हरियाणा के रोहतक जिले के गाँव जसिया स्थित चौधरी छोटूराम धाम में बच्चों और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एक विशाल मेस (भोजन कक्ष) एवं इनडोर हॉल निर्माण की शुरुआत हुई है। धाम परिसर में अध्ययनरत बच्चों के लिए भोजन और बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण संस्था को एक बड़े हॉल की सख्त आवश्यकता थी। जाट सेवा संघ व धाम की कार्यकारिणी द्वारा इस संबंध में संत रामपाल जी महाराज से सहयोग की प्रार्थना की गई थी। उनकी सहमति के पश्चात 2 सितंबर 2026 को मंगलाचरण के साथ 100 × 160 फीट क्षेत्रफल वाले इस मेस हॉल की विधिवत नींव रखी गई।
गाँव और धाम की मौजूदा स्थिति ने क्यों बढ़ाई मदद की जरूरत
चौधरी छोटूराम धाम, जसिया लगभग 26 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है। यहाँ बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, जिसके कारण भोजन के समय उनके एक साथ बैठने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। धाम के सदस्यों के अनुसार, पुराना स्थान काफी छोटा था और भोजन के समय व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता था। संस्था के पास कई तकनीकी, स्किल डेवलपमेंट, साइबर क्राइम, नाबार्ड और एआई जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजनाएँ थीं, लेकिन पर्याप्त इनडोर स्थान और मेस का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ था। इस बुनियादी समस्या के स्थायी समाधान के लिए संस्था ने बाहर से सहयोग प्राप्त करने का निर्णय लिया।
संत रामपाल जी महाराज के आदेश से शुरू हुआ निर्माण कार्य
संत रामपाल जी महाराज की ओर से प्राप्त सहयोग के तहत जसिया स्थित धाम में 100 × 160 फीट (100 दरब 160 फुट) आकार के विशाल इनडोर मेस हॉल का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया।
- हॉल का आकार: 100 × 160 फीट।
- बैठने की क्षमता: इस मेस हॉल में एक समय में लगभग 300 से लेकर 500 बच्चे एक साथ बैठकर भोजन कर सकेंगे।
- प्रयोजन: यह शेड युक्त हॉल मुख्य रूप से बच्चों के भोजन, बैठने और भविष्य में विभिन्न स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के संचालन के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
2 सितंबर 2026 को अनुयायियों और धाम के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा मंगलाचरण पाठ के उपरांत इस भव्य संरचना की नींव रखी गई।
ग्रामीणों और संस्था के पदाधिकारियों ने बताई स्थिति
धाम से जुड़े पदाधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस सहयोग पर अपने विचार साझा किए:
- हरज्ञान सिंह मलिक (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जाट सेवा संघ): उन्होंने बताया कि संस्था को मेस शेड की अत्यंत आवश्यकता थी और जैसे ही संत रामपाल जी महाराज से मांग की गई, उन्होंने तुरंत इसे स्वीकार कर लिया। 100 × 160 फीट का यह निर्माण संस्था के लिए एक ऐतिहासिक कार्य है।
- कैप्टन भूपेंद्र जागलान (प्रदेश अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि धाम की नींव रखे जाने के समय से ही संत रामपाल जी महाराज का निरंतर सहयोग मिलता रहा है। यह सहायता किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज और विद्यार्थियों के कल्याण के लिए है।
- विंग कमांडर महेंद्र सिंह मलिक (जनरल सेक्रेटरी): उन्होंने स्पष्ट किया कि कमेटी के सदस्य उनके व्यक्तिगत शिष्य नहीं हैं, फिर भी मात्र एक आग्रह पर एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य आरंभ करवा दिया गया।
- रामकृष्ण कुंडू (जिला अध्यक्ष, रोहतक): उन्होंने कहा कि एक हफ्ते पहले प्रार्थना की गई थी और इतनी जल्दी सुनवाई होकर नींव रखी जाना किसी बड़े सहयोग से कम नहीं है।
- भीम सिंह (ग्रामीण, मोखरा): उन्होंने बताया कि पहले जगह छोटी होने के कारण बच्चों को भोजन में दिक्कत होती थी, अब 100 × 160 फीट का हॉल बनने से बच्चे आराम से बैठकर भोजन कर सकेंगे।
त्वरित प्रतिक्रिया और जवाबदेही
संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार, इस पूरे निर्माण कार्य की प्रक्रिया अत्यंत त्वरित रही। कमेटी ने मात्र एक सप्ताह पहले संत रामपाल जी महाराज के समक्ष शेड निर्माण का प्रस्ताव रखा था। संस्था द्वारा बताए गए समय के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज की टीम ने तुरंत स्थल निरीक्षण किया और सात दिनों के भीतर निर्माण की नींव रख दी गई। किसी प्रकार के औपचारिक विलंब के बिना कार्य का आरंभ होना सामाजिक सेवा में त्वरित मानवीय प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
एक समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका
गाँव जसिया में शिक्षा और युवाओं की बुनियादी सुविधाओं के लिए किया गया यह सहयोग समाज कल्याण के व्यापक दृष्टिकोण को उजागर करता है। वक्ताओं ने उल्लेख किया कि विद्यार्थियों के लिए मेस हॉल के अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी, अन्नपूर्णा मुहिम के तहत आवास निर्माण, किसानों को खाद-बीज सहायता और गौशालाओं के लिए चारे की व्यवस्था जैसी मानवीय पहल भी उनके मार्गदर्शन में की जाती रही हैं। उनके अनुयायी और स्थानीय लोग इन कार्यों को निस्वार्थ जनकल्याण और मानवीय सेवा के रूप में देखते हैं। इस प्रकार की पहलें ग्रामीण विकास, शिक्षा के संवर्धन और जरूरतमंदों की सहायता के प्रति एक गंभीर सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाती हैं।
आज के युग में जब इंसान इंसान को पूछ कर खुश नहीं, तब ऐसी मदद भेजना एक ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक है। लोगो से अनुरोध है कि इसको सिर्फ सामाजिक सेवा मान कर अनदेखा न करे, संत रामपाल जी महाराज, एक पूर्ण संत है, इनके बारे में जानकारी ले और इनसे समय रहते जुड़े।



