हरियाणा/नूह – गाँव छछैड़ा: जहाँ प्रशासन रहा विफल, वहाँ मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज

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​हरियाणा के नूह जिले की तहसील नूह के अंतर्गत आने वाले गाँव छछैड़ा में पिछले लगभग 8 से 10 वर्षों से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई थी। यहाँ के किसानों की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि पानी में डूबी रहने के कारण बर्बाद हो चुकी थी। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के समक्ष कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। हताशा के इस माहौल में, ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के माध्यम से अपनी व्यथा संत जी तक पहुँचाने का निर्णय लिया।

समाचार मुख्य बिंदु:

  • ​गाँव छछैड़ा में पिछले 10 वर्षों से जलभराव की समस्या के कारण 80 प्रतिशत फसलें नष्ट हो रही थीं।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने प्रार्थना के मात्र 4 दिनों के भीतर राहत सामग्री भिजवाई।
  • ​राहत सामग्री में 8000 फुट 8 इंची पाइप और 6-7 एचपी की 6 बड़ी मोटरें शामिल थीं।
  • ​ग्रामीणों ने 1.5 किलोमीटर लंबे ट्रैक्टर काफिले और फूलों की वर्षा के साथ संत जी की सेवा का स्वागत किया।
  • ​पीजीटी शिक्षक अरुण शर्मा ने इस कार्य को “कल्पना को भूतल पर उतारने” जैसा बताया।
  • ​राहत सामग्री के साथ एक भी पैसा ग्रामीणों से नहीं लिया गया, सब कुछ निशुल्क प्रदान किया गया।
  • ​गाँव के सरपंच समय सिंह ने इसे किसानों के लिए जीवन रेखा बताया।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि इस सामान से पानी नहीं निकाला गया तो भविष्य में मदद नहीं मिलेगी।

विशाल राहत काफिले का आगमन और भव्य स्वागत

​जिस दिन संत रामपाल जी महाराज का बाढ़ राहत सेवा अभियान गाँव छछैड़ा पहुँचा, वह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार, जिसमें ट्रैक्टर और पाइपों से भरे ट्रक शामिल थे, गाँव की सीमाओं में प्रवेश कर रही थी। डीजे पर संत रामपाल जी महाराज के मंगल गीत बज रहे थे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था।

गाँव के बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान हाथों में फूलों की मालाएं लेकर स्वागत के लिए उमड़ पड़े थे। ग्रामीणों ने इसे किसी साधारण सहायता के रूप में नहीं, बल्कि साक्षात भगवान के आगमन के रूप में देखा। गाँव के प्रधान और मौजीज लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर और पगड़ी भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया।

किसानों के लिए वरदान: 8000 फुट पाइप और मोटरें

​संत रामपाल जी महाराज ने गाँव की भौगोलिक स्थिति और जलभराव की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी रूप से सक्षम सहायता प्रदान की। यहाँ की जमीन पानी को सोख नहीं पा रही थी, इसलिए पानी को लिफ्ट करके दूर नहर या नाले में डालना ही एकमात्र उपाय था।

नूह: संत रामपाल जी महाराज ने छछैड़ा गाँव को बाढ़ से बचाया

इसके लिए संत रामपाल जी महाराज ने 8000 फुट लंबा 8 इंची पाइप और 7 एचपी की 6 शक्तिशाली मोटरें भिजवाईं। इसके साथ ही स्टार्टर, नट-बोल्ट और वाशर जैसी छोटी से छोटी एक्सेसरीज भी उपलब्ध करवाई गईं ताकि किसानों को बाजार से एक भी पैसा खर्च न करना पड़े। यह सामग्री किसानों के लिए एक वरदान सिद्ध हुई है, जिससे अब वे अपनी डूब चुकी 20 किल्ले जमीन को फिर से उपजाऊ बना सकेंगे।

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राहत सामग्री का विवरण

नूह: संत रामपाल जी महाराज ने छछैड़ा गाँव को बाढ़ से बचाया
क्रम संख्यासामग्री का नाममात्रा/विवरण
1पाइप8000 फुट (8 इंची लाइन)
2मोटर6 नग (7 एचपी/6-7 एचपी)
3एक्सेसरीजस्टार्टर, नट, बोल्ट, वाशर सहित पूर्ण किट
4लागत (ग्रामीणों के लिए)पूर्णतः निशुल्क

शिक्षित वर्ग द्वारा संत रामपाल जी महाराज की प्रशंसा

​गाँव के शिक्षित और बुद्धिजीवी वर्ग ने भी संत रामपाल जी महाराज के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। गाँव के पीजीटी इंग्लिश टीचर, अरुण शर्मा ने कहा कि यह एक “कल्पना को भूतल पर उतारने” जैसा है। उन्होंने माना कि जहाँ प्रशासन और शासन केवल कागजी आश्वासन देते हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज ने धरातल पर कार्य करके दिखाया है।

वहीं, लेक्चरर गिरीश वशिष्ठ ने बताया कि 8-10 सेंटीमीटर पानी खड़े रहने से खेत सूखते नहीं थे और बुवाई संभव नहीं थी। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी ने ‘प्रैक्टिकली’ सामान उपलब्ध करवाकर समस्या का जड़ से समाधान किया है, जो समाज की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सरपंच और प्रधान की कृतज्ञता

​ग्राम पंचायत छछैड़ा के सरपंच समय सिंह ने बताया कि पिछले 5-6 सालों से भारी बारिश और जलभराव के कारण गाँव में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई थी। फसल न होने से पशुओं के चारे का संकट था और बीमारियां फैल रही थीं। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई यह सहायता किसानों के लिए एक “जीवन रेखा” है।

सरपंच ने स्वीकार किया कि सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और नेताओं के आगे अर्जी लगाने के बाद भी जो स्थायी समाधान नहीं मिला, वह संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से बिना किसी भागदौड़ के प्राप्त हो गया। गाँव के प्रधान ने भी भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी निस्वार्थ सेवा पहली बार देखी है और पूरा गाँव संत रामपाल जी का ऋणी रहेगा।

संत रामपाल जी महाराज का कड़ा संदेश और अनुशासन

​राहत सामग्री सौंपने के साथ ही संत रामपाल जी महाराज की ओर से सेवादारों ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी पढ़कर सुनाया। इसमें स्पष्ट कहा गया कि यह सहायता दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परिणाम के लिए है। ग्रामीणों को निर्देश दिया गया कि वे इस सामग्री का उपयोग कर गाँव का पानी अवश्य निकालें और फसल की बुवाई करें।

यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में ट्रस्ट द्वारा कोई मदद नहीं दी जाएगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए गाँव की ड्रोन से वीडियोग्राफी करवाई गई है-एक पानी भरे होने के दौरान, दूसरी पानी निकलने के बाद, और तीसरी जब फसल लहलहाएगी। ये वीडियो संगत को दिखाए जाएंगे ताकि उन्हें विश्वास हो कि उनके दान का सदुपयोग हो रहा है और किसी का पैसा व्यर्थ नहीं जा रहा।

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निस्वार्थ सेवा और राजनीति से दूरी

​संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने स्पष्ट किया कि इस सेवा के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य या वोट बैंक की राजनीति नहीं है। यह विशुद्ध रूप से मानव सेवा और परमार्थ का कार्य है। जहाँ आज के समय में धर्म के नाम पर कई संस्थाएं और कथावाचक केवल धन अर्जित करने में लगे हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज जनता से प्राप्त धन को वापस जनता की सेवा में ही लगा रहे हैं।

सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज पूरे भारत में बाढ़ पीड़ित गांवों में इसी तरह सेवा कर रहे हैं, चाहे वह पंजाब हो, हिमाचल हो या गुजरात। उनका एकमात्र उद्देश्य दुखी मानवता का कल्याण और गरीब किसान के घर में चूल्हा जलना है।

कलयुग के तारणहार: संत रामपाल जी महाराज की अद्भुत लीला

अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि छछैड़ा गाँव के लिए संत रामपाल जी महाराज साक्षात ईश्वर का रूप बनकर आए। उन्होंने न केवल भूमि को जलमग्न होने से बचाया बल्कि ग्रामीणों के टूटते हुए विश्वास को भी सहारा दिया। उ

नकी यह पहल साबित करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक और रक्षक भी हैं जो अपने अनुयायियों और समाज के हर वर्ग के सुख-दुख में उनके साथ खड़े हैं। उनकी करुणा और दूरदर्शिता ने हजारों परिवारों को उजड़ने से बचा लिया है।

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