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छत्रपति शिवाजी जयंती (Chhatrapati Shivaji Jayanti 2021): तत्वदर्शी संत मिला होता तो शिवाजी मोक्ष का मार्ग चुनते

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छत्रपति शिवाजी जयंती (Chhatrapati Shivaji Jayanti 2021): इस साल महान मराठा राजा की 391 वीं जयंती मनाई जा रही है। पाठक गण यहां जानेंगे मराठा राजा छत्रपति शिवाजी के कुछ प्रेरक उद्धरण। साथ ही यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि शिवाजी महाराज यदि सतभक्ति में लग जाते और उन्हें तत्वदर्शी संत रामपाल जी जैसा सतगुरु मिला होता तो क्या वह युद्ध की अपेक्षा पूर्ण मोक्ष का मार्ग नहीं चुनते ?

Chhatrapati Shivaji Jayanti 2021: शिवाजी पराक्रम, शौर्य और कुशल युद्ध नीति के धनी थे

भारतवर्ष के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji) महाराज एक महान योद्धा एवं कुशल प्रशासक थे। उन्होंने अपने पराक्रम, शौर्य और कुशल युद्ध नीति का सफल उपयोग किया और इसके बल पर मुगलों के छक्के छुड़ा दिए थे। 6 जून, 1674 को उन्हें रायगढ़ के छत्रपति के रूप में औपचारिक रूप से ताज पहनाया गया था। शिवाजी महाराज के सम्मान में लोग कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और जुलूस का आयोजन करते हैं। शिवाजी के जीवन को दर्शाने वाले नाटक भी विभिन्न स्थानों पर खेले जाते हैं।

Chhatrapati Shivaji Jayanti 2021: मराठा राजा छत्रपति शिवाजी के प्रेरक उद्धरण

  • “कभी भी अपना सिर न झुकाएं, इसे हमेशा ऊंचा रखें” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • “स्वतंत्रता वह वरदान है, जिसे पाने का अधिकारी हर किसी को है” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • “जब इरादे पक्के हों तो पहाड़ भी मिट्टी के ढेर की तरह दिखता है” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • दुश्मन को कमजोर न समझें, लेकिन अत्यधिक बलिष्ठ समझ कर डरें भी नहीं” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • “अपनी गलती से सीखने की अपेक्षा दूसरों की गलतियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • “भले ही हर किसी के हाथों में तलवार हो, लेकिन यह अपनी इच्छाशक्ति है जो सरकार स्थापित कराती है” -छत्रपति शिवाजी महाराज
  • “आत्मविश्वास शक्ति प्रदान करता है, शक्ति ज्ञान प्रदान करती है, ज्ञान स्थिरता प्रदान करता है और स्थिरता जीत की ओर ले जाती है” -छत्रपति शिवाजी महाराज

यदि शिवाजी को तत्वदर्शी संत रामपाल जी जैसा सतगुरु मिलता तो पूर्ण मोक्ष का मार्ग चुनते

छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji Jayanti 2021) बचपन से ही बहुत विधाओं के धनी थे। यदि उन्हें बचपन में ही तत्वदर्शी संत रामपाल जी जैसे सतगुरु मिल गए होते यह तो निश्चित था कि उनके जैसे व्यक्तित्व का व्यक्ति युद्ध कि अपेक्षा सतभक्ति को पूरे तन और मन से चुनता और निश्चित ही पूर्ण मोक्ष को प्राप्त होता। लेकिन उस काल में कोई सतनाम और सारनाम देने के अधिकारी संत नहीं थे और बचपन से ही उनकी माता ने उन्हें युद्ध की ओर प्रेरित किया था।

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इससे यह सबक लेने कि जरूरत है कि माता पिता की यह जिम्मेदारी है कि बच्चों को सतज्ञान का पाठ सिखाने के लिए सतगुरु रामपाल जी की शरण में तीन वर्ष की अवस्था से ही ले जाना चाहिए। परिणामस्वरूप बालक सतज्ञान में निपुण होकर सदाचार का व्यवहार करेगा और दुराचार से कभी भी नेह नहीं करेगा। एक आदर्श सेवाभावी इंसान बन कर प्रसन्नता पूर्वक जीवन जीकर अंत समय में पूर्ण मोक्ष को प्राप्त करेगा।

सतज्ञान को गहराई से जानने के लिए सतगुरु रामपाल जी महाराज द्वारा रचित पवित्र पुस्तक जीने की राह पढ़नी चाहिए और सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग सुनने चाहिए।

क्या करना चाहिए सतमार्ग में आने के लिए

पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी लोक पर एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी की शरण में आना चाहिए और नाम दीक्षा लेकर सतगुरु द्वारा बताई गई मर्यादा में रहकर साधना करनी चाहिए। ऐसा करने से सर्वपाप कर्म कट जाएंगे और मनुष्य पूरे सुख भोगने का अधिकारी बन जाएगा। पूर्ण मोक्ष को प्राप्त कर परम धाम सतलोक गमन करेगा जहां जाकर पुनः जन्म मृत्यु के चक्र में नहीं जाना पड़ता। यही मनुष्य योनि में जन्म लेने का एकमात्र लक्ष्य भी है।


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