बाढ़ से प्रभावित मथुरा के श्रीनगर गांव को जल निकासी के लिए मिली विशेष व्यवस्था, महीनों की फसल बर्बादी के बाद किसानों को राहत

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मथुरा, उत्तर प्रदेश: मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के बरसाना क्षेत्र के श्रीनगर गांव में पिछले लगभग तीन महीनों से किसान अपनी ही ज़मीन पर बेबस खड़े थे। खेतों में भरे बाढ़ के पानी ने फसलों को नष्ट कर दिया था। ठहरे हुए पानी में कपास की फसल सड़ चुकी थी और गेहूं की बुवाई की उम्मीद भी लगभग खत्म हो गई थी। सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलभराव से प्रभावित होने और रोज़मर्रा का जीवन बाधित होने के कारण ग्रामीणों ने खेतों से पानी निकालने के लिए सहायता की मांग की। अब ग्राम पंचायत को पाइप, उच्च क्षमता की मोटर और बिजली की तार सहित राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे खेतों से पानी निकाला जा सकेगा और किसान अगली फसल के लिए ज़मीन तैयार कर सकेंगे।

गांव के प्रतिनिधियों का एक दल इससे पहले स्थानीय प्रयासों से समस्या का समाधान न होने के बाद तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता के लिए निवेदन लेकर गया था।

Table of Contents

प्रमुख बिंदु: मथुरा के श्रीनगर गांव में बाढ़ राहत सहायता

  • श्रीनगर गांव के खेतों में लगभग तीन महीनों तक पानी भरा रहा
  • पानी में खड़ी रहने के कारण कपास की फसल सड़ गई, गेहूं की बुवाई पर संकट
  • लगभग 200–250 बीघा कृषि भूमि जलभराव से प्रभावित
  • ग्रामीणों ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की कमेटी से सहायता की प्रार्थना की
  • राहत सामग्री में शामिल:
    • 3700 फुट 8 इंच व्यास के पाइप
    • 15 एचपी पानी की मोटर
    • 1000 फुट बिजली की तार
    • ऑटोमेटिक स्टार्टर और अन्य असेंबली उपकरण
  • यह उपकरण ग्राम पंचायत श्रीनगर को स्थायी उपयोग के लिए सौंपे गए
  • सहायता तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के तहत प्रदान की गई

महीनों तक भरे पानी से किसानों पर संकट

यह कहानी मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील के बरसाना क्षेत्र के श्रीनगर गांव की है, जो पारंपरिक रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र माना जाता है। लगभग तीन महीनों तक यहां का दृश्य खेतों की बजाय झील जैसा दिखाई देता रहा। दूर से देखने पर जो पानी भरा क्षेत्र किसी जलाशय जैसा लगता था, वह दरअसल किसानों की डूबी हुई खेती थी।

किसानों के अनुसार खेतों में लंबे समय तक पानी भरे रहने के कारण कपास की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई थी। इससे गेहूं की अगली बुवाई भी खतरे में पड़ गई, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर चिंता पैदा हो गई।

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जलभराव के कारण सैकड़ों बीघा कृषि भूमि प्रभावित हुई, और कई जगहों पर खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थिति का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव का सामान्य जीवन भी प्रभावित हुआ।

जलभराव से उत्पन्न समस्याएं

  • गांव की कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे आवाजाही कठिन हो गई
  • डिस्पेंसरी सेवाएं बंद हो गईं
  • स्कूलों में भी पानी भर गया, जिससे बच्चे पढ़ाई के लिए नहीं जा सके
  • फसल नष्ट होने से पशुओं के लिए चारे की कमी हो गई

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या गांव की “36 बिरादरी” के लिए चुनौती बन गई थी, यानी समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित थे।

यह भी देखें:  https://youtu.be/X3CpjUkXo9Y?si=FxScw2OICzIF6_JT

प्रशासनिक प्रयास भी पर्याप्त नहीं रहे

ग्रामीणों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण जी पहले गांव का दौरा कर चुके थे। स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत ने भी सहायता करने का प्रयास किया था।

इन प्रयासों में शामिल थे:

  • सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था
  • बिजली के केबल
  • विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था

हालांकि ग्रामीणों का कहना था कि ये उपाय इतने बड़े स्तर के जलभराव को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

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ग्रामीणों ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से लगाई गुहार

जब सरकारी प्रयासों से समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई, तब गांव के प्रतिनिधि तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के मुनीन्द्र धर्मार्थ ट्रस्ट, बरवाला स्थित आफिस पहुंचे, जहां से मदद के लिए प्रार्थना लगाई गई।

ग्रामीणों के अनुसार उनकी प्रार्थना के बाद कम समय में प्रतिक्रिया मिली। गांव वालों का कहना था कि उन्हें लगा था कि किसी भी प्रक्रिया में दो से तीन महीने लग सकते हैं, लेकिन राहत सामग्री लगभग एक सप्ताह के भीतर गांव पहुंच गई।

श्रीनगर गांव में पहुंचा राहत काफिला

राहत सामग्री लेकर वाहन ग्राम पंचायत श्रीनगर पहुंचे, जहां ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। वाहनों पर अन्नपूर्णा मुहिम के बैनर लगे हुए थे, जिसके तहत संत रामपाल जी महाराज ने सहायता उपलब्ध कराई।

सामग्री सौंपने से पहले संत रामपाल जी महाराज का स्वरूप (फोटो) पंचायत स्थल पर लाया गया, जहां ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे और फूल-मालाओं से स्वागत किया। ग्रामीणों ने काफिले के प्रवेश के दौरान जयकारे लगाए। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग एक किलोमीटर तक ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने काफिले पर पुष्प वर्षा की

जल निकासी के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री

ग्राम पंचायत को दी गई राहत सामग्री का उद्देश्य खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराना था।

राहत सामग्री का विवरण

उपकरणविवरण
पाइप3700 फुट, 8 इंच व्यास
मोटर15 एचपी पानी की मोटर
बिजली की तार1000 फुट
स्टार्टरऑटोमेटिक स्टार्टर सिस्टम
सक्शन पाइप20 फुट
पाइप एक्सेसरीबैंड असेंबली, क्लैंप, चेन
वाल्व व फिटिंगफुट वाल्व, एयर वाल्व, स्टील नट
कनेक्टरप्लास्टिक निप्पल
चिपकाने का पदार्थएसआर पाइप सॉल्यूशन

सामग्री सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि यह उपकरण गांव के स्थायी उपयोग के लिए दिए गए हैं

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने भी बताया कि उन्हें वही सभी सामग्री प्राप्त हुई है, जिसका उल्लेख उन्होंने अपने लिखित पत्र में किया था।

पंचायत ने ली पानी निकालने की ज़िम्मेदारी 

कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत को एक औपचारिक पत्र पढ़कर सुनाया गया। इसमें कहा गया कि यह सामग्री इस उद्देश्य से दी जा रही है कि ग्रामीण इसका उपयोग करके खेतों से पानी निकालें और खेती योग्य भूमि तैयार करें।

पंचायत प्रतिनिधियों ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि:

  • उपकरणों को जल्द स्थापित किया जाएगा
  • खेतों से पानी निकाला जाएगा
  • अगली फसल की बुवाई के लिए ज़मीन तैयार की जाएगी

भविष्य में भी काम आएगी यह स्थायी व्यवस्था

गांव के प्रतिनिधियों का कहना था कि यह व्यवस्था भविष्य में भी जलभराव की समस्या से निपटने में मदद करेगी। ग्रामीणों ने बताया कि गांव की कुछ कृषि भूमि आसपास के क्षेत्र से थोड़ी नीची है, इसलिए बारिश का पानी वहां इकट्ठा हो जाता है।

पाइपलाइन और मोटर की स्थायी व्यवस्था होने से भारी बारिश होने पर भी पानी तुरंत निकाला जा सकेगा। एक प्रतिनिधि के अनुसार यह व्यवस्था जलभराव की समस्या का दीर्घकालिक समाधान बन सकती है और भविष्य की फसलों को भी सुरक्षित रखेगी।

ग्राम पंचायत द्वारा सम्मान समारोह

कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत और गांव के प्रमुख लोगों ने संत रामपाल जी महाराज को सम्मान स्वरूप पगड़ी भेंट की। ग्रामीणों का कहना था कि यह सम्मान किसानों की मदद के लिए आभार प्रकट करने का प्रतीक है। कई ग्रामीणों ने राहत सामग्री पहुंचाने वाले सेवादारों के अनुशासन और व्यवस्था की भी सराहना की।

सामाजिक कार्यकर्ता ने इसे बताया बड़ा सेवा कार्य

कार्यक्रम में मौजूद एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि यह सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार 200–250 बीघा जमीन से पानी निकल जाने पर किसान फिर से खेती शुरू कर सकेंगे

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उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और मजदूरों की मदद से पूरे ग्रामीण समाज को लाभ मिलता है, क्योंकि कृषि आय कई परिवारों की आजीविका का आधार होती है।

ग्राम पंचायत को औपचारिक रूप से सौंपी गई सामग्री

राहत सामग्री आधिकारिक रूप से ग्राम पंचायत श्रीनगर को सौंप दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि पत्र में मांगी गई सभी वस्तुएं उन्हें प्राप्त हो गई हैं। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था से जलभराव की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सकेगा। कई किसानों ने कहा कि पानी निकलने के बाद खेतों को दोबारा खेती के लिए तैयार किया जा सकेगा।

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का दिव्य आदेश

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पवित्र आदेश के अनुसार जिन गांवों को सहायता दी गई है, वहां यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मोटर और पाइपलाइन जैसी राहत सामग्री का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए, ताकि किसी भी किसान के खेत में पानी न रुके और अगली फसल समय पर बोई जा सके। उनका स्पष्ट निर्देश है कि यदि अतिरिक्त सामग्री की आवश्यकता हो तो बिना झिझक मांग की जाए, लेकिन किसी भी परिस्थिति में खेतों में पानी जमा नहीं रहना चाहिए। 

संत ने ग्रामीणों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह सहायता उनके कष्टों का स्थायी समाधान बने और परमेश्वर कबीर जी की कृपा से दिया गया यह उपहार गांव के लिए लाभकारी सिद्ध हो। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया गया और पानी की निकासी नहीं हुई तो भविष्य में सहायता प्रदान नहीं की जाएगी। इस दिव्य आदेश के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने यह संदेश दिया है कि सच्ची भक्ति समय पर सेवा, अनुशासन और मानवता के प्रति जिम्मेदारी निभाने में है।

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