अकाल में बेजुबानों के मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज: उमड़ा ग्रामीणों का सैलाब, डीजे और फूलों की बारिश से हुआ स्वागत

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जब इंसान पर संकट आता है, तो वह बोलकर अपनी पीड़ा बयां कर देता है। लेकिन जब बेजुबान मवेशियों पर सूखे और अकाल का कहर टूटता है, तो उनकी खामोश चीखें केवल वही सुन सकता है जिसके हृदय में सच्ची इंसानियत और ईश्वरीय प्रेम हो। जगन्नाथ महाप्रभु संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाया जा रहा नि:स्वार्थ जनकल्याणकारी और गौ सुरक्षा अभियान आज इसी सच्ची इंसानियत का साक्षात प्रमाण बन चुका है।

राजस्थान और हरियाणा के जिन गांवों में बारिश न होने से चारे के गोदाम पूरी तरह खाली हो चुके थे, वहां संत रामपाल जी महाराज जी के एक आदेश पर हज़ारों क्विंटल चारा पहुंच रहा है। आइए सबसे पहले इन महान कार्यों की एक विस्तृत झलक तालिका के माध्यम से देखते हैं।

आंकड़ों में निस्वार्थ जनसेवा

क्र.सं.गांव व जिलाराज्यगौवंश संख्यामांगी गई मददसंत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायताविशेष / मुख्य आकर्षण
1फोगाट (चरखी दादरी)हरियाणा220300 क्विंटल300 क्विंटल (मात्र 24 घंटे में)गोदाम पूरी तरह खाली था, रातों-रात मदद पहुंची।
2झाड़सर (चूरू)राजस्थान350–500 क्विंटल (दूसरी बार लगातार)डीजे और ट्रैक्टर रैली निकालकर ग्रामीणों ने जश्न मनाया।
3लाखासर (हनुमानगढ़)राजस्थान300300 क्विंटल500 क्विंटल (मांग से ज्यादा)निरीक्षण के बाद जरूरत देखकर 200 क्विंटल चारा अतिरिक्त भेजा।
4गुरेरा (भिवानी)हरियाणा400+–600 क्विंटल15-20 दिन का ही चारा बचा था, तुरंत 600 क्विंटल की खेप पहुंची।
5मेहराना (हनुमानगढ़)राजस्थान600800 क्विंटल900 क्विंटल (4 दिन के भीतर)महिलाओं ने सिर पर स्वरूप रखकर स्वागत किया, बुजुर्ग भावुक हुए।

अभियान की मुख्य विशेषताएं 

  • मांग से अधिक सहायता: जहां आवश्यकता अधिक दिखी, वहां बिना मांगे अतिरिक्त चारा (जैसे 300 की जगह 500 और 800 की जगह 900 क्विंटल) भेजा गया।
  • शून्य परिवहन लागत: गौशालाओं से चारे का मूल्य तो दूर, ट्रांसपोर्ट (भाड़ा) का भी एक रुपया नहीं लिया गया।
  • त्वरित कार्रवाई: सरकारी दफ्तरों की तरह महीनों का इंतज़ार नहीं; 24 घंटे से लेकर अधिकतम 4 दिनों के भीतर राहत पहुंचाई गई।

आइए, अब इन 5 गांवों की गौशालाओं में हुए इस चमत्कार को विस्तार से समझते हैं:

गांव फोगाट, चरखी दादरी (HR) खाली पड़ा था चारे का गोदाम, संत रामपाल जी ने गौशाला तक पहुंचाई बड़ी राहत

हरियाणा के चरखी दादरी जिले के फोगाट गांव स्थित ‘श्री कृष्ण गौशाला’ में 220 गौवंश थे। हालात इतने विकट हो गए थे कि सूखे चारे का गोदाम कतई खाली हो गया था। गौशाला प्रधान दलबीर जी ने बताया कि उनके पास एक दिन का भी सूखा चारा (तूड़ी) नहीं बचा था। वे केवल थोड़ा-बहुत हरा चारा लाकर रोज़ का काम चला रहे थे।

हताश होकर 26 जुलाई को गौशाला कमेटी संत रामपाल जी महाराज के आश्रम पहुंची और 300 क्विंटल चारे की मांग रखी। आपको जानकर हैरानी होगी कि अगले ही दिन सर्वे हुआ और 24 घंटे के भीतर 300 क्विंटल सूखा चारा ट्रकों में भरकर सीधे गौशाला पहुंच गया। इस अप्रत्याशित मदद को देखकर गांव वालों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भारी संख्या में ग्रामीणों ने फूलों की मालाएं पहनाकर और जयकारे लगाकर सेवादारों का स्वागत किया।

गांव के एक बुजुर्ग ने भावुक होते हुए कहा: “जहां धर्म के नाम पर लोग जनता को लूट रहे हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज लाखों का चारा मुफ्त बांट रहे हैं। ऐसा भगवान हमने पहली बार देखा है।”

वहीं एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि “आज के समय में कोई ₹100 उधार नहीं देता, और महाराज जी ने लाखों का चारा बिना कोई किराया या भाड़ा लिए सीधे हमारे द्वार पर पहुंचा दिया।” 

गांव झाड़सर, चूरू, (RJ): 20 दिन बाद फिर पहुँचा 500 क्विंटल चारा, संत रामपाल जी ने दूसरी बार भेज मदद

राजस्थान के चूरू जिले के झाड़सर (कांदलान) गांव की ‘श्री कृष्ण गौशाला’ का नजारा तो किसी बड़े उत्सव या शादी-ब्याह से कम नहीं था! इस गौशाला में 350 गायें हैं। 20 दिन पहले आश्रम की तरफ से यहां 500 क्विंटल चारा भेजा गया था। जैसे ही वह चारा खत्म होने को आया, आश्रम ने बिना कोई देरी किए दूसरी बार 500 क्विंटल चारा फिर से भिजवा दिया!

रात का समय था, फिर भी दर्जनों ट्रैक्टर अपनी लाइटें (डिपर) जलाए हुए कतार में खड़े थे। डीजे बज रहा था और पूरा गांव खुशी से झूमते हुए नाच रहा था।

एक युवा ग्रामीण ने नाचते हुए कहा: “सतयुग में कृष्ण भगवान ने गायें चराई थीं, आज संत रामपाल जी महाराज गोपाल बनकर हमारी गायों को चरा रहे हैं।”

गौशाला अध्यक्ष अमर सिंह कारेला ने बताया, “सूखे की वजह से यहां चारे का भाव आसमान छू रहा है, ऐसे में यह मदद भगवान के चमत्कार जैसी है।” गांव के एक अन्य युवा ने कहा कि “वे आश्रम गए थे और वहां का साफ-सुथरा माहौल और निस्वार्थ प्रेम देखकर उन्होंने हमेशा के लिए नाम दीक्षा (सतभक्ति) ले ली है। धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो वह संत रामपाल जी महाराज का आश्रम ही है।” 

गांव लाखासर, जिला हनुमानगढ़, राजस्थान: 300 गौवंश की चिंता, मांग से 200 क्विंटल ज्यादा पहुंचा चारा।

हनुमानगढ़ जिले के लाखासर गांव की कहानी भी बेहद मार्मिक और प्रेरणादायक है। यहां की गौशाला में 300 गौवंश पल रहे थे। चारे की भारी कमी को देखते हुए, ग्रामवासी और कमेटी के सदस्य आश्रम पहुंचे और एक महीने के लिए 300 क्विंटल सूखे चारे की मांग की।

लेकिन संत रामपाल जी महाराज की दयालुता देखिए! जब टीम ने सर्वे किया और पाया कि गायों को अधिक चारे की आवश्यकता है, तो उन्होंने 300 की बजाय सीधे 500 क्विंटल चारा भिजवा दिया! गांव में जब ट्रकों का काफिला पहुंचा, तो ग्रामीणों ने जेसीबी मशीन से फूलों की बारिश कर उनका भव्य स्वागत किया।

ग्रामीण जगदीश जी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा: “हम 26 तारीख को गए थे और 27 की रात को ही हमारे पास चारा आ गया। वहां किसी ने हमसे एक पैसा नहीं मांगा, बल्कि हमें इतना सम्मान और भोजन दिया गया कि हमारा घर आने का मन ही नहीं कर रहा था।”

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने हाथ जोड़ते हुए कहा, “मांगा 300 था, 500 मिल गया। महाराज जी संत नहीं, हमारे लिए साक्षात भगवान प्रकट हो गए हैं।” 

गांव गुरेरा, भिवानी (हरियाणा): 15–20 दिन का चारा बचा था, फिर संत रामपाल जी ने भेजा 600 क्विंटल चारा

भिवानी जिले के गुरेरा गांव की ‘आर्य परिवार गौशाला’ में 400 से अधिक गौवंश हैं। सूखे के कारण इनके पास केवल 15 से 20 दिन का चारा शेष बचा था। गौशाला कमेटी ने आश्रम जाकर अरदास लगाई।

आश्रम की कार्यप्रणाली इतनी तेज थी कि केवल 3-4 दिन के अंदर 600 क्विंटल सूखा चारा गाड़ियों में भरकर गांव पहुंच गया। गांव के सूबेदार बिल्लू जी ने भावुक होकर कहा: “सरकारें, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री भी इतना जल्दी काम नहीं कर सकते जितना संत रामपाल जी महाराज ने किया है। आज तक दुनिया में ‘लेने वाले’ संत तो बहुत देखे जो पहले दान-दक्षिणा मांगते हैं, लेकिन ‘देने वाला’ पहला संत देखा है जिसने बिना मांगे लाखों की मदद कर दी।”

गांव वालों ने बताया कि यह 600 क्विंटल चारा उनके लिए संजीवनी बूटी के समान है, और वे ताउम्र इस महान परोपकार के ऋणी रहेंगे। 

गांव मेहराना, हनुमानगढ़ (राजस्थान) गौशाला ने मांगा 800 क्विंटल चारा… मिला 900 क्विंटल

हनुमानगढ़ की भादरा तहसील के मेहराना गांव की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण थी। यह हरियाणा बॉर्डर से लगा एक बरानी (बिना सिंचाई वाला) क्षेत्र है। सूखे के कारण यहां सूखे चारे (तूड़ी) की कीमत ₹1000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी। गौशाला में 600 गायें थीं और कमेटी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे इतना महंगा चारा खरीद सकें।

कमेटी ने आश्रम जाकर 800 क्विंटल चारे की गुहार लगाई। संत रामपाल जी महाराज ने उनकी दयनीय स्थिति को समझा और 800 के बजाय पूरे 900 क्विंटल चारा (जिसकी बाजार कीमत करीब 9 लाख रुपये थी) केवल 4 दिनों के भीतर भिजवा दिया!

स्वागत का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। गांव की महिलाओं ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप को अपने सिर पर रखकर पूरे सम्मान के साथ गांव में प्रवेश कराया।

70 वर्षीय एक बुजुर्ग ताऊ जी ने आंखों में आंसू लिए हुए कहा: “मेरी उम्र 70 साल हो गई है, मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा संत नहीं देखा। हम तो गए थे थोड़ी सी आस लेकर, और उन्होंने तो कमाल ही कर दिया, हमारे लिए साक्षात भगवान ही आ गए।”

इंसानियत और नि:स्वार्थ सेवा का एक नया अध्याय

आज की दुनिया में जहां हर काम के पीछे कोई न कोई स्वार्थ छिपा होता है, वहीं संत रामपाल जी महाराज का यह नि:स्वार्थ जनसेवा अभियान समाज को झकझोर कर रख देने वाला है। बिना कोई चंदा लिए, बिना कोई किराया वसूले, लाखों रुपये का चारा रातों-रात गौशालाओं तक पहुंचा देना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है।

मांगने पर 300 की जगह 500 क्विंटल और 800 की जगह 900 क्विंटल चारा देना यह साबित करता है कि यह सहायता दिखावे के लिए नहीं, बल्कि बेजुबानों की असली तकलीफ दूर करने के लिए की जा रही है। ग्रामीणों की आंखों से छलकती खुशी, डीजे पर थिरकते उनके कदम और हृदय से निकली दुआएं गवाही दे रही हैं कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि इस घोर कलयुग में मानवता और इंसानियत के सबसे बड़े रक्षक हैं।

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