव की वास्तविक स्थिति की जानकारी पढ़िए :
- आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी का डर: ग्रामीणों ने बताया कि 50 साल से वे इस समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन इस बार हालात इतने खराब थे कि लोगों को लगा कि उनकी आने वाली पीढ़ियाँ बर्बाद हो जाएंगी। खेती न होने के कारण युवाओं का भविष्य भी अंधकारमय दिख रहा था।
- पशु जीवन और उनके चारे का संकट: बाढ़ के कारण पशुओं के लिए चारा (हरियाणवी शब्दों में जिसे ‘न्यार’ कहा जाता है) पूरी तरह खत्म हो गया था। फसलें डूबने से पशु भूखे मर रहे थे और कई पशु बीमार हो गए थे। एक ग्रामीण महिला ने भावुक होकर बताया कि “डांगर (पशु) भूखे मरते छोड़ दिए, बुरा हाल हो रहा है।”
- शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा ठप्प: गांव के स्कूल जलमग्न हो चुके थे, जिससे बच्चे शिक्षा से वंचित थे। गांव की डिस्पेंसरी भी बंद पड़ी थी क्योंकि वहां तक पहुँचने वाले सभी रास्ते पानी में डूबे हुए थे।
- गंदगी और बीमारियां: गांव के चारों तरफ गंदा पानी जमा होने के कारण मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया था कि लोगों का घरों में बैठना दूभर था। रास्ते बंद होने के कारण लोग घरों में कैद होकर रह गए थे। ऐसे भी बीमारियाँ फैल रही थी, डिस्पेंसरी बंद थी तो इलाज भी असंभव था।
मुंडा खेड़ा के सरपंच और ग्रामीणों के अनुसार, गांव एक “टापू” बन चुका था जहाँ उम्मीद की कोई किरण नहीं बची थी, जब तक कि संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ वहां नहीं पहुँची।

ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना लेकर पहुंचे
मुंडा खेड़ा गांव के हालात इतने खराब थे कि लोग कह रहे थे “हमारी तो नस्लें बर्बाद हो रही थीं।” ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए बताया कि गांव की पानी की निकासी को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। एक ग्रामीण ने भावुक होकर बताया कि एक नेता आया और ₹50000 देकर चला गया। ₹50000 रुपए से तो एक मोटर भी नहीं खरीदी जा सकती है। सरकार और नेताओं से पूरी तरह भरोसा उठने के बाद, गांव की पंचायत ने बरवाला में संत रामपाल जी महाराज के सामने अपनी झोली फैलाई।
संत रामपाल जी महाराज ने भेजा राहत सामग्री से लदा काफिला
संत रामपाल जी महाराज के सेवादार रात के समय ही मुंडा खेड़ा गांव पहुँचे। संत रामपाल जी महाराज जी का स्पष्ट आदेश था कि हमें लोक दिखावा नहीं चाहिए, सिर्फ जमीनी स्तर पर काम करना है। अब तक 300 से ज्यादा गांवों में यह सेवा पूरी हो चुकी है। मुंडा खेड़ा के लिए भेजी गई सहायता इतनी विस्तृत थी कि मोटर के साथ स्टार्टर, बैंड, पाइप जोड़ने वाला फेविकोल और हर जरूरी सामान भी साथ दिया गया ।
करोड़ों की राहत सामग्री का तकनीकी विवरण
| सामग्री का विवरण | मात्रा | विशेषता |
| विशाल मोटर | 05 | 15 HP की शक्तिशाली मोटरें (उच्च क्षमता वाली) |
| पाइप | 6000 फुट | 8 इंची हैवी-ड्यूटी पाइप लाइन |
| एक्सेसरीज | पूर्ण सेट | स्टार्टर, बैंड, वाल, वायर, नट-बोल्ट, क्लिप |
| सहायक सामग्री | किट | पाइप जोड़ने हेतु विशेष फेविकोल और अन्य टूल्स |
| गाँव वालों का खर्च | ₹0 | संपूर्ण खर्च ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ (सतलोक आश्रम) द्वारा वहन |
“हमारे लिए तो भगवान उतर आया”: ग्रामीणों और सरपंच के भावुक विचार
सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र जी और गांव के बुजुर्गों ने संत रामपाल जी महाराज का तहे दिल से धन्यवाद किया। सरपंच जी ने कहा, “हमने जितनी मांग की थी, उससे कहीं ज्यादा और व्यवस्थित सामान मिला है।” 71 वर्षीय एक बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी तबाही कभी नहीं देखी थी, लेकिन महाराज जी ने “सोना बरसा दिया (सोने की वर्षा)” है। गांव की महिलाओं (ताई जी) ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब पशुओं के लिए न्यार (चारा) और इंसानों के लिए अनाज (दाना) पैदा हो सकेगा।
संत रामपाल जी महाराज का सख्त आदेश: “पानी निकलना चाहिए, बहाना नहीं”
संत रामपाल जी महाराज जी की ओर से आए सेवादारों ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी गांव वालों को दिया। उन्होंने कहा कि महाराज जी खुद किसान परिवार से हैं और दर्द समझते हैं, लेकिन गांव वालों को भी कटिबद्ध होना होगा।
- ड्रोन वीडियो मॉनिटरिंग: गांव की 3 वीडियो बनेंगी (बाढ़ के समय, पानी निकलने के बाद और लहलहाती फसल की)।
- जवाबदेही: यदि इस सहायता के बाद भी पानी नहीं निकलां, तो भविष्य में ट्रस्ट कोई मदद नहीं करेगा। अतिरिक्त सामान चाहिए तो संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करके लिया जा सकता है लेकिन पानी निकलना चाहिए ।
- वीडियो बनाने का उद्देश्य: यह वीडियो संत रामपाल जी महाराज के समागमों में दिखाई जाएंगी ताकि दानकर्ताओं को पता चले कि उनके दान किए गए पैसे से कितने लोगों को ‘जीवनदान’ मिला।
ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज को ‘पगड़ी’ भेंट की
मुंडा खेड़ा गांव के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। आभार प्रकट करने के लिए पूरी ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के लिए एक सुंदर ‘पगड़ी’ (साफा) सेवादारों को भेंट की। ग्रामीणों ने कहा, “पगड़ी देना मतलब शीश देना है, हमारे लिए महाराज जी भगवान से बढ़कर हैं।” सरपंच और ग्रामीणों ने यह विश्वास दिलाया कि वे संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश का पालन करेंगे और जल्द से जल्द गांव को जलमुक्त करेंगे।
कलयुग में सतयुग की शुरुवात के अध्याय का नया पन्ना लिखा गया
मुंडा खेड़ा की यह कहानी सिर्फ पाइप और मोटर की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है जिसे संत रामपाल जी महाराज ने बहाल किया है। जहाँ प्रशासन वर्षों तक विफल रहा, वहां महाराज जी ने 10 दिन में समाधान खड़ा कर दिया। आज पूरा मुंडा खेड़ा एक ही स्वर में कह रहा है, दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार। और उन्हें वहां से वह सहारा मिला जिसने उनकी डूबती दुनिया को फिर से बसा दिया। अब भविष्य में भी संत रामपाल जी महाराज इस तरह की मदद जारी रखेंगे, जिस तरह पहले भी मानवता के कार्यों के लिए वो हमेशा तैयार खड़े मिले हैं। इस प्रकार कलयुग की इस बिचली पीढ़ी में सतयुग का उदय हो रहा है। संत रामपाल जी महाराज के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं। मुँडाखेड़ा गाँव के ऊपर आई इस आपदा की वीडियो यहाँ देखिए



