सोनीपत के ककरोई गांव में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जलभराव से प्रभावित खेतों के लिए राहत उपकरण पहुंचे

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हरियाणा के सोनीपत जिले के ककरोई गांव के किसान भारी परेशानी का सामना कर रहे थे, क्योंकि लगातार हुई भारी वर्षा के बाद उनकी कृषि भूमि 4–5 फीट तक ठहरे हुए पानी में डूबी हुई थी। धान की फसल पहले ही पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और ग्रामीणों को आशंका थी कि यदि समय रहते पानी नहीं निकाला गया तो आने वाली गेहूं की बुवाई भी असंभव हो जाएगी। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिला। 

ग्रामीणों ने यह अनुरोध तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज को भेजा था। ककरोई गांव की पंचायत के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित इस लिखित आवेदन में ऐसे उपकरणों की मांग की गई थी, जिनकी मदद से खेतों में जमा पानी को निकालकर पास की नहर में छोड़ा जा सके। इसके बाद गांव की पंचायत ने लिखित रूप से सहायता का अनुरोध किया। कुछ ही दिनों में मोटर और लंबी पाइपलाइन सहित राहत सामग्री गांव पहुंच गई, जिससे किसानों में उम्मीद जगी कि अब उनके खेत अगली फसल चक्र के लिए जल्द तैयार हो सकेंगे।

मुख्य बिंदु: सोनीपत के ककरोई गांव में बाढ़ राहत प्रयास

  • सोनीपत जिले के ककरोई गांव में कृषि भूमि में 4–5 फीट तक पानी भर गया था।
  • धान की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी थी और गेहूं की बुवाई संकट में थी।
  • सरपंच कर्मवीर सिंह, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक हैं, के नेतृत्व में पंचायत ने पानी निकालने के लिए सहायता मांगी।
  • खेतों का पानी नहर में डालने के लिए एक मोटर और लगभग 2010 फीट लंबी पाइपलाइन उपलब्ध कराई गई।
  • उपकरणों के साथ स्टार्टर, केबल, फिटिंग, नट-बोल्ट जैसे आवश्यक सामान भी दिए गए ताकि व्यवस्था तुरंत चालू की जा सके।
  • ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही पानी निकल जाएगा और अगली फसल चक्र शुरू हो सकेगी।

ककरोई गांव में जलभराव से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं

सोनीपत जिले का ककरोई गांव इस वर्ष कठिन कृषि मौसम से गुज़रा। भारी वर्षा के कारण खेतों में व्यापक जलभराव हो गया था। ग्रामीणों के अनुसार कई खेतों में पानी 4–5 फीट तक भर गया था, जिससे खेती करना पूरी तरह असंभव हो चुका था।

धान की फसल पहले ही खराब हो चुकी थी और किसानों को आशंका थी कि यदि पानी बना रहा तो गेहूं की बुवाई भी नहीं हो पाएगी। फसलों के नुकसान के अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी, क्योंकि गांव के तालाबों का पानी उफनकर आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचने लगा था।

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भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सैनिक और गांव के सरपंच कर्मवीर सिंह ने बताया कि गांव ने कई बार अधिकारियों से समाधान की मांग की, लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी।

पानी न निकल पाने की स्थिति ने न केवल किसानों की आजीविका को खतरे में डाला, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को प्रभावित किया, क्योंकि खेतों पर काम करने वाले मज़दूर और अन्य लोग भी कृषि गतिविधियों पर निर्भर रहते हैं।

मुनींद्र धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से पंचायत ने मांगी सहायता

लगातार बढ़ते नुकसान को देखते हुए ककरोई गांव की ग्राम पंचायत ने बरवाला स्थित संत रामपाल जी महाराज से सहायता मांगने का निर्णय लिया।

गांव के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित एक लिखित आवेदन में खेतों से पानी निकालने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। आवेदन में विशेष रूप से दो चीजों की मांग की गई थी:

  • पानी निकालने के लिए एक मोटर
  • खेतों से पानी दूर ले जाने के लिए लगभग 2010 फीट लंबी पाइपलाइन

इसका उद्देश्य था कि खेतों में जमा पानी को सीधे पास की नहर में डाला जा सके, जिससे जलभराव का स्थायी समाधान मिल सके।

कुछ ही दिनों में राहत उपकरण पहुंचे

ग्रामीणों और मौके पर मौजूद राहत दल के अनुसार आवेदन पर तुरंत कार्यवाही की गई और आवश्यक उपकरण कम समय में ही ककरोई गांव पहुंचा दिए गए।

सोनीपत में ककरोई गांव को संत रामपाल जी महाराज से मिली बाढ़ राहत सहायता

राहत सामग्री में शामिल था:

उपकरण — विवरण

  • मोटर — लगभग 7 से 7.5 हॉर्सपावर
  • पाइपलाइन — लगभग 2010 फीट लंबी, 8 इंच व्यास
  • सहायक सामग्री — स्टार्टर, विद्युत केबल, फिटिंग, नट-बोल्ट

राहत सामग्री के साथ आए संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने बताया कि यह पूरा सेट इस तरह उपलब्ध कराया गया है कि पंचायत को कोई भी छोटा-मोटा सामान अलग से खरीदने की आवश्यकता न पड़े क्योंकि नहर ककरोई गांव के पास से गुजरती है, इसलिए इस प्रणाली को इस प्रकार तैयार किया गया कि खेतों का पानी सीधे नहर में डाला जा सके और जल निकासी तेजी से हो सके।

ग्रामीणों ने जताई राहत और उम्मीद

जब राहत सामग्री गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने माहौल को उत्सव जैसा बताया। पंचायत स्थल पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए, जहां उपकरण पंचायत को सौंपे गए।

सरपंच कर्मवीर सिंह ने आए स्वयंसेवकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस व्यवस्था से खेतों में भरा पानी निकालने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि गांव लंबे समय से ऐसे समाधान की प्रतीक्षा कर रहा था, जिससे बाढ़ग्रस्त खेतों से पानी निकालकर समय पर गेहूं की बुवाई शुरू की जा सके।

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गांव के एक अन्य निवासी सतपाल सिंह, जो सेना से सेवानिवृत्त हैं, ने बताया कि खेतों में कई दिनों से पानी भरा हुआ था और यदि जल निकासी नहीं होती तो अगली फसल भी खराब हो जाती। उन्होंने आशा जताई कि नई व्यवस्था से किसान पानी निकालकर खेती फिर शुरू कर पाएंगे।

बुजुर्ग ग्रामीण ने याद किए पुराने बाढ़ के दिन

गांव के 72 वर्षीय एक बुजुर्ग ने वर्ष 1995 की बाढ़ सहित पुराने अनुभव साझा किए। उनके अनुसार पहले भी बाढ़ के कारण नुकसान हुआ है, लेकिन इस प्रकार की सहायता उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी।

उन्होंने बताया कि जब बाढ़ के कारण खेती प्रभावित होती है तो उसका असर पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर पड़ता है। किसान फसल खो देते हैं, मज़दूरों को काम नहीं मिलता और स्थानीय अर्थव्यवस्था धीमी पड़ जाती है।

बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा कि यदि समय रहते पानी निकल जाता है तो किसान अभी भी अपने खेत तैयार कर अगली फसल बो सकते हैं।

पंचायत को सौंपे गए उपकरण

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने मोटर और पाइपलाइन औपचारिक रूप से ककरोई गांव की ग्राम पंचायत को सौंप दी। पंचायत ने पुष्टि की कि उपलब्ध कराई गई सामग्री उनके द्वारा पहले दिए गए आवेदन के अनुरूप है।

सरपंच कर्मवीर सिंह ने उपकरण प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए कहा कि अब गांव जल्द ही खेतों से पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के प्रति सम्मान स्वरूप एक पारंपरिक पगड़ी भी भेंट की। स्थानीय परंपरा के अनुसार पगड़ी के साथ एक प्रतीकात्मक राशि भी अर्पित की गई। स्वयंसेवकों ने इस सम्मान के लिए ग्रामीणों का धन्यवाद किया और ऐसी भेंट से जुड़ी परंपरा की जानकारी दी।

व्यापक सेवा गतिविधियों से जुड़ा राहत अभियान

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित 400 से अधिक गांवों तक सहायता पहुंचाई जा चुकी है। राहत कार्यों का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक समाधान प्रदान करना है, जैसे मोटर और पाइपलाइन, ताकि किसान अपने खेतों से पानी निकालकर खेती फिर से शुरू कर सकें।

यह व्यापक सेवा कार्य तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद किसानों की फसल उत्पादन प्रक्रिया को बनाए रखना है।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि पानी सफलतापूर्वक निकल जाता है तो ककरोई गांव के खेत जल्द ही गेहूं की बुवाई के लिए तैयार हो जाएंगे और कृषि गतिविधियां फिर सामान्य हो सकेंगी।

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का दिव्य संदेश

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पवित्र निर्देश के अनुसार जिन गांवों को सहायता प्रदान की गई है, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उपलब्ध कराए गए राहत उपकरण, जैसे मोटर और पाइपलाइन, का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए, ताकि किसी भी किसान का खेत पानी में डूबा न रहे और अगली फसल समय पर बोई जा सके। उनके आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि अतिरिक्त सामग्री की आवश्यकता हो तो बिना संकोच के अनुरोध किया जा सकता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में पानी खेतों में रुका नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने ग्रामीणों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह सहायता उनके कष्टों का स्थायी समाधान बने और यह सर्वोच्च परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिला हुआ उपहार है। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि दिए गए संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया गया और पानी नहीं निकाला गया, तो भविष्य में सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। 

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