हरियाणा के हिसार जिले के मसूदपुर गांव में महीनों तक खेतों, घरों और खेल परिसरों को डुबोने वाली बाढ़ के बाद अब बड़े पैमाने पर कृषि बहाली देखी जा रही है। ग्रामीणों, किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार, बड़े पंपों और हजारों फुट लंबी पाइप लाइनों के जरिए लगभग 98 प्रतिशत ठहरा हुआ पानी बाहर निकाल दिया गया है।
जिन खेतों में पहले चार से छह फुट तक पानी भरा था, वहां अब गेहूं की फसल उगने लगी है और वही उपकरण दोबारा सिंचाई में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। गांव के सीमावर्ती हिस्सों में केवल कुछ छोटे क्षेत्र ही अब भी जलमग्न बताए जा रहे हैं, जहां काम जारी है।
मसूदपुर बाढ़ राहत से जुड़े प्रमुख तथ्य
- हिसार जिले के मसूदपुर गांव में 700–800 एकड़ खेत जलमग्न थे।
- बाढ़ का पानी लगभग 700–800 घरों में घुस गया था और स्टेडियम व तालाब भर गए थे।
- पांच 15 एचपी मोटर और लगभग 22,000 फुट आठ-इंच की पाइपलाइन लगाई गई।
- ग्रामीणों व अधिकारियों के अनुसार करीब 98 प्रतिशत पानी अब निकल चुका है।
- गेहूं और सरसों की फसल उग रही है, कई खेतों में सिंचाई फिर शुरू हो गई है।
- महीनों बाद राजीव गांधी खेल स्टेडियम में प्रशिक्षण दोबारा शुरू हुआ।
- किसानों का अनुमान है कि 500–600 “किल्ले” क्षेत्र में फिर से बुवाई हो चुकी है।
- सीमावर्ती निचले इलाकों में केवल 30–40 किल्ले जमीन में पानी बचा बताया जा रहा है।
मसूदपुर में व्यापक जलभराव

स्थानीय लोगों के अनुसार, हरियाणा के हिसार जिले में स्थित मसूदपुर गांव में बाढ़ ने खेती और रिहायशी इलाकों के बड़े हिस्से को डुबो दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 700–800 एकड़ भूमि पानी में डूबी रही, जबकि लगभग 700–800 घरों में भी पानी भर गया था। गांव का स्टेडियम और तालाब पूरी तरह लबालब हो गए थे।
किसानों ने बताया कि कई जगह पानी छाती तक, यानी पांच से छह फुट तक पहुंच गया था, जिससे उन्हें पाइपों से अस्थायी नावें बनाकर धान की फसल को दूर-दराज़ तक ले जाना पड़ा। कई ग्रामीणों ने कहा कि धान की फसल नष्ट हो गई थी और अगली बुवाई की उम्मीद भी लगभग खत्म हो चुकी थी।
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गांव के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार से केवल आश्वासन मिलने के बाद सरपंच और पंचायत, रोशन लाल के नेतृत्व में, तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता मांगने पहुंचे और बरवाला स्थित उनके मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट के सेवादारों को एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। इसमें खेतों और रिहायशी इलाकों से पानी निकालने के लिए बड़ी मोटरें और पाइपलाइन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
उपकरण पहुंचे, जलनिकासी अभियान शुरू
ग्रामीणों के अनुसार राहत सामग्री कुछ ही दिनों में पहुंच गई। मौके पर मौजूद लोगों के बयानों के मुताबिक, कई वाहनों का काफिला मसूदपुर पहुंचा, जिसमें शामिल थे:

- 15 हॉर्सपावर क्षमता की पांच बड़ी मोटरें
- लगभग 22,000 फुट आठ-इंच की उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन
- अतिरिक्त बिजली के केबल, स्टार्टर और सहायक उपकरण
ग्रामीणों ने बताया कि पाइपलाइन नेटवर्क पूरे गांव और आसपास के खेतों में बिछाया गया, जिससे लगातार पानी बाहर निकाला गया। बाद की यात्राओं के दौरान भी कई मोटरें चलती मिलीं, जो पानी को नजदीकी नहरों और निचले इलाकों की ओर मोड़ रही थीं।
किसानों ने यह भी कहा कि वही पंप और पाइपलाइन, जिनसे पहले पानी निकाला गया था, बाद में बुवाई शुरू होने पर सिंचाई के लिए इस्तेमाल किए गए, जिससे एक खेत का पानी दूसरे खेत में पहुंचाया जा सका।
खेतों में दोबारा बुवाई, गेहूं उभरने लगा
करीब एक से डेढ़ महीने बाद की गई फॉलो-अप यात्राओं के दौरान कई इलाकों में गेहूं की फसल चार से पांच इंच तक उगती दिखाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि बड़े हिस्से में बुवाई पूरी हो चुकी है और बाढ़ का पानी काफी हद तक उतर गया है।
किसानों का अनुमान है कि पहले डूबे 700–800 किल्लों में से लगभग 500–600 किल्लों में फिर से बुवाई हो चुकी है। कुछ गहरे हिस्सों में अभी भी पानी जमा है, लेकिन वहां पंपिंग जारी है।
निचले इलाकों में कपास के खेतों का भी निरीक्षण किया गया, जहां मोटरें अभी चल रही थीं। कुछ जगह कपास की कटाई पहले ही हो चुकी थी, जबकि अन्य स्थानों पर खड़ी फसल को बचाने के लिए पानी निकाला जा रहा था।
किसानों के बयान: ज़मीनी हालात
कई ग्रामीणों ने बदली परिस्थितियों पर बात की। किसान योगेश ने, जिन्होंने पहले बाढ़ के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे, बताया कि एक समय खेतों में कमर तक पानी था और बाद में सात से आठ मोटरें लगाकर इलाके से पानी निकाला गया।
साधु राम नामक किसान ने कहा कि धान के मौसम में डूबे उनके खेतों में अब गेहूं बोया जा चुका है और वही पाइपलाइन सिंचाई में काम आ रही है। उन्होंने बताया कि जिस स्कूल मैदान में पहले पांच फुट पानी था, वह अब सूख चुका है।
लेवा राम ने बताया कि उन्होंने 15–16 किल्लों में दोबारा बुवाई की है और गांव भर के किसान खेती फिर शुरू कर पाने से राहत महसूस कर रहे हैं।
कृष्ण नामक ग्रामीण ने कहा कि उनके इलाके में लगभग सारा पानी निकल चुका है और ज़्यादातर खेतों में बुवाई फिर शुरू हो गई है।
पशुओं के लिए चारा काट रहे शमशेर ने बताया कि उनके हिस्से में लगभग 90 प्रतिशत पानी उतर चुका है, जबकि सीमावर्ती इलाकों में अभी भी पंपिंग चल रही है।
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अजय नामक किसान ने कहा कि करीब 95 प्रतिशत खेत बहाल हो चुके हैं और केवल पांच प्रतिशत हिस्सा ही गांव की सीमा के पास पानी में डूबा है।
गांव प्रशासन का आकलन
सरपंच बंटी दलाल ने बताया कि मसूदपुर में शुरू में 1,500–1,600 किल्ले क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित थे। उनके अनुसार अब केवल 30–40 किल्ले ही जलमग्न बचे हैं, जो मुख्य रूप से डाटा, सिंधड़ और खानपुर जैसे पड़ोसी गांवों की सीमाओं के पास हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और लगभग पूरे गांव में गेहूं की बुवाई हो गई है।
दलाल ने संभावित आर्थिक प्रभाव का भी आकलन करते हुए कहा कि अगर एक किल्ले से करीब 50 “मन” गेहूं निकलता है, तो 10 किल्ले वाले किसान को भी बड़ा लाभ हो सकता है। उन्होंने जोड़ा कि फायदा केवल बड़े ज़मींदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि मजदूरों, सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों और अन्य ग्रामीणों तक भी पहुंचा है, क्योंकि जलभराव से गलियां, खेत और खेल मैदान सभी प्रभावित हुए थे।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उपलब्ध कराए गए उपकरणों में 22,000 फुट पाइपलाइन, पांच मोटरें और कनेक्टर, बैंड व बिजली फिटिंग जैसे सभी सहायक सामान शामिल थे, जिनमें से कुछ सामग्री भविष्य के लिए पंचायत के पास रखी गई है।
राजीव गांधी खेल स्टेडियम में फिर लौटी रौनक
मसूदपुर का राजीव गांधी खेल स्टेडियम भी बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। फुटबॉल कोच कपिल ने बताया कि मैदान में करीब साढ़े चार फुट पानी तीन से चार महीने तक भरा रहा, जिससे अभ्यास बंद करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि लगभग 12 किल्लों तक पाइपलाइन बिछाई गई और करीब डेढ़ महीने तक लगातार मोटरें चलाकर पानी निकाला गया। अब मैदान सूख चुका है, घास उगने लगी है और बच्चे एक महीने से अधिक समय से फिर अभ्यास कर रहे हैं।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
नब्बे वर्ष की उम्र के बुजुर्ग ग्रामीणों समेत कई लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी बड़ी स्वैच्छिक सहायता कभी नहीं देखी थी। कुछ निवासियों ने बताया कि जहां पहले उन्हें खुद को बेसहारा महसूस हो रहा था, वहीं इस हस्तक्षेप के बाद वे फिर खेती शुरू कर पाए और आने वाली फसलों की योजना बना सके।
कई किसानों ने कहा कि खेतों की बहाली उनके अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी थी, खासकर उनके लिए जिन्होंने जमीन पट्टे पर ले रखी थी और पूरा मौसम बर्बाद होने की आशंका से जूझ रहे थे।
आगे की राह
सीमावर्ती निचले इलाकों में अभी भी पंपिंग जारी है, वहीं बाकी मसूदपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य कृषि जीवन की ओर लौट रहे हैं। गांव भर में खेतों में सिंचाई हो रही है, पशुओं के लिए चारा फिर काटा जा रहा है और स्टेडियम में खेल गतिविधियां लौट आई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि महीनों की अनिश्चितता के बाद अब वे अगली फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। खड़े गेहूं के खेत और सूखते कपास के प्लॉट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लगातार चले जलनिकासी अभियानों ने उस गांव की दिनचर्या को बदल दिया है, जो कभी पूरी तरह पानी में डूबा हुआ था।
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