January 24, 2026

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से कलिंगा गांव को दी जल प्रलय से मुक्ति

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हरियाणा के भिवानी जिले का ऐतिहासिक गांव कलिंगा पिछले तीन दशकों से जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। लगभग पच्चीस हजार की आबादी और बारह हजार मतदाताओं वाले इस विशाल गांव की स्थिति उस समय अत्यंत दयनीय हो गई जब हालिया बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी तंत्र की विफलता के बीच कलिंगा गांव के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था। ऐसे में मानवता की सेवा के संकल्प के साथ संत रामपाल जी महाराज ने मदद करते हुए न केवल गांव को राहत सामग्री उपलब्ध कराई है, बल्कि हजारों ग्रामीणों के भविष्य को भी सुरक्षित किया है।

कलिंगा गांव की त्रासदी और सरकारी तंत्र की विफलता

कलिंगा गांव तीन पंचायतों और विभिन्न पानों में विभाजित एक समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र रहा है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और उचित निकासी व्यवस्था न होने के कारण यहां तीस वर्षों से खेतों में पानी खड़ा रहने की समस्या बनी हुई थी। स्थिति तब भयावह हो गई जब बाढ़ के कारण गांव के चारों ओर पानी का घेरा बन गया। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं और भविष्य में बिजाई की उम्मीदें भी समाप्त होने लगीं।

गांव के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सिंह परमार के अनुसार, जिला प्रशासन और डीसी कार्यालय ने स्पष्ट रूप से सहायता करने से हाथ खड़े कर दिए थे। प्रशासन की इस संवेदनहीनता के कारण गांव में मानवीय त्रासदी ने जन्म लिया। पानी के दबाव से दीवारें गिरने लगीं और एक अत्यंत निर्धन परिवार की चार वर्षीय मासूम बच्ची मलबे में दबकर मृत्यु का शिकार हो गई। ग्रामीणों ने इस स्थिति को सरकारी तंत्र की पूर्ण विफलता करार देते हुए प्रशासन को “माटी का पुतला” संबोधित किया, जो देख तो सकता था परंतु सुनने और सहायता करने की शक्ति खो चुका था।

संत रामपाल जी महाराज का ऐतिहासिक मानवीय राहत कार्य 

जब सरकारी दरवाजे बंद हो गए और कलिंगा गांव के ग्रामीणों को कोई मार्ग दिखाई नहीं दे रहा था, तब गांव की पंचायत और पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सिंह परमार ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता हेतु अर्जी लगाई। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।

जहां सरकारी मशीनरी हफ्तों में भी नहीं पहुंच पाई, वहां संत रामपाल जी महाराज के आदेश के कुछ ही दिनों के भीतर राहत सामग्री का एक विशाल काफिला कलिंगा की सीमाओं में दाखिल हुआ। यह सहायता केवल कागजी नहीं बल्कि धरातल पर समाधान सुनिश्चित करने वाली थी। संत रामपाल जी महाराज ने गांव की जल निकासी के लिए तीन विशाल 15 एचपी की अत्याधुनिक मोटरें और लगभग छह हजार फुट लंबा आठ इंची पाइप भिजवाया।

राहत सामग्री की तकनीकी सूक्ष्मता और समर्पण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री की विशेषता उसकी पूर्णता थी। सेवादारों ने पंचायत को सामान सौंपते हुए स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज का निर्देश है कि ग्रामीणों को बाजार से एक नट भी खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए। भेजी गई सामग्री में स्टार्टर, जॉइंट, हांडी, सुंडिया और पाइपों को जोड़ने के लिए फेविकोल तक शामिल था।

यह सेवा अभियान का एक किलोमीटर लंबा काफिला जब गांव के बीच से गुजरा, तो ग्रामीणों की आंखों में उम्मीद की नई किरण दिखाई दी। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि राहत सामग्री केवल अस्थायी न हो, बल्कि इसे स्थायी रूप से गांव की संपत्ति के रूप में दिया जाए ताकि भविष्य में भी कभी जलभराव होने पर ग्रामीण स्वयं उसका समाधान कर सकें।

अन्नपूर्णा मुहिम: एक राष्ट्रव्यापी सेवा अभियान

कलिंगा में दी गई सहायता संत रामपाल जी महाराज की व्यापक अन्नपूर्णा मुहिम का एक हिस्सा है। इस मुहिम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी व्यक्ति आपदा के कारण भूखा न रहे, किसी का घर न उजड़े और किसी बच्चे की शिक्षा बाधित न हो।

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अब तक हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के 300 से अधिक गांवों में संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से इसी प्रकार की सहायता पहुंचाई है। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि धर्म का वास्तविक अर्थ केवल कथावाचन नहीं बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा करना है। जहां अन्य धार्मिक गुरु और कथावाचक लाखों रुपये की दक्षिणा लेकर विलासी जीवन जीते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से दान के पैसे को सीधे जनसेवा में लगाकर एक नया आदर्श स्थापित किया है।

जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ सेवा का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज की कार्यशैली में केवल दयाभाव ही नहीं बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी भी निहित है। राहत सामग्री सौंपते समय सेवादारों ने संत रामपाल जी महाराज का एक विशेष संदेश और संकल्प पत्र भी पढ़कर सुनाया। इस पत्र में स्पष्ट किया गया कि गांव को पर्याप्त संसाधन दिए जा चुके हैं और अब यह पंचायत की जिम्मेदारी है कि वे आपसी समन्वय से जल निकासी का कार्य संपन्न करें।

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से यह निर्देश दिया कि ड्रोन के जरिए गांव की वर्तमान स्थिति की निगरानी की गई है और भविष्य में जल निकासी के बाद तथा फसल लहलहाने के समय भी ड्रोन से वीडियो बनाई जाएगी। यह पारदर्शिता इसलिए सुनिश्चित की गई है ताकि दानदाताओं को यह विश्वास हो सके कि उनके पैसे का सदुपयोग लाखों लोगों को जीवनदान देने में हो रहा है।

ग्रामीणों को चेतावनी भी दी गई कि यदि इस सहायता के बाद भी लापरवाही के कारण पानी नहीं निकाला गया और फसल की बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी किसी भी प्राकृतिक आपदा में कोई राहत नहीं दी जाएगी।

ग्रामीणों की कृतज्ञता और आस्था का नया स्वरूप

कलिंगा गांव के निवासी संत रामपाल जी महाराज की इस निस्वार्थ सेवा को देखकर भावुक हो उठे। पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सिंह परमार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे संत रामपाल जी महाराज को भगवान के समान मानते हैं, क्योंकि उन्होंने उस समय साथ दिया जब अपनों ने भी साथ छोड़ दिया था। ग्रामीणों का मानना है कि इतनी बड़ी मदद कोई सामान्य मनुष्य नहीं कर सकता।

सरपंच और अन्य पंचों ने संकल्प लिया कि वे संत रामपाल जी महाराज के आदेशों का पालन करते हुए दिन-रात मेहनत करेंगे और जल्द से जल्द गांव को जलमुक्त बनाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से उस बच्ची के परिवार को भी राशन सहायता प्रदान की है जिसने अपनी जान गंवाई थी। गांव में इस समय उत्सव जैसा माहौल है और लोग संत रामपाल जी महाराज को संकटमोचक के रूप में देख रहे हैं।

मानवता के लिए एक नई आशा

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से कलिंगा गांव में जो कार्य किया है, वह राष्ट्र निर्माण और मानवता की सेवा का एक अद्वितीय उदाहरण है। 30 साल पुरानी समस्या का समाधान मात्र एक अर्जी पर कर देना यह दर्शाता है कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी आपदा बड़ी नहीं होती।

संत रामपाल जी महाराज की यह मुहिम केवल बाढ़ राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने का प्रयास है कि वह इस संकट में अकेला नहीं है। कलिंगा की लहराती फसलें आने वाले समय में संत रामपाल जी महाराज के मानवीय संकल्पों की गवाह बनेंगी।

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