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Reality Test Of Paid And Fake Media

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नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए देश मे संविधान बनाया जाता है तथा सरकार, मीडिया, न्यायपालिका आदि भी नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी जिंदगी की बेहतरी के लिए ही बनाए गए हैं। आपको यह बात भी पता होगी कि किस तरह से देश की आजादी के लिए अखबार यानी मीडिया ने बहुत ही बढ़िया योगदान दिया था तथा पूरे देश में लोगों को आजादी के बारे में बताया था तथा एक आंदोलन खड़ा करने में बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया था लेकिन आज हम देख रहे हैं की मीडिया अपना दायित्व पूरी तरह से भूल गया है। भारतीय मीडिया अपने मूल कर्तव्य से बहुत दूर चला गया है। जिस मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है वही मीडिया आज इसका भक्षक बन गया है। वही मीडिया आज सरकार की कठपुतली बनकर रह गया है जो कि सिर्फ वही चीजें दिखाता है जो वर्तमान सरकार की बेहतरी के लिए जरूरी है।

इसी बिकाऊ मीडिया में सबसे ऊंचे पायदान पर है zee नेटवर्क जिनके कई चैनल जैसे zee news व zee hindustan चल रहे हैं। इन चैनलों पर मात्र झूठ दिखाया जाता है। आपको पता होगा संत रामपाल जी के बारे में। संत रामपाल जी के ऊपर 2014 में राजनीतिक कारणों व वोट बैंक के कारण कई फर्जी केस बनाए गए थे लेकिन धीरे धीरे इन फर्जी केसों का अंत होना शुरू हो गया जैसे कि संत जी के ऊपर आश्रम के अंदर अनुयायियों को बंधक बनाने का केस दर्ज किया गया था लेकिन बाद में पुलिस तफ्तीश में वह केस झूठा साबित हुआ इसी तरह से संत जी के ऊपर सरकारी कार्य में बाधा बनाने का केस बनाया गया था जो भी बाद में झूठा साबित हो गया और अभी कुछ दिनों पहले धार्मिक भावनाएं भड़काने और 2006 का जमीन धोखाधड़ी का केस भी गलत साबित हो गया। zee hindustan चैनल अपने अभिमान में संत रामपाल जी के बारे में गलत दिखाते हुए यह बात भी भूल गया की संत रामपाल जी महाराज पर मुकदमे 2013 में नहीं 2014 में दर्ज हुए थे।

इन सब बातों को जानकर भी zee hindustan लगातार संत जी के बारे में भारतीय जनता में दुष्प्रचार कर रहा है और झूठ फैला रहा है। याद रहे इस चैनल को कई बार फोन व सोशल मीडिया के माध्यम से यह बात बता दी गई कि आप जो बातें दिखा रहे हैं, वह सरासर झूठ है लेकिन इस भ्रष्ट चैनल के कान पर जू भी नहीं रेंगी जिसका साफ-साफ मतलब यह है कि यह सारा काम सरकार और मीडिया के सहयोग से हो रहा है। आपने कुछ दिनों पहले एक अंतराष्ट्रीय रिपोर्ट देखी होगी जिसमें यह बताया गया था कि भारतीय मीडिया बहुत ही अविश्वसनीय है जिसका मीडिया की आजादी में विश्व मे 138 वा स्थान है जो कि पड़ोसी देश नेपाल व भूटान से भी पीछे है। मतलब यह है की भारतीय मीडिया की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि ये अपनी जिम्मेदारी सरकार के आदेश के अनुसार पूरा करते है। इस रिपोर्ट से साफ मालूम पड़ता है कि Zee News व zee hindustan जैसे चैनलो के कारण ही विश्व में भारतीय मीडिया व देश का सम्मान कम हो रहा है व देश की किरकिरी हो रही है।

Zee hindustan जैसे चैनल यह बात भी भूल जाते हैं कि इनको जो जिम्मेदारी दी गई है वह बहुत महत्वपूर्ण है। इनको भारतीय जनता को जागरूक करने की बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गईं है, जहां कहीं भी देश में अत्याचार होता है उसके बारे में पूरे देश को पता चले यह जिम्मेदारी इनको दी गई है, कहीं भी किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन ना हो यह जिम्मेदारी दी गई है लेकिन फिर भी इन सब बातों को भूलकर इन सब जिम्मेदारियों से पीछे हट कर यह चैनल मात्र रोटियां सेकने में लगे हुए हैं। यह सरकार के हाथों बिके हुए हैं तथा जनता को सिर्फ वही बातें दिखाते हैं जिससे कि सरकार के स्वार्थ की पूर्ति हो सके। बदले में इनको सरकार द्वारा कहीं लाभ दिए जाते हैं जैसे कि Zee नेटवर्क के मालिक सुभाष चंद्रा का उदाहरण ले लीजिए जिन्हें सरकार ने राज्यसभा में सांसद बना दिया और इसी कारण यह चैनल सरकार के अनुसार जनता को संत रामपाल जी के बारे में लगातार भ्रमित कर रहा है। पद के साथ-साथ बदले में इनको मोटी रकम भी दी जाती होगी,इस बात को नकारा नही जा सकता।

अब आप बताइए क्या ऐसी मीडिया के खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन नहीं होना चाहिए ? क्या ऐसी मीडिया को तुरंत बर्खास्त नहीं करना चाहिए ? क्या ऐसी भ्रष्ट व बिकाऊ मीडिया के खिलाफ सख्त से सख्त कानून नहीं बनाया जाना चाहिए? अब समय आ गया है जब zee hindustan जैसे बिकाऊ चैनल को बताना होगा कि आप की मनमानी नहीं चलेगी तथा आप को सिर्फ और सिर्फ सच बताने के लिए रखा गया है।

ZEE HINDUSTAN EXPOSED

zee hindustan ke paap lok ka reality check

SantRampalji_फिर_बरी

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SantRampalji_फिर_बरी

#SantRampalji_फिर_बरी
सतलोक आश्रम न्यूज

रोहतक कोर्ट ने सतलोक आश्रम करौंथा के जमीनी विवाद मामले में संत रामपाल जी महाराज को माननीय अदालत ने बरी कर दिया, संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने इसे #ऐतिहासिक फैसले की बजाय एक उचित न्याय की संज्ञा देते हुए, माननीय #न्यायालय के द्वारा किये गए न्याय का स्वागत किया। जबकि संत रामपाल जी महाराज पर ये झूठा #आरोप लगाने वाले लोगों न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए, सोमवार तक सजा देने का आदेश पारित किया।
#संतरामपालजी महाराज लगातार 3 मामलों में #बरी हो चुके हैं।

बुद्ध का निर्वाण व नास्तिकता

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mahatama buddha

महात्मा गौतम बुद्ध एक पुण्यकर्मी प्राणी थे जो स्वर्ग लोक से आए थे। लोगों की आम धारणा है कि स्वर्ग प्राप्ति ही पूर्ण मोक्ष है जबकी स्वर्ग प्राप्ति तो अपने पुण्य खर्च करने का एक ज़रिया मात्र है! स्वर्ग में जो सुविधाएं उपलब्ध हैं वो यहाँ (पृथ्वीलोक) में कहां।
जो सुविधाएं पृथ्वीलोक में उपलब्ध हैं उसकी तुलना में स्वर्ग उच्च कोटी का स्थान है जहाँ आनंद भोगा जा सकता है जिन इच्छाओं का दमन पृथ्वी लोक में “तप” समझ कर किया जाता है उन्हीं इच्छाओं की पूर्ति स्वर्ग में आसानी से हो जाती है क्योंकि साधक समझता है की यही मेरा मोक्ष है और मैं अपने पृथ्वी लोक में किए तप और त्याग का लाभ /फल भोग रहा हूं जो स्थाई और अमर है! लेकिन सच तो यह है की तप और साधना से जो पुण्य कमाए थे स्वर्ग में पुण्य कर्मों का कोटा पुरा होते ही पृथ्वीलोक (मृत्युलोक) में वापस फेंक दिया जाता है। जिस तरह महात्मा गौतम बुद्ध के पुण्य खत्म होते ही उन्हें वापस पृथ्वीलोक पर आना पड़ा।

परमात्मा प्राप्ति के लिए घर त्याग देना उचित या अनुचित

स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आने के बाद सर्व सुविधाओं का अभाव महसूस होने लगता है इसलिए आत्मा के अंदर वही सर्व सुविधाएं प्राप्त करने की कसक बनी रहती है जबकी वास्तविकता तो यह है कि यह कसक तो परमात्मा प्राप्ति कि है जो जीव को अनादि काल से ही बनी हुई है लेकिन पूर्ण भक्ति मार्ग ना मिलने से महत्वकांक्षाओं की पूर्ति में ही जीवन समाप्त हो जाता है और अगर कुछ भक्ति बनी भी तो जीव को पता भी नहीं चलता कि कब उसके पुण्य कर्म कहाँ खर्च हो गए और फिर स्वर्ग जैसे स्थान पर साधक की पुण्य कमाई समाप्त होते ही वापस पृथ्वी लोक में भेज दिया जाता है। महात्मा गौतम बुद्ध ने भी इसी कसक में घर और राज त्यागा था और बिहार राज्य में “गया” नामक शहर के बाहर एक वट वृक्ष के नीचे मनमुखी साधना शुरु कर दी थी। इसी मनमुखी साधना के कारण शास्त्र अनुकूल साधना एवं वास्तविक मोक्ष मार्ग पर ताला पड़ गया और साधक कभी भी अपने निजधाम सतलोक नहीं पहुँच पाया क्योंकि गलत मार्गदर्शन में वह भ्रमित होकर गलत भक्ति में प्रवृत्त हो गया।mahatama buddh

भुखा रहने या व्रत करने से भगवान मिल सकता है क्या?

महात्मा गौतम बुद्ध काफी समय तक निराहार बैठा रहा, हाथ पांव हिलना बंद हो गये, शरीर नर-कंकाल सरीखा हो चला और धीरे धीरे मृत्यु के निकट पहुँच गया। किसी दयावान माई ने बुद्ध के मुँह पर खीर लगा दी सोचा शायद इसके प्राण बच जाएं। बुद्ध ने वह खीर चाटनी शुरु कर दी, पहले दिन 10 -20 ग्राम, दुसरे दिन 50 -60 ग्राम, और तीसरे दिन आंख खुली तो उठकर चल पड़ा। बुद्ध को पता चला की, “भूखे रहकर साधना नहीं की जा सकती” तो अपने इस अनुभव से उसने विधान बना दिया की भूखे मरने से कल्याण संभव नहीं! तथा इसी को लोग बुद्ध की निर्वान प्राप्ति के नाम से जानते हैं। बुद्ध को ध्यान में एक रोशनी दिखाई दी जिसे आज लोग ‘डिवाइन लाइट’ कहते हैं। पर जैसे किसी खेत की सफाई करने के बाद यदि उसमे फसल नही बोई जाई तो उसमें झाड़िया उग जाती हैं उसी तरह बुद्ध अच्छी आत्मा के थे मतलब एक तरह से उनका खेत साफ था पर सही भक्ति रूपी फसल नही बीजने से उन्हें झाड़ी रूपी रोशनी दिखाई देने लगी जिसका मोक्ष मार्ग में कोई स्थान नहीं था।

भक्तिमार्ग में वेशभुषा का महत्व

जैसे कि पहले बताया गया कि महात्मा बुद्ध के पिछली पुण्य कमाई अच्छी थी इसलिए वह वक्ता भी अच्छा था और उसके वचन में शक्ति भी थी जिसने बहुत से लोगों को प्रभावित भी कर दिया। तीन हज़ार वर्ष पहले जब बुद्ध आए थे तब तो अंधविश्वास बहुत ज्यादा था इसलिए महात्मा बुद्ध के वचनों पर विश्वास करके लोग बहुत आसक्त होने लगे! लंबी जटा और बड़ी दाढ़ी देखकर यह अनुमान लगाया जाता था की बहुत ही पहुँचा हुआ संत है और महात्मा गौतम बुद्ध के लिए हर आम आदमी के प्रभावित होने की एक खास वजह उनकी विशेष प्रकार की वेशभूषा भी थी जिसे देखकर लोग समझते की बड़ा महात्मा होगा। लेकिन बुद्ध द्वारा बताई गई पूजा की विधि शास्त्र अनुकूल न होने से किसी को भी आध्यात्मिक लाभ नहीं हुआ।

सबकुछ अपने आप ही होता है या भगवान है ?

जब महात्मा बुद्ध के निर्देश अनुसार भक्ति करने से कोई लाभ नहीं हुआ तो सब ने यह मान लिया की भगवान है ही नहीं अपना काम करो और खाओ, बस। अब यहां यह समझना होगा कि बुद्ध की क्रिया के अनुसार उन्हें भगवान नहीं मिला तो इसका मतलब यह है कि भगवान पाने का उनका तरीका गलत था ना कि ये की भगवान होता ही नहीं है। लेकिन बुद्ध के कारण लोगों की मानसिकता यह बन गई की भगवान नहीं होता है सर्व ब्रह्मांड, सृष्टि, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, सब अपने आप ही बनता और बिगड़ता है कोई कुछ नहीं है यहां पर? जीव अपने आप ही उत्पन्न होता है और नष्ट हो जाता है और भगवान है ही नहीं। लोगों ने उनकी बातों में आकर कहा कि सब भ्रमणा है और फिर यही नकारात्मक मानसिकता के आधार पर एक सिंद्धांत बन गया जो कई लोगों का अनमोल मनुष्य जीवन बर्बाद कर गया और इसके कारण कई देश जैसे चीन, म्यांमार
आदि नास्तिकता के घोर अंधेरे में चले गए और भगवान और मोक्ष से कोसों दूर हो गए।

यथार्थ ज्ञान

जबकि यथार्थ ज्ञान तो इससे बहुत भिन्न है कि परमात्मा है और उसकी शास्त्र अनुकूल साधना करने से ही पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो सकता है अन्य भक्ति करने से नहीं। बुद्ध के द्वारा बनाए गए स्वयंमुखी मार्ग पर चल कर कोई भी व्यक्ति परमेश्वर प्राप्ति नहीं कर सकता। हठ योग से सांसारिक सुखों व देह त्याग तो संभव है परंतु ईश प्राप्ति कदापि नहीं। युगों की पुण्यकर्मी प्यासी और तरसती आत्मा परमात्मा के दर्शन मात्र के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तत्पर रहती है। पर सही गुरु व सतमार्ग का अभाव जीव के असंख्य दुखों का कारण बनता है। परमेश्वर प्राप्ति के लिए कलयुग में परमात्मा स्वयं सतलोक से धरती पर अवतरित हुए हैं। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं जो सतलोक में सशरीर ऊँचे सिंहासन पर विराजमान हैं, जिन्होंने सर्व ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति करके मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार बनाया। मोक्ष का सतमार्ग जानने के लिए परमेश्वर कबीर जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग पर चलिए व ज्ञान समझ कर ग्रहन करें परमात्मा स्वयं मिल जाएंगे। यही सच वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ने बताने की कोशिश की तो सत्य बोलने की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होनें जन-जन को यही बताया की पिछले जन्मों के पुण्यकर्मी संस्कारी प्राणी ही परमात्मा की तड़प में घर त्याग देते हैैं और जो भी कोई जैसा भी मार्गदर्शन करता है साधक वैसी ही साधना करने लगता है।

 

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BUDHDHA

Savior Of The World

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savior of the world

वैज्ञानिक लोग विज्ञान के द्वारा कुछ परिस्थितियो एवं घटनाओ को पहले से ही भापकर बता देते है कि कब कौन सी घटना घटेगी, यहा तक की अगले दिन सूरज कब उगेगा, अस्त कब होगा, ग्रहण कब होगा, यह भी बता देते है लेकिन सोचने वाली बात है की अगर यह उपरोक्त भविष्यवाणिया नही की जाती तो क्या यह सब घटित नही होता, सुर्य उदय नही होता, या ग्रहण नही लगता, परमात्मा के विधान अनुसार ये सब तो होना ही है, अगर वैज्ञानिक ये बाते नही बोलते तो भी ये सब होना ही था। उसी तरह कुछ भविष्यकर्ता अपनी भक्ति कमाई से आगे होने वाली घटनाओं को देख लेते है जो कि परमात्मा के विधानुसार होना ही है।
नास्त्रेदमस एक फ्रांस भविष्यकर्ता है जिन्होने अपने 1000 श्लोक के माध्यम से 1555 में भविष्य में होने वाली कई घटनाएं लिखी। उसने 16 वी शताब्दी को पहला शतक कहा है। उन्होंने कहा कि तीन तरफ से समुद्र से घिरे हुए देश मे जहा पाँच नदिया बहती है वहा एक महापुरुष जन्म लेगा। साफ तौर पर इशारा पंजाब प्रांत की और है जहाँ संतरामपालजी का जन्म हुआ जो कि बाद में विभाजित हुआ और हरियाणा राज्य के नाम से एक नया राज्य बना। नास्त्रदेमस खुद यहूदी थे और क्रिस्चियन धर्म मानते थे पर फिर भी उन्होंने कहा कि वह शायरन यानी मुक्तिदाता क्रिस्चियन या मुसलमान नही होगा, वह निस्संदेह हिंदू होगा। उसने कहा है कि शायरन एक नया ज्ञान आविष्कार करेगा तथा एशिया में उस खंड में जन्म लेगा जिसके नाम पर महासागर का नाम हैं। जैसे कि हिन्द महासागर और हिंदुस्तान है। वह अज्ञान नींद में सोए हुए समाज को तत्वज्ञान की रोशनी से जगायेगा जिससे मानव समाज हड़बड़ा कर जाग उठेगा। वह मुक्तिदाता अपनी पूजा का आधार गुरुवर अर्थात श्रेष्ठ गुरु यानी सतगुरु को बनाएगा। संतरामपालजी महाराज ने गीता, वेद, क़ुरान, बाइबल के आगे एक नया ज्ञान दिया है तथा इसके द्वारा सतगुरु कबीर साहेब की साधना भक्ति के बारे में बताया है जिसके बारे में आजतक कोई नही जानता था। इस गुरुवर को एक दूसरे व्यक्ति ने थर्सडे कर दिया है जो कि यहां सटीक नही बैठता। नास्त्रेदमस अचंभित होकर ’’ग्रेट शायरन‘‘ के बारे में बताता है कि उसके ज्ञान के दिव्य तेज के प्रभाव से उस द्वीपकल्प (भारतवर्ष) में आक्रामक तूफान, खलबली मचेगी अर्थात् अज्ञानी संतों के द्वारा विद्रोह किया जाएगा। पर उसको शांत करने का उपाय भी उसी को मालूम होगा जैसा कि आज सभी नकली धर्मगुरु संतरामपालजी का विरोध कर रहे है। वह संसार को हिंसक क्रुरचंद यानी काल के बारे में बताएगा और सभी को उससे बचने का उपाय भी बताएगा। तथा इस क्रूर भूमि से मुक्त करवाकर अपने पूर्वजों के पास यानी सतलोक मे स्थाई स्थान प्राप्त करवाएगा। उसने कहा है कि वह महापुरुष 5 वे शतक के अंत मे अधेड़ उम्र मे चौकट लांघकर अपना ज्ञान फैलाएगा तथा लोग उसे नासमझी के कारण उपेक्षा का पात्र बनाएंगे जैसे की संतरामपालजी महाराज ने 1999 में घर घर सत्संग करना छोड़ रोहतक (हरियाणा) में करौंथा आश्रम बनाया। उसने कहा कि 450 वर्ष बाद यानी 2006 में वह संत नकली गुरुओ की ज्ञान से खाल उतार देगा जैसा कि संतरामपालजी महाराज ने आर्य समाज औऱ अन्य के साथ किया जिसके कारण करौंथा कांड हुआ। नास्त्रेदमस कहता है कि उस महान व्यक्तित्व की उपेक्षा के कारण वह दुखी होता है लेकिन उसे इस बात की खुशी है कि उसकी भविष्यवाणी उस संत की गौरवगाथा गायेगी।savior of the world

नास्त्रेदमस कहता है कि “वह हिन्दुस्तानी महान तत्वदृष्टा संत सभी को अभूतपूर्व राज्य प्रदान करेगा। वह समान कायदा, समान नियम बनाएगा, स्त्री-पुरुष में, अमीर-गरीब में, जाति और धर्म में कोई भेद-भाव नहीं रखेगा”। उसने कहा कि शीघ्र ही पूरी दुनिया का मुखिया होगा महान ‘शायरन’ जिसे पहले सभी प्यार करेंगे और बाद में वह भयंकर व भयभीत करने वाला होगा। उसकी ख्याति आसमान चूमेगी और वह विजेता के रूप में सम्मान पाएगा तथा एशिया में वह होगा, जो यूरोप में नहीं हो सकता, एक विद्वान शांतिदूत सभी राष्ट्रों पर हावी होगा।”
यही बाते जयगुरुदेव पंथ की स्थापना करने वाले तुलसीदास हाथरस वाले ने भी कहा है कि कलयुग में सतयुग लाने वाले का जन्म भारतवर्ष के छोटे से गांव में हो चुका है और 7 सितंबर 1971 में ठीक 20 वर्ष का हो चुका है और संतरामपालजी का जन्म 8 सितंबर 1951 में हुआ है। उन्होंने कहा है कि इस संत की अध्यक्षता में ही भारत दुनिया मे सिरमौर बनेगा तथा सारे राष्ट्र मिलकर भी भारत को नही हरा पाएंगे।
इन्ही बातो की गवाही इंग्लैंड के ज्योतिषी कीरो, श्री वेजीलेटिन,अमेरिका की महिला जीन डिक्सन, अमेरिका की भविष्यवक्ता श्री चार्ल्स क्लार्क, अमेरिका के हेंडरसन, हंगरी की महिला ज्योतिषी बोरिस्का, फ्रांस के जुल्वर्न, हॉलैंड की जरदारी क्राइसे, इजराइल के प्रो. हरार, नॉर्वे के आनंदाचार्य ने भी दी है जो कहते है कि 20 सदी के अंत मे विश्व मे भारी उथल पुथल रहेगी व भारत के छोटे से गाँव मे जन्मा व्यक्ति एक नई विचारधारा लाकर सम्पूर्ण विश्व से युध्द को सदा के लिए भगा देगा व शांति स्थापित करेगा ।
जो महापुरुष अनेक कष्टो को सहता हुआ भी अपनी तपस्या या सत्य पर अडिग रहे वह गलत नही हो सकता। सत्य पर अडिग रहते हुए ईसा मसीह ने भयंकर कष्ट झेला, सुकरात ने जहर का प्याला पिया। यदि आज सभी उस परमत्व के ज्ञाता संत को पहचानकर सच स्वीकार कर, उसके बताये हुए रास्ते पर चले तो विश्व मे सद्भाव आपसी भाईचारा तथा सद्भक्ति का वातावरण हो जाएगा। वर्तमान में सभी पढ़े लिखे है और सभी उसे पहचान सकते है और वह है संतरामपालजी महाराज।

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आखिर क्यों जगन्नाथ मंदिर में स्थापित तीनों मूर्तियों के हाथ के व पैरों के पंजे नहीं हैं?

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jagannath temple

उड़ीसा प्रांत का राजा इंद्रदमन चिंतित था क्योंकि श्री कृष्ण जी ने स्वपन में आकर स्थान बताते हुए कहा था कि इंद्रदमन समुद्र किनारे एक मंदिर बनवाओ जिसमें मूर्ति पूजा नहीं होनी चाहिये। सिर्फ मंदिर में एक संत नियुक्त करो जो दर्शकों को गीता जी का पाठ सुनाया करेगा। लेकिन प्रतिशोध के चलते समुंद्र जगन्नाथ पुरी के मंदिर को तोड़ने की अपनी ज़िद पर कायम था क्योंकि त्रेतायुग में समुंद्र ने राम को रास्ता नहीं दिया था। तब राम ने क्रोधवश
समुन्द्र को नष्ट करने के लिए डराया धमकाया था और उसी का बदला लेने के लिए अब समुंद्र बार बार जगन्नाथ पुरी मंदिर निर्माण में बाधक बन रहा था। राजा ने कृष्ण जी के आदेश अनुसार 5 बार मंदिर बनवाने की कोशिश की पर समुंद्र बड़े वेग से भीषण तूफान सरीखा उठकर आता और मंदिर को बहाकर ले जाता। राजा ने श्री कृष्ण से बार-बार मदद की विनती की लेकिन श्री कृष्ण जी भी समुंद्र को रोकने में असमर्थ रहे। धीरे धीरे राजा का खजाना भी खत्म हो गया और उसने मंदिर नही बनवाने का निर्णय लिया।
एक दिन कबीर परमात्मा संत रुप में राजा के पास आये और राजा को कहा की अब तुम मंदिर बनवाओ मैं तुम्हारे साथ हूं। अबकी बार समुंद्र मंदिर नहीं तोड़ेगा। राजा ने कहा की जब भगवान श्री कृष्ण जी समुंद्र को नहीं रोक पाये तो आप क्या कर पाओगे! कबीर परमेश्वर ने कहा की मुझे उस परमेश्वर की शक्ति प्राप्त है जिसने सर्व ब्रह्मांडो की रचना की है और वही समरथ प्रभु असंभव को भी संभव कर सकता है अन्य देवता नहीं। राजा ने कबीर परमात्मा की बात नहीं मानी तो कबीर जी ने अपना पता बताते हुए कहा की जब भी मंदिर बनाने का मन बने तो मेरे पास आ जाना। आखिर श्री कृष्ण जी ने राजा को स्वपन में आकर कहा की वह जो संत आया था उसकी शक्ति का कोई वार पार नहीं वह मंदिर बनवा देगा, उससे याचना करो, फिर इंद्रदमन ने कबीर जी से विनती की तो कबीर जी ने मंदिर बनवाना शुरु करवा दिया, समुंद्र भी मंदिर तोड़ने के लिए बड़े तीव्र वेग से उठकर आता और विवश होकर थम जाता क्योंकि कबीर परमात्मा अपना हाथ ऊपर को उठाते और अपनी शक्ति से समुंद्र को रोक देते।jagannath dham

फिर समुंद्र कबीर जी से याचना करता की मैं आपके समक्ष निर्बल हूं आप से नहीं जीत सकता लेकिन मैं अपना प्रतिशोध कैसे लूं, उपाय बताएं ? तब कबीर जी ने द्वारिका को डुबोकर गुस्सा शांत करने का विकल्प बताया क्योंकि द्वारिका खाली पड़ी थी। जिस स्थान पर कबीरजी ने समुंद्र को रोका था वहाँ आज भी एक गुम्बद यादगार के रूप में मौजूद है जहाँ वर्तमान में महंत रहता है।
इसी दौरान नाथ परंपरा के एक सिद्ध महात्मा आये और राजा से कहा की मूर्ति बिना मंदिर कैसा, आप चंदन की लकड़ी की मूर्ति बनाओ और मंदिर में स्थापित करो, राजा ने तीन मूर्तियां बनवाई जो बार बार टूट जाती थी। इस तरह तीन बार मूर्ति बनवाई और तीनों बार खंड हो गई तो राजा फिर चिंतित हुआ। सुबह जब राजा दरबार में पहुँचा तो कबीर परमात्मा एक मूर्तिकार के रुप मे आये और राजा से कहा कि मुझे 60 साल का अनुभव है, मैं मूर्तियां बनाउंगा तो नहीं टूटेंगीं। मुझे एक कमरा दे दो जिसमें मैं मूर्तियां बनाउंगा और जब तक मूर्तियां नहीं बन जाती कोई भी कमरा ना खोले। राजा ने वही किया, उधर कुछ दिन बाद नाथ जी फिर आए और उनके पूछने पर राजा ने पूरा वृतांत बताया तो नाथ जी ने कहा की पिछले 10-12 दिन से वह कारीगर मूर्ति बना रहा है, कहीं गलत मूर्तियां ना बना दे। हमें मूर्तियां को देखना चाहिये, यह सोचकर कमरे में दाखिल हुए तो कबीर परमात्मा गायब हो गये, तीनों मूर्तियां बन चुकी थी लेकिन बीच में ही व्यवधान उत्पन्न होने से तीनों मूर्तियों के हाथ और पांव की ऊँगलियां नही बनी थीं। इस कारण मंदिर में बगैर ऊँगलियों वाली मूर्तियां ही रखी गईं।
कुछ समय उपरांत जगन्नाथ पुरी मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए कुछ पंडित मंदिर में पहुँचे। मंदिर के द्वार की ओर मुंह करके कबीर परमात्मा खड़े थे। पंडित ने कबीर परमात्मा को अछूत कहते हुए धक्का दे दिया और मंदिर में प्रवेश किया। अंदर जाकर देखा तो हर मूर्ति कबीर परमात्मा के स्वरुप मे तब्दील हो गई थी और यह देखकर पंडित हैरान थे। बाद मे उस पंडित को कोढ़ हो गया जिसने कबीर परमात्मा को धक्का देकर अछूत कहा था। लेकिन दयालु कबीर परमात्मा जी ने बाद में उसे ठीक कर दिया। उसके बाद जगन्नाथ पुरी मंदिर में छुआछात नहीं हुई।
कबीर परमात्मा ने यहाँ सिद्ध करके बताया की वह समर्थ है और ब्रह्मा, विष्णु और महेश से ऊपर की शक्ति है। कबीर परमात्मा चारों युग में सतलोक से गति करके आते हैं सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेता में मुनिंद्र नाम से, द्वापर में करुणामय नाम से, और कलयुग में अपने असली नाम कबीर (कविर्देव) नाम से आते हैं और यही सत्य वर्तमान मे भी संत रामपालजी महाराज ने बताया है की आत्मकल्याण तो केवल पवित्र गीता जी व पवित्र वेदों मे वर्णित तथा परमेश्वर कबीर के द्वारा दिये गये तत्वज्ञान के अनुसार भक्ति साधना करने मात्र से ही सम्भव है अन्यथा शास्त्र विरुद्ध होने से मानव जीवन व्यर्थ हो जाएगा।
श्री जगन्नाथ के मन्दिर में प्रभु के आदेशानुसार पवित्र गीता जी के ज्ञान की महिमा का गुणगान होना ही श्रेयकर है तथा जैसा श्रीमद्भगवत गीता जी में भक्ति विधि है उसी प्रकार साधना करने मात्रा से ही आत्म कल्याण संभव है, अन्यथा जगन्नाथ जी के दर्शन मात्र या खिचड़ी प्रसाद खाने मात्र से कोई लाभ नहीं क्योंकि यह क्रिया श्री गीता जी में वर्णित न होने से शास्त्रविरुद्ध हुई, जो अध्याय 16 मंत्र 23,24 में प्रमाण है।[embedyt] https://www.youtube.com/embed?listType=playlist&list=PLBCA8E70EC577E963&layout=gallery[/embedyt]

देवास न्यूज़

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UPJAIL BAGLI , MP

कैदियों का बदला जीवन, मिला सत्भक्ति का मार्ग

मध्य प्रदेश के जिला देवास की उप जेल बागली में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अमृत प्रवचनो का सत्संग सुनने को मिला।
इस दौरान संत रामपाल जी महाराज ने कैदियों को सत्संग सुनाते हुए कहा कि नशा, चोरी, हत्या, डकैती आदि जीवन को दुखदाई बनाने के कारक है, इसलिए इन सभी से बचने के लिए सत भक्ति का मार्ग सबसे उत्तम है इन अद्भुत सत्संगों को सुनकर कैदियों ने कहा कि संत रामपाल जी महाराज के सत्संग हमे पहले सुनने को मिलते तो आज हम इस जेल में नही होते। इसके साथ ही सभी कैदियों ने बुराई को त्याग के अच्छाई के रास्ते पर चलने का संकप्ल लिया। और कहा कि संत रामपाल जी महाराज जी जैसे महान संत से ही इस भारत वर्ष का कल्याण संभव है।UPJAIL BAGLI DEVAS

धौलपुर रमैनी

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अब सच होगा सबका सपना |
दहेज मुक्त होगा भारत अपना ||

एक तरफ तो आज के दौर में समाज में शादी के नाम पर लाखों रुपए का खर्चा और दिखावा देखने में आया है इसी कारण से गरीब व्यक्ति को बेटी की शादी की चिंता बनी रहती है लेकिन दूसरी तरफ संत रामपाल जी महाराज अपने शिष्यों को बिना किसी खर्चे के बिल्कुल साधारण तरीके से शादी करने की प्रेरणा दे कर दहेज मुक्त भारत बनाने का सपना साकार कर रहे है
इसी के चलते पिछले रविवार दिनांक 22/4/2018 को धौलपुर के हिना रिसॉर्ट में संत रामपाल जी महाराज का सत्संग हुआ और एक दहेज मुक्त शादी हुई जिसमें 1 ₹ भी खर्चा नहीं आया बिल्कुल सिंपल तरीके से मात्र 17 मिनट में परमात्मा की रमैणी बोली गई और शादी संपन्न हो गईDHOLPUR REMNI NEWS

बाड़मेर रमैनी न्यूज़

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barmer remni news

कुरीतियों को जड़ से खत्म करती ये अद्भत शादी

धोरीमना के निवासियों का कहना था कि हमारे जीवन इतिहास में यह पहली बार ऐसा हुआ है कि बिना #दहेज और #फिजूलखर्ची रहित शादी करके किसी ने #इतिहास रचा दिया हो उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की प्रशंसा इस बात पर भी की कि आजादी के लगभग 70 साल बीत जाने के बाद भी सरकारों द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी दहेज प्रथा छुआछूत भ्रष्टाचार कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने में सफल नहीं हो सकी जबकि संत जी ने अपने ज्ञान आधार से इन सारी कुरीतियों को जड़ से मिटाया है तथा समाज को यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान जो हमारे धर्म शास्त्रों में छुपा हुआ था जनता के सामने लाकर मानव जाति पर बहुत बड़ा उपकार किया हैbarmer remni news

सवाई माधोपुर रमैनी न्यूज़

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सतलोक आश्रम न्यूज़, सवाई माधोपुर

सवाई माधोपुर की बोंली तहसील में SDM कोर्ट परिसर में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का एक दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन हुआ।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने सतसंग के माध्यम से समाज में फैली बुराइयों, नशाखोरी, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, रिश्वतखोरी आदि को दूर कर स्वच्छ समाज का निर्माण करने का संदेश दिया। इस सत्संग समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक सत्संग सुना और वहाँ उपस्थित लोगो ने आजीवन नशे व मृत्युभोज तथा दहेज जैसी कुप्रथा का त्याग कर शास्त्रोक्त भक्ति करने का सकंल्प लिया।
इस दौरान एक ऐसी अद्भुत शादी देखने को मिली जिसमे न कोई दहेज़ न बैंड-बाजा न पंडित और किसी भी प्रकार का कोई आडम्बर नहीं था और मात्र 17 मिनट में शादी संपन्न हुई।

फिल्मो की देन युवा हुए बैचेन

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Biggest cause of impatience among Youth

कागभुसंड – विष्णुजी के वाहन गरुड़ की तरह एक जीव जिसके ऊपर का शरीर काग का है। कागभुसंड
बनने से पहले वह आत्मा मनुष्य शरीर में थी और तब उनके प्रदेश में अकाल पड़ गया था। जवान होने के कारण कागभुसंड तो बच गए पर उनके परिवार के सभी लोग मृत्यु को प्राप्त हुए। उस जगह को छोड़ वे आगे बढ़े और चलते चलते किसी अवंतिका नगरी में पहुचे। यहां एक साधु ने उन्हें खाना दिया और पुत्र की तरह प्रेम दिया। उन्हें वहां एक मंदिर में रहने की जगह दी। कागभुसंड वहाँ रोज़ सत्संग सुनते और साधु भी उन्हें नामदीक्षा लेने को कहता। पर कागभुसंड पर इनका कुछ असर नहीं हुआ। लेकिन छ: महीने मना करने के बाद धीरे धीरे वे बातें उनके मस्तिष्क में बैठ गई और वह नामदीक्षा लेने को तैयार हो गए। और फिर उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। इसीको हम सिनेमा पर लागू करे तो हम सिनेमा को बचपन से देखना शुरू करते है। और फिर फ़िल्म में दिखने वाली घटना दिमाग मे पैठ जमा लेती है और हम थोड़ा सोचे तो पाएंगे कि समाज को सबसे ज्यादा नुकसान यदि किसी ने पहुंचाया है तो वह सिनेमा है।
Biggest cause of impatience among Youth
जब सिनेमा में कोई हीरो किसी हीरोइन को छेड़ता है, उसका पीछा करता है तो हम बड़े खुश होते हैं और हममें से कुछ ताली भी बजा देते हैं। फिर धीरे धीरे यही बातें लोगों के दिमाग में जगह बना लेती है। दिमाग में ऐसी बातें व्यक्ति के रहन सहन व समाज में उसकी गतिविधि को प्रभावित करती हैं। फिर इनमें से ही कुछ आदमी हमारी माताओं व बहनों को छेड़ते हैं। अब यहां पहुंचकर हमारी खुशी दुख में बदल जाती है।
समाज में शादी को बहुत पवित्र बताया गया है व वंश की गति के लिए ये आवश्यक भी है। लेकिन फिल्मों में इसे कामुकता के साथ दिखाया जाता है। खूब कामुक गाने भी गाए जाते हैं। जिससे लोगों में हवस बढ़ती है यही बाद में बलात्कार का रूप लेती है। आजकल आये दिन नन्ही नन्ही बच्चीयों के साथ हो रही ऐसी घटनायें भी इस कामुक सिनेमा की ही देन है। जब ऐसी घटना घटित होती है तो हम खूब मोमबत्ती जलाकर विरोध करते हैं और फिर अगले दिन घर पर या सिनेमाघर में फिर ऐसे सिनेमा को बढ़ावा देते हुए नज़र आते हैं। तो फिर हमें विरोध का बाहरी दिखावा करने की भी कोई जरूरत नहीं है।
फिल्मों के अंदर हम पैसे और वैभव का ज़बरदस्त प्रदर्शन देखते हैं। इसको देखकर आदमी और अधिक कमाने के लिए अपनी नींद खराब कर देता है। जितना कमाता है उसे वह उतना ही कम लगता है। अधिक कमाने में वह गलत काम करने से भी नहीं हिचकता। डॉक्टर है तो मरीज को लूटता है, वकील है तो अपने फरियादी को ठगता है, न्यायाधीश है तो पैसा लेकर गलत न्याय करता है, पुलिस है तो निर्दोष को परेशान करता है और फिर हम लोग ऐसे लोगों के बीच खुद को असहाय पाते हैं।
सिनेमा में हम देखते हैं अभिनेता नशा करते हैं। सिगेरट लेकर उसका धुंआ मस्ती में हवा में छोड़ते हैं। गाने भी गाते हैं जैसे ‘4 बोतल वोडका काम मेरा रोज़ का’। फिर यही गाने माता पिता अपने बच्चों से खूब खुश होकर गवाते हैं। फिर यही बच्चे शराबी बनते हैं। और समाज में चोरी, डकैती, बलात्कार, मर्डर को बढ़ावा देते हैं। फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा के कारण वास्तविक समाज में लोगों में दया खत्म हो जाती है। जिसके कारण छोटी छोटी बातों में मारपीट व मर्डर हो जाते हैं।
इन समस्याओं को आप समाज में नहीं रोक सकते। इनको रोकने के लिए इनके कारणों को खत्म करना होगा। और इनके कारणों में एक बहुत महत्वपूर्ण सिनेमा है। फिल्मो में काम करने वाले वहां नाटक करके खूब पैसा कमाते हैं। और एक सामान्य आदमी उनके द्वारा समाज को दिए धीमे ज़हर से रोज़ मरता है। यही समय यदि हम सत्संग में लगाएं तो उससे हमारे दिमाग में मानसिक शांति रहेगी व कागभुसंड की तरह धीरे धीरे हम मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं।फिल्मों से दूर होकर ही हम भगवान के पास पहुच सकते हैं। क्योंकि फिल्मों की बुराइयां दिमाग में लेकर कोई व्यक्ति शाश्वत स्थान सतलोक नहीं जा सकता।

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