बरवाला कांड के दिन का काला सच

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आज हर आंख फिर भीगी है
घाव अभी भी लाल हैं
चेहरे काले और यादें सफेद हैं
डंडे, लाठियों, आंसू गैस, राकेट बंमो उस दिन छह मासूमों की जान है
हर ओर मौत और मातम का मंज़र था
वो दिन आज भी आंखों के सामने जीवंत खड़ा है
कोई चीख रहा था, तो कोई रो रहा था।
जीेने के लिए गहरी सांसें खींच रहा था।
40,000 पुलिसबल आश्रम के बाहर
हथियारबंद खड़ा था।
बेकसूर शिष्यों का कसूर केवल गुरूदर्शन मात्र था।
सरकार की मनमर्जी ने निर्दोष संत को
देशद्रोही घोषित कर डाला था।
एक ऐसा काला दिन जिसके कारण
खून से रंग लिए हैं बीजेपी सरकार ने अपने हाथ।

काला दिन उसे कहते हैं जिस दिन किसी के साथ कोई अप्रिय घटना घटित हुई हो और जिसे भूलना और भूला देना दोनों नामुमकिन हो।

ऐसी ही एक ऐतिहासिक अप्रिय, भयानक, दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दिया गया 18 नवंबर 2014 को बरवाला के सतलोक आश्रम में हरियाणा सरकार के द्वारा। सरकार के निशाने पर थे निर्दोष संत रामपाल जी महाराज जी व अत्याचार और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे उनके समूचे शिष्य।
18 नवंबर, 2014 का वह भवावह दिन हरियाणा सरकार की दमनकारी नीतियों का ही नतीजा था। अत्याचार का यह सिलसिला आर्य समाजियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हरियाणा सरकार के साथ मिलकर साल 2006 में जबरन करौंथा कांड करवा कर शुरू किया। हुड्डा की सरकार ने संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को मिटाने की कुचेष्टा करते हुए 2014 में आई मनोहर लाल खट्टर सरकार को भी संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को मिटाने का कार्य सौंपा था। लोग त्योहार मना कर खुशी मनाते हैं परंतु हरियाणा सरकार निर्दोष संत और शिष्यों पर हमला करके अपनी जीत का जश्न मनाती है।

दिनाँक 18.11.2014 को 6 निर्दोषों की जान लेकर एक हजार के लगभग श्रद्धालुओं तथा सन्त रामपाल जी को जेल में डालकर, देशद्रोह का झूठा मुकदमा बनाकर श्री मनोहर लाल खट्टर सरकार फूली नहीं समा रही है। राजा प्रजा का हितैषी होता है। यदि वही अपनी प्रजा पर ऐसे जुल्म करेगा तो उस सरकार के सर्व अधिकारी तो न्यायपक्ष की बात कर ही नहीं सकते।
रावण अपने आपको बहुत बड़ा शूरवीर मानता था। किसी से नहीं डरता था। परमात्मा से डर कर न रहने के कारण गर्द अर्थात् मिट्टी में मिल गया। स्वर्ण की लंका नगरी का राजा था, सर्व सम्पत्ति त्याग कर खाली हाथ चला गया। न राज रहा, न धन रहा, न काया (शरीर) जिसका बहुत गर्व था। अंत में नरक को प्राप्त हुआ। ऐसा ही सत्ता लोलुप राजनेताओं के साथ होता है जो जनता को अपने जूते के नीचे रखते हैं।
संत रामपाल जी महाराज और उनके सर्व शिष्य भ्रष्टाचार के विरूद्ध प्रयासरत हैं और देश के विभिन्न निम्न से उच्च पदों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले प्रदर्शनकारी शिष्यों को सरकार ने देशद्रोही बना दिया।
बरवाला कांड के असली गुनहगार आई जी अनिल राव, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर , समस्त भ्रष्ट जज, नेतागण, पुलिस व बीजेपी सरकार है।

सन्त रामपाल जी ने सर्व धर्मों के सद्ग्रन्थों को पढ़कर उनको जानकर “सार ज्ञान” मानव समाज को दिया है।
सन्त रामपाल जी महाराज ने भारत वर्ष को सर्व बुराइयों से रहित करने के उद्देश्य से तत्वज्ञान अर्थात् यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार हरियाणा प्राँत से शुरू किया। सन्त रामपाल जी महाराज के सत्संग प्रवचनों का आधार महान सन्त कबीर जी की अमृत वाणी हैं। सन्त रामपाल जी का उद्देश्य भारतवर्ष को नशा, माँसाहार, भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा तथा भ्रूण हत्या जैसी बुराईयों से पूर्ण रूप से मुक्त कराना है। ताकि भारत फिर से सोने की चिड़िया के नाम से विश्व में प्रसिद्ध हो। परंतु सरकार ही समाज की दुश्मन बन रही है। मनुष्य समाज का हित चाहने वाले संत को सलाखों के पीछे रखकर अपना झूठा हित समझ रही है और समाज का कुहित कर रही है।

पृथ्वी घूमती है कि तरह सत्य है संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान

निकोलस कोपरनिकस नामक व्यक्ति जो पोलैण्ड का रहने वाला था, उसको सन् 1543 में फांसी दे दी गई थी क्योंकि उसने 400 वर्ष पूर्व कहा था कि पृथ्वी घूमती है, सूर्य के चारों ओर तथा अपने अक्ष पर भी घूमती है, जिससे दिन-रात बनते हैं। उस समय उसका घोर विरोध धर्मगुरूओं ने किया। राजा ने सजा सुना दी कि यह झूठा पाखण्डी है, देश के व्यक्तियों को भ्रमित कर रहा है। अब 400 वर्ष पश्चात् जब उसकी बात सत्य सिद्ध हुई, अब उसकी आत्मा से क्षमा याचना की गई। इसी प्रकार आज जो सत्य आध्यात्मिक ज्ञान सन्त रामपाल जी महाराज बता रहे हैं, वह वर्तमान के धर्मगुरूओं को ऐसा ही लग रहा है जैसे उस समय पृथ्वी का घूमना असत्य लगता था। जबकी उनका अपना ज्ञान गलत था। इसी प्रकार वर्तमान में विश्व के सर्व धर्मगुरू सन्त रामपाल जी महाराज के तत्व ज्ञान को (जो पूर्ण रूप से सत्य है) असत्य मान रहे हैं तथा जनता को भ्रमित कर रहें है। संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान को सर्व वर्तमान के धर्मगुरू अर्थात् आचार्यजन गलत मानते हैं। जबकि सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान शास्त्र प्रमाणित है तथा ‘‘पृथ्वी घूमती है’’ इस उदाहरण की तरह पूर्णरूपेण सत्य है।

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