लुड़ेसर में बजट के अभाव में अधूरा था गोदाम, जानिए कैसे 15 दिन में पूरा हुआ 55×125 फीट का चारा शेड

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हरियाणा के सिरसा जिले के गांव लुड़ेसर स्थित श्री कृष्ण प्रणामी गौशाला एवं नंदीशाला में चारे और तूड़ी को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। गौशाला प्रबंधन ने ग्रामीणों के सहयोग से चारे के गोदाम की दीवारें तो तैयार करवा ली थीं, लेकिन बजट का अभाव हो जाने के कारण ऊपर टिन शेड की छत नहीं लग पा रही थी। बारिश और आंधी में चारा भीगने से बचाने के लिए जब कोई अन्य समाधान नहीं सूझा, तब ग्राम पंचायत और गौशाला कमेटी ने आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रार्थना प्रस्तुत की। प्रार्थना स्वीकार होने और आवश्यक सर्वेक्षण के उपरांत संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार मात्र 15 दिनों में गोदाम के ऊपर मजबूत टिन शेड का निर्माण पूर्ण करवाकर गौशाला को सौंप दिया गया।

खुले में भीगती तूड़ी और फटे त्रिपाल ने बढ़ाई थी मदद की जरूरत

श्री कृष्ण प्रणामी गौशाला में गौवंश की संख्या अधिक होने के चलते चारा और तूड़ी रखने के लिए उपलब्ध शेड छोटा पड़ रहा था। जगह की कमी से बड़ी मात्रा में चारा खुले आसमान के नीचे रखना पड़ता था, जो बरसात, सीलन और तेज धूप के कारण सड़-गलकर खराब हो जाता था। ग्रामीणों के अनुसार चारे को बचाने के लिए वे ऊपर से मच्छरदानी या त्रिपाल डालते थे, लेकिन तेज आंधी-तूफान आते ही त्रिपाल फट जाते थे और पूरे साल का संचित चारा भीगने की चिंता बनी रहती थी। इसके अतिरिक्त जिस शेड में गायों को बांधा जाता था, मजबूरी में वहां भी तूड़ी भरनी पड़ती थी। गौशाला कमेटी ने चंदे से गोदाम की दीवारें तो खड़ी कर लीं, लेकिन वित्तीय संसाधन पूरी तरह समाप्त हो जाने से छत का निर्माण अधर में लटक गया था, जिससे बाहरी सहायता अपरिहार्य हो गई।

संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 55×125 फीट शेड का निर्माण

गौ सुरक्षा अभियान के अंतर्गत मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में यह सेवा कार्य करवाया गया। इस पहल के तहत गोदाम पर 55 फीट चौड़ा और 125 फीट लंबा (55×125 फीट) विशाल टिन शेड निर्मित किया गया। निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए टाटा कंपनी की चद्दरें और मजबूत लोहे के पाइप व एंगल लगाए गए। लोहे के संपूर्ण ढांचे को जंग और पानी की मार से बचाने के लिए सफेद रंग के सुरक्षात्मक पेंट से लेपित किया गया। इसके साथ ही गौशाला में गोबर, खाद हटाने और चारे के ढेर को ऊंचा करने के लिए एक लोडर भी तैयार करवाया जा रहा है, जिसे शीघ्र उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई।

ग्रामीणों ने बयां की त्वरित निर्माण से मिली राहत

लुड़ेसर गांव के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इस सहायता पर अपने विचार रखे:

  • अमर सिंह शाह (सरपंच, लुड़ेसर): उन्होंने बताया कि गांव वालों ने मिलकर गोदाम की दीवारें तो बना दी थीं, मगर ऊपर चादर लगाने का बजट नहीं था। संत रामपाल जी महाराज के पास जाकर शेड और लोडर की मांग की, जिसे तुरंत मंजूरी मिल गई। 55×125 फीट का शेड बनने से अब 12 महीने का चारा सुरक्षित रहेगा और बरसात में तूड़ी नहीं भीगेगी।
  • शंकरलाल सिद्धू (गौशाला प्रधान): प्रधान ने बताया कि चंदे से दीवारें बन चुकी थीं पर बजट खत्म होने से शेड नहीं डल पा रहा था। संत रामपाल जी द्वारा 55×125 फीट का शेड मिलने से अब तूड़ी खराब होने की सारी चिंता खत्म हो गई है।
  • डॉ. जगदीश शर्मा (पूर्व प्रधान, गौशाला): उन्होंने कहा कि बजट के अभाव में रुका काम संत रामपाल जी के सहयोग से मात्र 15 दिन में बनकर तैयार हो गया। बेहतरीन सामग्री से बने इस शेड से अब बाहर से आने वाली तूड़ी सुरक्षित रहेगी।
  • रणधीर सिंह घाट (ग्रामीण): इन्होंने विचार व्यक्त किया कि धूप, बारिश और आंधी में तूड़ी उड़ने व भीगने की जो मुख्य समस्या थी, उसका स्थाई समाधान 125×55 फीट के शेड और लोडर के माध्यम से हो गया है।
  • भीमराज इंद्रा व लादूराम घाट (गौशाला सदस्य): इन्होंने बताया कि गौशाला के पास बजट न होने पर महाराज जी ने पहली ही बार में बात सुनी और 10-12 से 15 दिनों में सामान भेजकर शेड तैयार करवा दिया।

जवाबदेही और पारदर्शी कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष उदाहरण

इस सहायता की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी त्वरित समयबद्धता रही। ग्रामीणों के अनुसार जब कमेटी सहायता की अर्जी लेकर आश्रम गई, तो बिना किसी विलंब के तत्काल स्वीकृति मिल गई। तीसरे ही दिन निर्माण दल आवश्यक सामग्री लेकर गौशाला पहुंच गया और मात्र 15 दिनों के भीतर 55×125 फीट के विशालकाय ढांचे पर टिन शेड लगाकर काम पूरा कर दिया गया। सितंबर 2026 में स्थापित इस परियोजना की बाकायदा नेम प्लेट लगाई गई, जिसमें लाभार्थी संस्था, ट्रस्ट और निर्माण वर्ष का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। 

एक सामाजिक सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका

यह सेवा कार्य केवल एक ढांचागत सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और बेजुबान पशुओं के प्रति व्यापक करुणा को रेखांकित करता है। ग्रामीण वक्ताओं ने उल्लेख किया कि संकट चाहे बाढ़ का हो या गौशालाओं में चारे-पानी की किल्लत का, संत रामपाल जी महाराज की मानवीय पहल हर जरूरतमंद तक पहुंचती है। उनके अनुयायी और ग्रामीण उन्हें एक मार्गदर्शक, परोपकारी संत एवं भगवान के रूप में देखते हैं, जिनकी प्रेरणा से नशा मुक्ति जैसे सामाजिक सुधार और निस्वार्थ जनसेवा के अभियान धरातल पर क्रियान्वित हो रहे हैं। कबीर परमेश्वर की दया और सतगुरु संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में संचालित यह गौ सुरक्षा अभियान समाज में निस्वार्थ सेवा, जीव दया और नैतिक पुनरुत्थान की भावना को सुदृढ़ कर रहा है।

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