हरियाणा की बरवाला तहसील के राजली गांव के निवासियों ने बताया कि कई सप्ताह तक भारी बारिश और जलभराव के बाद पाइप और मोटर लगाए जाने से बाढ़ का पानी उतर गया और खेती दोबारा शुरू हो सकी। ग्रामीणों ने चार से छह फुट तक पानी भरने, 80 प्रतिशत तक फसल खराब होने और सैकड़ों खेत-आधारित घरों के खाली होने की बात कही।
ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, यह सहायता गांव की पंचायत द्वारा तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से संपर्क करने के बाद मिली।
राजली बाढ़ से उबरने के प्रमुख बिंदु
- राजली गांव चार से छह फुट गहरे पानी से घिरा रहा
- ग्रामीणों के 80% फसल में नुकसान और शुरू में 100–150 ढाणियाँ प्रभावित थी
- पंचायत ने चार मोटर और 20,000 फुट पाइपलाइन की मांग की
- ग्रामीणों के अनुसार 24 घंटे के भीतर पाइप, मोटर, केबल और फिटिंग पहुंचाई गई
- लगभग दो महीने बाद अधिकांश खेत सूख गए और गेहूं की बुआई शुरू हुई
- कई सप्ताह विस्थापन के बाद परिवारों लौटने लगे
भारी बारिश से राजली गांव जलमग्न
हरियाणा के हिसार जिले में स्थित राजली गांव को ग्रामीणों के अनुसार तेज़ बारिश के बाद चारों ओर से पानी घिर गया था। उनके अनुसार, चार से छह फुट तक पानी जमा हो गया, जिससे सड़कें, खेत और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत खड़ी फसल नष्ट हो गई। 100 से 150 खेत-आधारित घर, जिन्हें स्थानीय भाषा में ढाणी कहा जाता है, असुरक्षित घोषित हुए और परिवारों को अस्थायी रूप से मुख्य गांव या रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ा। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के चरम पर 200 से 250 ढाणियां खाली कर दी गई थीं।
ग्रामीणों के अनुसार, पानी कई दिशाओं से आया, पास के गांवों और खेतों की ओर से, जिससे प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था दबाव में आ गई। कई घरों में फर्श फट गए, दीवारों पर सीलन और पानी के निशान दिखने लगे।
मदद के लिए पंचायत की पहल
जब पानी लंबे समय तक बना रहा और किसान नई बुआई शुरू नहीं कर सके, तब राजली के सरपंच और पूरी ग्राम पंचायत ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से मदद मांगी।
गांव ने मांग की थी:
- चार मोटर
- लगभग 20,000 फुट पाइपलाइन
- स्थापना से जुड़ा सहायक सामान
ग्रामीणों ने बताया कि मांग के 24 घंटे के भीतर एक बड़ा काफिला राजली पहुंचा, जिसमें आठ इंच के पाइप, चार 20 हॉर्सपावर की मोटरें, स्टार्टर, केबल, चिपकाने की सामग्री और नट-बोल्ट शामिल थे, ताकि स्थानीय लोगों को बाज़ार से कुछ भी न खरीदना पड़े।

ग्रामीणों का कहना था कि यह सारा सामान तुरंत जलनिकासी शुरू करने और पानी को निचले या सूखे इलाकों की ओर मोड़ने के लिए दिया गया।
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जलनिकासी और धीरे-धीरे सुधार
किसानों और ग्रामीणों ने बताया कि मोटर और पाइप लगातार चलते रहे और स्थानीय लोगों ने अलग-अलग खेतों में लाइनें जोड़कर पानी को बाहर निकालने का काम किया।
- पहले लगभग 2,000 एकड़ या किल्ले जमीन पानी में डूबी थी
- करीब एक महीने में हालात काबू में आए
- लगभग दो महीने बाद गांव का अधिकांश इलाका सूखा नजर आया
कई किसानों ने बताया कि 90 से 95 प्रतिशत ज़मीन पर दोबारा बुआई हो चुकी है, जबकि चार से पांच प्रतिशत हिस्से में काम बाकी है और आने वाले दिनों में वहां भी खेती शुरू होने की उम्मीद है। कुछ खेतों में गेहूं की फसल 15 से 20 दिन की हो गई।
ग्रामीणों ने सूखी सड़कों, कटी हुई धान की फसल और नए तैयार खेतों को हालात सुधरने के संकेत बताया।
ग्रामीणों ने नुकसान का विवरण दिया
राजली में बार-बार दौरे के दौरान संवाददाताओं ने किसानों, बुजुर्गों और महिलाओं से बात की, जिन्होंने बाढ़ को नज़दीक से झेला था।
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कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों के अंदर डेढ़ से दो फुट तक पानी भर गया था, जबकि बाहर लगभग छह फुट तक पानी पहुंच गया था। उन्होंने टूटे फर्श, दीवारों में दरारें, सीलन और उखड़ते रंग का जिक्र किया।
एक निवासी ने बताया कि उन्हें बच्चों, मवेशियों और घरेलू सामान के साथ करीब दो महीने तक मुख्य गांव में रहना पड़ा। अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पशुओं को सुरक्षित जगहों पर रखना पड़ा और दिहाड़ी का काम बंद हो गया, जिससे आमदनी रुक गई।
ग्रामीणों के अनुसार:
- बाढ़ के चरम पर 100 से 200 घर खाली कराए गए
- कई परिवार रिश्तेदारों या अस्थायी ठिकानों पर रहे
- कुछ इलाकों में करीब छह साल से ठीक से बुआई नहीं हो पा रही थी
- जलनिकासी के बिना नई गेहूं की फसल संभव नहीं होती
परिवारों की वापसी और खेती की शुरुआत
पानी उतरने के बाद परिवार धीरे-धीरे अपने घरों और ढाणियों में लौटे। हफ्तों से कीचड़ में पड़े खेतों को समतल कर बुआई के लिए तैयार किया गया।
बाद के दौरों में किसानों ने बताया:
- गांव में लगभग सारा पानी उतर चुका है
- अधिकांश खेतों में गेहूं बो दी गई है
- केवल कुछ छोटे हिस्सों में नमी बची है
ग्रामीणों ने कहा कि सर्दियों में प्राकृतिक रूप से पानी सूखने की रफ्तार धीमी होने के कारण पाइप और मोटरों से निकासी बेहद अहम साबित हुई।
ग्रामीणों के बयान
मौके पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए आभार जताया और कहा कि इससे उन्हें बड़ी राहत मिली।
उनका कहना था:
- कुछ जगहों पर पाइप और मोटर स्थायी रूप से लगाए गए
- भारी जलभराव खत्म होने के बाद भी जलनिकासी जारी रही
- आसपास के गांवों को भी इससे फायदा हुआ
कुछ ग्रामीणों ने कहा कि पहले प्रशासन से की गई कोशिशों से तत्काल समाधान नहीं मिला, जबकि नई व्यवस्था से बुआई के समय से पहले खेती दोबारा शुरू हो सकी।
किसानों ने बताया कि मज़दूर फिर से खेतों में लौट आए हैं और खेती शुरू होने से जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।
मौजूदा हालात क्या दिखाते हैं
अंतिम दौरे के समय संवाददाताओं ने सूखी जमीन, कटी धान की फसल, नए बोए गए गेहूं के खेत और परिवारों को खेत-आधारित घरों में लौटते देखा।
ग्रामीणों ने बताया कि कभी पानी से घिरा दिखने वाला राजली का कृषि क्षेत्र अब काफी हद तक बहाल हो चुका है और ज्यादातर हिस्सों में खेती शुरू हो गई है।
खेती फिर पटरी पर लौटती दिख रही है
राजली गांव के निवासियों ने बताया कि बाढ़ से हफ्तों तक बाधित रहने के बाद अब वे आने वाली फसल पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अब परिवार लौट रहे है, पशु फिर से बाड़ों में है और किसानों के बचे हुए खेतों की तैयारी करने में जुटे है। हालांकि कुछ घरों में संरचनात्मक नुकसान और विस्थापन की कठिनाइयां है, लेकिन पूरे इलाके से पानी उतर चुका है। अधिकतर खेतों में गेहूं उगने लगी है और लोगों ने इसे बाढ़ के चरम दौर से बड़ा बदलाव बताया।
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