सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत जिले का भदाना गाँव पिछले चार महीनों से एक ऐसी त्रासदी झेल रहा था, जिसने यहाँ के जनजीवन को पूरी तरह ठप्प कर दिया था। यह समस्या केवल खेतों में डूबी फसल की नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव के अस्तित्व पर आए संकट की थी। चारों तरफ सड़ा हुआ पानी, मच्छरों का आतंक और महामारी का डर था।
भदाना के लोग बेबसी के साये में जी रहे थे। ऐसे समय में जब प्रशासन और फाइलें सुस्त पड़ी थीं, संत रामपाल जी महाराज एक मसीहा के रूप में सामने आए और धरातल पर वो कार्य कर दिखाया जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल था।
बदहाली का मंजर: सड़ते तालाब और बीमारी का साया

पिछले 4 महीनों से भदाना गाँव का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा था। हालात इतने खतरनाक थे कि गाँव के तालाबों का पानी सड़ चुका था, वह दूषित हो गया था और उसमें गैस बन रही थी। यह गंदा पानी लोगों की चौखट तक आ पहुँचा था। सरपंच प्रतिनिधि कर्मवीर जी और जिला परिषद के वाइस चेयरमैन मोनू जी बताते हैं कि गाँव पर बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा था।
मच्छरों का प्रकोप इतना था कि जीना मुहाल मुश्किल हो गया था। जब हर तरफ से स्वास्थ्य और फसल दोनों का संकट गहरा गया, तब गाँव के सम्मानित लोग मदद की गुहार लेकर संत रामपाल जी महाराज के पास पहुँचे।
उम्मीद की किरण: संत रामपाल जी महाराज का दरबार
जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब गाँव के मोजिज लोग और सरपंच कर्मवीर जी के नेतृत्व में 10-12 बुजुर्ग संत रामपाल जी महाराज जी के सतलोक आश्रम पहुंचे। जहाँ सरकारी व्यवस्थाओं में फैसले हफ़्तों फाइलों में अटके रहते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत निर्णय लिया।
जिला परिषद वाइस चेयरमैन मोनू ने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें 10-15 दिन का आश्वासन मिला था, लेकिन मदद उससे कहीं पहले पहुँच गई। संत रामपाल जी महाराज ने गाँव को इस नारकीय स्थिति से निकालने के लिए भारी राहत सामग्री का काफिला रवाना कर दिया।
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राहत सामग्री: पूर्ण और उच्च स्तरीय समाधान
ग्रामीणों की प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई मदद इतनी सटीक और विस्तृत थी कि ग्रामीणों को एक कील के लिए भी बाजार नहीं भागना पड़ा। इस सहायता में शामिल था:

- 15-हॉर्सपावर की एक मोटर
- छ: हजार फीट 8 इंची पाइप
- सहायक उपकरण: स्टार्टर, बैंड, नट-बोल्ट और यहाँ तक कि पाइप जोड़ने के लिए फेविकोल भी भेजा गया।
गाँव के चौकीदार जसमीर जी ने बताया कि उन्हें सारा सामान प्राप्त हो चुका था, जिसमें मोटर (15 हॉर्सपावर), फेविकोल, स्टार्टर, बैंड और पाइप (6000 फिट 8 इंची) शामिल थे।
सरपंच और पूरी पंचायत ने अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा: “संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई मशीनों का हम पूरा सदुपयोग करेंगे। हमारी पहली प्राथमिकता गाँव और खेतों से पानी को जल्द से जल्द निकालना है ताकि अगली गेहूं की फसल की बिजाई हो सके। यदि उनके आशीर्वाद से ये मोटर और पाइप हमें न मिलते, तो यह काम नामुमकिन होता। कार्य पूरा होने के बाद, पूरा गाँव मिलकर इस पूरे सामान को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी उठाएगा।”
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के शब्द
गाँव में जब राहत का काफिला पहुँचा, तो ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने अपनी भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया:
संदीप (ग्रामीण): “गाँव में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ रहा था। गाँव के सभी तालाब पानी से लबालब भरे हुए थे; अगर यह पानी निकल जाता है, तो गाँव के लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इससे हमारे बच्चों की जिंदगी भी बची रहेगी। इसके लिए हम पूरे गाँव की ओर से संत रामपाल जी महाराज का धन्यवाद करना चाहते हैं; वे तो साक्षात भगवान का रूप बनकर आए हैं। पूरे हरियाणा प्रदेश के लिए वे जो परोपकारी कार्य कर रहे हैं, वह बहुत सराहनीय है और यदि आगे भी ऐसा ही सहयोग मिलता रहे, तो पूरे समाज का बहुत भला होगा।”
एक अन्य ग्रामीण: “रामपाल जी ने जो हमारे गांव ने जो वहां पर डिमांड करी थी वो पूरी कर दी। हम उनको भगवान से भी ऊपर दर्जा देना चाह रहे हैं। यह 36 बिरादरी का फायदा है। किसी एक आदमी का निजी फायदा नहीं है। किसी चीज की कसर नहीं छोड़ी।”
सुरक्षित भविष्य और सामूहिक संकल्प
संत रामपाल जी महाराज जी ने सहायता के साथ एक विशेष संदेश भेजा, जिसमें इन उपकरणों को ग्रामीणों के लिए एक अनमोल उपहार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये संसाधन केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि भविष्य में भी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान बनेंगे। महाराज जी ने ग्रामीणों को जिम्मेदारी सौंपी कि वे एकजुट होकर समय पर पानी निकालें ताकि अगली फसल की बिजाई हो सके।
इस सेवा कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तीन चरणों में वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की गई है: पहली वर्तमान स्थिति (जलभराव) की, दूसरी जल-निकासी के पश्चात की, और तीसरी खेतों में लहलहाती फसलों की। इन दृश्यों को सभी आश्रमों में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि समाज तक निस्वार्थ मानव सेवा का यह सकारात्मक संदेश पहुँच सके।
लोक-कल्याण का संकल्प: धरातल पर दिखती निस्वार्थ सेवा
भदाना गांव में दी गई यह सहायता कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा संचालित “अन्नपूर्णा मुहिम” का एक अभिन्न हिस्सा है। संत रामपाल जी महाराज जी ने इस मुहिम की नींव इसी पावन उद्देश्य से रखी है कि समाज का कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं के अभाव में न रहे। यदि कोई स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो उसके लिए सिर पर छत, भूखे के लिए भोजन और बीमार के लिए उचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना ही संत जी का इस अभियान के तहत मुख्य ध्येय है। संत रामपाल जी महाराज जी हर पीड़ित के लिए ढाल बनकर खड़े हैं। “अन्नपूर्णा मुहिम” का नारा है:
“रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान ।
हर जरूरतमंद को दे रहा कबीर भगवान ।।”
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