यदि आज भारत मां के लाल भगत सिंह, चंद्र शेखर आज़ाद, सुखदेव जैसे शूरवीर जिंदा होते तो इन भ्रष्ट नेताओं, पुलिस वालों ,जजों, डाक्टरों, झूठी बिकाऊ मीडिया और धर्म के ठेकेदारों को देख कर ज़रूर ये कहते,” फिर से आज़ाद कराना होगा भारत को इन मक्कारों से।” अभी देश आज़ाद नहीं है।
जिस भारत को अंग्रेजों के अत्याचार से आज़ाद कराने में भारतीय देशभक्तों को दो सौ से भी अधिक वर्षों का समय लगा। हज़ारों भारतीय देशवासियों को अपनी जान की कुर्बानी देनी पड़ी। लाखों लोग शहीद हुए परंतु दुर्भाग्य मेरे भारत देश का आज भी यहां भारतीय अपने ही देश में भ्रष्टाचारी नेताओं की हुकूमत के कारण गुलाम बने हुए हैं। इन्होंने अपने ही देश की संपत्ति, संपदा को लूट खाया है।
आज़ादी गुलाम है विकासशील देश भारत में। कहीं छिप कर दुबक गई है तानाशाही नेताओं के डर से। जलियांवाला बाग तो जनलर डायर द्वारा किए गए नरसंहार का ट्रेलर था। ऐसा ही मानवीय नरसंहार 2006, 2013 करौंथा और 2014 बरवाला में हरियाणा सरकार ने दोहराया ।

अंग्रेज़ तो भारत लूटने दूसरे देश से आए थे यहां तो नेता ही हमें लूट रहे हैं।

अपने ही देश भारत में वो खूनी खेल खेले गए जिसे सारा देश और दुनिया करौंथा और बरवाला कांड के नाम से याद करती है। आज भी वह गमगीन दिन आंखों के सामने चलचित्र की तरह दिखने लगते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और हरियाणा मुखयमंत्री मनोहर लाल खट्टर व आईजी अनिल राव इन सब की आंखो के सामने और अगुवाई में एक महान साहसिक सत्यवादी तत्वदर्शी संत और उनके लाखों मासूम शिष्यों पर 40,000 पुलिस कर्मी लगातार कई घंटों तक गोलियां और आंसू गैस के गोले दागते रहे। इतने पर भी इन सभी के दिल नहीं पसीजे। हरियाणा सरकार ने पांच महिलाओं और एक डेढ़ वर्षीय बच्चे की जान ली, हज़ारों को घायल किया ,सैकडों को बेघर किया और 945 निर्दोष भक्तों को देशद्रोही बना कर थर्ड डीग्री की मानसिक, शारीरिक और आर्थिक यात्नाएं हिसार जेल सुपरिटेंडेंट शमशेर दहिया व जल्लाद पुलिस वालों द्वारा दी गई। आज तक निर्दोष संत रामपाल जी व शिष्यों की खबर लेने कोई सामाजिक और अतंर्राष्ट्रीय समाज सेवी संस्था या इनके प्रतिनिधि हिसार जेल नहीं पहुंचे। इनका जुल्मों सितम प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। आज़ादी अपनी आखिरी सांसे गिनती रही और अन्यायी भारतीय सरकार मूक दर्शक व बधिर बनी रही। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी भी इनके जैसे निकले।

इच्छा मृत्यु तक की लगाई गई थी गुहार

संत रामपाल जी के सभी शिष्य तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति जी से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाते रहे क्योंकि इनकी धार्मिक स्वतंत्रता (भक्ति करने की आज़ादी) छीनी जा रही थी। अपने साथ हो रहे अन्याय के बारे में लाखों प्रार्थनापत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को लिखे गए पर किसी एक पत्र का भी जवाब दो शब्दों में न आया। भारतीय सरकार द्वारा आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन किया जाता रहा है। अमीर और गरीब के बीच की आर्थिक खाई को भरने का कोई प्रयास नहीं किया जाता। देश का किसान कर्ज की मार के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर है। नौजवानों के पास नौकरी नहीं है। बहन बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। जात-पात के भेदभाव का आज भी बोलबाला है। शराब, नशे और मांसाहार का मार्केट गर्म है। आम लोगों के पास जीवनयापन करने के लिए मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। सरकारी बाबू से लेकर मंत्री, वकील, पुलिस, न्यायधीश, डाक्टर, मीडिया से जुड़े अधिकतर व्यक्ति रिश्वत की खाते हैं।

भारत में गुलाम है मानवता!

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत ने ब्रिटिश शासन से स्‍वतंत्रता प्राप्त की थी। 72 वर्ष की बूढ़ी आज़ादी नाममात्र के लिए साल दर साल तिरंगा फहराने और लाल किले पर भाषण तक सिमट गई है।
सच कहूं तो भारत कभी भी आज़ाद नहीं हो पाया।
भारत को भारत के नेता ही लूटते आए हैं। आज़ादी तो केवल नाम की रह गई है। परंतु भारत में आम भारतीय आज भी गुलाम है।
धर्म के नाम पर हमें बांट कर भारत के नेता आपसी फूट डलवाते हैं। गरीबों की झोपड़ियां यह जलवा देते हैं। इन्होंने समाज को इतना संकीर्ण बना दिया है कि हम अपने अपने मज़हब से बाहर निकल कर कभी सांस ही नहीं ले पाएं।

नहीं, भारत आज़ाद नहीं है!

मैं कैसे कह दूं कि भारत आज़ाद है यहां कभी राम मंदिर के नाम पर, तो कभी बाबरी मस्जिद के नाम पर दंगे कराए जाते हैं। कभी गौ हत्या के नाम पर आम गरीब मुसलमान की सरेआम हत्या के षडयन्त्र को अंजाम दे दिया जाता है। अचानक बिना नोटिस के करैंसी को बंद कर दिया जाता है। बैंक की लाइन में खडा़ गरीब अपने ही पैसे निकालने के लिए दम तोड़ जाता है। यहां बिना आधारकार्ड के गरीब भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। यहां न मां सुरक्षित है, न उसकी बेटी। असुरक्षित भारत के मंदिर में, बाजारों में, कमरे में, स्कूल में बच्चियों की आबरु से खेला जाता है। यहां कोई कड़ा कानून नहीं है। बलात्कारी और आतंकवादी यहां आज भी आज़ाद हैं और संत यहां देशद्रोही बनाकर जेल जाने को मजबूर कर दिए जाते हैं। कैसे कहूं कि मेरा भारत देश आज़ाद है। यहां नेता जनता की सेवा करने के लिए नहीं विदेशी यात्रा पर जाने और स्विस बैंक में अपने खाते भरने के लिए बनते हैं। तानाशाही और गद्दारी का इन्होंने चोला पहना है।

विकारों की मुक्ति आज़ादी की ओर बढ़ते कदम हैं।

देश पर मर मिटने को तैयार खडा़ हर सैनिक सीने पर गोली खाने और मातृभूमि की रक्षा को तत्पर रहता है। उसके शहीद होने पर उसके बूढ़े मां बाप और जवान पत्नी को सरकार की तरफ से क्या मिलता है? क्या तुमने कभी पूछा है?
नहीं ये देश अभी आज़ाद नहीं है।

एक महान संत धरती पर आया है संत रामपाल जी के रुप में जिसने लोगों को मानवता और भाईचारे का पाठ पढ़ाया। सभी तरह के नशे से दूर करवाकर सतभक्ति की राह दिखाई। सब धर्मों की दीवार गिराकर एक करके भाईचारे को बढ़ाया। दहेज मुक्त भारत के निर्माण की नींव रखी। बेटा बेटी एक समान हैं की शिक्षा दी। जिसने भ्रष्टाचार, नशा, दहेज, धार्मिक और आर्थिक भेदभाव को मिटाया। वेद, शास्त्र, कुरान, गीता,गुरुग्रंथ साहेब को खोल कर सत्संग का सही अर्थ समझाया। सभी देवी देवताओं और भगवानों की सही भक्ति विधि शुरु कराई। परमात्मा कौन है, कैसा है? कहां रहता है? क्या क्या सुख देता है बताया। स्वर्ग और नरक से ऊपर भी एक स्थान है उसका वास्तविक चित्रण किया। हम काल के लोक में आकर कैद हुए बैठे हैं। फिर भी अपनी गिरफ्तारी को झूठी आज़ादी समझने की भूल कर रहे हैं। ब्रह्मा, विष्णु, शिव और दुर्गा के जाल से भी संत रामपाल जी ही छुड़ा सकते हैं।

देश आज़ाद नहीं है यहां पंदों का फैलाया झूठा धार्मिक जाल है। यहां मुल्ला काज़ियों ने बिना कुरान समझे बेकसूर जानवरों की बलि प्रथा आरंभ कराई।मानुष को कसाई बनाया। यहां सिख भाई, गुरू नानक जी के दिखाए मार्ग को भूल मांस और शराब में उलझे पड़े हैं। ईसाई समाज नराकार परमात्मा को विसरा कर निराकार की भक्ति में लगे हैं। सभी धर्मों में फंसे लोगों को आज़ादी केवल संत रामपाल जी के तत्वज्ञान से ही मिलेगी।

72 वर्षीय आज़ादी के दौर में हमने क्या पाया

हम लोभी, कामी, क्रोधी, भ्रष्टाचारी, बलात्कारी, धार्मिक और जाति-पाति के भेदभाव वाले भारतीयों की संज्ञा में आ गए। क्या केवल स्कूल, कालेज, सरकारी दफ्तरों, वाहनों और घरों की छतों पर तिरंगा फहराने को हम भारत का आज़ाद होना मान लें। यदि हां, तो हम भारतीय बहुत भोले हैं। मुझे ऐसे भारत में रहना है जहां सतभक्ति की लहर चलती हो। तत्वदर्शी संत रामपाल जी का सम्मान हो। उन्हें सरआंखों पर बिठाया जाए।

संत रामपाल जी को क्यों भेजा गया है जेल में ?

इसके पीछे हरियाणा सरकार द्वारा बहुत बड़ा षडयंत्र रचा गया है। जिसमें पिछली व मौजूदा सरकार दोनों मिली हुई हैं।
आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती कहते थे की परमात्मा निराकार है (जिसका कोई आकार न हो)। यह बात आर्य समाज को मानने वालों ने अपने पल्ले बांध ली थी। परंतु जब संत रामपाल जी ने वेदों और गीता जी में से प्रमाण दिखाकर जनता को यह सत्य समझाया की परमात्मा साकार है सशरीर है। सतलोक में रहता है। उसी ने सब ब्रह्माण्डों की रचना की। मनुष्य को अपने जैसा बनाया। यह बात आर्य समाजियों के गले नहीं उतरी जिसके कारण 2006 में आर्य समाजियों और प्रशासन की मिलीभगत से करौंथा कांड हुआ और संत रामपाल जी 22 महीने जेल में रहे।
आप को बता दें कि 2006 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी की सरकार थी जो स्वयं आर्य समाजी हैं और जिनकी मदद से करौंथा और बरवाला कांड हुए।
फिर 2013 में जब संत रामपाल जी को करौंथा आश्रम सुप्रीम कोर्ट ने लौटाया तो फिर से आर्य समाजियों ने उपद्रवियों के साथ मिलकर आश्रम में बैठी संगत पर आक्रमण कर सरकार पर दबाव बनवा करके आश्रम खाली करवाया। इस प्रकरण में आईजी अनिल राव की मुख्य भूमिका रही। यही षड्यंत्र का कर्ता धर्ता है।
क्या सच बोलना और उससे जनता को अवगत कराना पाप है जिसके कारण संत जी को निर्दोष होते हुए बारबार जेल भेजा गया है। 2014 में, 2006 करौंथा विवाद के कारण संत जी की कोर्ट में पेशी थी और उनकी खराब सेहत के चलते संत रामपाल जी ने कोर्ट में पेश न हो पाने के लिए मैडिकल रिपोर्ट तथा ऐपलीकेशन पेश कर दी गई। जिसके लिए जज ने मंजूरी भी दी थी। परंतु आर्य समाजियों ने अन्य भ्रष्ट जजों को बरगला कर संत रामपाल जी को कोर्ट में हाजिर करवाने के लिए हरियाणा सरकार पर दबाव बनाया और बरवाला कांड 2014 को अंजाम दिया।
सतलोक आश्रम बरवाला पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल जी के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह सहित एफआईआर नंबर 426, 427, 428, 429, 430, 431, 443 दर्ज की थी। इनमें देशद्रोह, हत्या, हत्या प्रयास, जबरन बंधक बनाना सहित अन्य धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा संत रामपाल जी के 945 समर्थकों और अनुयायियों को भी विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था।
भारत लोकतांत्रिक देश है परंतु दुर्भाग्य इस देश के हर उस जांबाज का जिसने सच के लिए आवाज़ उठाई है। उसने देश को और जनता की बेहतरी के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाई है। संत रामपाल जी एक ऐसे सत्यनिष्ठ संत हैं जिन्होंने देशसेवा व जनहित को सर्वोच्च माना है। अपनी मानहानि करवा के भी देशद्रोही तथा अन्य झूठे केसों में फंसाए गए।
देश की न्यायपालिका में अटूट विश्वास रखने वाले एकमात्र संत जिन्होंने सिस्टम से भ्रष्टाचार को समाप्त करने की राह चुनी है। अपने शिष्यों को भी सत्य पर अडिग कर अहिंसा का पाठ पढ़ाया। यदि आप भी हरियाणा सरकार और झूठी मीडिया द्वारा फैलाए झूठ को देख और सुन कर झूठ को सच मान बैठे हैं और संत रामपाल जी को देशद्रोही समझ रहे हैं तो आप कभी आज़ाद नहीं हो सकते।

भारत को आज़ाद कराना है ताकि आने वाले समय में कोई हमें फिर से अपना गुलाम न बना सके।
इसके लिए हम सब को एक जुट होकर आज़ादी के लिए ज्ञान को आधार बनाकर आगे बढ़ना होगा।
जल्द ही वह दिन आएगा जब भारत की 1,352,551,891 जनसंख्या इनसे आज़ाद होने के लिए असली देशभक्त व भक्त बनकर आगे आएगी।
याद रखें अत्याचार को सहना भी गुलामी ही है।

जयहिंद
जयभारत