HomeBlogsValentine's Day Special Blog.

Valentine’s Day Special Blog.

Date:

वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day): गाड इज़ माई रिअल वैलेंटाइन.

बिना हवा पानी और रोशनी के पौधा सूख जाता है और ऐसे ही बिना प्यार के जीवन। जीवन में प्यार का होना बहुत ज़रूरी है। प्यार न हो तो जीवन निरीह रेगिस्तान है। प्यार जीवन में रंग और जीने की उमंग भर देता है। जीवन में प्रेम होने से मनुष्य सदा युवा बना रहता है। जहां दोस्ती होगी वहां प्रेम भी हो सकता है। उस दिन मेट्रो में सफर करते समय मेरे साथ सीट पर बैठी दो लड़कियां आपस में वैलेंटाइन डे की तैयारी के बारे में बात कर रहीं थीं। ये स्टेलाटोस (सैंडल) मैंने वैलेंटाइन डे के लिए खरीदे हैं। दूसरी लड़की चुटकी लेते हुए कहने लगी , मारेगी क्या उसे और दोनों हंसने लगीं।

शाम को हम दोनों पहले मूवी देखने जाएंगे, फिर कैंडल लाइट डिनर करेंगे। मैंने उसके लिए अभी तक कुछ नहीं खरीदा कुछ समझ नहीं आ रहा। दूसरी लड़की अरे एमेजॉन पर एक्सेसरीज पर हैवी वैलेंटाइन डे डिस्काउंट है कुछ भी आर्डर कर दे न। चल ठीक है रात को चैक करूंगी। भाविका अपने मंगेतर के साथ पहली वैलेंटाइन डेट पर जाने की पूरी तैयारी कर रही है। मेकअप, न्यू ड्रेस, डिनर टेबल बुकिंग और लड़के के लिए सरप्राइज गिफ्ट।

वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day) बना मार्केट.

वैलेंटाइन डे अब एक इंटरनेशनल मार्केट का रूप ले चुका है। न्यूज़ चैनलों से लेकर होटल, पब, रेस्तरां, कैफे, मूवी थियेटर, शापिंग माल सब इस दिन को बिज़नस का रूप दे चुके हैं। इन सभी का टारगेट कम आयु के लड़के लड़कियों से लेकर हैपनिंग, फैशनेबल, मार्डन लोग हैं। वैलेंटाइन डे मनाने की होड़ में युवा जल्दी जवान हो रहे हैं। हैरत की बात यह है कि वैलेंनटाइन डे के नाम पर अब प्यार का इज़हार खुलेआम होने लगा है। समाज में खुलापन इतना अधिक घर कर चुका है कि पहले जहां युवा छिपकर मिला करते थे अब वैलेंटाइन डे खुलेआम माता पिता की नोटिस में मनाते हैं।

History of Valentine’s Day: 14 फरवरी को सेंट वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ाया गया।

वैलेंटाइन डे मनाने की प्रथा रोमन संस्कृति से उत्पन्न हुई है। माना जाता है कि इस दिन का नाम संत वेलेंटाइन के नाम पर रखा गया था जो तीसरी शताब्दी में रोम में रहते थे और कैथोलिक पादरी थे।रोम में एक राजा था उसका मानना ​​था कि एकल सैनिक विवाहित लोगों की तुलना में समर्पित सेवा करते हैं इसलिए उसने सैनिकों की शादी करने पर पाबंदी लगा दी। तब वेलेंटाइन नाम के एक युवा पुजारी ने चुपके से जोड़ों की शादी कराना शुरू कर दिया और जब राजा को इस बात का पता चला तो उसने 14 फरवरी के दिन संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया।

इसलिए इस दिन की याद को बनाए रखने के लिए वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day) के नाम से मनाने लगे। सोचने वाली बात यह है कि यह घटना रोमन इतिहास (History) का काला दिन था। जिस दिन सेंट वेलेंटाइन नाम के पादरी को फांसी पर चढ़ाया गया और विश्व भर के युगल जोड़े उसकी फांसी तोड़ने के दिन को चाकलेट, टैडी अन्य उपहार देकर खुशी मनाते हैं।

वैलेंटाइन डे का भारत में होता रहा है विरोध।

भारत के कई राज्यों में वैलेंटाइन डे मनाने को लेकर प्रतिरोध किया जाता रहा है। इस दिन का प्रतिरोध करने वालों की यह धारणा है कि यह भारतीय युवाओं द्वारा अश्लीलता और गलत संस्कृति की नींव रख रहा है। वहीं कई धर्मगुरु इसे मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने लगे हैं। एक तरफ युगलों का प्रेम है तो दूसरी ओर माता पिता का। सच तो यह है कि भारत की संस्कृति और पहचान का हिस्सा वैलेंटाइन डे कभी था ही नहीं। यह पाश्चात्य जगत की देन है जो अब विश्व भर में अश्लीलता का भी रूप ले चुका है।

शांता, सरस्वती और पार्वती तीनों ने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध प्रेम प्रसंग किया था।

परमात्मा का विधान मनुष्य की बुद्धि और समझ से बहुत ऊंचा और श्रेष्ठ है। परमात्मा के विधान अनुसार सभी जोड़े संस्कार वश पहले ही तय होते हैं। धरती पर केवल उनका मिलना और बंधन में बंधना तय होता है। अयोध्या पति दशरथ पुत्र राजा राम चंद्र की सबसे बड़ी बहन शांता का विवाह श्रृंगी ऋषि के साथ करना पड़ा था। दशरथ शांता के विवाह के खिलाफ थे क्योंकि वे क्षत्रिय थे और श्रृंगी ऋषि ब्राह्मण। कुल की लाज रह जाए इस के लिए राजा दशरथ ने किसी अन्य ऋषि को शांता को गोद लेकर उसका कन्या दान करने को कहा था।

ब्रह्मा जी की पुत्री ने भी विवाह से पहले संबंध बनाए थे। जब ब्रह्मा जी को मालूम हुआ तो सरस्वती को श्राप दे दिया था। पार्वती जी ने भी पिता दक्ष की इच्छा के विरुद्ध जाकर शिवजी से विवाह किया था। राजा दक्ष ने पार्वती जी को उसके बाद कभी अपने घर नहीं बुलाया।
(अधिक जानकारी के लिए देखें साधना चैनल प्रतिदिन 07:30 – 08:30 बजे)

Valentine’day पर माता-पिता बच्चों को सदाचार की सीख दें.

सनातन इतिहास की बात करें तो वेदों, शास्त्रों के पन्ने पढ़ने के बाद भी वैलेंटाइन डे ,मातृ-पितृ दिवस, फादर्स डे, मदर्स डे, चाकलेट डे, टैडी डे, रोज़ डे, किस डे, हग डे और क्रिसमस डे की कोई जानकारी नहीं मिलती। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में स्वयंवर द्वारा लड़की अपना वर चुना करती थी और माता पिता ही लड़का-लड़की के लिए वर वधू की तलाश किया करते थे। आकर्षित होने के कारण प्रेम के चक्कर में पड़े लड़के-लड़कियों को घर और समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था। परिवार के मान की खातिर लड़के लड़कियों को मौत के घाट भी उतार दिया जाता था जो कि सरासर ग़लत है। ऐसी ही कुछ खाप पंचायतें भारतीय समाज में हैं जो ऐसे आतंकी फरमानों के साथ लड़का लड़की को मौत के घाट उतरवा देते हैं।

युवाओं से निवेदन है कि अपनी कमजोरी के कारण माता-पिता तथा समाज में विष न घोलें। विवाह करना अच्छी बात है। बकवाद करना बुरी बात है। विवाह के लिए माता-पिता समय पर स्वयं चिंतित हो जाते हैं और विवाह करके ही दम लेते हैं। फिर युवा क्यों सिरदर्द मोल लेते हैं? जब तक विवाह नहीं होता, चाव चढ़ा रहता है। विवाह के पश्चात् बच्चे हो जाते हैं। सात साल के पश्चात् महसूस होने लगता है कि ’’या के बनी‘‘? जैसे हरियाणवी कवि (स्वांगी) जाट मेहर सिंह जी ने कहा है कि :-
।विवाह करके देख लियो, जिसने देखी जेल नहीं है।।

Valentine’s Day की वास्तविकता: जैसे जेल में चार दिवारी के अंदर रहना मजबूरी होती है। विवाहित जीवन मर्यादा रूपी कारागार कही जाती है। परंतु इस कारागार बिना संसार की उत्पत्ति नहीं हो सकती। हमारे माता-पिता जी ने भी विवाह किया। हम को अनमोल मनुष्य शरीर मिला। इस शरीर में भक्ति करके मानव मोक्ष प्राप्त कर सकता है जो विवाह का ही वरदान है। इस पवित्र सम्बन्ध को चरित्रहीन व्यक्ति कामुक कथा सुनाकर तथा राग-रागनी गाकर युवाओं में वासनाओं को उत्प्रेरित करते हैं जिससे शांत व मर्यादित मानव समाज में आग लग जाती है। जिस कारण से कई परिवार उजड़ जाते हैं। जैसे समाचार पत्रों में पढ़ने को मिलता है कि युवक तथा युवती ने गाँव की गाँव में प्रेम करके नाश का बीज बो दिया। लड़की वालों ने अपनी लड़की को बहुत समझाया, परंतु गंदी फिल्मों से प्रेरित लड़की ने एक नहीं मानी। परिवार वालों ने लड़की की हत्या कर दी। जिस कारण से लड़की का भाई-पिता, माता तथा भाभी भी जेल गए। आजीवन कारागार हो गई। उन दोनों ने प्रेम प्रसंग रूपी अग्नि से परिवार जला दिया। बसे-बसाए घर का नाश कर दिया।

अन्य बहुत से उदाहरण हैं जिनमें औनर किलिंग का मुकदमा बनने से फांसी तक सजा का प्रावधान है। हे युवा बच्चों! विचार करो! माता-पिता आप से क्या-क्या उम्मीद लिए जीते हैं, आपको पढ़ाते हैं, पालते हैं। आप सामाजिक मर्यादा को भूलकर छोटी-सी भूल के कारण महान गलती करके जीवन नष्ट कर जाते हो। इसलिए बच्चों को सत्संग सुनाना अनिवार्य है। सामाजिक ऊँच-नीच का पाठ पढ़ाना आवश्यक है जिसका लगभग अभाव हो चुका है। जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए पढ़ें पुस्तक जीने की राह।

फिल्मों ने जनता को कामुक और व्यभिचारी बनाया।

Valentine’s Day: आजकल देखने में आ रहा है स्कूल में पढ़ने वाले लड़के लड़कियां प्रेम के चक्कर में पड़ कर कुछ तो घर से भाग जाते हैं और माता पिता उनकी इस गलती के कारण आजीवन शर्मसार रहते हैं। माया धारी मसखरों (फिल्म अभिनेताओं) को देख कर युवा इनकी देखा देखी करते हैं नाच गाना, फिल्म संगीत ने युवाओं के दिलों दिमाग पर वासना की चादर ओढ़ा दी है जिसके कारण लड़का लड़की बिना विवाह किए भी साथ रहने लगे हैं जिसे लिव इन रिलेशनशिप कहा जाता है। समाज में शर्म और लाज नहीं रही। लड़के, लड़कियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अजीबोगरीब हेयरस्टाइल रखते हैं, मंहगी गाड़ियों में सवार हो महंगे रेस्तरां में डेट के लिए लड़की को लेकर जाते हैं और लड़कियां तरह तरह के बाल रंगवा कर, मेकअप करके, स्टाइलिश कपड़े पहन कर हिरोइनों की तरह आकर्षण का केंद्र बनना चाहती हैं। ऐसे में दोनों अपनी मर्यादा को लांघ देते हैं। वैलेंटाइन डे की लोकप्रियता के कारण समलैंगिक, लेस्बियन जैसे अनचाहे रिश्ते भी समाज में अपनी जगह बना चुके हैं।

बिना सतभक्ति के हम सभी तरह के त्यौहार और डे मनाना सही समझते हैं क्योंकि हम केवल सामाजिक भेड़ चाल का हिस्सा बन रहे हैं और इसी कारण इन त्यौहारों और विशेष दिनों ने समाज को ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है जो कि खाई का काम कर रहे हैं जिससे मानव की अवनति हो रही है।

मानवीय मूल्यों का उत्थान सतभक्ति से होगा।

कलयुग में सतयुग जैसा माहौल सतभक्ति करने से ही तैयार किया जा सकता है। यदि परिवार में माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी व अन्य सदस्य पूर्ण परमात्मा की बताई हुई सतभक्ति करेंगे तो परिवार में सभी नेकनीति से रहेंगे। बच्चे सदाचारी व माता पिता की आज्ञा में रह कर काम करेंगे। शराब, मांस बीड़ी सिगरेट, हुक्के व नशे से दूर रहेंगे। माता पिता बच्चों का विवाह परमात्मा की इच्छा से जहां संयोग होगा वहीं करेंगे। दहेज रूपी दिखावटी दानव का सफाया हो जाएगा। यदि आप भी सतभक्ति कर अपने बच्चों को और समाज को सदाचारी बनाना चाहते हैं तो जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में ज़रूर आएं। उनका सत्संग श्रवण करें और अपनी आंखों से सकारात्मक बदलाव होता देखें। अपना सच्चा स्नेह और प्रेम परमात्मा पर अर्पित कीजिए। क्योंकि सच्चा वैलेंटाइन तो केवल पूर्ण परमात्मा होता है।

About the author

Website | + posts

SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

SA NEWS
SA NEWShttps://news.jagatgururampalji.org
SA News Channel is one of the most popular News channels on social media that provides Factual News updates. Tagline: Truth that you want to know

Share post:

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Lala Lajpat Rai Birth Anniversary: Know about the Lion of Punjab on His Jayanti

Last Updated on 28 January 2023, 4:03 PM IST:...

Saraswati Puja 2023 [Hindi]: क्या है ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करने की सही भक्ति विधि?

हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पक्ष...

Ascertain the Importance of True Spiritual knowledge on Basant Panchami 2023

Last Updated on 26 February 2023, 1:40 PM IST:...