बादलपुर में बेबस परिवार को मिला नया जीवन, संत रामपाल जी महाराज के आदेश से शुरू हुआ पक्के मकान का निर्माण

Published on

spot_img

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की घोड़ा डोंगरी तहसील अंतर्गत सुदूर वन क्षेत्र में स्थित गांव बादलपुर में तारा नामक एक बेबस महिला अपने दो बच्चों के साथ बीते 8–9 वर्षों से कपड़े की दीवारों और पीली त्रिपाल की झोपड़ी में अत्यधिक अभावग्रस्त जीवन बिताने को विवश थी। पति के आकस्मिक निधन के बाद वे मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं, किंतु कान की गंभीर बीमारी के कारण मजदूरी भी छूट गई। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि बच्चे केवल उबले चावल और उबली सब्जी पर निर्भर थे। इस परिवार की करुण व्यथा जब संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, तो उनके आदेश से तुरंत सर्वे कराया गया और परिवार को सुरक्षित किराए के मकान में स्थानांतरित कर राशन, कपड़े, पढ़ाई का सामान और पक्के मकान निर्माण का कार्य आरंभ कराया गया।

इस घर की मौजूदा स्थिति ने क्यों बढ़ाई मदद की जरूरत

गांव बादलपुर में तारा बहन अपने 14 वर्षीय बेटे हिमांशु गुप्ता और बेटी जानवी गुप्ता के साथ 5×5 फीट की एक छोटी सी झोपड़ी में रह रही थीं। इस अस्थाई आशियाने की छत पीली त्रिपाल की थी तथा दीवारें फटी साड़ियों व कपड़ों के पर्दों से ढकी थीं। बारिश के मौसम में पानी टपकने से बिस्तर भीग जाते थे और उन्हें पड़ोसियों के घर जाकर रात काटनी पड़ती थी। 7–8 साल पहले पति के हार्ट अटैक से निधन के उपरांत पंचायत ने उन्हें एक शासकीय प्लॉट आवंटित किया था, जिस पर पति ने मकान की नींव रखी थी, किंतु उनके निधन के बाद निर्माण अधूरा रह गया। गंभीर आर्थिक तंगी के चलते तारा जंगल से महुआ, तेंदू पत्ता और चिरौंजी बीनकर किसी तरह गुजारा करती थीं। इसी बीच उनके कान की हड्डी गलने के कारण असहनीय पीड़ा शुरू हो गई और डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई व्यापक सहायता

संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सेवादारों ने मौके पर पहुंचकर परिवार को तत्काल राहत प्रदान की और उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की:

  • तात्कालिक आवास: जब तक पक्का मकान तैयार नहीं होता, तब तक परिवार को पड़ोसी के पक्के कमरे में किराए पर रखवाया गया, जिसका संपूर्ण खर्च संत रामपाल जी महाराज की ओर से वहन किया जा रहा है।
  • खाद्य सामग्री (राशन): परिवार को 15 किलो आटा, 2.5 किलो चावल, 2 किलो चीनी, सूखा दूध, दलिया, बेसन, काले चने, पीली मूंग दाल, हरी मूंग दाल, चना दाल, चाय पत्ती, टाटा नमक, धनिया, जीरा, लाल मिर्च, हल्दी, कपड़े धोने व नहाने के साबुन, सर्फ, आलू, प्याज, अचार और खाद्य तेल उपलब्ध कराया गया।
  • घरेलू उपस्कर व वस्त्र: दो-दो जोड़ी कपड़े, तारा बहन के लिए साड़ियां, स्कूल ड्रेस, चप्पल, जूते, एक बेड, गद्दे, तीन बिछाने व तीन ओढ़ने की चादरें, संदूक (पेटी), बर्तन स्टैंड, गैस चूल्हा व लाइटर, कूकर, भगोने, बाल्टी, टब, पटा, साबुनदानी और सूर्य कंपनी का फर्राटा पंखा दिया गया।
  • शिक्षा व स्वास्थ्य: बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी-रजिस्टर, पेन, कंपास बॉक्स, पानी की बोतल व टिफिन बॉक्स दिए गए। कान के इलाज हेतु डॉक्टर से जांच कराकर चिकित्सा प्रक्रिया शुरू कराई गई।
  • मकान निर्माण: शासकीय भूमि पर पति की छोड़ी पुरानी नींव पर पक्के मकान का निर्माण शुरू कर दिया गया, जिसके लिए मौके पर 2–3 ट्रैक्टर ईंटें, सीमेंट और बजरी मंगवाई गई। सेवादारों के अनुसार यह निर्माण 10 से 15 दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा।

ग्रामीणों ने बताई मदद से बदलती तस्वीर

सहायता प्राप्त होने के बाद लाभार्थी परिवार एवं ग्रामीणों ने अपने अनुभव साझा किए:

  1. तारा (लाभार्थी महिला): उन्होंने बताया कि पति के जाने के बाद कोई सहारा नहीं था और कान की बीमारी के कारण मजदूरी भी बंद हो गई थी। संत रामपाल जी महाराज की दया से उन्हें नई जिंदगी मिली है और अब उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो गया है।
  1. हिमांशु गुप्ता (पुत्र, कक्षा 9): हिमांशु ने बताया कि पहले घर में खाने का अभाव था और वे केवल चावल व उबली सब्जी खाते थे। अब पूरा सामान, किताबें और रहने की सुरक्षित व्यवस्था मिलने से वे बहुत खुश हैं।
  1. जानवी गुप्ता (पुत्री, कक्षा 12): जानवी ने बताया कि झोपड़ी में बारिश का पानी भरने और चूल्हे पर खाना बनाते समय हाथ जलने जैसी तकलीफें झेलनी पड़ती थीं। अब गैस चूल्हा और घर का सामान मिलने से उनकी सारी परेशानियां खत्म हो गई हैं।
  1. बिशन विश्वास (ग्राम पंचायत बादलपुर के सरपंच): सरपंच ने बताया कि तारा बहन की स्थिति अत्यंत दयनीय थी और शासकीय जमीन पंचायत से उन्हें आवंटित थी। संत रामपाल जी महाराज द्वारा कराए जा रहे इस सहायता कार्य व पक्के मकान निर्माण को उन्होंने बेहद सराहनीय बताया।
  1. राजेश रावत (पड़ोसी ग्रामीण): उन्होंने कहा कि पति की मृत्यु के बाद यह परिवार बेहद परेशान था और इस गरीब व असहाय परिवार की मदद करके संत रामपाल जी महाराज ने देश और समाज के लिए बहुत उत्तम कार्य किया है।

जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल

इस मानवीय पहल में तत्परता और पारदर्शिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। सेवादारों द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के मात्र दो से तीन दिनों के भीतर संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर राहत सामग्री मौके पर पहुंचा दी गई। मकान निर्माण का कार्य तत्काल प्रभाव से सीमेंट, ईंट और बजरी गिराकर शुरू किया गया। इसके अतिरिक्त, परिवार को एक विशेष सेवादार सहायता कार्ड सौंपा गया, ताकि राशन अथवा आवश्यक वस्तु समाप्त होने पर वे सीधे संपर्क कर सकें और अगले ही दिन सामग्री पुनः उपलब्ध कराई जा सके। संत रामपाल जी महाराज से जुड़ी ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ के तहत मध्य प्रदेश में पहले भी कई मकान बनाए जा चुके हैं और यह इस क्रम में सातवां मकान है।

समाज सुधारक के रूप में संत रामपाल जी महाराज की भूमिका

बादलपुर की यह घटना संत रामपाल जी महाराज के उस सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहां दीन-दुखियों, अनाथों और असहाय परिवारों को केवल सहानुभूति नहीं बल्कि ठोस धरातलीय सहारा दिया जाता है। “रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान” के मानवीय संकल्प को चरितार्थ करते हुए यह सेवा कार्य चलाया जा रहा है। संत रामपाल जी महाराज समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना अपना परम धर्म मानते हैं। बिना किसी भेदभाव के सुदूर वनांचल में जाकर एक असहाय विधवा के सिर पर पक्की छत देना और बच्चों की शिक्षा का आजीवन दायित्व उठाना संत रामपाल जी महाराज को एक संवेदनशील समाज सुधारक के रूप में स्थापित करता है।

Latest articles

Durga Puja 2026: Date History and Significance | Know Whether Salvation is Possible by Durga Puja or Not?

Durga Puja 2026: Durga Puja is a major Hindu festival celebrated particularly in West...

जसिया के छोटूराम धाम में संत रामपाल जी महाराज के सहयोग से 100×160 फीट मेस हॉल का शिलान्यास

हरियाणा के रोहतक जिले के गाँव जसिया स्थित चौधरी छोटूराम धाम में बच्चों और...
spot_img

More like this