हिसार जिले के आदमपुर तहसील में बसे कोहली गांव की यह दर्दभरी कहानी हर किसान के दिल को छू जाती है। भारी बारिश ने खेतों को 3-3 फुट पानी में डुबो दिया, धान की फसल बर्बाद हो चुकी थी और गेहूं की बुवाई का समय नाक पर सांस ले रहा था।
गांव के वो किसान जिन्होंने कई किले जमीन ठेके पर ली थी, वो अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को पानी में सड़ता देख रहे थे। किसानों में एक किसान भाई ऐसे भी थे, जिन्होने 10 किल्ले जमीन ठेके पर ली थी, उनका लाखों रुपये का निवेश डूब चुका था, लेकिन संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से तीन दिन में ही गांव की किस्मत बदल गई।
बाढ़ की तबाही: खेतों का सन्नाटा
कोहली गांव में एक ऐसा दृश्य छाया था, जहां हरा-भरा खेत पानी की चादर तले सिसक रहा था। गांव में चारों तरफ पानी ही पानी था। धान की फसल तो बर्बाद हो ही चुकी थी, लेकिन असली चिंता गेहूं की बुवाई की थी।
एक किसान ने बताया, “10 किल्ले जमीन ठेके पर ली, 6 लाख का नुकसान हो चुका, अगर गेहूं न बोया तो नुकसान 10 लाख के पार चला जाता।” प्रशासन के चक्कर काटे, लेकिन जवाब मिला- पाइप आने में 6 महीने लगेंगे। घरों में सन्नाटा पसर गया, बच्चों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा। पशुओं को चारा न मिला, डिस्पेंसरियां बंद, स्कूलों में पानी भर गया। पूरा गांव उदास था, जैसे जिंदगी थम सी गई हो।
संत रामपाल जी महाराज: सच्चे सेवक का अवतार
संत रामपाल जी महाराज का नाम सुनते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं, दिल में भरोसा जाग उठता है। वे न सिर्फ आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि मानवता के सच्चे रक्षक भी हैं। किसान परिवार में जन्में संत रामपाल जी महाराज जी ने कभी दिखावे को नहीं अपनाया, बल्कि जमीनी स्तर पर सेवा का बीड़ा उठाया।
जब कोहली गांव के लोगों को पता लगा कि संत रामपाल जी महाराज जी के बरवाला स्थित ट्रस्ट ऑफिस में सिर्फ एक अर्जी लगाने से बिना किसी सिफारिश के अनेकों गांवों को मदद मिली है। तब कोहली गांव वालों ने भी संत रामपाल जी महाराज जी से प्रार्थना की, और मात्र 24 घंटे में उनकी प्रार्थना संत रामपाल जी महाराज जी ने स्वीकार कर ली, तीसरे दिन ही राहत का काफिला गांव कोहली की दहलीज पर आ खड़ा हुआ। राहत सामग्री देखकर गांव के सभी लोग आश्चर्यचकित थे।

- 8000 फुट 8 इंची पाइप
- दो 10 एचपी की क्रॉम्पटन कंपनी की मोटरें
- स्टार्टर, फेविकोल सहित सारा समान
संत रामपाल जी महाराज जी ने सारी सामग्री कोहली गांव के लिए भेज दी। सरपंच जी को एक नट भी बाजार से नहीं लाना पड़ा। और साथ ही साथ संत रामपाल जी महाराज जी ने यह भी आदेश दिए कि यह सामान हमेशा के लिए गांव की अमानत है। गांव वाले इसका उपयोग जरूरत पड़ने पर कर सकते है।
संत रामपाल जी महाराज समाज हित में निरंतर कार्यरत हैं- अन्नपूर्णा योजना से भूखे को अनाज, जूते-कपड़े, पढ़ाई-दवाई, मकान तक प्राप्त करवा रहे है। 400 से ज्यादा गांवों में संत रामपाल जी महाराज जी ने बाढ़ राहत सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करवाई है। पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात तक संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम से मदद मिली है। उनका स्पष्ट आदेश है- “लोक दिखावा नहीं, जमीनी काम दिखाओ। उनकी कृपा से लाखों जिंदगियां संवर रही हैं, वे डॉक्टरों से भी बड़ा काम कर रहे- विचारों से दिल ठीक करते हैं, और सेवा से मानव समाज को।
गांव वालों की प्रतिक्रियाएं: आंसुओं भरी मुस्कान
बाद राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए सारा गांव ग्राम पंचायत भवन पर इकट्ठा हुआ। सरपंच जी ने नम आंखों के साथ कहा, “इस आपदा की घड़ी में संत रामपाल जी महाराज ने जो मदद की, तहे दिल से धन्यवाद। हम हर जगह उनकी सेवा सुन चुके थे, गुराना से लेकर धनाना तक। तीन दिन में 8000 फुट पाइप, दो मोटरें- विश्वास दिलाता हूं, जल्द पानी निकालेंगे, फसल लहराएंगे।”
एक युवा डॉक्टर विशाल सिंह ने कहा, “मैं दवाइयों से शरीर ठीक करता हूं, लेकिन संत रामपाल जी महाराज विचारों से मन-दिल सुधारते हैं। वे हम डॉक्टरों से कहीं बड़ा काम कर रहे। बुराइयों से छुटकारा दिलाते हैं।”
जिस किसान भाई ने ठेके पर 10 किल्ले जमीन ली थी, उनकी आंखों में चमक थी, उन्होंने कहा “प्रशासन ने 6 महीने बोला, महाराज जी ने 3 दिन में तकदीर बदल दी। 6 लाख का नुकसान हो चुका, अब 100% गेहूं बोवेंगे। सरकार के चक्कर में मत पड़ो, आश्रम जाओ- सुनवाई होगी।”
एक बुजुर्ग ने हाथ जोड़े और कहा “चार साल से जलभराव था, इस बार तबाही ही हो रही थी पूरे गांव की। एक तरफ मोटर चल रही थी, रामपाल जी ने दो मोटरें और दे दी। 5-7 दिन में पानी साफ हो जाएगा। मैं संत रामपाल जी महाराज जी का दिल से धन्यवाद करता हूं।”
राहत कार्य का विवरण: मुकम्मल समाधान
ग्राम पंचायत कोहली को सारा समान सौंपा गया। दो 10 एचपी की मोटरें, 8000 फुट पाइप, छोटे-बड़े नट, सुंडिया, फेविकोल सहित सारा समान। सरपंच जी ने संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा भेजे गए पत्र पर हस्ताक्षर किए और वादा किया कि समय से पानी निकालकर अगली फसल की बुवाई की जाएगी।
समस्त ग्राम वासियों की उपस्थिति में निवेदन पत्र पढ़ा गया। जिसमें लिखा था कि अगर संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा भेजी गई राहत सामग्री से खेतों में से पानी नहीं निकलता है, तो गांव वाले निःसंकोच और राहत सामग्री की मांग संत रामपाल जी महाराज जी से कर सकते है।
अगर फिर भी खेतों में से पानी नहीं निकला और फसल नहीं बोई तो आगे से गांव वालों को कोई मदद नहीं मिलेगी। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेश है कि खेतों के तीन ड्रोन वीडियो बनाए जायेंगे। पहला वीडियो खेतों में पानी भरा हुआ, दूसरा वीडियो खेतों में पानी सूखने के बाद, अंत में एक ओर वीडियो बनाया जाएगा जिसमें फसल लहराती हुई दिखाई जाएगी।
यह तीनों वीडियो संत रामपाल जी महाराज जी के आश्रमों में समागमों में दिखाए जाएंगे। संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य है कि किसानों के खेतों में अगली फसल लहराए, जिससे किसान और मजदूर खुशहाल हो सके।
सामाजिक प्रभाव: नई उम्मीद की किरण
यह मदद सिर्फ कोहली तक सीमित नहीं है। अगर किसान का चूल्हा जलेगा तो मजदूर का भी चूल्हा जलेगा। बाढ़ से पशु-पक्षी, बच्चे-बुजुर्ग सभी प्रभावित है। बीमारियां फैलने का डर है, लेकिन अब संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा भेजी गई राहत सामग्री से राहत है। ऐसे समय में जब सरकारी मदद अपर्याप्त साबित हुई, उस समय धार्मिक संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए। कथावाचक लाखों रुपए कमाते हैं, पर जब सेवा का समय आता है, तब संत रामपाल जी महाराज जी जैसे बिरले ही संत है जो दान का हर पैसा परमार्थ में लगाते।
संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी गई राहत सामग्री से कोहली गांव में खुशी का माहौल है। एक किसान बोला, “मरते हौसले को नया जीवन मिला।” युवाओं में उत्साह और महिलाओं में संतोष है। संत रामपाल जी महाराज जी ने समाज में निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया है। संत रामपाल जी महाराज सदा से ही राष्ट्र हित में कार्यरत है। अगर संत रामपाल जी महाराज जी की तरह अन्य संस्थाएं भी समाज सेवा के कार्यों में आगे आयेंगे, तो सरकार पर बोझ कम होगा।
गांव कोहली की सेवा में मिला प्रेरणा का प्रकाश
कोहली की यह कहानी हताशा से आशा की उड़ान है। संत रामपाल जी महाराज ने साबित किया- सच्चा संत समाज में व्याप्त कमियों को भरता है। गांव अब हरियाली की ओर बढ़ रहा है, फसल लहराएगी, जिंदगियां मुस्कुराएंगी। संत रामपाल जी महाराज जी की दया से यह चमत्कार हरियाणा की धरती पर चित्रार्थ हुआ।



