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Chaitra Navratri 2023 [Hindi]: चैत्र नवरात्रि पर जानिए किस पूजा विधि से होगी घर में सुख व समृद्धि

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Chaitra Navratri in Hindi चैत्र नवरात्रि कौन है आदि माया का जनक

Last Updated on 11 March 2023, 8:13 PM IST: Chaitra Navratri in Hindi (चैत्र नवरात्रि 2023): हिन्दू धर्म में प्रचलित त्योहारों में से एक चैत्र नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। प्रत्येक वर्ष चैत्र नवरात्रि को बड़े आस्था से मनाया जाता है। इस बार जानते हैं हिन्दू पंचांग के अनुसार क्या है चैत्र नवरात्रि की तिथि।

Chaitra Navratri in Hindi (चैत्र नवरात्रि): मुख्य बिन्दु 

  1. इस दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं। नवरात्रि का पहला दिन घट स्थापना से शुरू होता है। नौ दिन व्रत रखने के बाद समापन किया जाता है।
  2. दुर्गा के नौ रूपों को पाप विनाशिनी कहा जाता है, हर देवी के अलग अलग वाहन हैं, अस्त्र-शस्त्र हैं परन्तु यह सब एक ही हैं।
  3. दुर्गा मां हमारे पापों का नाश नहीं कर सकती। जानिए कौन है आत्मा का सच्चा जनक जो पापों का विनाश कर देता है।

Chaitra Navratri 2023 Date (चैत्र नवरात्रि 2023 तिथि)

चैत्र नवरात्रि को हिन्दू मान्यता के अनुसार नए वर्ष का आरंभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के आधार पर यह माना जाता है कि माता दुर्गा इस दिन घर आती हैं। इस वर्ष 2023 में चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं तथा 30 मार्च 2023 को इनका समापन होगा। 

Chaitra Navratri 2023 Importance (चैत्र नवरात्रि का महत्व)

चैत्र नवरात्रि पर्व होली के त्योहार के कुछ दिन बाद से ही शुरू हो जाता है। पौराणिक धारणाओं अथवा हिन्दू मान्यता के अनुसार पूर्ण परमात्मा के ब्रह्माण्ड रचना के बाद ब्रह्मा जी ने संसार की रचना चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू की थी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो कर 30 मार्च तक पूरे नौ दिन तक मनाई जाती है जिसमें अलग अलग दिन अलग अलग देवी अर्थात दुर्गा माता के नौ रुपों की पूजा अर्चना की जाती है।

Story of Chaitra Navratri (चैत्र नवरात्रि की कथा)

Chaitra Navratri Story in Hindi:चैत्र नवरात्रि को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं उनमें से एक मुख्य है। माना जाता है कि असुर महिषासुर के आतंक से परेशान सभी देवताओं ने उसको रोकने का बहुत प्रयास किया परंतु उसको एक वरदान प्राप्त था जिसके फ़लस्वरूप कोई देवता अथवा दानव उसको हरा नहीं सकता था। आखिरकार सभी देवताओं ने माता पार्वती को सब स्तिथि सुनाकर महिषासुर के वध के लिए आग्रह किया। इस उपरान्त माँ पार्वती ने अपने अंश से नौ रूपों की रचना की जिन्हें सभी देवताओं ने अपने शस्त्र देकर और शक्ति पूर्ण बनाया।

माँ दुर्गा के कौन से नौ रूपों की पूजा की जाती है?

चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं तथा इनका समापन 30 मार्च को नवमी के रूप में हो रहा है। इन नौ दिनों में दुर्गा माता के जिन 9 अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है वे इस प्रकार हैं।

  • पहले नवरात्रि को माता शैलपुत्री जी की पूजा की जाती है।
  • दूसरे नवरात्रि को माता ब्रह्मचारिणी जी को पूजा जाता है।
  • तीसरे नवरात्रि को माता चन्द्रघण्टा को पूजा जाता है।
  • चौथे नवरात्रि को माता कुष्मांडा जी की पूजा होती है।
  • पांचवें नवरात्रि को स्कंदमाता जी की पूजा होती है।
  • छठे नवरात्रि में माता कात्यायानी की पूजा होती है।
  • सातवें नवरात्रि में माता कालरात्रि जी की पूजा होती है।
  • आठवें नवरात्री में माता महागौरी जी की पूजा होती है।
  • नौंवे नवरात्रि में सिद्धिदात्री माता को पूजा जाता है।

Chaitra Navratri 2023 [Hindi]: चैत्र नवरात्रि के दिनों में कैसे करते हैं पूजा?

तप, साधना और संयम के इन दिनों में घर-घर में माता की आराधना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन विधि विधान से घट स्थापना के साथ प्रथम आदिशक्ति मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप का भव्य श्रृंगार और पूजन किया जाता है।

■ Also Read: Shardiya Navratri [Hindi]: इस नवरात्रि पर जाने क्या देवी दुर्गा की उपासना से पूर्ण मोक्ष संभव है?

Chaitra Navratri in Hindi (चैत्र नवरात्रि): देवी के निमित्त अखंड ज्योति जलाकर भक्त नौ दिन के व्रत का संकल्प लेते हैं जबकि श्रीमद्भगवद गीता में इस तरह से पूजा यानी शास्त्र विरुद्ध भक्ति करने के लिए मना किया गया है। ये सारी क्रियाएं हम लोकवेद अर्थात सुने सुनाए ज्ञान के आधार पर करते हैं जो व्यर्थ हैं। प्रमुखत: श्रीमद्भागवत गीता में कहीं भी दुर्गा को पूजनीय नहीं कहा गया है। दुर्गा मां की वास्तविक साधना करने के लिए उनके विशिष्ट मंत्र का जाप करना होता है जो कि तत्वदर्शी संत बताते है।

तप और व्रत के लिए श्रीमद्भगवद्गीता में किया गया है मना

गीता अध्याय 6 का श्लोक 16

न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः,

न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।।

गीता ज्ञानदाता अर्जुन से कह रहा है, यह योग न तो अत्यधिक खाने वाले का और न बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् व्रत रखने वाले का तथा न ही बहुत शयन करने वाले का तथा न ही हठ करके अधिक जागने वाले का कभी सिद्ध होता है अर्थात यह सब व्यर्थ की साधना है ।

श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 34

तत्, विद्धि, प्रणिपातेन, परिप्रश्नेन, सेवया,

उपदेक्ष्यन्ति, ते, ज्ञानम्, ज्ञानिनः, तत्त्वदर्शिनः।।

पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि उपरोक्त नाना प्रकार की साधना तो मनमाना आचरण है। मेरे तक की साधना, अटकल लगाया ज्ञान है, परन्तु पूर्ण परमात्मा के पूर्ण मोक्ष मार्ग का मुझे भी ज्ञान नहीं है। उसके लिए इस मंत्र 34 में कहा है कि उस तत्वज्ञान को समझ। उन पूर्ण परमात्मा के वास्तविक ज्ञान व समाधान को जानने वाले संतों को भली भांति दण्डवत प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सफलतापूर्वक प्रश्न करने से वे पूर्ण ब्रह्म को तत्व से जानने वाले अर्थात् तत्वदर्शी ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे।

इसी का प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक 15-16 में भी है। अर्थात तत्वदर्शी संत की खोज कर और जैसे वह बताएं वैसे पूजा करने से लाभ होगा । (वर्तमान में वह तत्वदर्शी संत जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज हैं।)

क्या व्रत करना वेदों के अनुसार है?

व्रत करना, हठ योग साधना करना, तीर्थो पर जाना इत्यादि सब मनमाना आचरण हैं जिसके बारे में गीता जी मे वर्णित है कि इन साधना से मोक्ष सम्भव नहीं है बल्कि जो इस साधना को करते है वो केवल स्वर्ग-नरक वाली साधना में ही लीन हैं।

गीता जी अध्याय 6 का श्लोक 47

योगिनाम्, अपि, सर्वेषाम्, मद्गतेन, अन्तरात्मना,

श्रद्धावान्, भजते, यः, माम्, सः, मे, युक्ततमः, मतः।।

दुर्गा माता किसकी पूजा करने के लिए कहती हैं? प्रमाण देखिए

Chaitra Navratri in Hindi (चैत्र नवरात्रि):  श्रीमद् देवी भागवत पुराण के स्कंद 7, पृष्ठ 562 में देवी द्वारा हिमालय राज को ज्ञान उपदेश में दुर्गा जी स्वयं किसी और भगवान की पूजा करने की बात करती हैं। जहां देवी दुर्गा कहती हैं कि मेरी पूजा को भी त्याग दो और सब बातों को छोड़ दो, केवल ब्रह्म की साधना करो। जिस ब्रह्म के बारे में देवी ने पूजा के लिए कहा है वह ब्रह्म किसकी पूजा करने के लिए कह रहा है, आइए जानें

गीता अध्याय 15 का श्लोक 4

ततः, पदम्, तत्, परिमार्गितव्यम्, यस्मिन्, गताः, न, निवर्तन्ति, भूयः,

तम्, एव्, च, आद्यम्, पुरुषम्, प्रपद्ये, यतः, प्रवृत्तिः, प्रसृता, पुराणी।।

उस परमेश्वर के परम पद रूप परमेश्वर को भलीभांति खोजना चाहिए जिसमें गये हुए साधक फिर लौटकर संसार में नहीं आते और जिस परम अक्षर ब्रह्म (कबीर परमेश्वर) से आदि रचना-सृष्टि उत्पन्न हुई है, उस आदि पुरुष नारायण की ही मैं शरण में हूँ। पूर्ण निश्चय के साथ उसी परमात्मा का भजन करना चाहिए।

अध्याय 18 का श्लोक 66 

सर्वधर्मान्, परित्यज्य, माम्, एकम्, शरणम्, व्रज, 

अहम्, त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि, मा, शुचः।।

अनुवाद: (माम्) मेरी (सर्वधर्मान्) सम्पूर्ण पूजाओं को (परित्यज्य) त्यागकर तू केवल (एकम्) एक उस पूर्ण परमात्मा की (शरणम्) शरण में (व्रज) जा। (अहम्) मैं (त्वा) तुझे (सर्वपापेभ्यः) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः) शोक मत कर।

सृष्टि रचने वाला परमात्मा कौन है?

सृष्टि रचने वाले परमात्मा कबीर जी हैं जिसका प्रमाण सभी धर्म ग्रंथो में दिया गया है। पवित्र कुरान शरीफ में अल्लाह कबीर, सूरत फुरकानी 25, आयत 52-59 में स्पष्ट रूप से ‘कबीरन’ लिखा है। ये वहीं कबीर हैं जिनका प्रमाण बाइबिल में भी है कि परमात्मा ने छ दिन में सृष्टि रची तथा सातवें दिन आसमान पर अपने तख्त पर जा बिराजे।

आयत 25:52

“फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन”

किस किस को मिले परमात्मा? 

Chaitra Navratri 2023 [Hindi]: परमात्मा प्राप्त संतों जैसे संत नानक जी, दादू दास जी, मलूक दास जी, धर्मदास जी, घीसा दास जी, रविदास जी, मीरा बाई,पीपा,जीवा और दत्ता इन्होंने भी कभी कोई व्रत नहीं किया ना ही कोई तप या हठ योग किया। उन्होंने और अन्य संतों ने भी यह बताया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी हैं जो सर्व सृष्टि रचनहार हैं।

प्रिय पाठकों ! उपरोक्त प्रमाणों से यह सिद्ध हो रहा है कि सभी धार्मिक ग्रंथ, संत, महात्मा तथा भक्त पूर्ण परमात्मा की भक्ति के लिए ही प्रेरित करते हैं इसलिए हमें अपना विवेक प्रयोग करते हुए एक पूर्ण परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए। वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी हैं। 

इसका प्रमाण सभी सदग्रंथों में मिलता है अर्थात अब शिक्षित समाज को चाहिए कि वह पूर्ण परमात्मा को पहचान कर भक्ति करें ताकि उनको पूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिल सके। वर्तमान में  पूर्ण परमात्मा की साधना बताने वाले परम संत रामपाल जी महाराज हैं जो सतभक्ति और सत मंत्र बता रहे हैं। आप संत रामपाल जी महाराज एप्प डाउनलोड कर सत्संग पढें, सुनें और देखें, तथा नाम दीक्षा लेकर भक्ति आरंभ करें और अपना जीवन व्यर्थ जाने से बचाएं ।

कैसे मिलेंगे पूर्ण परमात्मा?

पूर्ण परमात्मा को पाने का एक मात्र तरीका है सच्ची भक्ति जो केवल संत रामपाल जी बताते हैं। जिसका प्रमाण हमारे सद्ग्रंथों में वर्णित है तथा पाठक स्वयं पुस्तक में से देखकर ग्रंथों में से मिलान कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए मंगवाये पुस्तक ज्ञान गंगा या देखें www.jagatgururampalji.org

FAQs about Chaitra Navratri 2023 [Hindi]

प्रश्न:- चैत्र नवरात्रि की तिथि क्या है?

उत्तर:- चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो जाएंगे तथा इनका समापन 30 मार्च को नवमी के रूप में होगा।

प्रश्न:- चैत्र मास का नाम चैत्र कैसे पड़ा?

उत्तर:- चैत्र मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में होती है जिस कारण इस महीने का नाम ही चैत्र पड़ गया।

प्रश्न:- चैत्र नवरात्रि में दुर्गा माता के कितने रूपों की पूजा की जाती है?

उत्तर:- चैत्र नवरात्रि में दुर्गा माता के नौं रूपों की पूजा की जाती है।

प्रश्न:- माता पार्वती ने चैत्र नवरात्रि में किस असुर का वध किया था?

उत्तर:- माता पार्वती ने चैत्र नवरात्रि में महिषासुर असुर का वध किया था।

Comedic Actor Satish Kaushik No More, Passes Away at 66

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Comedic Actor Satish Kaushik No More, Passes Away at 66

Famous Indian Comedic Actor Satish Kaushik passes away at 66. Examination states heart attack (Myocardial Infarction) to be the reason for his death. His manager told the media that Mr. Kaushik was at his farmhouse in Delhi’s Bijwasan when he felt discomfort in the middle of the night. He was rushed to Fortis Hospital, but he could not survive the attack. Last rites of Kaushik were done at the Versova Crematorium this Thursday. 

Comedic Actor Satish Kaushik passes away at 66: Highlights 

  • Indian Comedic Actor Satish Kaushik passes away at 66
  • Heart attack (Myocardial Infarction) is the reason for his death
  • Kaushik was at his farmhouse in Delhi’s Bijwasan at the time of heart attack
  • Kaushik was rushed to Fortis Hospital, but didn’t survive
  • Last rites performed at the Versova Crematorium this Thursday
  • Satlok is immortal place and is attained by SatBhakti

Comedic Star Kaushik Passed Away At 66: What Happened?

Kaushik’s Manager Santosh Rai told the media that Kaushik left for his farmhouse past the Holi Event. He slept at his house and called Santosh complaining about breathlessness. He was Rushed to the Fortis Hospital at Gurugram, but he could not survive the attack. 

Kaushik’s body was shifted to Deen Dayal Upadhyay Hospital for the autopsy. Soon after the autopsy, Kaushik’s body was handed over to the family this morning.  

Comedic Actor Satish Kaushik Passed Away At 66: When Did This Start?

Mr Kaushik arrived last night at his farm house at Delhi’s Bijwasan to celebrate Holi. He also attended the Holi party at Javed-Shabana’s home at Delhi. After playing Holi festival he tweeted. 

Comedic Actor Died at 66: Bollywood Condoles the Family

Anupam Kher, Ranbir Kapoor, Abhishek Bachchan, Shilpa Shetty, Shubhash Ghai and other friends condole the family over the loss of a film star. The messages of the condolence flooded over the social media following the death of the actor-filmmaker.  

Satish Kaushik Family and Early Life 

Famous Actor, Filmmaker, Comedian and Screenwriter Satish Kaushik was born on 13 April 1956 in Dhanounda Village, Mahendragarh, Haryana. Kaushik was from a low income family. He worked at a cloth mill for just 400 rupees before his career in movies. He completed his graduation from Kirori Mal College of Delhi University. He was an alumnus at the National School of Drama (New Delhi). Kaushik married Shashi in 1985. He had a son named Shanu Kaushik who died at the age of two. The actor also has a daughter Vanshika. 

Contribution to the Bollywood 

Kaushik made several contributions to Bollywood. He directed a number of films. He also played major roles in several films. 

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He directed his first movie in 1993 starring Anil Kapoor, Sridevi Kapoor, Jackie Shroff and Anupam Kher. The film, which was expected to be a blockbuster, failed at the box office and critics slammed it for poor dialogues and monotonous music. After the failure of his debut, he made a comeback with another film with film stars Anil Kapoor, Kajol, Anupam Kher and Shakti Kapoor. Kaushik then directed successful films between 2001 to 2014. Late Satish Kaushik made his debut in production with his movies in 1995.

  • The Late Veteran Actor also played significant comedic roles in many films. For his role in a film,  the actor also won the maiden Filmfare Award for Best Comedian. He also played the role of BBC (Banke Bihari Chaturvedi) in a movie with stars  Hema Malini, Anil Kapoor and Madhuri Dixit.
  • The Actor also played many iconic comedic roles in his career. In 2008, the actor also played a significant role in a film. In the next few years, Mr. Satish played both comedic and serious roles in few films. In 2016, the actor played a role in the crime drama.

Why is Life So Uncertain?

Death is inevitable. We all know that we all have to die one day. Birth and Death are hard and fast rules of this place where we live. We never wish, but have to leave this place one day. But why do we not want to die? Where does this feeling of not dying come from? Why do some die at an early age? We Worship But Remain Unhappy, Why?

This is because we have come from a place where there was no birth and death. The place where there was no old age. A place where we were immortal. We made a huge mistake by coming along with Kaal Brahm to this mortal world. This Kaal keeps us trapped in his lok and not let us go to the eternal place. The Satlok, where there is no mortality.

Satlok, the Place of Immortality, Attainable With Sat-Bhakti

Satlok is the place which is immortal. Supreme God Kabir ji dwells in Satlok. We can go back to Satlok by doing holy scriptures substantiated worship as bestowed by enlightened Sant Rampal Ji Maharaj. To make human birth meaningful, take Initiation (Naam Diksha) from Sant Rampalji Maharaj, practice Sat-Bhakti, maintain dignity and attain Satlok. 

FAQS on Satish Kaushik

Question: Why is comedic actor Satish Kaushik in the news?

Answer: Comedic actor Satish Kaushik died of a heart attack (Myocardial Infarction) in Delhi NCR.

Question: At what age did Satish Kaushik die?

Answer: Satish Kaushik died at 66.

Question: How did Satish Kaushik die?

Answer: Satish Kaushik died of heart attack (Myocardial Infarction).

Question: Where did Satish Kaushik take his last breath?

Answer: Satish Kaushik took his last breath at Gurugram.

Question: What did Satish Kaushik do before his death?

Answer: Satish Kaushik celebrated Holi at Javed-Shabana’s home in Delhi.

No Smoking Day 2023: Know How to Quit Smoking Easily

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No Smoking Day 2023 Theme, History, Quotes Quit Smoking

Last Updated on 9 March 2023, 3:15 PM IST: No Smoking Day 2023: No Smoking Day is the national day that is observed annually in different parts of the globe that aims at creating awareness about the need to quit smoking. Along with this it also brings into the notice of the people about the ways to quit smoking and benefits that it adds to the life of a person. Let us know about the highlights of the day in detail.

No Smoking Day 2023 Highlights

  • No Smoking Day falls annually on the second Wednesday in the month of march. 
  • This year No Smoking Day 2023 falls on 8th of March. 
  • No Smoking Day aims at highlighting the ill effects of smoking and at the same time encouraging people to quit smoking as well.
  • It was observed on the day of Ash Wednesday in the year 1984. 
  • Every year it is observed with a dedicated theme.
  • This day is inspired from World No Tobacco Day that happens to fall on 31st May every year.
  • Consumption of any kind of intoxicant is prohibited in every Holy Scripture and is also against the Constitution of Supreme God Kabir. The one consuming it cannot attain God.

What is No Smoking Day?

As the name reveals itself, No Smoking Day is one of those days that brings into limelight about the need to quit smoking for one’s well being. As smoking damages our body’s internal workings as it contains tobacco. Tobacco, whose consumption is the basis of various heart related diseases and can cause cancer too, thus decreases the lifespan of a human being. 

What is the Theme of No Smoking Day 2023?

The theme of no smoking day 2023 is “Quit and Win” It lays its emphasis on quitting smoking and overcoming one of the biggest evils of your life. Not only this upon quitting smoking you are also setting examples for others too and people can get inspiration from you once you quit smoking.

What is the History of No Smoking Day?

No Smoking Day was first celebrated in 1984 on Ash Wednesday by a charity group called ASH (Action on Smoking and Health) in the Republic of Ireland. The event was a huge success and lots of smokers participated in the event. And various smokers have also quit smoking too. Since then the day is observed on every second Wednesday in the month of march every year. 

When is No Smoking Day?

No Smoking Day 2023 happens to be on 8th March. As the date is the second Wednesday for the month, the day happens to be on that day. 

Statistics Revealed

  • Around 7000 chemicals are believed to be involved in tobacco smoke out of which 250 are harmful to us. 
  • The tally of smokers in China is around 300 million people who are consuming 1.7 trillion cigarettes every year and around three million cigarettes a minute.
  • Around 7 million people succumb to death every year because of smoking. This tally is expected to rise to 8 million by the year 2030. 
  • The only product being sold legally that can result in severe death of approximately half of the people who consume it is tobacco.
  • Smoking laws are estimated to be protecting 20% of the world’s population. 
  • Consumption of tobacco affects male sexual function, can cause ectopic pregnancy and can also cause tooth loss in various adults.

No Smoking Day 2023: Quotes

  • “Every time you try to quit smoking you are actually getting closer to staying smoke-free.” – Henry Ford
  • “Cigarettes are a classy way to commit suicide.” – Kurt Vonnegut
  • “Smoking is suicide by instalments.” – H.M. Forester
  • “A cigarette is the only consumer product which when used as directed kills its consumer.” – Gro Brundtland

Why are People Unable to Quit Smoking?

Smoking is one of those addictive habits that has taken many people into its custody that too with a rapid speed. But the worst part is that in spite of knowing the ill effects of smoking that it can lead to death, people are not able to quit smoking. It is because of their addiction that they think smoking adds relief to their day to day stresses but it is not so. 

■ Also Read: World No Tobacco Day Theme & Quotes

Although addiction to smoke seems comfortable but is killing and eating your body from within if you are a smoker. People who smoke need to open up their mind and question themselves about how smoking tobacco can free you from stress.

What is Tobacco Made Up Of?

The exact origin of tobacco is not revealed to the entire globe which is not just farming. Instead tobacco started originating at the place where the blood of Kamdhenu (Heaven’s Cow) fell on the ground for the first time when the cow was being shot by an arrow by a king. At the places where the blood fell, tobacco started growing and since then its production multiplied. Saint Garibdas Ji has stated in His sacred verses:

Khoo naam khoon ka, Tamaa naam gay |

sau baar saugandh, isko na peeye-khaay ||

Tamaa + Khoo = Tamaakhoo

Meaning:- The meaning is that in Persian language, a cow is called “Tamaa”. Blood is called “Khoo” i.e. “Khoon”. This tobacco has originated from cow’s blood. It has cow’s hair-like hair over it.

What is the Easiest Way to Quit Smoking?

Smoking is dangerous in itself and can cause various heart and lung related diseases to the human body. We as human beings have tried our best to quit smoking but most of us failed in doing so. It is a common saying that where man loses hope God generates scope. By adopting the spiritual way involving the power of True worship of Supreme God Kabir one’s soul can quit any sort of intoxication with ease. 

It is because of the supremacy of God Kabir and the power in His word that the method of His worship taken from His Complete Saint can clear off our sins and give us a life full of happiness. Saint Garibdas ji has revealed in His sacred verses about the ill effects of consuming tobacco from spiritual point of view:

Garib, Bhaang Tambhakhu Peev Hi, Sura Paan Se Haet |

Gausat Mitti Khaye Kar, Jungli Bane Praet ||

Who is the Complete Saint?

A Complete Saint is the one who is the representative of Supreme God Kabir here. And He is the medium by which Supreme God Kabir gives His benefits to His true devotees. By performing the worship as given by Him, one can enjoy the benefits that God Kabir gives to His devotees. Presently, Saint Rampal Ji Maharaj from Haryana, India is the one who stands complete on all the identifications of a Complete Saint. He is the one to reply upon to quit any sort of bad habit by the power of true worship of Supreme God Kabir given through Him. To know more you can visit Sant Rampal Ji Maharaj Youtube Channel.

No Smoking Day 2023 FAQ

Question: Which Wednesday in March is No Smoking Day?

Answer: Second Wednesday 

Question: Which organization initiated No Smoking Day?

Answer: Action on Smoking and Health(ASH)

Question: Which country has the highest number of smokers?

Answer: China

Question: Why does quitting smoking seem difficult?

Answer: It is because it is one of the web spreaded by Satan(Kaal Brahm) in order to keep souls away from their prime goal of attaining salvation.

Question: How can we quit smoking?

Answer: By going into the refuge of Sant Rampal Ji Maharaj who is the only Complete Saint amongst us.

No Smoking Day 2023 [Hindi]: धूम्रपान निषेध दिवस पर जानिए कैसे मिलेगा नशे के लत से छुटकारा?

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No Smoking Day Hindi धूम्रपान निषेध दिवस ऐसे मिलेगा नशे से छुटकारा

Last Updated on 8 March 2023, 3:25 PM IST: नों स्मोकिंग डे (No Smoking Day in Hindi): धूम्रपान के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से नो स्मोकिंग डे यानि धूम्रपान निषेध दिवस की शुरुआत हुई। नो स्मोकिंग डे 39 सालों से मनाया जाता आ रहा है। धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए लोग काफी मेहनत करते हैं, लेकिन छोड़ नहीं पाते हैं। स्मोकिंग छोड़ने वालों को प्रेरित करने के लिए प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को ‘नो स्मोकिंग डे’ अर्थात धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जाता है। इस साल यह दिवस 8 मार्च को मनाया जायेगा। धूम्रपान निषेध दिवस (नो स्मोकिंग डे) पर जानेंगे कि लाखों लोगों का नशा बिना किसी दवा के सिर्फ सतभक्ति से कैसे छूट चुका है। 

No Smoking Day 2023 [Hindi]: मुख्य बिंदु

  • नो स्मोकिंग डे (धूम्रपान निषेध दिवस) धूम्रपान के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाते हैं।
  • नो स्मोकिंग डे 1984 से मनाते आ रहे हैं।
  • हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है धूम्रपान निषेध दिवस
  • इस साल ‘नो स्मोकिंग डे’ 8 मार्च को मनाया जा रहा है।
  • सतभक्ति की शक्ति से नशा छुड़ाना हो रहा है संभव।

नो स्मोकिंग डे (No Smoking Day History in Hindi) कब से मनाते आ रहे हैं?

नो स्मोकिंग डे (No Smoking Day in Hindi) यानि धूम्रपान निषेध दिवस को धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में 1984 में पहली बार मनाया गया था, स्मोकिंग के दुष्प्रभावों को बताने और नशा मुक्ति हेतु प्रेरित करने के लिए इसे हर वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाने लगा।

No Smoking Day [Hindi]: आखिर क्या है नो स्मोकिंग डे?

इस दिन धूम्रपान के प्रति लोगों में एक जागरूकता अभियान की शुरूआत की गई जिससे इसके दुष्परिणामों और नशा मुक्ति के उपाय और इसलिए समाधानों पर कार्य करने के लिए एक मुहिम के तहत हर वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को इसे मनाया जाता है।

नो स्मोकिंग डे 2023 का विषय (No Smoking Day 2023 Theme)

धूम्रपान निषेध दिवस 2023 की थीम है ‘क्विट एंड विन’ जिसका सीधा सा अर्थ है कि ‘धूम्रपान छोड़ो और जीतो’। नो स्मोकिंग डे 2023 की थीम धूम्रपान निषेध दिवस को मनाने के मुख्य उद्देश्य को प्रेरित करती है साथ ही स्वास्थ्य लाभ, भलाई और वित्तीय लाभ के लिए धूम्रपान छोड़ने का प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। नो स्मोकिंग डे 2022 की थीम ‘Quitting Smoking Doesn’t have to be stressful’ थी जिसका अर्थ था ‘धूम्रपान छोड़ने के लिए तनावपूर्ण होने की ज़रूरत नहीं है’।

No Smoking Day Quotes: धूम्रपान निषेध दिवस संबंधित कुछ महत्वपूर्ण उद्धरण

  • शरीर का रखना हो ध्यान, तो बंद करें धूम्रपान।
  • आपका धूम्रपान सिर्फ आपके लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए खतरनाक है।
  • ऐसा कभी न हो शौक, जिससे हो गंभीर रोग।
  • नशा है नाश का कारण – संत रामपाल जी महाराज
  • आदत नही ये अच्छी, तू पहचान ले, जानलेवा है धूम्रपान, ये बात जान ले।

नो स्मोकिंग डे मनाने का महत्व (Significance Of No Smoking Day)

आज ‘नो स्मोकिंग डे’ अर्थात ‘धूम्रपान निषेध दिवस’ है। धूम्रपान की लत को छुड़ाने और लोगों में जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल मार्च महीने के दूसरे बुधवार को यह दिवस मनाया जाता है। इस साल यह दिवस 8 मार्च को मनाया जा रहा है। नो स्मोकिंग डे का उद्देश्य धूम्रपान से होने वाली बीमारियों को कम करना है।

No Smoking Day in Hindi: धूम्रपान से हमारे पूरे शरीर के विभिन्न अंगों पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। फेफड़ों, लीवर, किडनी दिमाग सहित कई अंगों पर अनेकों खतरनाक बीमारियों को उत्पन्न करने के साथ साथ यह हमारे सूक्ष्म शरीर पर भी बुरा प्रभाव डालता है। धूम्रपान हमारे भक्ति मार्ग में बाधक है, साथ ही इससे हार्ट अटैक, लंग कैंसर, माउथ कैंसर, किडनी फेल, अस्थमा आदि अनेकों खतरनाक बीमारियां होती है।  

आदरणीय गरीब दास जी महाराज इसके बारे में कहते हैं 

“भांग, तम्बाकू छोेतरा, आफू और शराब,

गरीब दास कौन करे बंदगी ये तो करे खराब ||” 

No Smoking Day [Hindi]: तम्बाकू का इतिहास

संत गरीबदास जी की वाणी में तम्बाकू की उत्पत्ति के बारे में प्रमाण है कि तम्बाकू की उत्पत्ति गाय के खून से हुई है, इसके सेवन करने वाले को गाय के खून पीने के बराबर पाप लगता है ।

खु नाम खून का तमा नाम गाय,  

सौ बार सौगंध इसको न खाय ||

नशा छोड़ना इतना मुश्किल क्यों

नशा चाहे धूम्रपान (No Smoking Day Hindi) का हो या फिर किसी भी चीज का छोड़ना आसान नहीं होता है। धूम्रपान से 7000 हानिकारक तत्व निकलते हैं जिनमें से 250 तो सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं, इन्हीं हानिकारक तत्वों के कारण शरीर के तंत्रिका तंत्र पर भी असर होता है। इंसान नशे का आदी हो जाता है नशा मुक्त नहीं हो पाता है। हर वर्ष 70 लाख लोगों की मृत्यु का कारण धूम्रपान है।

■ Read in English: No Smoking Day: Know The Easiest Way To Quit Smoking

सतभक्ति से नशा मुक्ति संभव है – लाखों लोग हो रहे हैं नशामुक्त

पूर्ण संत से नाम उपदेश लेकर सतभक्ति करने वालों भक्तों के नशे का नाश हो जाता है। उनके अंदर के विकार दूर हो जाते हैं, 

गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते हैं 

जब ही सतनाम हृदय धरो, भयो पाप को नाश,

जैसी चिंगारी अग्नि की, पड़ी पुरानी घांस ||

पूर्ण संत से उपदेश लेने के बाद उनके बताए भक्ति मार्ग पर चलने से हमारे प्रारब्ध के पाप कर्मों का भी नाश हो जाता है और वे तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं जिनके लाखों अनुयायियों नें नशा छोड़ दिया है और अब निरोगी जीवन जी रहे हैं।

कौन है वर्तमान में तत्वदर्शी संत?

तत्वदर्शी संत के बारे में हमारे धर्मग्रंथों में भी वर्णन देखने को मिलता है, 

संत गरीबदास जी की वाणी से प्रमाण-

सतगुरु के लक्षण कहूं, मधुरे बैन विनोद |

चार वेद, छ: शास्त्र कहें अठारह बोध | |

तत्वदर्शी संत वह है जो हमारे सारे धर्म ग्रंथों गीता, बाइबिल, कुरान शरीफ, गुरुग्रंथ साहिब वेदों आदि सतग्रंथो के आधार पर सटीक तत्वज्ञान बताते हैं, जो पूरे विश्व में एक ही होते हैं जो आज संत रामपाल जी महराज जी हैं जिनसे उपदेश प्राप्त करके लाखों लोग नशा मुक्त हो चुके हैं और शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं, आप से निवेदन है कि आप भी उनसे निशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त कर अपने और अपनों का कल्याण कराएं। अधिक जानकारी हेतु Sant RampalJi Maharaj App डाउनलोड करें।

FAQ About धूम्रपान निषेध दिवस (No Smoking Day 2023)

Q. नो स्मोकिंग डे अर्थात धूम्रपान निषेध दिवस कब मनाया जाता है?

Ans. नो स्मोकिंग डे प्रतिवर्ष मार्च महीने के दूसरे बुधवार के दिन मनाया जाता है।

Q. पहली बार धूम्रपान निषेध दिवस (नो स्मोकिंग डे) कब मनाया गया था?

Ans. रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड में 1984 में पहली बार धूम्रपान निषेध दिवस मनाया गया था।

Q. धूम्रपान से कौन-कौन से घातक रोग हो सकते है?

Ans. धूम्रपान करने वाले मनुष्य को कैंसर, हृदय रोग, हृदयाघात, फेफड़ों के रोग तथा अन्य कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

Q. क्या धूम्रपान से पूर्ण छुटकारा सम्भव है?

Ans. हां, पूर्ण गुरु द्वारा दी गई सत्यसाधना के प्रभाव से धूम्रपान से पूर्ण छुटकारा संभव है वो भी बिना किसी खर्चे के।

Q. नशे से मुक्ति पाने के लिए क्या करना चाहिए?

Ans. संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा लेकर आज ही नशे की लत से हमेशा के लिए मुक्ति पाएं। लाखों लोग संत रामपाल जी महाराज जी से नामदीक्षा प्राप्त करके नशे के चंगुल से आजाद हो चुके हैं और सुखी जीवन जी रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: International Women’s Day 2023 (Hindi) पर जानिए कैसे वापस मिल सकता है महिलाओं को उनका सम्मान?

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International Women’s Day in Hindi ऐसे मिलेगा महिलाओं को सम्मान

Last Updated on 8 March 2023, 2:34 PM IST: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day in Hindi) प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है। इस वर्ष भी यह प्रतिवर्ष की तरह 8 मार्च को मनाया जाएगा। आज हम जानेंगे इस नारीत्व के उत्सव के विषय में कुछ बिंदु। नारी अपने प्रत्येक रूप में सम्माननीय है। यूँ तो महिलाओं के लिए किसी ख़ास दिवस की दरकार नहीं है। प्रत्येक दिन उनका समर्पण अपने घर परिवार और समाज में रहता है। केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में पितृसत्तात्मक सोच का बोलबाला रहा है जिसने स्त्री के महत्व को एक लंबे समय तक नज़रंदाज़ किया है। लेकिन बीते कुछ समय से सभ्यता ने करवट ली है और महिलाओं ने सीमाओं से परे हर क्षेत्र में अपना प्रदर्शन किया है। महिला बेटी है, माँ है, पत्नी है, बहन है, दोस्त है और हर किरदार में महिला का अपना महत्व है।

Table of Contents

कब है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day in Hindi)?

जैसे कि ऊपर बताया जा चुका है कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ( International Women’s Day 2023) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष भी महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाएगा, यह अपने आप में महिला शक्ति को प्रदशित करता है। इस दिन दुनिया की महान महिलाओं को याद किया जाता है, इतना ही नहीं घर की आम गृहणियों को भी सम्मानित किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023: क्यों मनाया जाता है महिला दिवस?

International Women’s Day in Hindi: महिला दिवस महिलाओं के साहस का प्रतीक है। इसकी कहानी ऐसी है कि 1900 के पहले दशक में जब महिलाओं को अत्यधिक वेतन की असमानता, मतदान के अधिकारों की कमी का सामना करना पड़ा था। उस समय अपने अधिकारों की माँग के लिए सन 1908 में न्यूयॉर्क शहर में कुल 1500 महिलाओं ने आंदोलन किया। 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित किया और 1910 में कोपेनहेगन में महिलाओं द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का दर्जा मिला। वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने भी इस दिवस को प्रतिवर्ष एक नई थीम के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का सुझाव दिया।

महिला दिवस मनाने की आवश्यकता क्या है?

वैसे तो यह दिन पूरे विश्व में मनाया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है इसकी आवश्यकता क्या है। क्या आपने कभी सोचा कि महिला दिवस सिर्फ महिलाओं को सम्मान देने के लिए नही मनाया जाता बल्कि महिलाओं को उनके हक़ दिलाने के लिए मनाया जाता है। आज भी स्त्री को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता, जहा एक तरफ उसको देवी के रूप में पूजा जाता है, वहीं दूसरी तरफ बलात्कार की खबर सुनने को मिलती है। यहाँ तक कि इतना पढ़ने- लिखने के बाद भी महिलाए घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं, कभी कभी तो देखने को मिलता है आस पड़ोस के लोग भी महिला को उसके पति से छुड़ाने का प्रयास नहीं करते। यह दिन महिलाओं को जागृत करने के लिए भी मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (Women’s Day in Hindi) का इतिहास

अगर सूत्रों की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि सन् 1908 में न्यूयॉर्क में महिलाओं ने अपने काम के घण्टे कम करने लिए मार्च निकाला था, ऐसा कहा जाता है उस समय मार्च करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग 15000 थी। इसी दिन के ठीक एक साल बाद यानी 1909 में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस (National Women’s Day) घोषित कर दिया था, जोकि 28 फरवरी को मनाया गया। उसके बाद 1913 में महिला दिवस की तारीक में बदलाव किया गया और फिर 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने लगे।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की थीम (International Women’s Day Theme in Hindi)

International Women’s Day 2023 Theme: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की थीम है डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी (DigitALL: Innovation and technology for gender equality)। एंब्रेस इक्विटी (Embrace Equity) इसका मैसेज है। लैंगिक समानता पर ध्यान देना, हर समाज का हिस्सा है। इक्विटी और समानता के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। Embrace Equity का उद्देश्य दुनिया को यह बताना है कि समान अवसर पर्याप्त क्यों नहीं हैं। लोग अलग-अलग जगहों से शुरू करते हैं, इसलिए सच्चे समावेशन और जुड़ाव के लिए समान कार्रवाई की आवश्यकता होती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 पर क्या है खास?

  • प्रारंभ से ही डिजिटल दुनिया में महिलाओं का अधिकाधिक योगदान रहा है। महिलाओं के अनेकों प्रयत्नों से ही डिजिटल दुनिया अपने वर्तमान रूप में परिवर्तित हो पाई है। परंतु उनके इस योगदान का न तो सम्मान किया गया, न ही उसकी सराहना की गई। आज भी डिजिटल दुनिया में महिलाओं को पिछड़ा रखा गया। यही कारण है कि महिलाएं डिजिटल दुनिया के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमताओं के अनुकूल कार्यरत नहीं हो पाती है। डिजिटल दुनिया के कई क्षेत्र जिनमें महिलाएं पुरुषों से कई गुना बेहतर कर सकती थी, आज पुरुष प्रधान समाज होने की वजह से पिछड़े हुई हैं।  
  • परंतु वर्तमान डिजिटल दुनिया में महिला व किशोरी सशक्तिकरण कार्यक्रमों के प्रयासों से पिछड़े और पीड़ित वर्ग को समान अधिकार मिले, इसके लिए कई रास्ते खोले जा रहे हैं। इससे महिलाओं को अनेकों सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। आशा है कि डिजिटल शिक्षा से लेकर महिलाओं की अनेकों समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा। महिलाओं के प्रति दुराभाव समाप्त होगा। 
  • इस वर्ष 8 मार्च 2023 को अनेकों सरकारी, व गैर सरकारी संस्थान तथा निजी संस्थान महिलाओं के लिए डिजिटल दुनिया को सुरक्षित, अनुकूल तथा समदृष्टि बनाने के लिए प्रयत्न करेंगे। इनका उद्देश्य डिजिटल दुनिया को न सिर्फ महिलाओं व बेटियों के लिए, अपितु समस्त मानव समाज के लिए समान व सुरक्षित बनाना है। 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 (International Women’s Day in Hindi): कार्यक्रम

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2013 के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW67) के 67वें सत्र के साथ संरेखित है। यह कार्यक्रम 8 मार्च 2023, बुधवार को 10-11:30 पूर्वाह्न ईएसटी के बीच आयोजित किया जा रहा है। इच्छुक प्रतिभागियों को भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र वेब टीवी में शामिल होने की आवश्यकता है।

International Women’s Day [Hindi]: नारी का स्थान और महत्व

अगर बात करें महिलाओं के स्थान की तो कहने को तो सभी कहते हैं कि बेटा – बेटी एक सम्मान हैं लेकिन फिर भी बेटी के साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी लोगों की यह सोच है लेकिन फिर भी बड़ा तबका यही सोचता हैं। आज भी नारी को केवल घर की चारदीवारी के अंदर काम करने वाली के रूप में देखा जाता है, आज के दौर में भी महिलाओं को बोला जाता है कि तुम ऑफिस के कामों के लिए नहीं घर के कामों के लिए बनी हो। महिलाओं के साथ बलात्कार, घरेलू हिंसा आदि के मामले आम अखबार में पढ़ने को मिल जाते हैं, और तो और लोग छोटी बच्चियों को भी नहीं छोड़ते। वहीं दूसरी और बात करें हमारे सदग्रंथों की तो उनमें महिलाओं को पूरा सम्मान दिया गया है, हिंदू धर्म में तो औरत को देवी का दर्जा दिया गया है।

महिला, समाज और कानून

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए कानून, संस्था एवं अनेकों प्रावधान बनाये गए हैं। महिलाओं के बेहतर आज और सुरक्षित कल के लिए लगातार सभी ओर से प्रयास होते रहे हैं। भारत की बात करें तो भारतीय संविधान में महिलाओं से सम्बंधित अपराध जैसे सती प्रथा, दहेज प्रथा, छेड़छाड़, बलात्कार, प्रताड़ना आदि से सम्बंधित कानून बनाए गए हैं। कानून बनाना अलग बात है और कानून लागू होना अलग बात है। समाज में कानून से बचने के चोर दरवाजे हमेशा ढूँढ़ लिए जाते हैं। दहेज के नाम पर औरतें अब भी जिंदा जलाई जाती हैं, बलात्कार के बाद आग में फूँक दी जाती हैं, प्रतिदिन आते जाते छेड़छाड़ का सामना करती हैं, भ्रूण हत्या का सामना करती है। 

■ Read in English: International Women’s Day: Know The Role of Innovation & Technology in Empowering Women

समाज में अनेकों ऐसी प्रथाएँ रही हैं जिनमें महिलाओं को निकृष्टतम समझा गया है। इसके निवारण लिए अनेकों कानून बनाये गए जिनमें महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय दंड संहिता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त औरतों की खरीद फरोख्त पर रोक से लेकर हिन्दू विवाह एक्ट तक अपराधों पर रोक लगाने एवं औरतों को समानता का दर्जा देने के लिए कदम उठाये गए हैं ।  

आखिर क्यों समाज का स्तर गिरता जा रहा है?

International Women’s Day in Hindi: भारत जैसे महान देश में भी आये दिन यौन उत्पीड़न की खबरे सुनने को मिल जाती हैं आखिर क्या कारण है कि बेटी घर में भी सुरक्षित नहीं है। यहाँ तक कि भाई, बाप ने भी लड़की का यौन उत्पीड़न किया यह खबरे देखने को मिल जाती है, यहाँ से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि समाज में लोगों का मनोबल गिर चुका है। आपने कभी सोचा है इन सब का कारण क्या है? सबसे बड़ी बात तो घर का माहौल है जहा से बच्चे संस्कार सीखते हैं।

अगर घर में अच्छी शिक्षा दी जाए तो बच्चों का व्यवहार बाहर भी अच्छा होगा। लोग परमात्मा से दूर होते जा रहे हैं, केवल धन कमाना उदेश्य रह गया है। दूसरी वजह बॉलीवुड फ़िल्में, गाने आदि है जिनसे बच्चे बहुत कुछ गलत सीखते हैं। लेकिन संत रामपाल जी महाराज के शिष्य इन सब का बहिष्कार करते हैं क्योंकि इन सब का हमारे दिमाग पर गलत असर पढ़ता है। यह बॉलीवुड फिल्में रेप, नशा, चोरी, दहेज प्रथा जैसी बुराइयों को बढ़ावा देती हैं। लेकिन संत रामपाल जी का ज्ञान ऐसा है कि इन सब को जड़ से खत्म कर सकता है।

सन्त रामपाल जी ने दिलाया बराबरी का हक़

International Women’s Day 2023 Special: समाज में महिलाओं का आकलन सदैव कम किया गया है। परमात्मा के संविधान में प्रत्येक जीव उसके जाति, लिंग, रंग से परे बराबर है। लेकिन तथाकथित धर्म के ठेकेदारों ने धर्म अनुसार महिला को देवी का दर्ज़ा तो दिया पर साथ ही अनेकों बंदिशें भी उस पर लगा दी। वह कब शुद्ध है कब अशुद्ध यह निर्धारित करने का ठेका भी धर्म के ठेकेदारो ने ले लिया। महिलाएं क्या कर सकती हैं और क्या नहीं यह समाज ने अपनी सहूलियत से निर्धारित किया। 

स्त्री को उसके असली सम्मान का हक़ दिलाया है सन्त रामपाल जी महाराज ने। संविधान, संस्थाएं तो दशकों से लगे हैं लेकिन स्त्री की स्थिति समाज में नहीं सुधर सकी। कानून तो बने लेकिन इन्हें हरकत में लाना सदियों पुराने समाज में कठिन रहा। सन्त रामपाल जी महाराज ने अब स्त्रियों को उनका हक़ दिया है। उन्हे समझाया है कि स्त्री और पुरुष के परे वे आत्मा हैं।

सन्त रामपाल जी ने अपने तत्वज्ञान में समझाया है कि यह शरीर स्त्री और पुरुष का आवरण मात्र है। उन्होंने बेटियों को बेटों से बेहतर ठहराया। उनका बताया तार्किक तत्वज्ञान समाज में फैले रूढ़िवाद पर तमाचा है। सन्त रामपाल जी महाराज ने बेटियों के लिए ऐसे स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव रखी है जिसने बेटियों को खुलकर हँसने का अवसर दिया है। सन्त रामपाल जी ने अपने तत्वज्ञान के आधार पर समझाया है कि स्त्री पुरुष के बराबर नहीं बल्कि कुछ आगे ही है।

International Women’s Day in Hindi: सन्त रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान ने ऐसा असर डाला है कि लोग स्वयं दहेज नहीं लेना चाहते। हजारों बेटियां आज प्रसन्नता से सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही हैं। यह समाचार सन्त रामपाल जी महाराज एप्प पर भी प्रतिदिन देखे जा सकते हैं। संत रामपाल जी के ज्ञान में ऐसा क्या है कि लोग स्वयं ही अपराधों से मुक्त होने की ओर अग्रसर होना चाहते हैं। जानने के लिए देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल। 

क्या सीख देते हैं संत रामपाल जी महाराज?

संत रामपाल जी महाराज कोई आम संत नहीं हैं, बल्कि वो एक ऐसे संत हैं जिनके वचन में शक्ति है। संत रामपाल जी महाराज सिर्फ बुराइयों से अवगत ही नहीं करवाते, बल्कि वो अपना ज्ञान सुना के बुराइयों को छुड़वाते भी हैं। संत रामपाल जी के शिष्य उनके नियमों का सख़्ती से पालन करते हैं, संत रामपाल जी के अनुयायी चोरी, जारी आदि बुराइयों से दूर हैं। आइये जानते हैं संत रामपाल जी के शिष्य क्या नियम पालन करते हैं:-

  • संत रामपाल के अनुयाई न दहेज लेते हैं न देते हैं उनके शिष्य बिना दहेज के शादी करते हैं। ऐसे में संत रामपाल जी अच्छा समाज तैयार कर रहे हैं।
  • संत रामपाल जी के शिष्य लड़का या लड़की में अंतर नहीं मानते, क्योंकि उनका कहना है दोनों परमात्मा के जीव हैं। क्योंकि उनका मानना है स्त्री हो या पुरुष दोनों को परमात्मा पाने का अधिकार है। कबीर साहेब कहते हैं:-

कबीर, मानुष जन्म पाय कर, नहीं रटैं हरि नाम।

जैसे कुआँ जल बिना, बनवाया किस काम।।

  • संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई चोरी, जारी नहीं करते क्योंकि हमारे सदग्रंथों के अनुसार हम अगर ऐसी गलती करते हैं तो उसका हिसाब ईश्वर के दरबार में देना पड़ता है।
  • संत रामपाल जी के अनुसार अनुयाई को पराई स्त्री को, अपनी बहन, माँ, बेटी के समान समझना चाहिए।

गरीबदास जी महाराज कहते हैं:-

गरीब, पर द्वारा स्त्री का खोलै, सत्तर जन्म अन्धा हो डोलै।।

इसके अलावा संत रामपाल जी महाराज ने नशा, रिश्वतखोरी, भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों पर भी रोक लगाई है। इसके अलावा उनके शिष्य रक्तदान शिविर आदि भी लगाते हैं, इससे यह साबित होता है संत रामपाल जी महाराज अच्छे समाज सुधारक हैं।

संत रामपाल जी महाराज के बारे में भविष्यवक्ताओं का क्या है कहना?

संत रामपाल जी के बारे में हमारे सदग्रंथों में भी प्रमाण है। संत रामपाल जी के पूर्ण संत होने का प्रमाण केवल हमारे सदग्रंथो ने ही नहीं बल्कि दुनिया भर के भविष्यवक्ताओं ने भी दिया हैं। उस संत के बारे में नास्त्रेदमस, अमेरिका के श्री एण्डरसन, इंग्लैण्ड के ज्योतिषी ‘कीरो’, अमेरिका की महिला भविष्यवक्ता ‘‘जीन डिक्सन’’ आदि ने भी अपनी भविष्यवाणियों में कहा है कि पूरे विश्व में वह संत अपने ज्ञान से तहलका मचा देगा। उस संत के बारे में लिखा है उसके ज्ञान और बताई भक्ति से विश्व मे शांति स्थापित होगी और उसका बताया ज्ञान पूरे विश्व में फैलेगा। कबीर साहेब कहते हैं

कबीर, गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।

गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।।

FAQS on International Women’s Day 2023 (Hindi)

प्रश्न: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कब मनाया जाता है? 

उत्तर: प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है।

प्रश्न: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की थीम क्या है?

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की थीम है : डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी (DigitALL: Innovation and technology for gender equality)।

प्रश्न: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व क्या है?

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विशेष महत्त्व है। इस दिन को न केवल महिलाओं को उनके खोए हुए समान दिलाने, बल्कि महिलाओं को समान अधिकार व अधिकार के प्रति जागरूक बनाने के लिए मनाया जाता है। 

प्रश्न: कौन से ऐसे संत है जिन्होंने दिलाया है महिलाओं को खोया हुआ सम्मान?

उत्तर: संत रामपाल जी महाराज वह संत हैं, जिन्होंने महिलाओं को खोया हुआ सम्मान दिलाने के लिए अनेकों प्रयत्न किए है। दहेज प्रथा को 17 मिनट के रमैनी विवाह पद्धति से ख़त्म किया है। 

International Women’s Day 2023: Know The Role of Innovation & Technology in Empowering Women

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International Women’s Day 2023 Theme, History, Quotes, Event

Last Updated on 7 March 2023, 7:19 PM IST: International Women’s Day 2023: It has been more than 100 years since this day is reminding the whole world that till date gender inequality has proved to be a curse for the entire globe. There is still discrimination seen at some point between men and women. Gracious God Kabir has given us two different bodies in the form of men and women but we are equal as a soul in His eyes. Hence this discrimination stands incomplete. Let us know about the day in detail.

What is International Women’s Day?

International Women’s Day or Happy Women’s Day is an international event celebrated annually by default on 8th March in the entire globe so as to bring the problem of gender inequality into the limelight again and again. Also, this day is special for women worldwide as this day acknowledges empowerment of women and their contribution in different fields.

Theme of International Women’s Day 2023

Happy women’s day 2023: The theme for Women’s day 2023 is “DigitALL: Innovation and technology for gender equality” which clearly demonstrates the role of the digital field i.e., the impact of innovation and technology in attaining gender equality.

What is the history behind International Women’s Day? 

Happy women’s day 2023: Women’s Day was first observed in America on 28th February 1909 when the Socialist Party went onto streets protesting against the uncomfortable working conditions for women in the previous year. On 19th March 1911, Austria, Denmark, Germany and Switzerland celebrated the first official International Women’s Day. More than 1 million people were observed there to highlight the need for women’s rights in front of the globe in the form of rallies, representations etc.

Over the next few years, European countries marked 8th March as international women’s day but it became official by the United Nations in 1975. Moreover, As per the International Women’s Day website, Purple, Green, and White are the official colors which some people wear on this day. Purple signifies justice and dignity. White symbolizes purity. Green signifies hope.

International Women’s Day Events in 2023

International Women’s Day is being observed with an international event organized by the United Nations. The focus of the event is aligned with the 67th session of Commission of Status of Women (CSW67). The event is being organized on 8th March 2023, Wednesday between 10-11:30 am EST. Willing participants need to join UN Web Tv to participate.

Need for International Women’s Day

Although since 1911, the situation has changed very much but it is still not upto the mark as desired. Hence, IWD is pivotal and is a must in improving the condition of women. Numbers speak louder than words in magnifying the extent upto which the problem has been dominating us. Let’s go through them—

  • Two thirds of the children who are deprived of education are girls. And around 75 percent of the illiterate adults worldwide are women. 
  • Currently women acquire 21% of the world parliamentary seats, and only 8% of cabinet ministers are women. 
  • One amongst three women are found to be a sufferer of gender parity and violence. 
  • The 30 percent target of female decision makers by the UN is being fulfilled by only 46 countries. 
  • 21 female deaths are reported every day for dowry in India. 
  • Almost 2.5 lakh cases of rape or attempted rape are reported by the Police worldwide annually. 

Although the Government frames various policies to safeguard women’s rights, the improvement in the condition of women is still a matter of concern. And this day is a kind of hope in changing the attitude of society towards girls. 

Significance of International Women’s Day — Understanding the Solution of Gender Parity

Happy International women’s day 2023: The true meaning of significance of any such day is adopting the solution to eradicate this curse completely. At present, Saint Rampal Ji Maharaj Who has come onto the holy land of Haryana is successfully manifesting through His devotees the way of True Worship. After attaining True Spiritual Knowledge (Tatvgyan) from Him, it is so easy to end any sort of problem (physical, mental, financial or social). 

■ Also Read: International Women’s Day-An Inspirational Story of the Draupadi 

What Are the Efforts of Saint Rampal Ji Maharaj for Women?

Saint Rampal Ji Maharaj’s efforts towards building up a clean society especially for upgrading girls condition are:-

  • The devotees of Saint Rampal Ji perform their marriage without taking dowry.
  • The devotees never consume drugs. It avoids a lot of crimes as it is the habit of people to cause nuisance after consuming drugs and alcohol. 
  • The devotees are adopting simplicity over materialism. And that’s how society is reforming.
  • Upon the birth of a boy or a girl, a family cannot differentiate between them on any basis after taking Naam Diksha (Initiation) from Saint Rampal Ji Maharaj
  • Not even a single devotee takes or gives bribes & dowry and never accumulates false money.  

Saint Rampal Ji Maharaj is contributing a lot in creating an evil free society where girls would be no more a burden for a family. They always say #BetiAbBojhNahi (Daughter is not a burden).

Every Soul Is Equal for God Kabir, Whether a Man or a Woman

Happy women’s day 2023: In this educated world, in most of the regions, people still distinguish between a girl and a boy considering girls as a burden. On the contrary, for Supreme Power Kabir Sahib Ji, all are equal, whether a girl or a boy. 

Saint Rampal Ji Maharaj is the only representative of Kabir Sahib Ji. And He is continuously preaching His (Kabir Sahib Ji’s) ideologies. He is the only saint whose devotees are not practicing any sort of inequality especially based on gender. Moreover, only by taking refuge in Him (Saint Rampal Ji), the agony of birth and death can finally end. And a soul can move to its native place Satlok where everything is everlasting and immortal to make this human life successful and thus attain salvation. Thus, one should take Initiation (Naam) from Saint Rampal Ji Maharaj in order to attain Moksha (Salvation) through True devotion. 

Kabir Saheb Ji says:-

Manush janam paye kar, Jo nahi rate Hari Naam |

Jaise kuua jal bina, Fir banwaya kya kaam ||

International Women’s Day 2023 Quotes

  • A soul can connect to God and it doesn’t matter whether it is a male or a female. 
  • The right way of worship can ensure gender equality throughout the entire globe. 
  • Society lags in the awareness of True Spiritual Knowledge to overcome gender inequality. 
  • Gender inequality is yet another way by Satan (Kaal Brahm) to make us entangled in his web. 
  • Supreme God Kabir is unbiased for a pious soul who does worship, abiding by His rules to achieve every desire.

International Women’s Day FAQ

Question: Who came up first to celebrate International Women’s Day as a holiday worldwide?

Answer: Clara Zetkin, a women’s right advocate and activist.

Question: What percentage of women use the internet as per International Telecommunication Union (ITU)?

Answer: 63%

Question: When did women in Russia get the right to vote?

Answer: On the occasion of International Women’s Day in 1917.

Question: Who is Marilyn vos Savant?

Answer: She is the woman with the highest recorded IQ with the score of 228.

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Shab E Barat Hindi 2022 Date जानिए शब-ए-बारात की सच्चाई

Last Updated on 7 March 2023, 4:41 PM IST: शब-ए-बारात 2023 (Shab E Barat Hindi) | इस्लामिक लोक मान्यताओं के अनुसार शब-ए-बारात (Shab E Barat 2023) में इबादत करने वाले लोगों के सारे गुनाह माफ़ हो जाते हैं इसलिए लोग शब-ए-बारात में अल्लाह की इबादत अधिक करते हैं और उनसे अपने गुनाहों को माफ़ करने की दुआ मांगते हैं । केवल दुआ मांगने और नमाज़ पढ़ने से नहीं सतभक्ति करने से कटते हैं पाप और मिलती है खुदा से माफी और मगफिरत ( मोक्ष)। बाख़बर संत की शरण में रहकर भक्ति करने से रूह को दोजख और बिहिश्त नहीं जाना पड़ता। सत भक्ति करने मात्र से होगा अल्लाह का जमीं पर दीदार।

Shab E Barat 2023 [Hindi]: (शब-ए-बारात) से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

  • हिजरी कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बारात को इबादत की रात कहा जाता है यह हर साल शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। इस मौके पर लोग अल्लाह से अपनी बेहतरी के लिए दुआ करते हैं और गुनाहों की माफी मांग कर इबादत में रात बिताते हैं।
  • इस मौके पर मुस्लिम समाज में घरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। शब-ए-बारात में मस्जिदों और कब्रिस्तानों में भी खास तरह की सजावट की जाती है। साथ ही लोग अपने बुजुर्गों की कब्रों पर जाकर चरागां करते हैं और उनके गुनाहों की माफी के लिए दुआ मांगते हैं।
  • लोक मान्यता के मुताबिक चार मुकद्दस रातों, आशूरा की रात, शब-ए-मेराज और शब-ए-कद्र में से एक शब-ए-बारात भी है इसे बहुत ही मुकद्दस माना जाता है।
  • नमाज़, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तान की जियारत और हैसियत के मुताबिक खैरात करना इस रात के अहम काम हैं।
  • ऐसी मान्यता कि इस रात सच्चे दिल से अगर अल्लाह की इबादत की जाए और अपने गुनाहों से तौबा की जाए तो अल्लाह इंसान को हर गुनाह से बरी कर देता है। किंतु सच्चाई यह है कि बड़ा अल्लाह कबीर ही है जो सच्ची इबादत करने वाले अपने बंदे के गुनाहों को माफ कर देता है ।

Shab E Barat 2023 Date [Hindi]

शब ए बारात शाबान की 14वीं रात को मनाया जाता है जो इस्लामी कैलेंडर में आठवां महीना है। इस साल 2023 में शब ए बारात 7 मार्च की शाम को पड़ रहा है जो बुधवार 8 मार्च की शाम को समाप्त हो रहा है।

क्यों मनाया जाता है शब-ए-बारात (Shab E Barat in Hindi)?

लोक मान्यताओं के आधार पर ऐसा माना जाता है कि इस दिन अल्लाह अपने बंदों के कर्मों का लेखा जोखा करता है और कई सारे लोगों को नरक से आज़ाद भी कर देता है। इसी वजह से मुस्लिम लोग इस पर्व वाले दिन रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं। यह सब लोक मान्यताए है, सच्चाई का इससे कोई लेना देना नहीं है। 

शब-ए-बारात पर सुन्नी समुदाय में हलवा खाने की है रिवायत

इस दिन सुन्नी मुस्लिमों द्वारा हलवा खाने की भी परंपरा है। जिसके पीछे की मान्यता ये है कि इस दिन उहुद की लड़ाई में मुहम्मद साहब का एक दांत टूट गया था। जिस कारण इस दिन उन्होंने हलवा खाया था, यही कारण है कि इस दिन हलवा खाना सुन्नत माना गया है।

Read in English: Shab-E-Barat: Sat-Bhakti Can Bestow Fortune And Forgiveness

मुस्लिम समुदाय शब-ए-बारात (Shab E Barat 2023) को तकदीर तय होने का समय मानते हैं

मुस्लिम शब-ए-बारात को रात भर तिलावत, ज़ियारत करते हैं। शब-ए-बारात (Shab E Barat 2023 in Hindi) सिर्फ गुनाहों की माफ़ी और मरहूमों के लिए दुआओं की रात नहीं है, बल्कि कौन पैदा होगा, किसकी इस दुनिया से रुखसती होगी? किसे दुनिया में क्या हासिल होगा? कितनी रोज़ी मिलेगी? किसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे? यानी हर मुसलमान की तकदीर इस रात तय हो जाएगी, ऐसा माना जाता है।

जो लोग दुनिया से जा चुके हैं उनके लिए दुआएं मांगी जाती हैं। खुद के लिए अल्लाह से माफ़ी मांगते हैं और उन्हें जन्नत नसीब हो, उनकी रूह को सुकून मिले, इसके लिए अल्लाह से दरख्वास्त करते हैं ।

पैगंबर हज़रत मुहम्मद को अल्लाह ने बाखबर की खोज कर इबादत करने को कहा था

इस्लाम के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब ने इसे रहमत की रात कहा है। कुरान शरीफ के ज्ञानदाता ने हजरत मोहम्मद जी से कहा है कि बड़े अल्लाह कबीर की इबादत करने से सभी, गुनाह माफ हो जाते हैं अर्थात सभी पाप खत्म हो जाते हैं और उसकी इबादत के लिए किसी बाखबर की खोज करो, वही अल्लाह हू कबीर की इबादत की सच्ची विधि बताएगा।

कौन है व कैसा है वह अल्लाह जो करता है सबके गुनाहों को माफ़?

कुरान की सूरत फुरकानि 25, आयत नंबर 52,58,59 में बताया गया है कि

आयत 52:- फला तुतिअल् – काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा (कबीरन्)।

Shab E Barat Hindi: हज़रत मुहम्मद जी का खुदा कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को बड़ा अल्लाह नहीं मानते। आप मेरे द्वारा दिए इस कुरान के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही बड़ा अल्लाह है तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना (लड़ना नहीं) अर्थात् उसके दिये ज्ञान व मर्यादा पर अडिग रहना।

आयत 58:- व तवक्कल् अलल् हरिूल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिही व कफा बिही बिजुनूबि अिबादिही खबीरा (कबीरा)।

हज़रत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं वह कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर! उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला नहीं है अर्थात् वास्तव में अविनाशी है। तारीफ के साथ उसकी पाकी (पवित्र महिमा) का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह इबादत के योग्य है तथा अपने बंदों के सर्व गुनाहों को खत्म करने वाला है।

आयत 59:- अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज व मा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन् सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल् बिही खबीरन्(कबीरन्)।

कुरान शरीफ बोलने वाला अल्लाह किसी बड़े अल्लाह की तरफ इशारा करते हुए कह रहा है कि वह बडा़ कबीर अल्लाह वही है जिसने ज़मीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन ऊपर अपने सतलोक में सिंहासन पर विराजमान हो (बैठ) गया। उस बडे़ कबीर अल्लाह की जनकारी बाखबर (तत्वदर्शी) से पूछो, वो बाखबर ही आपको बड़े अल्लाह की इबादत का सही तरीका बताएगा।

निष्कर्ष

इन तीनों आयतों से यह सिद्ध होता है कि बड़ा अल्लाह कबीर ही इबादत के योग्य है, और वह साकार है क्योंकि तख्त पर बैठने वाला निराकार नहीं हो सकता और वही हमारे गुनाहों को माफ़ कर सकता है तथा किस प्रकार उस बडे़ अल्लाह कबीर  की इबादत करनी चाहिए, उसके लिए हमें बाखबर की खोज करनी होगी।

“शब-ए-बारात” 2023 पर जानें, वर्तमान में कौन है सच्चा बाखबर व अंतिम पैगंबर ?

वर्तमान में वह बाखबर व अंतिम पैगंबर कोई और नहीं बल्कि तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी हैं जो सच्चे खुदा अल्लाह हू कबीर की इबादत का सही तरीका बताते हैं उनकी बताई हुई इबादत करके कई हिंदू – मुस्लिम भाई सच्चे व बड़े खुदा की सही इबादत करके सुखमय, निरोगी, जीवन व्यतीत कर रहे हैं और अल्लाह हू कबीर का दीदार कर रहे हैं। संपूर्ण जानकारी के लिए आप बाखबर संत रामपाल जी महाराज जी का सच्चा कुरान शरीफ़ वाला ज्ञान यूट्यूबचैनल सतलोक आश्रम ” पर जाकर सुन सकते हैं। उनसे नाम उपदेश लेकर इबादत करें इससे आपको अविनाशी जन्नत प्राप्त होगी। उस अविनाशी जन्नत “सतलोक” “नूरी लोक” को प्राप्त किए हुए प्राणी फिर कभी संसार में लौट कर वापस नहीं आते वह हमेशा वहां पर सुखी रहते हैं और सच्चे बड़े खुदा अल्लाह हू कबीर का हरदम दीदार करके आनंदित रहते हैं।

Shab-e-Barat 2023: Only True Way of Worship Can Bestow Fortune and Forgiveness

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Shab-e-Barat 2022 India Date Who Can Bestow Fortune & Forgiveness

Last Updated on 7 March 2023, 4:15 PM IST: A large section of Muslims believes Shab-e-Barat as a holy night of fortune and forgiveness. It is celebrated on the intervening night of 14 and 15 of Shabaan month of the Islamic calendar which falls on 7 March 2023. The readers would know the true knowledge that offers cheerfulness and aid attaining salvation by eradicating the sinful deeds.  

What is Shab-e-Barat?

Shab-e-Barat 2023 is commemorated by a huge Muslim population on the intervening night of 14 and 15 Shabaan month of the Islamic calendar which falls on 7 March 2023. Shab represents night and Barat symbolizes salvation. Shab-e-Barat is believed to be a holy night of fortune and forgiveness.

The Muslims believe that the Almighty decides the fortunes of humans for the approaching year. Shab-e-Barat is also identified as Laylat-al-Baraa or mid-Shabaan. It is observed 15 days in advance to the holy month of Ramadan or Ramzan. The Barelvi and the Deobandi followers Sunni Muslims mostly observe this night.

What Is The Shab-e-Barat 2023 Date in India?

Shab e Barat is commemorated on the 14th night of Sha’ban, which is the eighth month in the Islamic calendar. This Year in 2023, Shab e-Barat falls on the evening of 7 March and ends on the evening of Wednesday, 8 March.

How Do Devotees Pray for Fortune and Forgiveness?

Muslims believe that Allah pardons everyone who prays to do so on this night. After sundown on evening Shab-e-Barat, the devotees begin their prayers with “Isha Ki Namaz”. The long Namaz session lasts for the whole night. Next day Sehri is eaten before the azan. The devotees start fast for Shab-e-Barat after Sehri, however taking fast is useless practice and there is no evidence of it in our holy scripture such as Holy Quran, Holy Bible, Holy Shrimad Bhagwat Geeta, etc. Muslim devotees consider that the prayer on Shab-e-Barat blesses the fortune bestowed upon by Allah. 

How Is Shab-e-barat Celebrated?

There are several ways of celebrating Shab-e-Barat depending upon the country. On this night, traditionally people distribute sweets or local desserts known as “Halwa” or other delicacies to their beloved ones including family members, friends, neighbours and the impoverished. 

Read in Hindi: शब-ए-बारात (Shab E Barat) पर जाने सच्चे खुदा की सच्ची इबादत 

In Iraq and many parts of South Asian countries, people usually distribute sweets whereas the regions of Middle Eastern countries do not celebrate the night.. Some recite Al-Quran and any other act to get Allah’s attention and blessings.

Traditional Rituals Do Not provide Relief From Misfortune

Spirituality is the cure of all kinds of problems. Spirituality does not mean meditation, going to the Temple or Mosque, studying the scriptures. Gods, other than the Supreme God Kabir Sahib or Allah Hu Akbar, can only give fruits according to the past deeds, they can’t add good deeds or can’t remove bad ones from our destiny.

Know the Supreme God

The Supreme God is Allahu Akbar or Kabir Saheb as mentioned in the Quran. Verse 25:52 says “Fala-Tutiyal-Kafiran-ve-Jahidhum-Bihi-Jihadan-Kabiran”. Prophet Muhammad’s God tells, Oh Prophet! Do not listen to the kafir (disbelievers, who instead of one God, worshipping other Gods–Goddesses and Idols) because those people do not consider Kabir as the Supreme God. You may remain firm on the basis of the knowledge of the Quran given by me that Kabir is the only Supreme God, and may struggle (Do Not Fight) and remain rigid for Allah Kabir. 

Bakhabar Is Well Acquainted With All Holy scriptures 

Quran Sharif Surah Al Furqan 25:59 says, He who created the heavens and the earth and what is between Sky and Earth in six days and then established Himself above the Throne – the Most Merciful [Kabir], so ask about Him one well informed. Bakhabar is a well-acquainted Saint who has complete knowledge of all Holy scriptures. He is called the Enlightened Saint/ Dheeranam. Bakhabar is fully aware about the creation of the universes.

Accepting True Devotion Gives Inevitable Benefits

The holy Quran Verse 25:58 says “Va tavakkal’ alal’- harulliji la yamutu va sabbih’ bihm’dihi va kafaa bihi bijunoobi ibadihi Khabira (Kabira)”. The Quran Sharif narrator tells about some other AllahTala Supreme God Allah Kabir, ‘O-Prophet trust that ‘Zinda’ who met you inform as ‘Zinda Saint’, trust Him, who never dies, means He is immortal, and praise Him; means He is different than the Quran Sharif narrator, whom he is telling to praise; that God. He destroys the sins of His devotees. In today’s time all the benefits are possible only by taking the Naam Diksha (Initiation) from Enlightened Saint Bakhabar Rampal Ji Maharaj.

True Way of Worship Is Solution to All Problems

Let us know how one can be liberated from sinful deeds by the true way of worship. It provides prevention from distress and diseases and ultimately complete salvation. Any other kind of worship and meditation does not yield benefit.

The Seeker Should Take the Naam Diksha (Initiation)

Yes, the Supreme God can get the devotees rid of all kinds of worldly sufferings by the Sat-Gyan and Sat-Bhakti as mentioned by Kabir Saheb. For this, the seeker should take the Naam Diksha (Initiation) from the Tatvdarshi Sant Rampal Ji Maharaj and destroy all accumulated sinful deeds. Doing so will provide relief from all worldly sufferings as well as attain Salvation. Listen to Satsang on ‘Satlok Ashram YouTube channel ‘ and read the Sacred Book ‘ The Way of Living‘.

Umesh Pal Murder Case [Hindi]: उमेश पाल हत्याकांड की पूरी कहानी, ऐसे होंगे अपराध खत्म

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Umesh Pal Murder Case [Hindi] उमेश पाल हत्याकांड की पूरी कहानी

Umesh Pal Murder Case: प्रयागराज के उमेश पाल पेशे से वकील थे जिनकी 24 फरवरी 2023 को दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। उमेश पाल 18 साल पहले बसपा विधायक राजू पाल के केस के सबसे अहम गवाह थे। जब वह कार से उतरकर घर की ओर जा रहे थे तभी उनकी हत्या कर दी गई। अब यह फिर से चर्चा में इसलिए है क्योंकि उमेश पाल के मर्डर के एक आरोपी को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।

Umesh Pal Murder Case: मुख्य बिंदु

  • बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के अहम गवाह उमेश पाल की हुई थी हत्या।
  • उमेश पाल पर गोली चलाने वाले उस्मान का हुआ एनकाउंटर।
  • उस्मान को लोग नान बाबा के नाम से जानते थे।
  • उस्मान के पहले एक और शूटर अरबाज को नेहरू पार्क में मारा गया था।

Umesh Pal Murder Case: उमेश पाल हत्याकांड

Umesh Pal Murder Case: प्रयागराज में उमेश पाल पेशे से वकील और बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के एकमात्र चश्मदीद गवाह थे जो 24 फरवरी 2023 को दिन दहाड़े अपने घर के सामने गोलियों और बम से भून दिए गए। यह घटना धूमनगंज थाना क्षेत्र की है। उमेश पाल सहित उनके दो सुरक्षा कर्मी भी मारे गए थे। यह घटना आसपास के सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हो गई थी। गोलियों और बम की आवाज से पूरा इलाका थर्रा गया था। तीनों को एसआरएन अस्पताल ले जाया गया जहां उमेश पाल और सुरक्षाकर्मी संदीप निषाद को मृत घोषित कर दिया गया। राघवेंद्र का इलाज चला लेकिन उसके बावजूद उसने भी दम तोड़ दिया।

Umesh Pal Murder Case News Update: हत्यारों की हुई पहचान

Umesh Pal Murder Case: घटना के बाद उमेश की पत्नी जया ने पूर्व सांसद अतीक अहमद उसके दो बेटों, पत्नी और भाई तथा 9-10 साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। हत्या के लिए आरोपी पांच हत्यारों के लिए पुलिस ने ढाई लाख के इनाम घोषित किए हैं। इस हत्याकांड का मास्टर माइंड अतीक अहमद का बेटा ठहराया जा रहा है। अतीक अहमद तो अभी गुजरात की जेल में है। हत्याकांड में आरोपियों की पहचान असद, गुड्डू मुस्लिम, गुलाम, अरमान, साबिर और शाहरुख उर्फ पिंटू के रूप में हुई है।

Umesh Pal Murder Case: अतीक अहमद के पूरे परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Umesh Pal Murder Case: अतीक अहमद जो गुजरात जेल में है वह उत्तर प्रदेश लाया जा सकता है। इसके लिए अतीक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। अतीक के पूरे परिवार पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार माफियाओं को जड़ से खत्म करेगी। पुलिस बल द्वारा अतीक के कई गुर्गों के यहां छापेमारी की गई। 

अतीक की हत्या के लिए गुंडे जिस क्रेटा गाड़ी में आए थे उसे अतीक के घर के पास से ही बरामद किया गया। उमेश की पत्नी जया का आरोप है कि उसके पति को 2006 में अपहृत करके गलत गवाही दिलवाई गई थी जिसके बारे में कोर्ट में उमेश पाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी और इसी की सुनवाई शुक्रवार को होनी थी। पुलिस बल घटना के बाद ही हरकत में आ गया था और विभिन्न टीमें इस केस की जांच के लिए गठित की गईं हैं।

पहली गोली चलाने वाला उस्मान हुआ ‘ ढेर ‘

Umesh Pal Murder Case: उमेश पाल पर पहली गोली उस्मान ने चलाई थी जिसके लगने के बाद उमेश वापस उठकर अपने घर की तरफ भागे थे लेकिन अन्य शूटर्स ने गोलियां बरसाकर उसकी जान ले ली। गत दिवस सोमवार की सुबह कौंधियारा गांव में उस्मान का एनकाउंटर उत्तर प्रदेश पुलिस ने कर दिया है। इस मुठभेड़ में उस्मान के कंधे, जांघ और सीने में गोलियां लगी थीं। इसके पहले अरबाज को भी पुलिस नेहरू पार्क में ढेर कर चुकी है। उस्मान का असली नाम विजय चौधरी बताया जा रहा है जिसे उस्मान नाम अतीक अहमद की गैंग में शामिल होने पर मिला।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि उसका धर्म परिवर्तन कर दिया गया था। उस्मान पर पचास हजार का इनाम था जबकि अन्य शूटरों पर ढाई लाख का इनाम पुलिस ने रखा है। उस्मान का भाई भी हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है जिस पर हत्या सहित कई गंभीर मुकदमे लगे हैं।

Umesh Pal Murder Case: अरबाज का एनकाउंटर पुलिस ने किया

Umesh Pal Murder Case: अरबाज़ को धूमनगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत ही 27 फरवरी को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस दौरान थाना प्रभारी राजेश मौर्या घायल भी हुए। अरबाज वही क्रेटा गाड़ी चला रहा था जिस पर सवार होकर उस्मान और अन्य हत्यारे उमेश पाल की हत्या के लिए आए थे।

■ यह भी पढ़ें: Vikas Dubey Encounter News Today [Hindi]: आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे ढेर

पुलिस लगातार अतीक अहमद के प्रमुख गुर्गों को पकड़कर कार्यवाही में लगी है। पुलिस ने प्रमुख गुर्गे जफर अहमद के घर पर बुलडोजर चढ़ाकर उसे ध्वस्त कर दिया है। घर की लागत तीन करोड़ बताई जा रही है। जफर का घर मुख्य अड्डा था। कत्ल के बाद भी सभी आरोपी इसी स्थान पर मिले थे। इसके घर पर विदेशी राइफल और तलवारें भी बरामद हुई हैं।

Umesh Pal Murder Case: अतीक अहमद का बेटा असद है गैंग मास्टर

Umesh Pal Murder Case: अतीक अहमद का बेटा असद इस समय गैंग का लीडर है। असद के इशारे पर ही सभी घटनाएं अंजाम दी जाती हैं। इसके गैंग में कई खतरनाक आरोपी शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ कोई न कोई केस चल रहा है। असद के खिलाफ अब तक कोई केस सामने नहीं आया है। वह सेंट जोसेफ कॉलेज का छात्र भी है। असद इस समय भागा भागा फिर रहा है। पहली किसी भी बड़ी घटना में असद इस प्रकार शामिल हुआ था।

गुड्डू मुस्लिम शातिर बमबाज

Umesh Pal Murder Case: गुड्डू मुस्लिम का नाम बहुत पहले से प्रसिद्ध है जो शातिर बमबाज है। गुड्डू मुस्लिम बाइक पर बम बांधकर लोगों को मौत के घाट उतार देता है। गुड्डू मुस्लिम को कई सांसदों और विधायकों की छत्रचाया प्राप्त थी। श्रीप्रकाश शुक्ल, टाडा परवेज और अब अतीक अहमद के गिरोह में वह शामिल था। अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ल को यह अपना गुरु मानता था। राजू पाल हत्याकांड में भी गुड्डू मुस्लिम का नाम शामिल था। ऐसे कई खतरनाक शूटर्स और बमबाज अतीक अहमद के गिरोह में शामिल हैं जिनमें प्रमुख हैं साबिर, अरमान, गुलाम।

Umesh Pal Murder Case: उमेशपाल हत्याकांड का सिलसिलेवार घटनाक्रम

Umesh Pal Murder Case: दिनांक 24 फरवरी को उमेश पाल की घर के सामने ही गोलियों और बमों से निर्मम हत्या की जाती है। 25 फरवरी को सीसीटीवी की मदद से हत्यारे नामजद हुए। पुलिस ने क्रेटा कार अतीक के घर के पास से बरामद की और इस बीच अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन फरार हो गई। 26 फरवरी को सदाकत खान को गिरफ्तार कर लिया गया। सदाकत छात्र है जो इलाहाबाद विश्विद्यालय के मुस्लिम हॉस्टल में रहता था। उसके कमरे में ही इस षड्यंत्र को अंजाम दिया गया था। 27 फरवरी को क्रेटा का ड्राइवर अरबाज पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया। 

28 फरवरी को पुलिस ने क्रेटा कार के असली मालिक नफीस को हिरासत में ले लिया जिसे वह अपने रिश्तेदार को बेच चुका था। 1 मार्च को अतीक की पत्नी का घर बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। 2 मार्च को उमेश के दूसरे सुरक्षाकर्मी की भी मौत हो गई। इसी दिन अतीक के गुर्गे सफदर का मकान भी पुलिस ने बुलडोजर से जमींदोज़ कर दिया।

3 मार्च को भी बुलडोजर के द्वारा अतीक के गुर्गों के मकान ध्वस्त करने की प्रक्रिया जारी रही। 4 मार्च को अतीक के नाबालिग बेटे, जो पुलिस हिरासत में 24 की रात ही ले लिए गए थे, उन्हें बाल संरक्षण गृह भेजा गया। 5 मार्च को हत्यारों पर इनामी राशि 50 हजार से ढाई लाख तक बढ़ाई गई और 6 मार्च को पुलिस ने उस्मान उर्फ विजय चौधरी को भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

Umesh Pal Murder Case: युवाओं में बढ़ती जा रही अपराधिक प्रवृत्ति

Umesh Pal Murder Case: आपराधिक प्रवृत्तियों के संस्कार कम उम्र में ही पड़ने शुरू हो सकते हैं। वर्तमान समय में युवाओं में जो जोश अपराध करने में सामने आ रहा है वह यकीनन सकारात्मक कार्यों में नहीं है। अपराधिक प्रवृत्तियां कभी भी कानून से खत्म नहीं होतीं। आपराधिक तत्व जरूर खत्म किए जा सकते हैं परंतु जब तक इनका पैदा होना जारी रहेगा तब तक इसकी जड़ पर हमला नहीं किया जाता। जड़ हैं संस्कार। 

संस्कार यदि शुभ हैं तो व्यक्ति सकारात्मक कार्यों की ओर झुकता है और यदि संस्कार ठीक नहीं हैं तो भी उन्हें ज्ञान की मदद से उचित दिशा और दशा में मोड़ा जा सकता है। इनके लिए राजनैतिक परिस्थितियां और लालच भी जिम्मेदार है। गोलीबारी, बम धमाके, हत्या, डकैती, बदमाशी निश्चित रूप से कोई अपने बच्चों के भावी भविष्य के रूप में नहीं देखना चाहता। इन विकारों को सत्संग और तत्वज्ञान के माध्यम से ही खत्म किया जा सकता है।

तत्वज्ञान है समाज सुधारक

बात आपराधिक प्रवृत्तियों या अपराधों के दमन की हो अथवा समाज में व्याप्त अन्य बुराइयों को दूर करने की हो तो तत्वज्ञान सबका हल है। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जिन्होंने तत्वज्ञान के माध्यम से लोगों में इन प्रवृतियों को खत्म किया है और अपराध की लगाम कसी है। आज संत रामपाल जी महाराज के अनेकों समागम साल भर में होते हैं जहां प्रतिदिन कई लाखों की संख्या में लोग आते जाते हैं। किंतु किसी भी प्रकार के अपराध की बात दूर छोटी नोंक झोंक भी नहीं होती। यह केवल तत्वज्ञान से संभव है। 

नशा मुक्ति का बीड़ा जो संत रामपाल जी महाराज ने उठाया, उसे करके दिखाया है जोकि आज तक असंभव जान पड़ता था। वास्तव में मनुष्य अपने कर्मों से अनजान रहता है और मनमुताबिक कार्य करता रहता है। जब इसे भगवान के संविधान का ज्ञान होता है और अपने प्रत्येक कर्म के हिसाब का पता तत्वज्ञान के माध्यम से चलता है तो उसकी आत्मा के चक्षु खुल जाते हैं और वह अपराधों की दुनिया से कोसों दूर मनुष्य जन्म के उद्देश्य को सार्थक करने में लग जाता है। 

युवा पीढ़ी लगातार अवसाद, बेचैनी, नशा और अपराध के गर्त में गिर रही है। संत रामपाल जी महाराज की शरण में आए युवा अपना कर्म, किस्मत और जीवन संवार रहे हैं। समाज को ऐसे निर्मल ज्ञान और सत्संग की आवश्यकता है जिससे युवा पीढ़ी सही दिशा में अग्रसर हो और समाज में अपराधों की रोकथाम हो। अधिक जानकारी के लिए निशुल्क डाउनलोड करें संत रामपाल जी महाराज एप और पढ़ें आध्यात्मिक ज्ञान की अनमोल पुस्तकें बिल्कुल मुफ्त।

Holi Festival 2023 [Hindi]: नकली रंग की नहीं बल्कि राम रंग की होली है सबसे लाभकारी

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Holi Festival in Hindi नकली रंग नहीं बल्कि राम रंग की होली है लाभकारी

Last Updated on 6 March 2023, 3:49 PM IST: Holi Festival 2023 in Hindi: होली पर हर वर्ग के लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलते हैं। बच्चे पिचकारी में रंग भर कर एक-दूसरे पर डालते हैं। होली के त्योहार से एक दिन पहले, रात को कई जगह लोग लकड़ी, घास और गोबर का बड़ा सा ढेर बनाकर जलाते हैं जिसको होलिका दहन कहते हैं। वर्तमान में जो होली मनाई जा रही है यह भक्त प्रहलाद के जीवन का उदाहरण देकर त्योहार का रूप ले चुकी है परंतु दुर्भाग्य सर्व समाज का जो बुराई पर अच्छाई की जीत का उदाहरण तो देते हैं परंतु आध्यात्मिक वास्तविकता से परिचित भी नहीं हैं। इस लेख के माध्यम से हम सर्व समाज को असली राम नाम की होली के विषय से अवगत कराएंगे।

Table of Contents

2023 में होली कब मनाई जाएगी?

प्रत्येक वर्ष होली का उत्सव मार्च महीने में मनाया जाता है। इस बार होली 8 मार्च, 2023 को मनाई जाएगी। यह पर्व भारत में कई जगहों पर मनाया जाता है।

होली कैसे मनाते हैं?

होली के दिन बच्चे हर जगह खूब धमाचौकड़ी मचाते हैं। रास्ते में आने वाले लोगों पर जो होली नहीं मनाते उन पर भी रंग और पानी से भरे गुब्बारे फेंकते हैं। होली हर साल आती है और इसकी पहचान रंग-बिरंगे गुलाल, गुब्बारे, पानी, गुजिया और भांग हैं। युवा लड़के,‌ लड़कियों पर भद्दे कमेंट करते हैं जो हमारी संस्कृति के बिल्कुल विरुद्ध है। इस प्रकार होली को पर्व की तरह मनाने से अच्छाई तो कुछ नहीं हो रही अपितु समाज में बुराई बढ़ती ही चली जा रही है। असलियत में गीता जी या किसी भी अन्य धर्म ग्रंथ में कहीं भी होली या अन्य पर्व मनाने के लिए नहीं कहा गया है।

होली पर्व का इतिहास (History of Holi Festival in Hindi)

होली उत्सव का इतिहास कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। इसमें प्रहलाद, कामदेव और पूतना की कहानियां प्रमुख हैं। ये सभी कथाएं यही शिक्षा देती हैं कि अन्त में अच्छाई की ही जीत होती है। कथाओं से शिक्षा लेने की बजाए उनको लोगों ने धूम धाम से मनाना शुरू कर दिया। ये कहानियां अच्छाई की बुराई पर जीत को दर्शाती हैं। पर्व की ओट लेकर समाज वास्तविकता को अनदेखा कर रहा है।

Holi Festival पर जाने भक्त प्रहलाद की सत्य कथा

‘‘बिल्ली के बच्चों की रक्षा करना’’ इस घटना ने प्रहलाद का परमात्मा में विश्वास और अधिक बढ़ा दिया

प्रहलाद को अक्षर ज्ञान तथा भक्ति ज्ञान के लिए उनके पिता राजा हिरण्यकशिपु ने शहर से बाहर बनी पाठशाला में भेजा जहाँ पर दो पाधे (उपाध्य यानि आचार्य) एक साना तथा दूसरा मुर्का पढ़ाया करते थे। धर्म की शिक्षा दिया करते थे। हिरण्यकशिपु के आदेश से सबको हिरण्यकशिपु-हिरण्यकशिपु नाम जाप करने का मंत्र बताते थे। कहते थे कि राम-विष्णु नाम या अन्य किसी भी देव का नाम नहीं जपना है। हिरण्यकशिपु (हिरणाकुश) ही परमात्मा है। प्रहलाद भी अपने पिता का नाम जाप करते थे। यदि कोई हिरण्यकशिपु के स्थान पर राम-राम या अन्य नाम जो प्रभु के हैं, जाप करता मिल जाता तो उसे मौत की सज़ा सबके सामने दी जाती थी।

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पाठशाला के रास्ते में एक कुम्हार ने मटके पकाने के लिए आवे में रखे थे। उन्हे लकड़ी तथा उपलों से ढ़क रखा था। सुबह अग्नि लगानी थी। रात्रि में एक बिल्ली ने अपने बच्चे उसी आवे (मटके पकाने का स्थान) में एक मटके में रख दिए। प्रातःकाल बिल्ली अन्य घर में भोजन के लिए चली गई। कुम्हार ने आवे को अग्नि लगा दी। आग प्रबल होकर जलने लगी। कुछ समय पश्चात बिल्ली आई और अपने बच्चे को आपत्ति में देखकर म्याऊँ-म्याऊँ करने लगी। कुम्हारी को समझते देर ना लगी। वह भी परमात्मा से अर्ज करने लगी और रोने लगी। हे प्रभु। हे राम। 

हमारे को महापाप लगेगा। इस बिल्ली के बच्चों की रक्षा करो। बार-बार यह कहकर पुकार कर रही थी। उस समय भक्त प्रहलाद उसी रास्ते से पाठशाला जा रहा था। कुम्हारी को रोते हुए देखा तो उसके निकट गया। वह हे राम। हे विष्णु भगवान। हे परमेश्वर। इन बिल्ली के बच्चों को बचाओ, हमारे को पाप लगेगा, कह रही थी। प्रहलाद ने उस माई से कहा कि हे माता। आप राम ना कहो। मेरे पिता जी का नाम लो, नहीं तो आपको मार डालेगा।

कुम्हारी ने बताया कि इस आवे में बिल्ली के बच्चे रह गए हैं। हमारे को पता नहीं चला। भगवान से इन बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रही हूँ। इस भयंकर अग्नि से राजा हिरण्यकशिपु नहीं बचा सकते, परमात्मा ही बचा सकते हैं। प्रहलाद भक्त ने कहा, माई। जब आप घड़े निकालें तो मुझे बुलाना। कहते हैं कि एक महीने में आवे में रखे घड़े पकते थे। उस समय अढ़ाई (2.1/2) दिन में आवा पक गया। परमात्मा ने ऐसी शीतल हवा चलाई कि अग्नि बुझ गई। प्रहलाद भक्त को बुलाकर आवे से मटके निकाले गए। जिस घड़े में बिल्ली के बच्चे थे, वह घड़ा कच्चा था। बिल्ली के बच्चे सुरक्षित थे। अन्य सब घड़े पके हुए थे। यह दृश्य देखकर प्रहलाद ने मान लिया कि ऐसी विकट परिस्थिति में मानव कुछ नहीं कर सकता। परमात्मा ही समर्थ हैं।

असली राम का तो जगत को पता भी नहीं मालूम

Holi Festival in Hindi: कुम्हारी से भक्त प्रहलाद जी ने कहा था कि माता जी। यदि भगवान ने बिल्ली के बच्चे बचा दिए तो मैं भी परमात्मा का ही नाम जपा करूँगा। अपने पिता का नाम जाप नहीं करूँगा। उस दिन के पश्चात् प्रहलाद भक्त राम का नाम जाप करने लगा। यह घटना सत्ययुग की है। श्री रामचन्द्र पुत्र दशरथ जी का तो तब जन्म भी नहीं हुआ था। जब साना तथा मुर्का अध्यापकों को पता चला कि प्रहलाद राम का जाप करता है तो उसे बहुत समझाया कि आप हिरण्यकशिपु राजा का नाम जाप करो।

प्रह्लाद भक्त बहुत पुण्य कर्मी आत्मा था तथा वह कबीर परमात्मा जी की ही भक्ति किया करता था

प्रहलाद ने कहा कि गुरूदेव। मेरे पिता मानव हैं, राजा हैं, परंतु भगवान नहीं हैं। विशेष परिस्थिति में परमात्मा ही रक्षा कर सकता है। जीव कल्याण भी परमात्मा से हो सकता है। राजा जनता को क्या देता है? उल्टा ‘‘कर’’ (टैक्स) जनता से लेता है। परमात्मा सबका पालन करता है। वर्षा करता है तो धन्य-धान्य से मानव परिपूर्ण होता है। राजा होना अनिवार्य है, परन्तु अन्यायी नहीं होना चाहिए। राजा कानून व्यवस्था बनाने के लिए बनाया जाता है। प्रजा की बदमाशों से सुरक्षा करना राजा का परम कर्तव्य है। राजा को परमात्मा की भक्ति से ही राज्य प्राप्त होता है। राजा यदि प्रजा को तंग करता है तो परमात्मा उसे दण्ड देता है। नर्क में डालता है। फिर पशु-पक्षियों की योनियों में कष्ट उठाता है। इसलिए राजा को भी परमात्मा का नाम लेना चाहिए। परमात्मा से डरकर काम करना चाहिए। साना ने कहा, राजकुमार। आप हमारे शिष्य हैं, गुरु नहीं। आप हमें शिक्षा दे रहे हो। प्रहलाद ने कहा, क्षमा करो गुरुदेव। मैं आपको शिक्षा नहीं दे रहा, राजा का धर्म बता रहा हूँ। मुर्का पाण्डे ने कहा, हे राजकुमार। यह ज्ञान आपको किसने करवाया? 

Holi Festival in Hindi: प्रहलाद पिछली पुण्य आत्मा था

प्रहलाद ने कहा, गुरूदेव। मुझे पिछली याद ताजा हो गई है। जब मैं माता के गर्भ में था। नारद जी मेरे पास आए थे (सूक्ष्म रूप बनाकर) उन्होंने मुझे परमात्मा की महिमा तथा मानव कर्तव्य बताया था। मुझे नाम भी जाप करने को दिया था। अब मैं वही जाप किया करूँगा।

साना-मुर्का पंडितों ने राजा को बताया कि आपका पुत्र राम का नाम जाप करता है। हमारी बात नहीं मानता। हम शिक्षा देते हैं तो हमारे को ही ज्ञान सुनाने लगता है। हिरण्यकशिपु ने बुलाकर राम का नाम न जपने को कहा तो प्रहलाद ने स्पष्ट कहा, पिताजी। परमात्मा ही समर्थ है। प्रत्येक कष्ट से परमात्मा ही बचा सकता है। मानव समर्थ नहीं है। यदि कोई भक्त साधना करके कुछ शक्ति परमात्मा से प्राप्त कर लेता है तो वह सामान्य व्यक्तियों में तो उत्तम हो जाता है, परंतु परमात्मा से उत्तम नहीं हो सकता। परमात्मा ही श्रेष्ठ है। वही समर्थ है।

प्रहलाद को मारने की हर कोशिश हुई नाकाम

Holi Festival in Hindi: यह बात भक्त प्रहलाद से सुनकर अहंकारी हिरण्यकशिपु क्रोध से लाल हो गया और नौकरों-सिपाहियों से बोला कि इसको ले जाओ मेरी आँखों के सामने से और जंगल में सर्पों में डाल आओ। सर्प के डसने से यह मर जाएगा। ऐसा ही किया गया। परंतु प्रहलाद मरा नहीं, सर्पों ने डसा नहीं। आराम से सो रहा था। सुबह धूप से बचाने के लिए सर्प प्रहलाद भक्त पर अपने फन फैलाकर छाया किए हुए थे। राजा ने कहा कि जाओ, जंगल से शव उठा लाओ। सिपाही गए तो प्रहलाद सुरक्षित था। सर्प इधर-उधर चले गए। सिपाहियों ने सब देख लिया था। प्रहलाद को मरा जान उठाने लगे तो प्रहलाद अपने आप उठ खड़ा हुआ। प्रहलाद की आयु दस वर्ष थी। फिर पर्वत से फेंकवाया। प्रहलाद फूलों के घने पौधों के ऊपर गिरा, मरा नहीं।

होलिका की गोद में बैठ कर भी प्रहलाद की रक्षा हुई

फिर प्रहलाद की बुआ होलिका अपने भाई हिरण्यकशिपु की आज्ञा से चिता के ऊपर प्रहलाद जी को गोद में लेकर बैठ गई। होलिका के पास एक चादर थी। उसको ओढ़कर यदि अग्नि में प्रवेश कर जाए तो व्यक्ति जलता नहीं था। उस चादर को ओढ़कर अपने को पूरा ढ़ककर प्रहलाद को उससे बाहर गोडों में बैठा लिया। कहा, बेटा। देख मैं भी तो बैठी हूँ। कुछ नहीं होगा तेरे को। अग्नि लगा दी गई। परमात्मा ने शीतल पवन चलाई। तेज आँधी आई। होलिका के शरीर से चादर उड़कर प्रहलाद भक्त पूरा ढ़क गया। होलिका जलकर राख हो गई। भक्त को आँच नहीं आई। प्रहलाद जी का विश्वास बढ़ता चला गया। ऐसे-ऐसे चौरासी कष्ट भक्त प्रहलाद को दिए गए। परंतु परमात्मा ने भक्त के विश्वास को देखकर उसकी दृढ़ता से प्रसन्न होकर उसके पतिव्रता धर्म से प्रभावित होकर प्रत्येक संकट में उसकी सहायता की।

हिरण्यकशिपु को ब्रह्मा जी से वरदान मिला था

Holi Festival in Hindi: हिरण्यकशिपु ने श्री ब्रह्मा जी की भक्ति करके वरदान प्राप्त कर रखा था कि मैं सुबह मरूँ ना शाम मरूँ, दिन में मरूँ न रात्रि में मरूँ, बारह महीने में से किसी में ना मरूँ, न अस्त्र-शस्त्र से मरूँ, पृथ्वी पर मरूँ ना आकाश में मरूँ। न पशु से मरूँ, ना पक्षी, ना कीट से मरूँ, न मानव से मरूँ। न घर में मरूँ, न बाहर मरूँ। हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को मारने के लिए एक लोहे का खम्बा अग्नि से गर्म करके तथा तपाकर लाल कर दिया। प्रहलाद जी को उस खम्बे के पास खड़ा करके हिरण्यकशिपु ने कहा कि क्या तेरा प्रभु इस तपते खम्बे से भी तेरी जलने से रक्षा कर देगा? हज़ारों दर्शक यह अत्याचार देख रहे थे।

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प्रहलाद भक्त भयभीत हो गए कि परमात्मा इस जलते खम्बे में कैसे आएगा? उसी समय प्रहलाद ने देखा कि उस खम्बे पर बालु कीड़ी (भूरे रंग की छोटी-छोटी चींटियाँ) पंक्ति बनाकर चल रही थी। ऊपर-नीचे आ-जा रही थी। प्रहलाद ने विचार किया कि जब चीटियाँ नहीं जल रही तो मैं भी नहीं जलूँगा। हिरण्यकशिपु ने कहा, प्रहलाद। इस खम्बे को दोनों हाथों से पकड़कर लिपट, देखूँ तेरा भगवान तेरी कैसे रक्षा करता है? यदि खम्बा नहीं पकड़ा तो देख यह तलवार, इससे तेरी गर्दन काट दूँगा। डर के कारण प्रहलाद जी ने परमात्मा का नाम स्मरण करके खम्बे को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाए।

Holi Festival in Hindi: नरसिंह रूप धारण कर आए कबीर परमात्मा

उसी के अंदर से नरसिंह रूप धारण करके प्रभु प्रकट हुए। हिरण्यकशिपु भयभीत होकर भागने लगा। नरसिंह प्रभु ने उसे पकड़कर अपने गोडों (घुटनों) के पास हवा में लटका दिया। हिरण्यकशिपु चीखने लगा कि मुझे क्षमा कर दो, मैं कभी किसी को नहीं सताऊँगा। तब प्रभु ने कहा, क्या मेरे भक्त ने तेरे से क्षमा याचना नहीं की थी? तूने एक नहीं सुनी। अब तेरी जान पर पड़ी तो डर लग रहा है। हे अपराधी। देख न मैं मानव हूँ, न पशु, न तू आकाश में है, न पृथ्वी पर, न अभी सुबह है न शाम है। न अभी बारह महीने में से कोई है, यह तेरहवां महीना है, (हरियाणा की भाषा में लौंद का महीना कहते हैं) न मैने अस्त्र ले रखा है, न शस्त्र मेरे पास है। 

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परमात्मा घर के दरवाजे के मध्यम में खड़े होने के कारण बोले कि न मैं घर में, न बाहर हूँ। अब तेरा अंत है। यह कहकर नरसिंह भगवान ने उस राक्षस का पेट फाड़कर आँतें निकाल दी और जमीन पर उस राक्षस को फेंक दिया। प्रहलाद को गोदी में उठाया और जीभ से चाटा (प्यार किया)। उस नगरी का राजा प्रहलाद बना। विवाह हुआ। एक पुत्र हुआ जिसका नाम बैलोचन (विरेचन) रखा।

सतभक्ति करने वाले साधक की रक्षा स्वयं परमात्मा करते हैं

गोरखनाथ, दत्तात्रेय, शुकदेव, पीपा, नामदेव, धन्ना भक्त, रैदास (रविदास), फरीद, नानक, दादू, हरिदास, गोपीचंद, भरथरी, जंगनाथ (झंगरनाथ), चरपटनाथ, अब्राहिम अधम सुल्तान, नारद ऋषि, प्रहलाद भक्त, ध्रुव, विभीषण, जयदेव, कपिल मुनि, स्वामी रामानंद, श्री कृष्ण, ऋषि दुर्वासा, शंभु यानि शिव, विष्णु, ब्रह्मा आदि सबकी प्रसिद्धि पूर्व जन्म तथा वर्तमान में की गई नाम-सुमरण (स्मरण) की शक्ति से हुई है, अन्यथा ये कहाँ थे यानी इनको कौन जानता था? इसी प्रकार आप भी तन-मन-धन समर्पित करके गुरू धारण करके आजीवन भक्ति मर्यादा में रहकर करोगे तो आप भी भक्ति शक्ति प्राप्त करके अमर हो जाओगे। जिन-जिन साधकों ने जिस-जिस देव की साधना की, उनको उतनी महिमा मिली है।

गरीब, गगन मण्डल में रहत है, अविनाशी आप अलेख।                                       

जुगन-जुगन सत्संग है, धर-धर खेलै भेख।।

गरीब, काया माया खण्ड है, खण्ड राज और पाट। अमर नाम निज बंदगी, सतगुरू सें भई साँट।।

भावार्थ :- पूर्ण परमात्मा कबीर जी गगन मंडल यानी आकाश में रहता है जो अविनाशी अलेख है। {अलेख का अर्थ है जो पृथ्वी से देखा नहीं जा सकता। जिसे अविनाशी अव्यक्त गीता अध्याय 8 श्लोक 20 से 23 में कहा है। जैसे कुछ ऋषिजन दिव्य दृष्टि के द्वारा पृथ्वी से स्वर्ग लोक, श्री विष्णु लोक, श्री ब्रह्मा लोक तथा श्री शिव जी के लोक को तथा वहाँ के देवताओं को तथा ब्रह्मा-विष्णु-महेश को देख लेते थे। परंतु ब्रह्म काल को तथा इससे ऊपर अक्षर पुरूष तथा परम अक्षर पुरूष (अविनाशी अलेख) को कोई नहीं देख सकते। जिस कारण से उस परमात्मा का यथार्थ उल्लेख ग्रंथों में नहीं है। यथार्थ वर्णन सुक्ष्मवेद में है जो स्वयं परमात्मा द्वारा बताया अध्यात्म ज्ञान है। इसलिए उस पूर्ण परमात्मा को अलख कहकर उपमा की है।

कबीर परमात्मा की भक्ति से ही हमारी भी रक्षा संभव 

पूर्ण परमेश्वर को देखने के लिए पूर्ण सतगुरु जी से दीक्षा लेनी होगी तब सतलोक जाकर ही उसे देखा जा सकता है। वह परमात्मा स्वयं अन्य भेख (वेश) धारण करके पृथ्वी पर प्रत्येक युग में प्रकट होता है। अपना तत्वज्ञान (चक्रवर्ती ज्ञान) स्वयं ही बताता है कि यह सब राज-पाट तथा शरीर खण्ड (नाशवान) है। केवल सतगुरु से मिलन तथा उनके द्वारा दिया निज नाम (सत्य भक्ति मंत्र) ही अमर है। यदि सच्चे भक्ति मंत्र प्राप्त नहीं हुए तो अन्य नामों का जाप (सुमरण) तथा यज्ञ करना सब व्यर्थ है।

गरीब, राम रटत नहिं ढील कर, हरदम नाम उचार। 

अमी महारस पीजिये, योह तत बारंबार।।

भावार्थ: हे साधक। पूर्ण गुरू से नाम दीक्षा लेकर उस राम के नाम की रटना (जाप करने में) में देरी (ढ़ील) ना कर। प्रत्येक श्वास में उस नाम को उच्चार यानी जाप कर। यह स्मरण का अमृत बार-बार पी यानी कार्य करते-करते तथा कार्य से समय मिलते ही जाप शुरू कर दे। इस अमृत रूपी नाम जाप के अमृत को पीता रहे। यह तत यानी भक्ति का सार है। यदि यथार्थ नाम प्राप्त नहीं है तो चाहे पुराणों में वर्णित धार्मिक क्रियाएं करोड़ों गाय दान करो, करोड़ों धर्म यज्ञ, जौनार (जीमनवार = किसी लड़के के जन्म पर भोजन कराना) करो, चाहे करोड़ों कुँए खनों (खुदवाओ), करोड़ों तीर्थों के तालाबों को गहरा कराओ जिससे जम मार (काल की चोट) यानि कर्म का दण्ड समाप्त नहीं होगा।

विचार कीजिए कि क्या गुब्बारे वाली होली कभी प्रहलाद ने अपना जीवन बच जाने की खुशी में मनाई थी? क्या होलिका ने प्रहलाद पर रंग बिखेरे थे? क्या प्रहलाद की नगरी के सभी लोग होली मनाने के लिए भांग और शराब के नशे में डूब कर फिल्मी गानों पर नाचे थे, मिठाई खाई थी? क्या प्रहलाद की नगरी में होली की आड़ में किसी महिला का बलात्कार हुआ था?

Holi Festival in Hindi: असली होली मनाने की विधि

एक दूसरे को गुलाल लगाना, हुल्लड़बाजी करना, सड़कों पर घूमना ये तो नकली होली खेलने के उदाहरण हैं। जिसका न तो कोई लाभ है और न ही हमारे सद्ग्रंथो में नलकी होली मनाने की विधि का कहीं वर्णन है। असली होली तो राम नाम की होली खेलना है अर्थात परमात्मा के नाम का हर स्वांस में जाप करना। 

कबीर परमात्मा कहते हैं कि:

स्वांस उसवांस में नाम जपो, व्यर्था स्वांस मत खोये।

न जाने इस स्वांस का, आवन होक ना हो।।

उपरोक्त वाणी का अर्थ है कि हमें हर स्वांस में परमात्मा का नाम लेना चाहिए क्योंकि हमें नहीं पता कि अगले ही पल हमारे साथ क्या हो जाना है। विचारणीय बात यह है तकरीबन सभी संत तथा उनके शिष्य रंगो से होली मनाते हैं, नाचते गाते हैं जो शास्त्र विरुद्ध है।

जबकि आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज अपनी अमृतमय वाणी में वास्तविक होली की महिमा करते हुए बताते है,

ध्रु प्रहलाद जहां खेलहीं रंग होरी हो,  नारद का उपदेश राम रंग होरी हो |

हाथ पिचकारी प्रेम की रंग होरी हो, खेलत हैं हमेश राम रंग होरी हो ||

जिस प्रकार देश दुनिया के लोग एकसाथ मिलजुलकर रंगों की होली हर्ष और उल्लास के साथ खेलते हैं ठीक उसी तरह शाश्वत सनातन परमधाम अर्थात सतलोक में हंस आत्माएं राम नाम का रंग चढ़ा कर सदा हमेशा के लिए होली का आनंद उठाते हैं। वर्तमान में केवल संत रामपाल जी महाराज जी ही एकमात्र सच्चे संत हैं जिन्होंने असली तथा नकली होली के अंतर को प्रमाण सहित बताया है। आप सभी से निवेदन है कि होली की यथार्थता जानने के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग Satlok Ashram News YouTube channel पर अवश्य देखें।

Holi Festival in Hindi FAQS: होली 2023

होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है?

पूर्ण परमात्मा द्वारा भक्त प्रह्लाद की रक्षा तथा अच्छाई की बुराई पर जीत की यादगार के रूप में होली के त्योहार को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

होली की शुरुआत कैसे हुई?

बुराई पर अच्छे की जीत तथा भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अंत के यादगार के स्वरूप में यह त्योहार मनाया जाता है।

होली पर किसकी पूजा की जाती है?

होली पर होलिका दहन से पहले भक्त प्रह्लाद तथा होलिका की पूजा की जाती है। आपको बता दें की इस पूजा का वर्णन पवित्र वेदों था गीता जी में कहीं पर भी नहीं मिलता। जिस से यह शास्त्र विरुद्ध तथा व्यर्थ पूजा साधना है। 

क्या होली का त्योहार मनाना सही है?

नहीं। चूंकि यह शास्त्र विरुद्ध क्रिया है। जिसे गीता जी के अध्याय 16 श्लोक 23 और 24 में व्यर्थ बताया गया है।

क्या होली पर रंगों से खेलना सही है?

लोक वेद, दंत कथाओं तथा सुनी सुनाई बातो के आधार पर होली के त्योहार पर रंगों से खेलने की कुप्रथा प्रारंभ हुई है। इस क्रिया का पवित्र शास्त्रों में वर्णन न होने से यह शास्त्र विरुद्ध तथा व्यर्थ साधना है। इसकी अपेक्षा लोगों को चाहिए की वे तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर राम रंग की वास्तविक होली को साल के 365 दिन खेले।

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