हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला तहसील में बसा सिंधड़ गांव आज शांति और खुशहाली का दृश्य पेश कर रहा है, लेकिन कुछ ही दिन पहले यही गांव बाढ़ की तबाही से घिरा हुआ था। खेतों में अथाह पानी भरा पड़ा था, नरमा और धान की फसलें डूब गई थीं, घरों के अंदर भी पानी घुस आया था और परिवार भूखे पेट रातें गुजार रहे थे।
ग्रामीणों ने जब लगातार सरकारी दरवाजों के चक्कर लगाने के बाद भी उम्मीद छोड़ दी, तब पंचायत की ओर से एक प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज के चरणों में पहुंची। इस प्रार्थना का जवाब न सिर्फ तेजी से आया, बल्कि इतना बड़ा था कि आज पूरा गांव उस दया को याद करता है, जिसने न केवल खेतों को बचाया, बल्कि गांव की जिंदगियों में नई राह दिखाई।
बाढ़ की विपदा: किस तरह डूबा सिंदड़ गांव
सिंधड़ गांव के लोग बताते हैं कि पिछले कई दिनों तक बारिश और जलभराव की वजह से पूरा इलाका समुद्र जैसा लग रहा था। खेत तालाब बन चुके थे, जिनमें नरमा और धान तक ही नहीं, बल्कि घरों की दीवारें भी पानी में डूबी हुई थीं। एक किसान के अनुसार उनके खेत में कहीं जहां दो फुट पानी था, तो कहीं चार फुट तक पानी चढ़ा पड़ा था।
परिवारों को न तो ठीक तरह से खाने को मिलता था और न ही रहने के लिए सुरक्षित जगह मिलती थी। गांव की महिलाएं कहती हैं कि उस दौरान ऐसा लग रहा था मानो जीवन खत्म हो गया हो, क्योंकि सारी मेहनत बेकार होती नजर आ रही थी।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मोटरें और पाइप लाने के लिए दर‑दर भटकना शुरू कर दिया, लेकिन कहीं से कोई ठोस सहायता नहीं मिली। एक और किसान ने कहा कि कर्ज का डर और फसल की बर्बादी दोनों ही उनके सिर पर साया बनकर बैठ गया था। गांव की चौपालों पर चर्चा हर रोज यही होती थी कि आज भी पानी न निकला तो अगली फसल तक खेत खाली रहेंगे। ऐसे में जब सारे रास्ते बंद दिख रहे थे, तब गांव की पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से मदद की प्रार्थना कर दी।
संत रामपाल जी महाराज की त्वरित मदद से बचा गांव
संत रामपाल जी महाराज ने प्रार्थना के बाद तुरंत आदेश दिया कि सिंधड़ गांव को वह सारी राहत सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, जिसकी गांव को जरूरत थी। महज चौबीस घंटे के भीतर ट्रकों का एक लंबा काफिला तैयार किया गया और लंबी कतार में खड़े वाहन गांव की ओर रवाना हो गए। इन ट्रकों में गांव की मांग के अनुसार सारा समान रखा गया।

- 20,000 फीट आठ इंच पाइप
- चार बड़ी 15 HP की मोटरें
- 1500 फुट तक तार और स्टार्टर
जैसी आवश्यक वस्तुएं
यह सामान सीधे ग्राम पंचायत को सौंपा गया ताकि तुरंत काम शुरू किया जा सके। गांव के लोग बताते हैं कि जैसे ही पाइप और मोटरें गांव पहुंचीं, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए और वे संत रामपाल जी महाराज के चरणों में धन्यवाद देने लगे। उनका कहना था कि यह मदद केवल राहत नहीं थी, बल्कि उनके लिए नई जिंदगी का सहारा थी।
एक किसान ने कहा कि अगर यह मदद नहीं आती तो वे एक साल तक भी अपने खेतों पर बिजाई नहीं कर पाते और उनका पूरा भरोसा टूट चुका होता। गांव के लोगों ने उस दिन संकल्प लिया कि वे इन साधनों का सही इस्तेमाल करेंगे और जलभराव की समस्या को आजीवन दूर करने की कोशिश करेंगे।
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पानी कैसे उतारा गया, जमीन कैसे सूखी
संत रामपाल जी महाराज की ओर से भेजी गई मोटरों और पाइपलाइन का गांव के लोगों ने सदुपयोग किया। एक किसान जो खुद प्लम्बर है, उन्होंने बताया कि उन्होंने स्थानीय गांव में जाकर खुद ही पाइपों की फिटिंग की और पूरी पाइपलाइन को जोड़ने व चलाने की जिम्मेदारी ली। उन्होंने बताया कि जब कोई मोटर रुकती या पानी उठाने में दिक्कत आती, तो वे दौड़कर जाकर उसे फिर से चलाने लगते। गांव के कई लोग मिलकर दिन‑रात एक करके अथाह पानी को खेतों से बाहर खींचते रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार पूरे गांव में लगभग छह सौ से सात सौ किल्ले जमीन पानी में डूबी पड़ी थी। लेकिन मोटरों और पाइपलाइन की मदद से धीरे‑धीरे पानी घटने लगा और खेतों की देखभाल शुरू हो गई। ग्राम पंचायत ने जब पूरे क्षेत्र का भौगोलिक अनुमान लगाया तो पता चला कि अधिकांश खेतों से पानी पूरी तरह निकाल लिया गया है और सिर्फ कुछ अलग‑अलग तालाबों में ही थोड़ा‑सा पानी बचा हुआ है।
एक और किसान ने बताया कि जहां उनके दस एकड़ में से सिर्फ दो एकड़ ही बच सके थे, आज वे उन एकड़ों में भी बिजाई कर रहे हैं और बाकी जमीनों को तैयार कर रहे हैं।
गांव वालों की आपबीती और खुशी
जब सिंदड़ गांव के किसानों से बात की गई, तो उनकी खुशी साफ झलकी। किसान अनिल जी बोले, “संत रामपाल महाराज ने बढ़िया काम किया। अब हरियाली है, बिजाई हो गई।”
कुलदीप भाई भावुक होकर बोले, “सत साहेब को नमन। 600 किले पानी उतरा, 500 किले में बिजाई हो गई। मेरे 10 एकड़ बच गए। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करता हूं कि वे एक चूस बोर लगवा दें, तो और भलाई हो।”
एक किसान ने कहा, “10 लाख का नुकसान टला। रामपाल जी नहीं होते तो बिजाई ही नहीं होती। बहुत धन्यवाद।”
ताई जी ने दर्द भरी आवाज में कहा “मजदूर और किसान सभी बर्बाद हो गए थे, आज संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दिए गए मोटर‑पाइप से खेतों का पानी उतरा है।”
सरपंच के पिताजी बोले, “पूरे गांव का पानी उतर गया। रामपाल महाराज को प्रणाम।”आज गांव का बच्चा – बच्चा संत रामपाल जी महाराज जी के प्रति नतमस्तक है। “रामपाल जी मसीहा बनकर आए हैं। बच्चे‑बच्चे की जुबान पर उनका नाम है।”
एक भाई ने कहा, “2022 में 11 महीने पानी भरा था, छोटी मोटरें बेकार थीं। इस बार बड़े साधन मिले तो जल्दी ही पानी उतर गया।”
ये प्रतिक्रियाएं साबित करती हैं कि संत रामपाल जी महाराज जी ने दी है मदद ने सिर्फ खेत ही नहीं, बल्कि लोगों का दिल भी जीत लिया है। गांव की चौपालों पर चर्चा है – “रामपाल जी की दया से तालाब खेत बन गया।”
नई जिंदगी, नई उम्मीदें
यह मदद सिर्फ पानी निकालने तक सीमित नहीं रही। पूरे समाज पर इसका गहरा असर पड़ा। किसान जो कर्ज के जाल में फंसने वाले थे, आज मुस्कुरा रहे हैं। परिवारों में खुशी लौट आई है, बच्चे अब खाने के लिए तरसेंगे नहीं। ग्रामीणों ने पाइप दबाकर भविष्य भी सुरक्षित कर लिया है।
सरपंच जी बोले, “जिन्होंने हिम्मत की, फसल बचा ली। लगभग 95 प्रतिशत बिजाई हो गई है।” सरपंच जी के पिता जी का कहना है, “सात पीढ़ियों का दुख एक ही झटके में मिट गया है।” आसपास के गांव प्रेरित हो रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज ने साबित किया कि एक संत की कृपा दृष्टि से पूरे समुदाय को बचाया जा सकता है।
अब गांव में हरियाणा की हरियाली लौट आई है – ट्रैक्टर चल रहे हैं, कोपलें लहरा रही हैं। किसान कहते हैं, “जमीन है तो सब कुछ है। रामपाल जी ने हमारी जिंदगी बचा ली।”
सेवा का संकल्प, आपदा पर विजय
सिंधड़ गांव की यह कहानी प्रेरणा है। बाढ़ जैसी भयानक आपदा में संत रामपाल जी महाराज की त्वरित और निस्वार्थ सेवा ने चमत्कार कर दिखाया है। 20,000 फीट पाइप, चार मोटरें – यह सामान दान नहीं, जीवन‑दान था। किसानों की हंसी, हरियाली भरी फसलें – सब संत रामपाल जी महाराज की कृपा का नतीजा है। आज गांव का बच्चा‑बच्चा संत रामपाल जी महाराज जी के लिए नतमस्तक है।
यह बात साबित करती है कि सच्चे संत की शक्ति के आगे कोई भी आपदा इतनी बड़ी नहीं रहती। आज पूरा सिंदड़ गांव संत रामपाल जी महाराज के प्रति धन्यवाद भाव से भर गया है।
संत रामपाल जी महाराज जी की कृपा से आज पूरा गांव खुशहाल है, और यह खुशी हर कोने तक पहुंच रही है।



