संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत बहलबा (बलमभा) गाँव में बाढ़ राहत: एक अनुकरणीय पहल

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रोहतक, हरियाणा: हरियाणा के रोहतक जिले का बहलबा (स्थानीय रूप से बलमभा) गाँव, जो दो पंचायतों – बहलवा और बहलवा बजाण – में विभाजित है, हाल ही में आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गया। इस प्राकृतिक आपदा ने गाँव की लगभग 1000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया, जिससे खड़ी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं और अगली बुवाई की उम्मीद भी धूमिल हो गई। सरकारी सहायता के अभाव में, दोनों पंचायतों ने संत रामपाल जी महाराज से मदद की गुहार लगाई, जिसके परिणामस्वरूप ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत एक वृहद राहत अभियान चलाया गया, जिसने पूरे गाँव में आशा की नई किरण जगाई।

बहलबा गाँव में बाढ़ का पानी कई दिनों तक जमा रहा, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। फसलों के पूरी तरह से नष्ट हो जाने के कारण, किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। पशुओं के लिए चारे की कमी, घरों में पानी का भर जाना, स्कूल और डिस्पेंसरी का बंद होना जैसी समस्याओं ने ग्रामीणों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। स्थानीय ग्रामीणों और सरपंचों के अनुसार, उन्होंने सरकारी प्रशासन से कई बार मदद मांगी, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई। सरपंच सतपाल जी और सरपंच प्रतिनिधि भीम पहलवान जी ने बताया कि वे मोटर और पाइप के लिए तीन-तीन दिनों तक भटकते रहे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

संत रामपाल जी महाराज से गुहार और त्वरित प्रतिक्रिया

सरकारी तंत्र से निराश होकर, बहलवा पंचायत ने सरपंच सतपाल जी के नेतृत्व में 3000 फुट पाइप और चार 15 हॉर्स पावर की मोटरों की मांग की। वहीं, बहलवा बजाण पंचायत ने सरपंच प्रतिनिधि भीम पहलवान जी के नेतृत्व में 20,000 फुट पाइप और तीन 15 हॉर्स पावर की मोटरों की गुहार लगाई। यह प्रार्थना 3 अक्टूबर को संत रामपाल जी महाराज के दरबार में एक आवेदन के माध्यम से भेजी गई। हैरानी की बात यह है कि जहाँ सरकारी प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की पुकार को तुरंत सुना। 

मात्र तीन दिनों के भीतर, यानी 6 अक्टूबर तक, कुल सात 15 हॉर्स पावर की मोटरें और 23,000 फुट (लगभग 15 किलोमीटर) 8 इंच के उच्च गुणवत्ता वाले पाइप, स्टार्टर, केबल और अन्य आवश्यक सामग्री बहलबा गाँव में पहुँच गई। यह सहायता इतनी विशाल थी कि इसे ले जाने के लिए ट्रकों का एक लंबा काफिला गाँव पहुँचा।

राहत सामग्री का विवरण और वितरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजे गए राहत सामग्री में निम्नलिखित प्रमुख वस्तुएँ शामिल थीं:

  • मोटरें: कुल सात (7) बड़ी 15 हॉर्स पावर की मोटरें। इनमें से चार मोटरें बहलवा पंचायत को और तीन मोटरें बहलवा बजाण पंचायत को दी गईं।
  • पाइप: कुल 23,000 फुट (लगभग 15 किलोमीटर) 8 इंच के उच्च गुणवत्ता वाले पाइप। इनमें से 3000 फुट पाइप बहलवा पंचायत को और 20,000 फुट पाइप बहलवा बजाण पंचायत को प्रदान किए गए।
  • सहायक उपकरण: मोटरों को चलाने के लिए आवश्यक स्टार्टर, केबल और अन्य सभी छोटे-बड़े उपकरण भी शामिल थे, ताकि ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह अभियान सिर्फ बहलबा तक सीमित नहीं था। संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने बताया कि अब तक 200 से अधिक गाँवों में इसी तरह की सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं और यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और आभार

राहत सामग्री के विशाल काफिले को देखकर बहलबा गाँव के ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। ग्रामीणों ने एक स्वर में संत रामपाल जी महाराज को “भगवान” की उपाधि दी और उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। सरपंच सतपाल जी ने कहा, “रामपाल जी महाराज ने पानी उतारने के लिए पाइप दिए हैं, आगे फसल बोई जाएगी। फसल नष्ट हो गई थी, आगे वाली फसल की भी संभावना नहीं थी।” 

सरपंच प्रतिनिधि भीम पहलवान जी ने जोर देकर कहा, “जो काम सरकार नै करना चाहिए, वो संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं।” भारतीय किसान यूनियन महम ब्लॉक के प्रधान ने भी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनाज और आवास की व्यवस्था की थी। गाँव की महिलाओं और बच्चों सहित सभी 36 बिरादरी के लोगों ने इस सहायता का स्वागत किया। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के प्रतिनिधियों को सम्मान के प्रतीक के रूप में पगड़ी और शील्ड भेंट की।

स्थाई समाधान और भविष्य की चेतावनी

संत रामपाल जी महाराज ने न केवल तत्काल राहत प्रदान की, बल्कि भविष्य के लिए एक स्थाई समाधान भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि वे प्रदान किए गए पाइपों को अपनी जमीन में दबा दें, ताकि भविष्य में जब भी भारी बारिश हो, वे आसानी से पानी निकाल सकें और बाढ़ की समस्या से स्थायी रूप से निजात पा सकें। उन्होंने इसे “अनमोल गिफ्ट” बताया जो परमेश्वर कबीर जी की दया से प्रदान किया गया है।

हालांकि, इस सहायता के साथ एक सख्त संदेश भी दिया गया। संत रामपाल जी महाराज ने निवेदन किया कि यदि दी गई राहत सामग्री का निर्धारित समय पर सही उपयोग नहीं किया गया और पानी नहीं निकाला गया, जिससे अगली फसल की बिजाई नहीं हो पाई, तो भविष्य में उनका ट्रस्ट उस गाँव की कोई मदद नहीं करेगा। इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्रामीण स्वयं सक्रिय रूप से इस समस्या का समाधान करें। ट्रस्ट ने गाँव की ड्रोन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की, जिसमें बाढ़ की स्थिति दिखाई गई, और बताया गया कि पानी निकलने और फसल लहलहाने के बाद भी वीडियो बनाई जाएंगी, ताकि दानदाताओं को उनके पैसे के सही उपयोग का विश्वास दिलाया जा सके।

एक व्यापक सामाजिक सरोकार

संत रामपाल जी महाराज स्वयं एक किसान परिवार से हैं और किसानों के दर्द को भली-भांति समझते हैं। उनके अनुसार, यह 36 बिरादरी के जान-माल का सवाल है, जहाँ लोगों के घरों में पानी भरा है, पशुधन को हानि हुई है, और बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है। उन्होंने अन्य धार्मिक संस्थाओं और कथावाचकों से भी समाज सेवा के लिए आगे आने का आह्वान किया, जो आमतौर पर कथाओं के लिए लाखों रुपये लेते हैं, लेकिन आपदा के समय में निष्क्रिय रहते हैं। 

संत रामपाल जी महाराज का मानना है कि दान का पैसा जनसेवा और परमार्थ में लगाना ही सबसे बड़ा पुण्य है। उनकी ‘अन्नपूर्णा मुहिम‘ इसी सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में कोई भी भूखा न सोए और किसी को भी किसी चीज की कमी न रहे।

जनसेवा और दूरदर्शिता का अद्भुत उदाहरण

बहलबा गाँव में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाया गया बाढ़ राहत अभियान न केवल एक तात्कालिक मदद था, बल्कि यह समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा और दूरदर्शिता का भी प्रतीक है। जहाँ सरकार और अन्य संगठन अक्सर ऐसी आपदाओं में अपर्याप्त साबित होते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने ग्रामीणों को एक नई दिशा और उम्मीद दी है। 

इस पहल ने न केवल उनके दुख कम किए, बल्कि उन्हें भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान और आत्मविश्वास भी प्रदान किया है, जिससे पूरे हरियाणा में उनकी जय-जयकार हो रही है। इस प्रकार, संत रामपाल जी महाराज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि जनसेवा और परमार्थ के कार्यों में निहित है।

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