करवा चौथ : क्यों नहीं करना चाहिए?

Date:

करैं एकादशी संजम सोई, करवा चौथ गदहरी होई।

आज 27 अक्टूबर,18 को देशभर की अधिकतर महिलाएं व्रत रखेंगी जिसे करवा चौथ कहते हैं।
करवा चौथ को हिंदू महिलाएं एक प्रमुख व्रत मानती हैं। औरतें यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखती हैं। यह व्रत सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ रखती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब चार बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।

प्रचलित मान्यताएं

प्रचलित मान्यताओं के आधार पर पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन औरतें पूरे दिन के लिए उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करती हैं। जो सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं। हाथों में मेंहदी लगाकर, हारश्रृंगार करके दुल्हन की तरह सजने का चलन समाज में अधिक बढ़ रहा है।

गूगल पर करवा चौथ के बारे में सर्च करने पर अनेक प्रचलित कहानियां सामने आईं जो काल्पनिक लगती हैं। क्योंकि यदि करवा चौथ में सच्चाई होती तो कहानी भी एक होती और मत भी। जबकि पवित्र पुस्तक गीता जी सभी तरह के व्रत को शास्त्र विरुद्ध साधना करना बताती है।

करवा चौथ शास्त्र विरुद्ध साधना का सटीक उदाहरण है

मां की दुआओं में और पत्नी के भूखे रह कर व्रत करने में इतनी ताकत होती तो सरहद पर देश और देशवासियों की सुरक्षा में तैनात सैनिक दुश्मन की गोली से यूं शहीद नहीं होता। यहां परिवार, नाते, रिश्तेदार, दोस्त, अजनबी और हम सभी आपस में संस्कारवश जुड़े हैं। पृथ्वी पर हमारा आना अचानक नहीं हुआ इसके पीछे हमारे कर्म हैं। चौरासी लाख योनियों के बाद एक मनुष्य का जन्म मिलता है। जन्म से लेकर मृत्यु और चौरासी लाख अन्य जीवों के शरीर में जन्म, स्वर्ग और नरक गमन यह मनुष्य के हाथ में नहीं है। जन्म मरण इस पर केवल परमात्मा का अधिकार है। अमूल्य मनुष्य जीवन परमात्मा को पहचान कर सतभक्ति कर मोक्ष पाने के लिए मिला है। मनुष्य चांद आदि ग्रहों पर घूम कर आ सकता है पर चांद को देखकर जल चढ़ा कर किसी की आयु बढ़ाने की केवल कल्पनामात्र ही की जा सकती है। ज़मीन में पानी डालकर पौधा उगाया जा सकता है पर चांद को अर्घ्य देकर किसी की सांसें बढ़ गई हो ऐसा संभव होता नहीं देखा।

विचार कीजिए

विकासशील देश भारत में जहां हम महिला अधिकारों और समानता की बात करते हैं वहां सतभक्ति न करने के कारण ही पुरुष को आज भी श्रेष्ठ मान कर उसकी पूजा आरती की जाती है। उसकी आयु अधिक हो जाए यह प्रार्थना की जाती है। मां के लिए सभी बच्चे समान होते हैं। उसी तरह हम सब एक परमात्मा की संतान हैं। हम एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण और पुरूषों से बराबरी की बात करते हैं और वहीं दूसरी ओर पुरुष की अधिक आयु चाहते हैं। खाली पेट और खाली दिमाग दोनों में शैतान का वास होता है। भूखे पेट न तो भजन अच्छा लगता है और न काम करना ऐसे में जब अपने प्राण निकल रहे हों तो दूसरे की लंबी आयु के बारे में कौन सोचता है। नवजात शिशु तक भूखे पेट चुप नहीं रह सकता तो आप क्यों? पानी, भोजन, फल, सब्ज़ी खाने को न मिलने पर एक ही चीज़ पर ध्यान लगा रहता है की जल्दी चार बजे पूजा शुरू हो और पानी पी लें और चांद निकलने पर ठूंस ठूंस कर खाया-पिया जाए।

व्रत करना गीता अनुसार कैसा है

न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः, न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।।
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 श्लोक 16 के अनुसार व्रत  नहीं करना चाहिए। गीता ज्ञान दाता कह रहा है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा न अधिक जागने वाले की सफल होती है।

गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते हैं

।।कहे जो करवा चौथ कहानी, तास गदहरी निश्चय जानी, करे एकादशी संजम सोई, करवा चौथ गदहरी होई।। आठे, साते करे कंदूरी, सो तो बने नीच घर सूरी।।
आन धर्म जो मन बसे, कोए करो नर नारी।। गरीबदास जिंदा कहे, सो जासी नरक द्वार।।

गरीबदास जी समझाते हैं शास्त्रानुकूल भक्ति को छोड़ कर यदि कोई अन्य पूजा करते हैं तो वह ठीक नहीं हैं और जो अन्य पुजाएँ करता है वो नरक में जाएगा। वो चाहे पुरुष हो या स्त्री जो करवा चौथ का व्रत रखते हैं और जो उन्हें कहानी सुनाती हैं स्त्रियां उनकी चोटी पकड़ कर काल ले जाएगा और गधे की योनि में डालेगा। करवा चौथ रखने वाली स्त्री और कथा सुनाने वाले दोनों नरक के साथ गधे की योनि में जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि यह व्रत करना परमात्मा की इच्छा के विरुद्ध है।

गीतानुसार भक्ति का प्रारूप

गीता अध्याय 6 श्लोक 17 अनुसार दुःखों का नाश शास्त्रानुकूल साधना करने से होगा अर्थात् वह पूर्ण मोक्ष प्राप्ति की साधना तो यथायोग्य आहार-विहार करने वाले के दैनिक कार्य करते-करते भक्ति करने तथा यथायोग्य सोने तथा जागने वाले की ही सिद्ध होती है।
गीता अध्याय 6 श्लोक 18-19 के अनुसार जो तत्वज्ञान समझा हुआ व्यक्ति सांसारिक विषयों से पूर्ण रूप से मन हटा लेता है। उस साधक की इन्द्रियाँ ऐसे निश्चल होती हैं जैसे जिस स्थान पर वायु न चल रही हो, वहाँ रखे दीपक की लौ (ज्योति) चलायमान नहीं होती। उसी प्रकार अन्तरात्मा से परमात्मा की भक्ति (योग) में लगे हुए योगी यानि भक्त के मन व इन्द्रियों की स्थिति कही गई है।
अध्याय 6 के श्लोक 16 से 32 में कहा है कि अन्न-जल सोने-जागने का संयम करके यानि ठीक-ठीक खाए-पीए, जागे-सोवे, ऐसे रहकर पूर्ण परमात्मा के कभी समाप्त न होने वाले आनन्द (पूर्ण मुक्ति) को प्राप्त करने के लिए शास्त्रों के अनुसार नियमित साधना करनी चाहिए। पूर्ण गुरु की खोज करें जो पूर्ण परमात्मा का मार्गदर्शक हो। पूर्ण परमात्मा की भक्ति पूर्ण मुक्ति (परम-गति) व परम शांति दे सकती है। जो साधक परमात्मा और जीव की स्थिति सही तरह जान लेता है वही पूर्ण मुक्ति प्राप्त करता है। जो प्राणी काल (ब्रह्म) के आधीन हैं वे काल (ब्रह्म) को भगवान मानते हैं। काल (ब्रह्म) का उन पर पूरा दायित्व है। जो साधक कबीर साहेब के हंस हैं वे काल से बाहर हैं। इसलिए कहा कि जो मुझ काल को भजते हैं वे मुझे सर्वेसर्वा मानते हैं तथा वे प्राणी भी मेरी नजरों से दूर नहीं हैं अर्थात् मैं (काल) उन पर पूरी नजर रखता हूँ भावार्थ है कि जो काल उपासक ब्रह्म की साधना करता है वह काल (ब्रह्म) के जाल में ही रहता है। जो पूर्ण परमात्मा का भजन करता है वह काल जाल से बाहर है।
पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है। – ऋग्वेद
ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 – 3

करवा चौथ शास्त्र विरुद्ध है

समाज के भ्रमित लोग इसे करते हैं जो केवल देखा-देखी की भक्ति को आंख मूंद कर अनुसरण करते आ रहे हैं। वह ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अंतर्गत रहकर पूजा करते हैं और यह तीनों माया यानि दुर्गा और काल के पुत्र हैं। जब ब्रह्मा, विष्णु और शिव की भी जन्म मृत्यु होती है तो यह इन्हीं की भक्ति करने वालों की आयु कैसे बढ़ा सकते हैं। यह साधक के जीवन में कोई बदलाव नहीं कर सकते। इनकी शक्तियां बहुत सीमित हैं। ये तीनों भगवान, दुर्गा और काल मनुष्य को चौरासी लाख योनियों में जकडे़ रखते हैं। इनके जाल से बचने का उपाय केवल पूर्ण परमात्मा के पूर्ण संत के पास है जो न केवल साधक की आयु भक्ति के लिए बढ़ा देता है बल्कि तत्वज्ञान का अनमोल उपहार देकर साधक को सदा के लिए जन्म-मृत्यु और काल के जाल से आज़ाद करवा देता है। पूर्ण संत कौन है? पूर्ण संत की क्या पहचान है यह जानने के लिए प्रतिदिन अवश्य देखिए साधना चैनल 7:30-8:30 pm

About the author

Administrator at SA News Channel | Website | + posts

SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

SA NEWS
SA NEWShttps://news.jagatgururampalji.org
SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

World Teachers’ Day 2022: Find an Enlightened Teacher to Unfold the Mystery of Birth & Death

The World Teachers' Day presents the chance to applaud the teaching profession worldwide. Know its Theme, History, Facts along with the Enlightened Teacher.

World Animal Day 2022: How Many Species of Animals Can Be Saved Which Are on the Verge of Extinction?

Every year on 4 October, the feast day of Francis of Assisi, the patron saint of animals, World Animal Day, or World Animal Welfare Day, is observed. This is an international action day for animal rights and welfare. Its goal is to improve the health and welfare of animals. World Animal Day strives to promote animal welfare, establish animal rescue shelters, raise finances, and organize activities to improve animal living conditions and raise awareness. Here's everything you need to know about this attempt on World Animal Day which is also known as Animal Lovers Day. 

Dussehra in Hindi | दशहरा (विजयादशमी) 2022: किस ज्ञान से हमारे अंदर का रावण समाप्त होगा?

दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध किए जाने के उपलक्ष्य में दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का त्योहार दीपावली से कुछ दिन पूर्व मनाया जाता है। इस बार 07 अक्टूबर को नवरात्रि शुरु हुई है वहीं विजया दशमी (दशहरा 2021) का पर्व 15 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा।

Dussehra 2022 (Vijayadashami): Did Lord Ram Kill Ravan? [Reality Revealed]

Read to know the Story of Dussehra 2021 and Vijayadashami. Know how Ram Setu was built. Also, know if Lord Rama is the True God.
World Teachers’ Day 2022: Find an Enlightened Teacher to Unfold the Mystery of Birth & Death World Animal Day 2022: How Many Species of Animals Can Be Saved Which Are on the Verge of Extinction? How Ravana was Killed by the Supreme God [Explained]