January 21, 2026

जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने सोनीपत के बाघडू गाँव में उपहास को बदला यथार्थ में; सरपंच बोले: ‘संत ही हैं असली संकटमोचक’

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यह दास्तान हरियाणा के सोनीपत जिले की तहसील सोनीपत में स्थित बाघडू गाँव की है, जहाँ मानसून के भयंकर प्रकोप ने किसानों की कमर तोड़ दी थी। ग्रामीण बाढ़ के पानी से त्रस्त थे, जिससे उनका वर्तमान और भविष्य दोनों डूब चुके थे। गाँव में क़रीब 250 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पूरी तरह से जलमग्न हो गई थी। इस जलभराव के कारण धान की ख़रीफ़ फ़सलें तो पूरी तरह बर्बाद हो ही चुकी थीं, साथ ही आगामी रबी की फ़सल, विशेषकर गेहूँ की बुवाई की उम्मीद भी समाप्त हो चुकी थी। किसानों को दोगुना आर्थिक नुक़सान झेलना पड़ रहा था।

समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं थी; यह 36 बिरादरी के जान-माल का सवाल बन गई थी। अत्यधिक जलभराव के कारण पशुओं के लिए चारे की भारी कमी हो गई थी, जिससे पशु हानि की आशंका बढ़ गई थी। इसके अतिरिक्त, घरों में पानी घुस जाने से लोगों को असुविधा हो रही थी। स्कूलों और डिस्पेंसरियों में पानी भर जाने से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्रभावित हो रही थीं। सरकारी स्तर पर कोई समाधान न देख, ग्रामीणों की निराशा बढ़ती जा रही थी, जिससे उन्होंने अपने संकट को दूर करने के लिए आख़िरी आस एक आध्यात्मिक शक्ति पर लगाई।

‘क्या पाइप रेल में भरकर आएँगे?’ उपहास से प्रार्थना तक

जब सभी सरकारी प्रयास विफल हो गए, तब ग्राम पंचायत बाघडू के सरपंच श्री प्रवीण कुमार जी ने संत रामपाल जी महाराज से मदद मांगने का साहसिक फैसला किया। यह निर्णय लेते समय, गाँव के कुछ लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया और उपहासपूर्ण लहज़े में कहा, “क्या पाइप रेल में भरकर आएँगे?” ग्रामीण यह कल्पना भी नहीं कर पा रहे थे कि इतनी भारी मात्रा में आवश्यक सामग्री इतनी जल्दी और निःशुल्क उनके गाँव तक पहुँच सकती है।


सरपंच प्रवीण कुमार जी के नेतृत्व में पूरी ग्राम पंचायत बरवाला स्थित संत रामपाल जी महाराज के दफ़्तर पहुँची। उन्होंने विधिवत रूप से पंचायत के लेटर हेड पर मुहर और हस्ताक्षर के साथ एक प्रार्थना पत्र सौंपा। इस प्रार्थना पत्र में ग्राम पंचायत ने स्पष्ट रूप से पानी निकासी के लिए निम्नलिखित सामग्री की माँग की थी: पाँच (5) मोटरें (10 हॉर्स पावर, 10 HP) और 16,500 फ़ुट लंबी पाइपलाइन। सरपंच प्रवीण कुमार ने मीडिया को बताया कि उन्हें पूरा विश्वास है कि संत रामपाल जी महाराज गाँव बाघडू पर अपना आशीर्वाद दिखाएँगे। 

प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई की गति किसी चमत्कार से कम नहीं थी। सेवादारों ने पंचायत को आश्वासन दिया कि संत रामपाल जी महाराज का आदेश आते ही, यह सारा सामान तुरंत गाँव में उपलब्ध करा दिया जाएगा।

लाखों की राहत सामग्री की ‘रेलगाड़ी’

जैसा कि उपहास उड़ाया गया था, प्रार्थना पत्र सौंपने के महज़ कुछ ही दिनों में, मदद का एक विशाल काफ़िला, जिसे ग्रामीणों ने ‘पाइपों की एक रेलगाड़ी’ कहा, बाघडू गाँव पहुँच गया। यह काफ़िला किसानों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया। संत रामपाल जी महाराज की ओर से भेजी गई सामग्री लाखों रुपये की थी, और यह माँग से भी ज़्यादा पूर्णता के साथ उपलब्ध कराई गई:

मोटरें: पाँच (5) मोटरें (10 हॉर्स पावर, 10 HP), जो क्रॉम्प्टन (Crompton) और क्लॉस्कर (Kirloskar) जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों की उच्च गुणवत्ता वाली थीं।

पाइपलाइन: 16,500 फ़ुट लंबी और 8 इंची व्यास की उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन।

सहायक उपकरण: मोटर चलाने के लिए स्टार्टर, केबल, सुंडी, बैंड, हांडे, पाइप चिपकाने के लिए फेविकोल और हर छोटा-बड़ा पेंच, नट-बोल्ट सहित पूरा सेट दिया गया, ताकि ग्रामीणों को एक नट भी बाज़ार से न ख़रीदना पड़े।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि सामग्री का मूल्य, उसे ढोने का किराया-भाड़ा, और सेवादारों की मेहनत सारा ख़र्चा संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट द्वारा वहन किया गया। ग्रामीणों का इस सेवा पर एक रुपये का भी ख़र्च नहीं आया, जिसने उनके विश्वास को और अधिक मजबूत किया।

अन्नपूर्णा मुहिम का राष्ट्रव्यापी प्रभाव

बाघडू गाँव में यह राहत सेवा संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई गई राष्ट्रव्यापी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का हिस्सा है। इस मुहिम के तहत, संत जी ने रोटी, कपड़ा और मकान की मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी करने का संकल्प लिया है। सेवादारों ने बताया कि इस बाढ़ राहत सेवा की सूची बहुत लंबी है। यह सेवा केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, और गुजरात सहित कई राज्यों के 300 से ज़्यादा बाढ़ पीड़ित गाँवों में पूरी हो चुकी है और यह लगातार जारी रहेगी। कई गाँवों में माँग के अनुसार 10 से 17 मोटरें तक उपलब्ध कराई गई हैं।

Also Read: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ ने झज्जर के गुभाना और माजरी गांवों में बाढ़ राहत से निराशा को उम्मीद में बदला


यह सेवा उन कथावाचकों के बिलकुल विपरीत है, जो लाखों रुपये कथा करने के लिए लेते हैं और सारा पैसा हजम कर जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज को संगत से प्राप्त होने वाला दान का पैसा ट्रस्ट में जमा कराया जाता है और पूरा का पूरा पैसा जनहित के परमार्थ कार्यों, जैसे बाढ़ राहत, गरीबों के मकान बनवाने, बच्चों की पढ़ाई, और दवाई में लगाया जाता है। उनका स्पष्ट आदेश है कि लोक-दिखावा नहीं करना, बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम करके दिखाना है। यह कार्य किसानों की मदद करके पुण्य कमाने का सबसे बड़ा तरीक़ा है, क्योंकि किसान के घर चूल्हा जलने पर ही मज़दूर के घर चूल्हा जलता है, और यह सेवा मानव समाज और राष्ट्र हित को समर्पित है।

ग्रामीणों का उद्घोष: ‘हमें भगवान मिल गया’

राहत सामग्री मिलते ही बाघडू के ग्रामीणों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। किसानों ने एक स्वर में संत रामपाल जी महाराज को ‘भगवान का रूप’ कहकर संबोधित किया। सरपंच प्रवीण कुमार ने तहे दिल से धन्यवाद करते हुए कहा, “अगर संत रामपाल जी की मेहरबानी नहीं होती तो शायद आपकी बार गेहूँ नहीं बुते।” अन्य ग्रामीणों ने इस सेवा की गति और व्यापकता पर आश्चर्य व्यक्त किया। एक ग्रामीण ने कहा, “हमने भगवान मिल गया हमारे लिए तो,” और एक अन्य ने कहा कि “इसे महाराज पैदा ना हो जो संकट में के समय में काम दे बिना कहे।”


ग्रामीणों ने इस बात की पुष्टि की कि इस मदद के बिना, गाँव का लगभग 90% क्षेत्र बिना बुवाई के रह जाता। जिस मज़ाक का सामना सरपंच को करना पड़ा था (“पाइप रेल में भरकर आएँगे”), वह अब एक हक़ीक़त बन चुका था, जिसने विरोधियों को भी निरुत्तर कर दिया। यह मदद केवल पानी निकालने का साधन नहीं, बल्कि लाखों किसानों और मज़दूरों के लिए जीवन दान थी, जिसने उनके लिए अगली फ़सल की उम्मीद को ज़िंदा कर दिया।

सेवा की पारदर्शिता और स्थायी समाधान का संकल्प

संत रामपाल जी महाराज की ओर से ग्राम पंचायत बाघडू को एक ‘विशेष निवेदन पत्र’ भी सौंपा गया, जिसमें उनकी सेवा की पारदर्शिता और अनुशासन की झलक मिलती है। निवेदन में स्पष्ट किया गया है कि गाँव का पानी जल्द से जल्द निकलना चाहिए ताकि अगली फ़सल की बिजाई हो सके। पत्र में साफ़ चेतावनी दी गई है कि “यदि संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी गई राहत सामग्री से निर्धारित समय पर पानी नहीं निकलता है और इस बार फसल की बिजाई नहीं हुई तो आगे से हमारा ट्रस्ट आपके गाँव की कोई मदद नहीं करेगा।” यह शर्त ग्रामवासियों को एकजुट होकर तुरंत कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करती है। इस पत्र में सेवा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक अद्वितीय उपाय भी बताया गया है। संत जी के आदेशानुसार:

  • गाँव में जलभराव की ड्रोन से वीडियो पहले ही बना ली गई है।
  • पानी निकलने के बाद दूसरी वीडियो बनाई जाएगी।
  • किसानों की फ़सल लहलहाने के बाद तीसरी वीडियो बनाई जाएगी।


ये तीनों वीडियो प्रत्येक समागम में सतलोक आश्रमों में प्रोजेक्टर पर चलाई जाएँगी। इसका दोहरा उद्देश्य है: दान करने वाली संगत का विश्वास बना रहे कि उनके पैसे का दुरुपयोग नहीं हो रहा है, और उन्हें यह पता चले कि उनके दान से लाखों लोगों को जीवनदान मिला है।


इसके अतिरिक्त, इस मुहिम का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए स्थायी समाधान भी देना है। ग्रामीणों से अनुरोध किया गया है कि वे पाइप और मोटर को अपनी ज़मीन में दबा लें, ताकि जब भी बारिश हो, वे तुरंत पानी निकालकर अपनी समस्या का सदा के लिए समाधान कर सकें। संत रामपाल जी महाराज की यह निःस्वार्थ पहल, जिसमें किसी भी ज़रूरत पर आगे और सामान देने का आश्वासन दिया गया है, किसानों के लिए परमेश्वर कबीर जी की दया से मिला एक अनमोल वरदान सिद्ध हुई है। 

सरपंच प्रवीण कुमार जी ने सामान का सदुपयोग करने और गाँव से पानी जल्द निकालने का भरोसा दिलाकर संत जी का दिल से धन्यवाद किया।

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