भारत में स्वच्छता अब केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय बन चुकी है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में 7 जनवरी 2026 को हरियाणा के चरखी दादरी में आयोजित महा-सफाई अभियान इसी परिवर्तनशील सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह अभियान जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के स्पष्ट संदेश—“साफ-सुथरा हो अपना देश”—से प्रेरित होकर व्यापक स्तर पर संपन्न किया गया।
संत रामपाल जी महाराज का संदेश और स्वच्छता का व्यापक दृष्टिकोण
संत रामपाल जी महाराज का संदेश “साफ-सुथरा हो अपना देश” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन व्यवहार में उतारने योग्य विचार है। उनके अनुसार स्वच्छता बाहरी वातावरण तक सीमित न होकर आंतरिक अनुशासन और सामाजिक सोच से भी जुड़ी होती है। जब व्यक्ति अपने आसपास की सफाई को अपनी जिम्मेदारी मानता है, तभी समाज स्वच्छ बनता है।
उनके मार्गदर्शन में चलाए गए सामाजिक अभियानों में स्वच्छता को नैतिक कर्तव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यही कारण है कि उनके अनुयायी और सामाजिक संगठन बिना किसी दबाव, लाभ या प्रचार की अपेक्षा के स्वेच्छा से ऐसे अभियानों में भाग लेते हैं। यह स्वैच्छिक सहभागिता ही इस महा-सफाई अभियान को विशेष बनाती है।
चरखी दादरी में महा-सफाई अभियान का व्यापक स्वरूप
चरखी दादरी में आयोजित यह महा-सफाई अभियान केवल कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे सुनियोजित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, बाजार क्षेत्रों और आवासीय कॉलोनियों में व्यापक स्तर पर सफाई कार्य किया गया।
सफाई के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक संसाधनों का भी उपयोग किया गया। जेसीबी मशीनों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य साधनों की सहायता से कचरा और मलबा हटाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभियान केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक योजना पर आधारित था। स्वयंसेवकों की बड़ी संख्या ने इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दे दिया।
टीम-आधारित व्यवस्था और कार्य विभाजन
इस महा-सफाई अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी टीम-आधारित संरचना रही। पूरे शहर को विभिन्न रूट और सेक्टर में विभाजित किया गया तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गईं। हर टीम में सेवादारों की निश्चित संख्या, जिम्मेदार इंचार्ज और आवश्यक संसाधन निर्धारित किए गए।

इस कार्य विभाजन से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ कि कोई क्षेत्र छूटे नहीं और हर स्थान पर समान स्तर की सफाई हो। यह मॉडल दिखाता है कि जब सामाजिक कार्यों को भी पेशेवर योजना के साथ किया जाता है, तो परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं।
| टीम नं. | रूट | सेवादार इंचार्ज | सेवादारों की संख्या | JCB | ट्रैक्टर | ट्रॉली |
| 1 | लोहार चौक → बवाना चौक | विनोद दास | 40 | — | 01 | 01 |
| 2 | लोहार चौक → देसाली/देहाती मार्ग | रतन दास | 30 | — | — | 01 |
| 3 | बवाना चौक → माइनर/सेक्टर रोड | चन्द्रवीर दास | 50 | 01 | 02 | 01 |
| 4 | बवाना चौक → रेलवे रोड → हॉस्पिटल के पीछे | राजीव दास | 60 | ↓ | ↓ | ↓ |
| 5 | बवाना चौक → जयसिंह बस्ती/उप-मार्ग | गोपी दास | 40 | — | — | 01 |
| 6 | जयसिंह बस्ती → रोहतक चौक → अंबेडकर चौक | देवकुमार दास | 50 | — | — | 01 |
| 7 | रोहतक चौक → कोर्ट रोड → कलेक्ट्रेट/कचहरी क्षेत्र | सुरेश दास | 45 | — | — | 01 |
| 8 | रोहतक चौक → रेलवे/हटमार्केट → सब्ज़ी मंडी | विनोद दास | 30 | — | — | 01 |
| 9 | धिगावा रोड → माइनर/नया बाइपास | नरेश दास | 55 | — | — | 01 |
| टीम नं. | रूट | सेवादार इंचार्ज | सेवादारों की संख्या | JCB | ट्रैक्टर | ट्रॉली |
| 10 | रोहतक गेट → रेलवे स्टेशन → पुरानी अनाज मंडी → तिरंगा पार्क | दीपक दास | 30 | — | — | 01 |
| 11 | पुरानी अनाज मंडी गेट → कंपोज़ रोड → नई मंडी | शरण दास | 40 | — | — | 01 |
| 12 | बालसमंद → अंबेडकर पार्क → ढाणी लावण | संजय दास | 52 | — | — | 01 |
| 13 | बवाना रेलवे लाइन → जेल के पीछे का रोड | सुरेश दास | 40 | — | — | 01 |
| 14 | गढ़ीबांध चौक → नई अनाज मंडी | हरबीर दास | 45 | 01 | 01 | 01 |
| 15 | पिलानी रोड → ढाणी लावण | मुकेश दास | 60 | ↓ | 01 | 01 |
| 16 | एमपी/धनसारी क्षेत्र की गलियाँ | रमेश दास | 40 | — | — | 01 |
| 17 | एमसी कॉलोनी → फायर स्टेशन → कॉलोनी का आंतरिक क्षेत्र | अनिल दास | 30 | (एमसी रोड-वाली) | — | 01 |
कुल (Total): सेवादार — 268, JCB — 02, ट्रैक्टर — 04, ट्रॉली — 16
संसाधनों का संतुलित उपयोग
तालिकाओं से स्पष्ट है कि जहाँ भारी कचरा/मलबा अधिक था, वहाँ JCB और ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाए गए; जबकि आवासीय गलियों और बाज़ार क्षेत्रों में मानव-श्रम आधारित सफाई पर जोर दिया गया। इस संतुलन ने न केवल समय बचाया, बल्कि ईंधन और मशीन का कुशल उपयोग भी सुनिश्चित किया।
सामाजिक सहभागिता: जन-आंदोलन का स्वरूप
चरखी दादरी में आयोजित इस महा-सफाई अभियान में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की समान भागीदारी ने यह साबित किया कि जब समाज एकजुट होता है, तो बड़े से बड़ा परिवर्तन संभव है। सफाई करते हुए स्वयंसेवकों के दृश्य, कचरा हटाने के लिए मशीनों का उपयोग—ये सभी पहलू इस अभियान को प्रेरणादायक बनाते हैं।
निष्कर्ष
चरखी दादरी, हरियाणा में आयोजित महा-सफाई अभियान एक उदाहरण है कि कैसे संत रामपाल जी महाराज के विचार समाज को सकारात्मक दिशा दे रहे हैं। यह पहल स्वच्छता, सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता का सशक्त संदेश देती है। ऐसे अभियानों से न केवल शहर और गांव साफ होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता, अनुशासन और सेवा भावना भी मजबूत होती है। स्वच्छ भारत की कल्पना को साकार करने में इस तरह के प्रयास निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होते हैं।



