तलाकौर में 60 साल पुरानी त्रासदी का अंत: संत रामपाल जी महाराज की मदद से बदली किस्मत

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हरियाणा के जिला यमुनानगर के गांव तलाकौर की कहानी किसी साधारण समस्या की कहानी नहीं है। यह उस 60 वर्ष पुराने जलभराव के रोग की कहानी है जिसने लगभग 150 एकड़ कृषि भूमि को हर साल बर्बाद कर दिया। गांव के कई किसान ऐसे भी हैं, जिनकी एकमात्र किला भर जमीन पूरी तरह पानी में डूब जाती थी। जीरी हो या गेहूं हर साल फसल खड़ी-खड़ी नष्ट हो जाती थी।

गांव वालों ने वर्षों तक हर दरवाजे पर दस्तक दी। सरपंचों ने अनगिनत बार सरकारों, प्रशासन और विधायकों को लिखित में अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। प्रक्रिया लंबी होने की बात कहकर फाइलें आगे बढ़ा दी जाती थीं। गांव का तर्क साफ था “सरकारी काम में 1–1.5 साल लग जाता है, लेकिन किसान की फसल 1 महीने में बोनी होती है।”

जब सरकारी गलियारों में थककर लौट आए, तब गांव ने अंतिम उम्मीद के रूप में 200 किलोमीटर दूर, बरवाला स्थित ट्रस्ट ऑफिस में संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना पत्र भेजने का फैसला किया।

ग्राम पंचायत की प्रार्थना: 6500 फुट पाइप और दो मोटरों की मांग

ग्राम पंचायत तलाकौर, खंड सरस्वती नगर, जिला यमुनानगर, ने गांव के लेटर हेड पर सामूहिक सहमति से एक प्रार्थना पत्र तैयार किया। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख था:

  • 6500 फुट 8 इंच पाइपलाइन
  • 10 एचपी की दो मोटरें
  • और उनसे जुड़ा पूरा सेट-अप

ग्राम पंचायत के सभी पंच व सरपंच स्वयं पहुंचकर यह अरदास लेकर गए। गांव का कहना था “हमने हर जगह लेटर पैड लगाए, पर किसी ने कीमत नहीं समझी। लेकिन यहां हमारे लेटर पैड को गांव की मजबूरी माना गया।”

सिर्फ छह दिनों में चमत्कार: गांव पहुंचा लाखों का सामान

जिस कार्य में सरकारें डेढ़-दो साल लगातीं, वह सिर्फ 6 दिन में पूरा हो गया।

संत रामपाल जी महाराज ने:

  • 6500 फुट 8 इंची पाइप,
  • 10 एचपी की दो मोटर,
  • दो स्टार्टर,
  • और पाइपिंग के लिए जरूरी एक-एक नट-बोल्ट से लेकर रबर चेन तक गांव भेज दिया।

गांव वालों ने आश्चर्य से कहा “भगत जी ने कहा था कि एक नट भी आपको बाहर से नहीं खरीदना पड़ेगा… और सच में एक नट भी नहीं लाना पड़ा।” 

जब पाइप और मोटरों से भरे ट्रक गांव में पहुंचे, तो बच्चों ने ताली बजाकर स्वागत किया और महिलाओं ने राहत की सांस ली। किसी के आंखों में बरसों पुरानी पीड़ा थी तो किसी में कसक कि “काश ये मदद हमारे पिता या पति के जीवन में पहले हो जाती।” सरपंच की आवाज़ भी भर्रा गई जब उन्होंने कहा, “हमने तो उम्मीद छोड़ दी थी… लेकिन आज ऐसा लग रहा है जैसे 60 साल बाद गांव में पहली बार उजाला आया है।”

बाढ़ से तबाही: ड्रोन फुटेज ने दिखाया विनाश

सेवादारों ने जब गांव का ड्रोन सर्वे किया तो तस्वीरें बेहद मार्मिक थीं। चारों ओर पानी, खेतों में डेढ़-डेढ़ फुट तक पानी भरा हुआ, जीरी की फसल पूरी तरह नष्ट, गेहूं की बिजाई का कोई अवसर नहीं। कुछ किसान तो लगातार कई वर्षों से फसल नहीं उगा पाए थे। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनकी आधी किला जमीन तक डूब जाती थी और वे अनाज खरीदकर खाने को मजबूर थे।

सरपंच और ग्रामीणों की भावुक प्रतिक्रिया

जब सामग्री गांव पहुंची, तो सरपंच संदीप कुमार ने भावुक होकर कहा, 

“हम पंचायत में प्रस्ताव डालते हैं तो 1–2 साल भी लग जाते हैं।

लेकिन यहां छठे दिन ट्रकों में भरकर सामान आ गया। मैं हैरान हूं, यकीन नहीं हो रहा कि ऐसा भी कहीं होता है।” गांव के बुजुर्ग किसान बोले “हमें 30–60 साल से यह रोग लगा था।

Also Read: गुढ़ाण गाँव का निर्णायक मोड़: जब संत रामपाल जी महाराज जी ने गांव के दुख को अपना दुख समझ कर पहुंचाई बाढ़ राहत सामग्री

आज संत रामपाल जी ने एक झटके में समस्या खत्म कर दी। हमारे लिए यही भगवान हैं।” गांव में हिन्दू, मुसलमान, सिख सभी रहते हैं। सभी ने एक स्वर में कहा,  “संत रामपाल जी महाराज ने धर्म नहीं देखा, दर्द देखा।”

संत रामपाल जी महाराज की मुहिम: एक-एक गांव तक राहत

सेवादारों ने बताया कि अब तक देशभर में 300 से अधिक गांवों में राहत पहुंचाई जा चुकी है। इनमें राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात के गांव शामिल हैं। तक राहत पहुंचाई जा रही है। संत रामपाल जी का स्पष्ट आदेश है- “लोक दिखावा नहीं, जमीन पर काम करके दिखाओ। किसान की अगली फसल हर हाल में बचनी चाहिए।”

गांव वालों को सख्त और महत्वपूर्ण निवेदन पत्र

संत रामपाल जी महाराज ने गांव वालों को एक विशेष निवेदन पत्र भी दिया, जिसमें कहा गया कि सामान स्थायी है, हमेशा गांव का रहेगा। यदि समय पर पानी नहीं निकाला गया और फसल बोई नहीं गई, तो आगे कोई मदद नहीं मिलेगी। तीन वीडियो बनाए जाएंगे, एक बाढ़ के समय, एक पानी निकलने के बाद, एक फसल लहराते समय, ताकि संगत को पता चले कि दान का सही उपयोग हुआ। यह पारदर्शिता की एक अनूठी मिसाल है। साथ ही संत रामपाल जी महाराज जी ने कहा कि यदि और भी समान की आवश्यकता होती है तो वह प्रदान की जाएगी लेकिन अगली फसल की बुवाई समय से की जाए।

निर्माण कार्य रोककर राहत को दी प्राथमिकता

संत रामपाल जी ने आदेश दिया कि “देशभर में 500 से अधिक नामदान केंद्रों और आश्रमों पर चल रहे सभी निर्माण कार्य तुरंत बंद कर दिए जाएं। पूरी राशि और सभी सेवादारों को बाढ़ राहत की सेवा में लगाया जाए।” यह आदेश मिलते ही सभी सेवादार हर्ष से भर उठे। किसी के लिए यह बोझ नहीं, बल्कि परम करुणा का अवसर था। संत रामपाल जी कहाराज कोई साधारण संत नहीं है। वे असाधारण रूप से शक्तिशाली और सर्वसक्षम हैं। उनके भगवान के अवतार होने में कोई शंका नहीं क्योंकि इतनी करुणा केवल करुणानिधि यानी पूर्ण परमात्मा में ही होती है। 

सामग्री का स्थायी समाधान: अब गांव में दोबारा पानी नहीं जमा होगा

पाइपलाइन को खेतों में स्थायी रूप से दबा दिया जाएगा, ताकि जैसे ही बारिश या जलभराव हो गांव वाले तुरंत मोटर चलाकर पानी निकाल सकें। गांव का कहना है, सरकारें तो पानी निकलते ही सामान वापस ले जाती हैं। लेकिन यहां तो स्थायी समाधान दे दिया गया। अब यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो गई।”

गांव का आभार और सम्मान: पगड़ी भेंट

ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी के सम्मान में एक पारंपरिक पगड़ी का कपड़ा सेवादारों को सौंपा, जिसे आश्रम में महाराज जी के चरणों में अर्पित किया जाएगा। सरपंच बोले “यह सिर्फ पगड़ी नहीं, हमारी सदियों पुरानी पीड़ा के अंत का सम्मान है।” गांव के कई किसानों ने कहा,“उन्होंने जनरेटर 4-4 महीने चलाए थे, पर पानी नहीं निकला। उनकी दो-दो फसलें हर साल बरबाद हो जाती थीं। यहां तक कि कुछ किसान अनाज खरीदकर खाते थे। आज जो हुआ, वो भगवान ही करा सकता है।एक किसान ने तो कहा  सरकार तो हमारे लिए सरकार नहीं रही हमारी सरकार संत रामपाल जी हैं।

यह सिर्फ राहत नहीं, बदलाव की नई परिभाषा है

तलाकौर की 60 साल की समस्या 6 दिनों में खत्म हो गई। 150 एकड़ बंजर भूमि फिर से उपजाऊ होने जा रही है। यह भूमि जब फसल देगी तो वह भी तो आखिरकार देश के लिए योगदान देगी। अन्नदाता सारी फसल स्वयं के खाने के लिए नहीं उगाता है। जब गाँव वाले हर तरफ़ से हार गए तब संत रामपाल जी महाराज की शरण में गए और उस परमात्मा स्वरूप महान संत ने यह भी नहीं देखा कि फ़रियाद लेकर आया कौन है, और तुरंत यह जानकर कि देश के किसान दुखी हैं और रो रहे हैं उन्होंने जो माँगा गया, दे दिया। संत रामपाल जी महाराज की दया से आज सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी वापस लौट रही है।

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