हरियाणा के जींद जिले की जुलाना तहसील में स्थित मालवी गाँव की गलियों में पिछले तीन महीनों से सन्नाटा नहीं, बल्कि पानी का खौफनाक शोर था। जहाँ कभी लहलहाती फसलें और खुशहाल रास्ते हुआ करते थे, वहाँ एक ‘सफेद समंदर’ ने अपना डेरा जमा लिया था। यह मंजर इतना भयावह था कि गाँव के मुख्य रास्ते प्रलयकारी बाढ़ की भेंट चढ़ चुके थे और घर किसी लाचार टापू की तरह पानी के बीचों-बीच डूबे नजर आ रहे थे।
धान की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो ही चुकी थी, लेकिन किसानों की आँखों में अगली गेहूं की बिजाई को लेकर जो बेबसी थी, वह किसी भी पत्थर दिल को पिघला देने वाली थी। ऐसे अंधेरे वक्त में, जब सरकारी आश्वासन दम तोड़ चुके थे, तब संत रामपाल जी महाराज की दया ने मालवी गाँव में उम्मीद का नया सूरज उगाया है।
मालवी गाँव को मिला बेबसी का मंजर और सरकारी आश्वासनों की हार
मालवी गाँव के हालात बद से बदतर हो चुके थे। गाँव के सरपंच और पूर्व फौजी बताते हैं कि गाँव को इस जल-प्रलय से निकालने के लिए उन्होंने प्रशासन के हर दरवाजे पर दस्तक दी। विधायकों से लेकर मंत्रियों तक सिफारिशें करवाई गईं, लेकिन बदले में सिर्फ ‘तारीख पर तारीख’ और खोखले आश्वासन ही मिले।

किसान अपनी ही उपजाऊ जमीन पर खड़ा होकर भुखमरी की आहट सुन रहा था क्योंकि पानी निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। लगभग 18,000 बीघे जमीन जलमग्न थी। जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तब मालवी की पंचायत ने एक अंतिम उम्मीद के साथ संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी अर्जी लगाई।
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जब एक अर्जी पहुंची संत के द्वार तब शुरु हुई सेवा की अद्भुत रफ्तार
कहते हैं कि जब इंसान की शक्ति जवाब दे देती है, तब परमात्मा की शक्ति कार्य करती है। मालवी पंचायत की अर्जी स्वीकार होने के मात्र एक सप्ताह के भीतर गाँव की सूरत बदल गई। संत रामपाल जी महाराज के यहाँ सेवा की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते गाँव की गलियों में ट्रैक्टरों और ट्रकों का एक विशाल रेला उमड़ पड़ा। यह केवल सामान का आना नहीं था, बल्कि मालवी के किसानों के लिए खुशहाली की वापसी थी। सेवादारों ने स्पष्ट कर दिया कि इस लाखों रुपये के सामान का एक नट-बोल्ट भी सरपंच को बाहर से नहीं खरीदना पड़ेगा और यह पूरी सामग्री अब गाँव की साझा मिल्कियत है।
राहत सामग्री का विवरण
संत रामपाल जी महाराज की ओर से मालवी ग्राम पंचायत को सौंपी गई राहत सामग्री का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

| क्रम संख्या | सामग्री | विवरण |
| 1 | विशाल मोटरें | 5 मोटरें (प्रत्येक 20 हॉर्स पावर – 20 HP) |
| 2 | पाइप लाइन | 18,000 फुट लंबी (8 इंची पाइप) |
| 3 | विद्युत उपकरण | स्टार्टर, केबल और सहायक एक्सेसरी |
| 4 | फिटिंग सामग्री | सुंडिया, नट-बोल्ट और अन्य आवश्यक सामान |
| 5 | ब्रांड/क्वालिटी | क्रॉप्टन और किर्लोस्कर जैसी उच्च गुणवत्ता वाली मोटरें |
400 से अधिक गाँवों में पहुंच चुका संत रामपाल जी महाराज का “मानव रक्षक” अभियान
संत रामपाल जी महाराज का यह राहत अभियान केवल मालवी तक सीमित नहीं है। अब तक हरियाणा के 400 से अधिक गाँवों में यह सेवा पूरी हो चुकी है। हिसार जैसे जिलों में, जहाँ सबसे पहले मदद पहुँची थी, वहाँ आज पानी निकल चुका है और किसान खुशी-खुशी अपनी गेहूं की बिजाई कर रहे हैं। महाराज जी का स्पष्ट आदेश है कि हमें लोक-दिखावा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य करना है।
यही कारण है कि आज उन्हें समाज द्वारा ‘किसान रक्षक’ और ‘मानव रक्षक’ जैसे सम्मानों से नवाजा जा रहा है। वे स्वयं एक किसान परिवार से हैं, इसलिए किसानों के दर्द को भली-भांति समझते हैं।
बदलाव की लहर और ग्रामीणों का उत्साह
जैसे ही राहत सामग्री से भरे ट्रक मालवी की सीमा पर पहुँचे, पूरे गाँव ने उत्सव जैसा माहौल बना दिया। सरपंच और सैकड़ों ग्रामीण काफिले की अगवानी के लिए 2 किलोमीटर पहले ही पहुँच गए। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ महाराज जी के स्वरूप पर पुष्प वर्षा की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जो काम सरकार सालों में नहीं कर पाई, वह महाराज जी ने एक प्रार्थना पर कर दिखाया। गाँव की चौपाल पर हुए स्वागत समारोह में सेवादारों ने महाराज जी का संदेश भी सुनाया कि सामान चाहे कितना भी लगे, पर गाँव का पानी निकलना चाहिए ताकि अन्नदाता की मेहनत बर्बाद न हो।
संत रामपाल जी महाराज ने सिखाया परमार्थ ही सच्चा धर्म है
मालवी गाँव की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब संत रामपाल जी महाराज जैसे मसीहा ही सहारा बनते हैं। उनका यह कार्य केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता को एक सूत्र में पिरोने और ‘निस्वार्थ सेवा’ का अद्भुत उदाहरण है। आज मालवी के खेतों में सड़ा हुआ पानी नहीं, बल्कि खुशहाली की नई फसल लहलहाने की उम्मीद है।
महाराज जी ने सिद्ध कर दिया है कि कथाओं और प्रवचनों का असली अर्थ तब सार्थक होता है जब वे किसी दुखी के आँसू पोंछने के काम आएँ। युगों-युगों तक मालवी की धरती पर महाराज जी के इस उपकार को स्वर्ण अक्षरों में याद रखा जाएगा।



