यह घटना हरियाणा राज्य के हिसार जिले के अंतर्गत आने वाली मंडी आदमपुर तहसील के गांव आदमपुर की है। पिछले तीन-चार वर्षों से यह गांव एक भीषण प्राकृतिक त्रासदी का सामना कर रहा था। गांव की लगभग 1500 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह से पानी की चादर ओढ़े बैठी थी। आदमपुर के हालात इतने बदतर हो चुके थे कि यहां का जमीनी जलस्तर, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चोआ’ कहा जाता है, बिल्कुल सतह के ऊपर आ चुका था। हल्की सी बारिश भी इन खेतों को समंदर में तब्दील कर देती थी।
इस जलभराव के कारण करीब 1500 एकड़ में बोई गई खरीफ की फसल पूरी तरह से डूबकर नष्ट हो चुकी थी। किसानों का असली दर्द मात्र इस फसल के नुकसान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें इस बात की गहरी चिंता सता रही थी कि खेतों में एक से डेढ़ फुट पानी जमा होने के कारण आगामी गेहूं की बिजाई की भी कोई उम्मीद शेष नहीं बची थी। सरकारी तंत्र और प्रशासन के लगातार चक्कर काटकर किसान पूरी तरह से हार मान चुके थे।
मुख्य बिंदु:
- हरियाणा के हिसार जिले की मंडी आदमपुर तहसील के आदमपुर गांव में 1500 एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न ।
- प्रशासन से निराश होकर ग्राम पंचायत ने सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज से सहायता की गुहार लगाई।
- संत रामपाल जी महाराज ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 एचपी की मोटर और कुल 9500 फुट 8 इंची मजबूत पाइप पूरी तरह से निशुल्क भिजवाए।
- मोटर के साथ स्टार्टर, केबल, पाइप चिपकाने वाला फेविकोल तथा छोटे-से-छोटा नट-बोल्ट जैसी सभी आवश्यक सामग्रियां भी प्रदान की गईं।
- गांव के सरपंच सुनील कुमार और सैकड़ों ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ गांव के मुख्य द्वार पर राहत सामग्री के काफिले का भव्य स्वागत किया।
- सेवानिवृत्त अधिकारी नरसिंह बेनीवाल ने संत रामपाल जी महाराज के निस्वार्थ परोपकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की और वर्तमान दौर में इसे अद्वितीय बताया।
- संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि यदि दी गई सामग्री से समय पर पानी नहीं निकाला गया, तो भविष्य में कोई मदद नहीं मिलेगी।
ग्रामवासियों ने सहायता के लिए संत रामपाल जी महाराज से कैसे संपर्क किया
जब सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर हर तरफ से रास्ते बंद नजर आए और अन्नदाता पूरी तरह से बेसहारा हो गया, तब गांव की पंचायत ने सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे परमार्थ कार्यों को देखा। बिना किसी देरी के ग्राम पंचायत ने वकीलों और एक कमेटी के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी समस्या रखते हुए एक प्रार्थना पत्र भेजा। संत रामपाल जी महाराज के दरबार में सेवा का पैमाना आम इंसान की कल्पना से भी कहीं अधिक विस्तृत है।
जैसे ही आदमपुर के किसानों की यह पुकार उन तक पहुंची, उनकी प्रार्थना को तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया। मात्र कुछ ही दिनों के भीतर राहत सामग्री से भरा एक विशाल काफिला आदमपुर गांव के स्वागत द्वार पर पहुंच गया।
आश्रमों के निर्माण कार्य रोककर किसानों को प्राथमिकता देना
संत रामपाल जी महाराज स्वयं एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए वे किसानों की पीड़ा को बहुत गहराई से समझते हैं। जब उनके पास बाढ़ पीड़ित आदमपुर गांव की यह प्रार्थना पहुंची, तो उन्होंने तुरंत एक ऐतिहासिक और सख्त आदेश जारी किया। उन्होंने सभी आश्रमों और नाम दान सेंटरों में चल रहे निर्माण कार्यों को तुरंत प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया। उनका स्पष्ट मानना था कि सबसे पहले प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों की मदद कर उन्हें इस संकट से उबारा जाए।
एक किसान पर ही मजदूर और व्यापारी वर्ग सहित 36 बिरादरी निर्भर करती है। यदि किसान नष्ट हो गया, तो पूरा देश पतन की ओर चला जाएगा। इसी दूरदर्शी और कल्याणकारी सोच के साथ उन्होंने अपना पूरा ध्यान आदमपुर के जलमग्न खेतों की ओर केंद्रित किया।
राहत सामग्री का विस्तृत विवरण और बुनियादी जरूरतों का ध्यान

गांव को इस भयंकर जलभराव से बचाने के लिए संत रामपाल जी महाराज ने शुरुआत में 8000 फुट लंबी 8 इंची मजबूत पाइप लाइन और एक विशाल 15 एचपी की मोटर भिजवाई। यह मदद इतनी बारीक और सुव्यवस्थित थी कि मोटर के साथ लगने वाला हर छोटा-बड़ा उपकरण साथ भेजा गया था। इसमें स्टार्टर, बिजली की केबल, पाइप को आपस में जोड़ने वाला फेविकोल और यहां तक कि छोटे-से-छोटा नट-बोल्ट भी शामिल था। स्पष्ट कर दिया गया था कि सरपंच को अपनी तरफ से एक रुपये का भी सामान बाहर से नहीं लाना पड़ेगा।
इसके उपरांत गांव की आवश्यकता को देखते हुए दूसरी बार भी मदद पहुंचाई गई, जिसमें 1500 फीट 8 इंची पाइप और दिया गया। इस प्रकार कुल मिलाकर संत रामपाल जी महाराज द्वारा आदमपुर गांव को 9500 फीट 8 इंची पाइप और 15 एचपी की मोटर पूर्णतः निशुल्क प्रदान की गई, जो अब हमेशा के लिए गांव की अमानत बन चुकी है।
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आदमपुर गांव के स्वागत द्वार पर ग्रामीणों द्वारा भव्य अभिनंदन
जब यह बहुमूल्य राहत सामग्री आदमपुर गांव पहुंची, तो वहां का मंजर किसी बड़े त्योहार जैसा प्रतीत हो रहा था। आदमपुर गांव के सरपंच सुनील कुमार स्वयं सैकड़ों ग्रामीणों के साथ गांव के मुख्य स्वागत द्वार तक पैदल चलकर आए। ग्रामवासियों ने हाथों में फूलों की मालाएं ले रखी थीं और उन्होंने पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संत रामपाल जी महाराज के इस काफिले का भव्य स्वागत किया।
सरपंच सुनील कुमार ने बताया कि पूरे गांव की तरफ से जो अरदास संत रामपाल जी महाराज के चरणों में लगाई गई थी, वह तुरंत पूरी हुई है। अब गांव में जल निकासी सुनिश्चित हो सकेगी और किसान अपनी गेहूं की फसल बो सकेंगे।
पंचायत को सौंपे गए कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश
संत रामपाल जी महाराज द्वारा जहां एक ओर अथाह परोपकार किया गया, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश भी दिए गए। मौके पर पंचायत को एक पत्र पढ़कर सुनाया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि संत रामपाल जी महाराज का आदेश है कि निर्धारित समय पर इस सामग्री का उपयोग करके पानी बाहर निकाला जाए। यदि पानी नहीं निकलता है और फसल की बिजाई नहीं होती है, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा गांव की कोई मदद नहीं की जाएगी।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि दान के पैसों का कोई दुरुपयोग न हो, गांव के जलमग्न खेतों की ड्रोन से वीडियो बनाई गई। पानी निकलने के बाद दूसरी और फसल लहलहाने पर तीसरी ड्रोन वीडियो बनाने का भी प्रावधान रखा गया, जिसे समागमों में दिखाया जाएगा ताकि संगत का दान करने का हौसला बना रहे।
आदमपुर पंचायत द्वारा सम्मान पत्र भेंट कर आभार व्यक्त
राहत सामग्री प्राप्त करने के पश्चात, ग्राम पंचायत आदमपुर और जिला हिसार के समस्त निवासियों की ओर से संत रामपाल जी महाराज को सम्मान के तौर पर एक ‘मोमेंटो’ (सम्मान पत्र) भेंट किया गया। सरपंच सुनील कुमार ने इस नेक कार्य में सहयोग हेतु पूरे गांव की तरफ से हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही, सरपंच और पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजे गए निवेदन पत्र के नियमों व शर्तों को सहर्ष स्वीकार करते हुए उस पर हस्ताक्षर किए और यह विश्वास दिलाया कि दी गई सामग्री का तुरंत प्रभाव से सदुपयोग करके पानी निकाला जाएगा।
सेवानिवृत्त अधिकारी नरसिंह बेनीवाल का स्पष्टवादी दृष्टिकोण
इस अवसर पर गांव के एक बुजुर्ग और सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त अधिकारी नरसिंह बेनीवाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी सर्विस में कई सरकारों का कार्यकाल देखा है, लेकिन बिना स्वार्थ के करोड़ों रुपये का सामान घर तक पहुंचाने वाला संत पूरे भारत में दूसरा कोई नहीं है।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जहां आज कई कथावाचक लाखों रुपये लेकर केवल अपना घर भर रहे हैं और अवैध धंधे कर रहे हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज दान के पैसे का सही उपयोग कर जनसेवा और परमार्थ के कार्यों में लगा रहे हैं। उनके अनुसार यह कार्य लोगों का जीवन स्तर सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।
राहत सामग्री का विस्तृत आंकड़ा
| क्रम संख्या | सामग्री का विवरण | मात्रा / क्षमता |
| 1 | उच्च गुणवत्ता वाले पाइप (प्रथम चरण) | 8000 फीट (8 इंची गोलाई) |
| 2 | उच्च गुणवत्ता वाले पाइप (द्वितीय चरण) | 1500 फीट (8 इंची गोलाई) |
| 3 | कुल पाइप लाइन | 9500 फीट (8 इंची गोलाई) |
| 4 | जल निकासी मोटर | 1 15 HP (हॉर्स पावर) |
| 5 | अन्य आवश्यक उपकरण | स्टार्टर, केबल, सुंडिया, फेविकोल, नट-बोल्ट |
निस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति: संत रामपाल जी महाराज का अविस्मरणीय योगदान
आदमपुर की यह पूरी घटना मात्र 9500 फीट पाइप या एक 15 एचपी मोटर के दान तक सीमित नहीं है। यह घटना इस अटूट भरोसे की है कि वर्तमान समय में जब चारों ओर स्वार्थ का बोलबाला है, तब संत रामपाल जी महाराज जैसे महापुरुष धरती पर निस्वार्थ सेवा का परचम लहरा रहे हैं। उनका मानना है कि किसान और मजदूर समाज की रीढ़ हैं।
बिना किसी सरकारी सहायता की प्रतीक्षा किए, संत रामपाल जी महाराज ने आदमपुर के किसानों को जो राहत दी है, उसने उन्हें एक नया जीवन और एक सुरक्षित भविष्य का अनमोल उपहार दिया है। उनके द्वारा किए जा रहे इन कार्यों को देखकर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि जब तक संत रामपाल जी महाराज जैसे महापुरुष समाज में सक्रिय हैं, तब तक भारतवर्ष को दोबारा सोने की चिड़िया बनने से कोई नहीं रोक सकता।
अब आदमपुर के 1500 एकड़ खेतों में बाढ़ का ठहरा हुआ दूषित पानी नहीं, बल्कि किसानों के अथक परिश्रम से खुशहाली की नई फसल लहलहाएगी। यह संपूर्ण घटनाक्रम परोपकार, इंसानियत और सच्ची संत प्रवृत्ति का एक जीता-जागता प्रमाण है जो पूरे विश्व के लिए एक अद्भुत प्रेरणा है।



