उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील में स्थित गाँव सरूरपुर की यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। कान्हा की नगरी का यह गाँव पिछले 5-6 वर्षों से जलमग्न था, जहाँ करीब 500 से 700 बीघा उपजाऊ भूमि ड्रेन के पानी में समा चुकी थी। किसान अपनी आँखों के सामने अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख पलायन करने को मजबूर थे। प्रशासन और स्थानीय नेताओं से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब केवल निराशा हाथ लगी, तब गाँव वालों ने हरियाणा के जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से सहायता की करुण प्रार्थना की। संत रामपाल जी महाराज की दिव्य करुणा ने न केवल गाँव को इस संकट से उभारा, बल्कि मथुरा की इस धरती पर मानवता की एक नई मिसाल पेश की। आइए जानते है दुख से सुख की यह कहानी विस्तार से।
गांव की वर्तमान स्थिति
सरूरपुर गाँव के हालात अत्यंत भयावह हो चुके थे। पिछले 6 सालों से खेतों में पानी भरा होने के कारण फसल की बिजाई असंभव थी। ग्रामीणों की पीड़ा का वर्णन करते हुए सेवादारों ने बताया कि किसान अपनी आजीविका खो चुके थे और पशुओं के चारे तक का संकट खड़ा हो गया था। गाँव के लोग अपनी ज़मीन छोड़कर मजदूरी के लिए बाहर जाने लगे थे। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों के अनुसार, मथुरा में कई बड़े कथावाचक और धार्मिक संगठन हैं जो दान तो बहुत लेते हैं, लेकिन आपदा के समय किसानों की सुध लेने कोई नहीं आया।
ग्रामीणों की मार्मिक मांग
सभी दरवाजों से निराश होने के बाद, सरूरपुर की ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट कार्यालय में एक विनम्र प्रार्थना पत्र भेजा। ग्रामीणों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:
- जल निकासी के लिए 20 HP की एक शक्तिशाली मोटर।
- खेतों से दूर तक पानी ले जाने के लिए 7900 फीट लंबी पाइपलाइन।
गाँव वालों की इस पुकार को संत रामपाल जी महाराज ने अपना दुःख समझा और मात्र 24 घंटों के भीतर राहत का एक विशाल काफिला गाँव की ओर रवाना कर दिया।
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संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज की असीम दया से जो राहत सामग्री भेजी गई, वह ग्रामीणों की कल्पना से भी अधिक थी। संत जी ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों को एक कील भी बाहर से न खरीदनी पड़े। प्रदान की गई सामग्री पूरी तरह निःशुल्क और स्थायी है:
- 7,900 फीट उच्च गुणवत्ता वाली 8-इंच पाइपलाइन।
- 20 HP की एक विशाल और शक्तिशाली मोटर (किर्लोस्कर/क्रॉम्पटन मेक)।
- 500 फीट शुद्ध कॉपर की भारी बिजली की तार।
- मोटर के साथ स्टार्टर, बैंड, प्लास्टिक व निप्पल, और एयर वाल्व।
- सेवा की बारीकी इतनी थी कि जंग से बचाव के लिए स्टील के नट-बोल्ट भी भेजे गए।
पुष्प वर्षा और भव्य स्वागत: ग्रामीणों का उमड़ा जनसैलाब
जैसे ही संत रामपाल जी महाराज की राहत सामग्री से लदे ट्रक सरूरपुर की सीमा में दाखिल हुए, पूरा गाँव उत्सव के माहौल में डूब गया। गाँव के बाहर 2 किलोमीटर पहले ही ग्रामीण काफिले के स्वागत के लिए खड़े थे।
- ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप (तस्वीर) पर पुष्प वर्षा की और उन्हें अपने सीने से लगाकर कार्यक्रम स्थल तक ले गए।
- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने जयकारों के साथ इस दिव्य सहायता का अभिनंदन किया।
- ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने आज तक ऐसी निस्वार्थ और त्वरित सेवा किसी इंसान या संस्था द्वारा नहीं देखी।
ग्रामीणों की आवाज़
गाँव के प्रतिनिधियों और किसानों ने भावुक होकर अपने विचार साझा किए:
- “हमारे गाँव की 500 से 700 बीघा ज़मीन जलमग्न थी और लोग पलायन कर रहे थे। संत रामपाल जी महाराज ने हमारी उम्मीद पूरी की है। इसके लिए जितना धन्यवाद दिया जाए कम है।”
- “इस देश में अंबानी-अडानी और बहुत से अमीर संत हैं, लेकिन गरीबों के बारे में कोई नहीं सोचता। संत रामपाल जी महाराज ने जो मदद पहुँचाई है, वह हमारे जीवन में पहली बार हो रहा है।”
- “गुरु जी का आशीर्वाद ऐसा है कि यदि गाँव में भरे पानी की स्याही बनाई जाए, तो भी उनकी महिमा लिखने के लिए वह कम पड़ जाएगी।”
- “गाँव में इतनी खुशी है जैसे साक्षात भगवान आ गए हों। मात्र दो दिन में हमारी सर्वे हुई और आज सामान आ गया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं।”
- “6 साल से हम एसडीएम और विधायकों के चक्कर काट रहे थे, उन्होंने हमें गुमराह किया। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने हमारी प्रार्थना तुरंत स्वीकार की।”
जवाबदेही और पारदर्शिता
संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम अपनी पारदर्शिता के लिए जानी जाती है। राहत वितरण के साथ ही पंचायत को एक निर्देश पत्र सौंपा गया:
- गाँव को निर्देश दिया गया कि निर्धारित समय में पानी निकालकर बिजाई शुरू की जाए।
- सहायता के तीन चरणों की ड्रोन रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई: राहत से पहले, पानी निकलने के बाद और फसल लहराने पर।
- यह वीडियो सतलोक आश्रमों में दानदाताओं को दिखाया जाएगा ताकि उन्हें विश्वास रहे कि उनके दान का एक-एक पैसा मानवता की सेवा में लगा है।
- यदि भविष्य में और भी सामग्री की आवश्यकता हुई, तो संत जी ने और मदद देने का आश्वासन भी दिया है।
विश्व उद्धारक और किसान मसीहा संत रामपाल जी महाराज
सरूरपुर गाँव की यह ऐतिहासिक राहत मुहिम प्रमाणित करती है कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान में एकमात्र पूर्ण संत और कबीर परमेश्वर के वास्तविक प्रतिनिधि हैं। जहाँ दुनिया स्वार्थ में डूबी है, वहीं संत जी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से 400 से अधिक गाँवों में निःशुल्क राहत पहुँचाकर किसानों के सच्चे मसीहा बन चुके हैं। उनकी यह सेवा जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर केवल ‘जीव मात्र’ के कल्याण के लिए है। जैसा कि ग्रामीणों ने स्वीकार किया, संत रामपाल जी महाराज कलयुग में सतयुग का आगाज कर रहे हैं और वे ही इस विश्व के सच्चे उद्धारक हैं।



