January 9, 2026

फतेहाबाद: जहां प्रशासन हुआ फेल, वहां मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज; गदली गांव को ‘सेम’ से मुक्ति दिलाने को भेजी 13,200 फीट पाइपलाइन

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फतेहाबाद, हरियाणा: प्राकृतिक आपदाएं और प्रशासनिक विफलता जब किसान की कमर तोड़ देती हैं, तब उम्मीद की किरण सिर्फ आध्यात्म और मानवता से ही मिलती है। ऐसा ही एक वाक्या हरियाणा के फतेहाबाद जिले की भट्टू तहसील के गांव गदली (Gadli) में देखने को मिला। यहाँ ‘सेम’ (Waterlogging/Salinity) की समस्या ने उपजाऊ ज़मीन को बंजर बना दिया था। जहाँ सरकार के 18 सोलर ट्यूबवेल भी पानी निकालने में नाकाम रहे, वहां तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम सहारा बनी। 

मुख्य बिंदु:

  • संत रामपाल जी महाराज ने गदली गांव में भेजी 13,200 फीट (8 इंची) पाइपलाइन और तीन 10 HP (हॉर्स पावर) की मोटरें। 
  • गांव की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई और मात्र 7 दिनों के भीतर राहत का पूरा काफिला पहुंचा गांव।
  • केवल मोटर-पाइप ही नहीं, बल्कि स्टार्टर, नट-बोल्ट और फेविकोल जैसी छोटी से छोटी वस्तु भी साथ में भेजी गई। 
  • राहत देखकर गांव की महिला सरपंच सुनीता देवी ने नंगे पैर चलकर संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप और मदद के विशाल काफिले का किया स्वागत।

सरकारी तंत्र के 18 ट्यूबवेल हुए फेल

ग्रामीणों और सरपंच ने बताया कि गांव में ‘सेम’ की समस्या इतनी विकराल थी कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थीं। सरकार ने राहत के लिए 18 सोलर ट्यूबवेल भेजे थे, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। प्रशासन ने अपनी मोटरें संसाधन कम है बताकर वापस ले लिया। किसान हताश थे, रबी की फसल (गेहूं) की बिजाई का समय निकलता जा रहा था और खेतों में 1.5 फीट तक पानी भरा था।

एक पुकार और 7 दिन में हुआ ‘चमत्कार’

निराश होकर ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। अर्जी लगाने के मात्र एक सप्ताह के भीतर उनकी सुनवाई हो गई। राहत सामग्री का काफिला जब गदली पहुंचा तो ग्रामीणों की आंखें फटी रह गईं।

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ट्रकों और लोडिंग गाड़ियों में भरकर 13,200 फीट पाइप और भारी-भरकम 10 HP की 3 मोटरें गांव पहुंचीं। सेवादारों ने बताया कि गुरुजी का आदेश था कि किसान को 10 रुपये का सामान भी बाहर से न लाना पड़े, इसलिए स्टार्टर से लेकर फेविकोल तक सब कुछ साथ भेजा गया।

गुरुजी का सख्त आदेश

राहत सामग्री के साथ संत रामपाल जी महाराज ने एक निवेदन पत्र भी साथ में भेजा। इसमें सख्त हिदायत थी:

“हमें लोक दिखावा नहीं करना, ज़मीनी स्तर पर काम करके दिखाना है। सामान चाहे कितना भी लगे, लेकिन गांव से पानी निकलना चाहिए और अगली फसल की बिजाई होनी चाहिए। यदि सामान मिलने के बाद भी पानी नहीं निकाला गया और बिजाई नहीं हुई, तो भविष्य में ट्रस्ट मदद नहीं करेगा।”

सरपंच सुनीता देवी ने नंगे पैर किया स्वागत

राहत सामग्री पहुंचते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया। गदली की सरपंच श्रीमती सुनीता देवी ने खुद आगे बढ़कर स्वागत किया। श्रद्धा का आलम यह था कि सरपंच ने अपने जूते-चप्पल उतार दिए और नंगे पैर चलकर संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप और सेवादारों का स्वागत किया। 

सरपंच सुनीता देवी ने कहा;

“हमने 5 – 10 दिन पहले गुरुजी से प्रार्थना लगाई थी। सरकार ने जो मदद दी थी, वो वापस ले गई, लेकिन गुरुजी ने हमारी एक पुकार पर लाखों का सामान भेज दिया। यह सामान अब परमानेंट गांव का है। मुझे पूरा विश्वास है कि अब हमारे खेतों से पानी निकलेगा और गेहूं की बिजाई हो सकेगी। गुरुजी का दिल की गहराइयों से धन्यवाद।”

ग्रामीण बोले, “इससे बढ़िया तो भगवान भी नहीं कर सकता”

गांव के बुजुर्गों ने कहा कि “आज के दौर में जहां सगा भाई मदद नहीं करता, वहां संत रामपाल जी महाराज ने बिना देखे लाखों की मदद भेज दी।” एक ग्रामीण ने भावुक होकर कहा, “सरकार के चक्कर काट-काटकर हम थक चुके थे। कोई सुध लेने वाला नहीं था। लेकिन यहाँ एक अर्जी लगाते ही तूफान की तरह मदद आई। हमारे लिए तो संत रामपाल जी ही भगवान हैं। जो काम सरकार और विधायक नहीं कर सके, वो एक संत ने कर दिखाया।”

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