हरियाणा के सोनीपत जिले की तहसील सोनीपत के अंतर्गत आने वाले बागड़ू गांव में पिछले 4-5 वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई थी। इस वर्ष मानसून के दौरान गांव की लगभग 500 से 600 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी। खेतों में पानी का स्तर 2.5 फुट से लेकर 5 फुट तक पहुंच गया था। इस स्थिति के कारण किसानों के पास रबी की फसल, विशेषकर गेहूं की बिजाई के लिए कोई साधन शेष नहीं बचा था। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव के कारण न केवल उनकी वर्तमान फसल बर्बाद हुई, बल्कि आने वाले समय में भुखमरी और पशुओं के लिए चारे के संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
प्रशासनिक विफलता और संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार
बागड़ू गांव के सरपंच प्रवीण कुमार और अन्य ग्रामीणों ने जल निकासी के लिए सरकारी अधिकारियों और प्रशासन से कई बार संपर्क किया। ग्रामीणों के अनुसार, वे लगभग 20 बार सरकार के पास मदद के लिए गए, लेकिन उन्हें कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई। जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब सरपंच प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गांव की पंचायत और व्यक्तियों ने संत रामपाल जी महाराज से मदद मांगने का निर्णय लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में अतर सिंह, समाजसेवी वेदपाल, प्रधान और अन्य ग्रामीण शामिल थे, जिन्होंने बरवाला जाकर एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा।
सहायता सामग्री का विवरण और वितरण प्रक्रिया
प्रार्थना पत्र दिए जाने के कुछ ही दिनों के भीतर सहायता सामग्री बागड़ू गांव पहुंची। शुरुआत में गांव के कुछ व्यक्तियों ने इस सहायता की संभावना का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि क्या पाइप रेलगाड़ी में भरकर आएंगे, परंतु सहायता की मात्रा ने सभी को चकित कर दिया। संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध कराई:
- किर्लोस्कर (Kirloskar) और क्रॉम्पटन (Crompton) कंपनी की 10 हॉर्स पावर (HP) की 5 बड़ी मोटरें।
- 16,500 फुट लंबे और 8 इंच चौड़े उच्च गुणवत्ता वाले पाइप।
- मोटरों को संचालित करने के लिए आवश्यक स्टार्टर, केबल और अन्य तकनीकी उपकरण।
जल निकासी अभियान और स्थायी बुनियादी ढांचा निर्माण
सहायता सामग्री प्राप्त होने के बाद ग्रामीणों ने दिन-रात मोटरों का संचालन कर खेतों से पानी निकाला। जल निकासी की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 16,500 फुट लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। भविष्य में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्रामीणों ने निम्नलिखित कदम उठाए:
- पाइपलाइन के एक बड़े हिस्से को सड़क के किनारे जमीन के नीचे स्थायी रूप से दबा दिया गया है।
- इस पाइपलाइन को सीधे मुख्य ड्रेन (Drain) से जोड़ा गया है ताकि भविष्य में भारी बारिश होने पर पानी को तुरंत निकाला जा सके।
- वर्तमान में केवल 50 एकड़ ऐसी भूमि बची है जहां ट्रैक्टर नहीं चल पा रहे हैं, बाकी भूमि पूरी तरह सूख चुकी है।
कृषि पुनरुद्धार और फसलों की वर्तमान स्थिति
जल निकासी के सफल अभियान के बाद बागड़ू गांव की कृषि भूमि की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- लगभग 450 एकड़ भूमि पर गेहूं की बिजाई सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है।
- जिन खेतों में पहले 4 फुट तक पानी खड़ा था, वहां अब गेहूं की फसल लहलहा रही है।
- शेष बची हुई भूमि पर किसान ज्वार, मक्का और सब्जियां (जैसे घिया) लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
- किसान अब सिंचाई का कार्य भी प्रारंभ कर चुके हैं, जिससे अनाज और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है।
बागड़ू राहत अभियान का सारांश
| विवरण | तथ्य और आंकड़े |
| प्रभावित क्षेत्र | 500-600 एकड़ (कुल), 250+ एकड़ (गंभीर) |
| जल स्तर | 2.5 फुट से 5 फुट तक |
| प्रदान की गई मोटरें | 5 मोटर (10 HP प्रत्येक, किर्लोस्कर व क्रॉम्पटन) |
| पाइप की लंबाई | 16,500 फुट (8 इंच चौड़ाई) |
| मुख्य लाभार्थी | सरपंच प्रवीण कुमार, वेदपाल, सुरेंद्र, धनराज, पवन |
| वर्तमान परिणाम | 450 एकड़ में गेहूं की बिजाई पूर्ण |
| समाधान का प्रकार | पाइपलाइन को जमीन में दबाकर स्थायी ड्रेनेज सिस्टम |
बागड़ू गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर प्रभाव
संत रामपाल जी महाराज द्वारा की गई इस सहायता ने गांव को एक बड़े आर्थिक संकट से बचा लिया है। किसान धनराज और पवन ने बताया कि यदि यह मदद न मिलती तो उन्हें अपने परिवार और पशुओं के लिए दाने-दाने का मोहताज होना पड़ता। किसानों पर कर्ज का भारी बोझ था और फसल न होने की स्थिति में उनके पास कोई विकल्प नहीं था। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से स्वीकार किया कि यह सेवा निस्वार्थ भाव से की गई है और इसके लिए उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।



