न्याय के देवता कहे जाने वाले “भ्रष्ट जज” न्यायपालिका पर कलंक हैं

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कहा जाता है कि न्यायालय एक मंदिर है और मंदिर में बैठे भगवान अर्थात जज साहेबान का पूरा भारतवर्ष सम्मान करता है या दूसरे शब्दों में कहें कि न्यायालय एक न्याय का दरबार है जहां फरियादी या पीड़ित अपने साथ हुए अन्याय के लिए इंसाफ मांगने आते हैं। लेकिन अगर न्यायालय के ठेकेदार जज साहेबान ही संविधान के विरुद्ध चले अर्थात गलत फैसलेे सुनाने लगे तो क्या यह हमारे भारत देश की न्याय व्यवस्था का सरेआम कत्ल नहीं है? इसी कारण लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के भूतपूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की बेंच ने कहा है लोग जजों को संदेह की नजर से देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अधीनस्थ न्यायपालिका के 80% जज भ्रष्ट हैं जो समाज के साथ धोखा तो है ही, साथ ही हमारे भारतदेश को शर्मसार कर देने वाली बात भी है। इसी वजह से हमारे सिर शर्म से झुक गए हैं।

चीफ जस्टिस एस.एच. कपाड़िया ने कहा है “काले कोट में बेदाग लोग चाहिए” अर्थात काले कोट का दुरुपयोग हो रहा है जो कि नहीं होना चाहिए।

लोग न्यायालय का सहारा इसलिए लेते हैं ताकि उनके साथ न्याय हो और दोषियों को सजा हो लेकिन आज अधिकतर जज भ्रष्ट हो चुके हैं जिन्हें ना तो न्याय से मतलब है और ना ही संविधान से। पद और रुपयों के लालच में जज संविधान का भी उल्लंघन कर जाते हैं लेकिन उनसे कोई पूछने वाला नहीं है कि उन्होंने फरियादी या पीड़ित के साथ न्याय क्यों नहीं किया। इसीलिए जरूरी है कि जजों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि जज गलत फैसला ना दे पाएं। यदि जज ही जनता के साथ अन्याय करे तो ऐसे में जनता न्याय के लिए कहाँ जाए?

आज ऐसे ही एक भ्रष्ट जज की हकीकत से आपको रूबरू करवाते हैं जिसने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दीं।

हिसार कोर्ट में ADJ पद पर नियुक्त भ्रष्ट जज डी आर चालिया (देशराज चालिया) ने अपनी कलम और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 23 निर्दोषों को मौत के मुंह में धकेल दिया। उन्होंने हरियाणा के सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके 22 अनुयायियों को हत्या के एक झूठे मामले में आजीवन कारावास (मृत्यु पर्यंत) की सजा सुना दी जबकि ना तो सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों ने कोई अपराध किया और ना ही उन पर अपराध साबित हुआ।

सतगुरु रामपाल जी महाराज का संक्षिप्त परिचय और उनके साथ हुए अन्याय की शुरुआत

सतगुरु रामपाल जी महाराज एक शिक्षित व्यक्ति हैं। पहले वह हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। शुरू से ही उनकी छवि एक नेक व ईमानदार व्यक्ति की रही। उन्हें कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। सतगुरु रामपाल जी महाराज बेहद ईमानदार होने के साथ साथ अपने पूज्य गुरुदेव और परमात्मा के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित थे। उनके इसी आचरण को देखते हुए स्वामी रामदेवानंद जी ने अपने लाखों शिष्यों में से सतगुरु रामपाल जी महाराज को ही आध्यात्मिक मार्ग को आगे बढ़ाने का कार्य सौंपा। सतगुरु रामपाल जी महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव स्वामी रामदेवानंद जी के आदेश पालन किया और कबीर साहेब के आध्यात्मिक ज्ञान को सर्वत्र फैलाने, पाखंड वाद का पूर्णतः खंडन करने व मानव कल्याण हेतु अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाया। सतगुरु रामपाल जी महाराज ने सन् 2000 में सर्व धर्मों के सर्व सद्ग्रन्थों का गहन अध्ययन किया और पाया कि सर्व धर्म के संत-महंत, कथाकार, धर्मगुरु, मुल्ला-काजी आदि सभी ने जनता को उल्टा पाठ पढ़ा कर सत्य भक्ति से दूर रखा और विपरीत दिशा में झोंक दिया है।

सतगुरु रामपाल जी महाराज ने वेदों का भी गहन अध्ययन किया और वेदों के विद्वान कहे जाने वाले महर्षि दयानन्द सरस्वती की अज्ञानता का पर्दाफाश किया। सतगुरु रामपाल जी महाराज ने महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश जिसे श्रेष्ठ माना जाता है, उस पुस्तक में लिखी गई मनगढ़ंत, समाज नाशक, वेद विरुद्ध ज्ञान की सच्चाई को जनता के समक्ष रखा।

आर्य समाज के प्रमुख महर्षि दयानंद सरस्वती का वेद ज्ञान शून्य था। सतगुरु रामपाल जी महाराज द्वारा जनता को अज्ञानता की गहरी नींद से जगाने के लिए यह सच TV चैनलों पर प्रसारित किया गया जो आर्य समाजियों से सहा नहीं गया, जिसके परिणामस्वरूप आर्य समाजियों ने सन् 2006 में करौंथा कांण्ड करवा दिया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और साज़िश के तहत सोनू नाम के एक मृतक युवक की हत्या का केस सतगुरु रामपाल जी महाराज पर जबरन थोप दिया गया।

यह सिलसिला काफी वर्षों तक चलता रहा लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज के जीवन का केवल एक ही उद्देश्य है, चाहे जान चली जाए लेकिन यह सत्य आध्यात्मिक ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति के पास पहुंचा कर ही छोडूंगा।

सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ हुए अन्याय का दोषी कौन?

जनता के सामने सद्ग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान उजागर करने हेतु सतगुरु रामपाल जी महाराज ने फिर से सन 2012 में सभी धर्मों के धर्म गुरुओं को आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा के लिए आमंत्रित किया और कहा कि आप सब जो भक्ति कर और करवा रहे हैं, यह शास्त्र अनुकूल साधना नहीं है, बल्कि शास्त्रविरुद्ध साधना है जिससे ना तो जीवन में सुख हो सकता और ना ही मोक्ष हो सकता है। उसके लिए कोई और भक्ति विधि है जो सतगुरु रामपाल जी महाराज ही बताएंगे। अतः हम सब मिलकर समाज को सही भक्ति मार्ग बताएं जो सर्व सद्ग्रन्थों पर आधारित है। ज्ञान चर्चा में मुख्य रूप से:
1) चारों शंकराचार्य
2) डॉ जाकिर नाइक (जिसने स्वयं ही हिंदुस्तान के सभी धर्मगुरुओं को ज्ञान चर्चा के लिए चुनौती दी)
3) आर्य समाज
और विश्व के समस्त सन्त-महंत, धर्मगुरु, कथाकारों आदि को आमंत्रित करके इनके ज्ञान के सीमित स्तर को जनता के सामने रखना चाहा लेकिन इस ज्ञान चर्चा में कोई भी शामिल नहीं हुआ क्योंकि, ये सभी नकली और अज्ञानी धर्मगुरु डरते थे कि कहीं हम ज्ञान में पराजित ना हो जाएं और हमारी पोल जनता के सामने ना खुल जाए।

भ्रष्ट जजों ने किया सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ अन्याय। न्यायपालिका के भ्रष्ट जजों का काला धंधा इस तरह शुरू हुआ

इसी तरह सतगुरु रामपाल जी महाराज को सन् 2006 में हुए करौंथा कांड के केसों की तारीखों पर दौड़ते-दौड़ते लगभग 8 वर्ष बीत गए और 18 नंवम्बर 2014 आ गया। इस बीच भ्रष्ट जजों के अन्याय और अत्याचारों का सिलसिला जारी रहा।

RSSS (राष्ट्रीय समाज सेवा समिति) ने भ्रष्ट जजों के खिलाफ 10 लाख लोगों की मौजूदगी में 24/11/14 को विशाल प्रदर्शन किया। इसी दौरान सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ हुए अत्याचार व भ्रष्ट जजों की काली करतूतों को जनता के सामने उजागर करने के लिए तीन पुस्तकें भी प्रकाशित की गईं:
1) न्यायलय की गिरती गरिमा
2) भ्रष्ट जज कुमार्ग पर
3) सच बनाम झूठ

जिसके चलते सभी भ्रष्ट जजों की पोल खुलने वाली थी। इसीलिए न्यायालय द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए सतगुरु रामपाल जी महाराज पर झूठा अवमानना का केस दर्ज किया गया और 18 नंवम्बर 2014 को सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों के साथ अमानवीय कार्रवाई की गई।
सतगुरु रामपाल जी महाराज के आश्रम पर हमला करने के लिये 40 हज़ार पुलिस फोर्स भेजी गई और एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन, लाठी चार्ज द्वारा की गई बर्बरता पूर्ण कार्रवाई में 5 महिलाओं और एक मासूम बच्चे की मौत हो गई और धारा 429/2014 और धारा 430/2014 हत्या का झुठा मुकदमा सन्त रामपाल जी और उनके अनुयायियों पर बना दिया गया, साथ ही उन पर झूठा देशद्रोह का मुकदमा बनाकर हिसार जेल में डाल दिया गया।
आप “बरवाला कांड की सच्चाई” की पूरी जानकारी के लिए देखे पूरा video 

Spiritual Leader

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दबाव में दर्ज हुए झूठे मुकदमे

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा पुलिस प्रशासन व भ्रष्ट जजों के साथ मिलकर बे-बुनियाद और झूठे मुकदमे सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों पर दर्ज कर लिए क्योंकि, वह नहीं चाहते कि सतगुरु रामपाल जी महाराज को न्याय मिले। इसके लिए मनोहर लाल खट्टर ने जजों पर सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ अन्याय करने के लिए दबाव डाला। सतगुरु रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को न्यायालय पर पूरा विश्वास था कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। लेकिन दुर्भाग्य रहा और हिसार सेशन कोर्ट जज देशराज चालिया ने 23 निर्दोषों को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर न्याय का सरेआम कत्ल कर दिया।

सबूतों और गवाहों को दरकिनार किया भ्रष्ट जज डी आर चालिया ने

न्यायालय सबूतों और गवाहों के आधार पर चलता है लेकिन जज देशराज चालिया ने जिन मृतकों की मौत का जिम्मेदार सतगुरु रामपाल जी महाराज को बनाया, उन मृतकों के परिजनों ने स्वयं एफिडेविट (शपथ पत्र) दे कर कहा कि पुलिस ने जबरन उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाये थे। सतगुरु रामपाल जी महाराज पूर्ण रूप से निर्दोष हैं, हमारे परिवार के सदस्यों की मृत्यु पुलिस की कार्रवाई में हुई है और हमें आश्रम में बंधक नहीं बनाया गया था। लेकिन जज ने उनकी एक भी नहीं सुनी, बल्कि उन पर ही झूठा मुकदमा बना दिया।

जज डी आर चालिया भ्रष्टाचार के कारण पद और रुपयों के लालच में इतने अंधे हो गए कि वह ये भी भूल गए कि बंधक बनाने वाले मामले में सतगुरु रामपाल जी महाराज पहले ही बरी हो चुके थे, फिर भी भ्रष्ट जज डी आर चालिया ने इसी को आधार बनाकर मृतकों की मौत का जिम्मेदार सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके 22 अनुयायियों को माना, जबकि उन मौतों की जिम्मेदारी हरियाणा सरकार, आईजी अनिल राव की थी। इन मुकदमों में सतगुरु रामपाल जी महाराज और 22 अनुयायियों को जीवनपर्यंत उम्र कैद की सजा सुना दी और 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया और कहा कि यदि जुर्माना नहीं दिया तो 2 साल और जेल में रहना पड़ेगा।

भ्रष्ट जज डी आर चालिया का एक और मूर्खतापूर्ण फैसला

विचार करें कि जिसे आखिरी सांस तक उम्र कैद की सजा सुनाई हो, वह 1लाख रुपये का जुर्माना क्यों भरेगा? लेकिन जज कहता है कि अगर जुर्माना नहीं भरा तो 2 साल की सजा और भोगनी पड़ेगी! यहां स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि जज डी आर चालिया भ्रष्टाचार के चलते अपना विवेक भी खो चुके हैं।

देश में ऐसे कई जज हैं जिन्होंने इस सम्मानीय पद को शर्मसार किया है जिसके कारण लाखों मासूमों की जिंदगी तबाह हो गई। लेकिन आम व्यक्ति इनके खिलाफ कुछ भी कर पाने में असमर्थ है क्योंकि, संविधान में भ्रष्ट जजों के खिलाफ कोई कानून ही नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि जजों की जवाबदेही तय की जाए ताकि लोगों को उचित समय पर और सही न्याय मिल पाए।

यदि आप सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ अन्याय करने वाले भ्रष्ट जजों की पूरी सच्चाई जानना चाहते हैं तो “सरा-सर अन्याय” नामक पुस्तक पढ़ें। न्यायपालिका को बचाने, समाज सुधार करने, भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने और समाज को सही भक्तिमार्ग प्रदान करने हेतु संघर्षरत सतगुरु रामपाल जी महाराज और उनके अनुयायियों का सहयोग जरूर करें क्योंकि, जो अन्याय आज सतगुरु रामपाल जी महाराज के साथ हुआ है, भविष्य में आपके साथ भी हो सकता है।

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